*💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
*🎈दिनांक 19 जुलाई 2026*
*🎈 वार- रविवार*
*🎈 मास - आषाढ़ मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - रितु वर्षा*
*🎈तिथि - षष्ठी 27:29:28*am तक *तत्पश्चात सप्तमी*
*🎈 नक्षत्र - उत्तराफाल्गुनी - 06:12 पी एम तक pm तक*तत्पश्चात हस्त*
*🎈योग - परिघ - 07:23 पी एम* तक, तत्पश्चात् शिव*
*🎈करण- बव-16:06:27*
तक,तत्पश्चात् बालव*
*🎈राहुकाल -05:47 pm से 07:29pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈 सूर्योदय-05:53:23*
*🎈 सूर्यास्त-19:29:01*
*🎈 चन्द्र राशि- कन्या*
*🎈 सूर्य राशि- कर्क*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:29 ए एम से 05:11 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त*12:14 पी एम से 01:09 पी एम*
*🎈 अमृत काल- 10:56 ए एम से 12:33 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:21 ए एम, जुलाई 20 से 01:02 ए एम, जुलाई 20*
*🎈 अमृत सिद्धि योग 06:12 पी एम से 05:53 ए एम, जुलाई 20
*🎈 रवि योग -05:52 ए एम से 06:12 पी एम
*🎈व्रत पर्व विवरण - विशेष shssthi तिथि को लौकी खाना वर्जित माना गया है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- *आषाढ़ मास षष्ठी
तिथि को हिंदू धर्म शास्त्रों और ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, पंचमी तिथि के दिन विशेष रूप से बैंगन, कटेहरी और कटहल का सेवन वर्जित माना गया है*
💥 गुप्त पंचम नवरात्र महात्म्य*☀️
*🏓19 जुलाई 2026 के पंचांग के अनुसार शनिवार का दिन आषाढ़ शुक्ल पक्ष की सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे दिन षष्ठी तिथि है, जिसमें ग्रहों की चाल के प्रभाव से विशेषकर वृश्चिक, मीन राशि, कुंभ राशि के जातकों को सावधान रहना होगा वहीं, अन्य राशियों के लिए मिला-जुला दिन रहने की संभावना है।
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉*विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल*
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी
💢सेनाधिपति चन्द्र⚔️ -
🏵️ रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी
🛟मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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💢आज का राशिफल💢
💥1.मेष: परिस्थितियां आपके पक्ष में हैं। लंबित कार्यों का दबाव रहेगा, लेकिन अपनी कार्यकुशलता से हर परिस्थिति संभाल लेंगे।
💥वृष: खर्चों पर नियंत्रण रखने और बजट बनाने के लिए दिन अच्छा है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।
💥मिथुन: रियल एस्टेट या संपत्ति के मामलों में अच्छा मुनाफा हो सकता है। आर्थिक मामलों में लाभ के योग हैं।
💥कर्क: व्यापार और करियर में बेहतरीन अवसर बनेंगे। अनुभवी लोगों का सहयोग प्राप्त होगा।
💥सिंह: परिवार के साथ सुखद समय बीतेगा। दोस्तों के साथ मनोरंजन और घूमने का प्रोग्राम बन सकता है।
💥कन्या: रचनात्मक सोच आपको आगे बढ़ाएगी। आर्थिक मामलों में बचत की नई योजनाएं बन सकती हैं।
💥तुला: वित्तीय मामलों में विशेष सावधानी बरतें। बजट का ध्यान रखें और जोखिम भरे निवेश से बचें।वृश्चिक: आर्थिक दृष्टि से दिन अनुकूल है। एक्स्ट्रा इनकम (अतिरिक्त आय) के शानदार अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
💥धनु: भाग्य का पूरा सहयोग मिलेगा। पैतृक संपत्ति या लंबे समय की बचत से लाभ की संभावना है।
💥मकर: नया काम शुरू करने के लिए दिन उत्तम है। कार्यों में अनुशासन बनाए रखने से सफलता मिलेगी।
💥कुंभ: धैर्य और संयम से काम लें। वाद-विवाद से बचें और लेन-देन में पूरी सावधानी बरतें।
💥मीन: साझेदारी और टीमवर्क में सफलता मिलेगी। जीवनसाथी के साथ संबंधों में प्रेम और विश्वास बढ़ेगा।
🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
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➡️ *।। ॐ श्री गणेशाय नमः ।।
🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️☀️क्यो निष्फल होते हैं अनुष्ठान मंत्रादि उपाय -
"औषधि मणि मंत्राणां, ग्रह नक्षत्र तारिका ।
भाग्यकाले भवेत्सिद्धि अभाग्यं निष्फलं भवेत्।।"
अर्थात-
औषधी रत्न मंत्र ग्रह नक्षत्रों के योग भाग्य काल में ही उपयुक्त फल देने में समर्थ होते हैं लेकिन विपरीत भाग्य होने पर यह सब निष्फल हो जाते हैं।।
दान करने का समय-
बुधस्य घटिका पंच,शौरिमध्यान्हमेव च।
चन्द्रे जीवे संध्यायां,भौमे च घटिका द्वयम्।।
राहु केतु अर्द्ध रात्रौ, सूर्य शुक्र अरुणोदये।
अन्य काले च कर्तव्यं,कृते दानं तु निष्फलम् ।।
अर्थात-
दान ग्रहण करने एवं देने हेतु प्रत्येक ग्रह के लिए एक समय निर्धारित है सूर्य और शुक्र के लिए सूर्योदय का समय श्रेष्ठ है ,चंद्रमा व वृहस्पति के लिए सायंकाल का समय, मंगल के लिए प्रातः काल 7:00 बजे एवं बुध के लिए प्रातः 8:00 बजे का समय श्रेष्ठ है । शनि के दान के लिए सर्वश्रेष्ठ समय दोपहर का है और राहु तथा केतु के लिए मध्यरात्रि का समय श्रेष्ठ है। वर्णित समय के अतिरिक्त किया गया दान फल रहित होता है।
किस ग्रह की वस्तु का दान किसे दे-
दान सर्वदा योग्य व्यक्ति को ही देना चाहिए इसके लिए विशेष प्रयास करना पड़ता है कि दान ग्रहण करने हेतु सुयोग्य व्यक्ति मिले ।मंगल का दान ब्राह्मण और क्षत्रिय को देना चाहिए ।शनि के दान के लिए वृद्ध, विकलांग एवं शुद्र व्यक्ति, बुद्ध के दान के लिए मूक और बधिर ,राहु के दान के लिए व्याधिग्रस्त एवं विकलांग तथा बृहस्पति का दान पंडित, पुजारी ,ज्ञानी व्यक्ति को देना चाहिये।
" दान दीन को दीजिए,मिटे दरिद्र की पीर।
औषध जाको दीजिए,जाके रोग शरीर ।।"
दान की मात्रा-
दान प्रचुर होना चाहिए।किसी को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दिया जाना चाहिए तथा दान की मात्रा इतनी होनी चाहिए कि दान देने वाले व्यक्ति को ऐसा प्रतीत हो कि उसके पास कुछ कम हुआ है तथा जिसे दान प्राप्त हो उसे ऐसा प्रतीत हो कि उसे बहुत कुछ मिला है दान लेने वाले व्यक्ति का कार्य एक ही स्थान से दान लेने से चल जाना चाहिए। उसकी आवश्यकताएं पूरी हो जानी चाहिए तथा उसके कुटुंब के लिए पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। प्राय: यह देखने में आता है कि शनि दान की कामना से दान मांगने वाले एक पात्र में तेल तथा शनि देव की एक लोहे की मूर्ति रखकर घर-घर दान हेतु विचरण करते हैं वैसे तो यह दान है ही नहीं इस दान को भिक्षा का स्वरूप प्रदान कर दिया गया है ।जहां तक शनि के दान का प्रश्न है उसे यदि भिच्छा के रूप में भी ग्रहण किया जाए तो कोई आपत्तिजनक विषय नहीं है क्योंकि शनि भीक्षा का कारक है ।यहां हास्यास्पद परंतु दुख का विषय यह है कि जो लोग शनि का दान देकर पुण्य अर्जित करने की कामना से शनि के पात्र में मुद्राएं डालते हैं वह प्रायः 1, 2 अथवा ₹5 का सिक्का ही होता है जबकि प्रायः उनके सामर्थ्य हजारों रुपयों से भी अधिक होती है ऐसे साधक शनिदेव को दो अथवा ₹5 देकर उनसे लाखों करोड़ों रुपए की अपेक्षा रखते हैं यह अत्यंत भ्रामक और अज्ञानता का विषय है। दान प्रचुर मात्रा में होना चाहिए तथा अपने सामर्थ्य के अनुरूप किया जाना चाहिए यदि शनि का दान करना है तो कम से कम 1 दिन की आय के समतुल्य राशि का दान अवश्य किया जाना चाहिए यदि 1 महीने में ₹100000 की आय है महीने भर में कम से कम तीन से ₹3000 का दान देना आवश्यक है वास्तविकता यह है कि दान को हमने भिक्षा का रूप प्रदान कर दिया है तथा अपेक्षा हमें दान के प्रताप से मिलने वाले सुफल की होती है,तो फल कहा से प्राप्त होगा।
💕"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः "
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" नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम् "
🛟॥ श्री हरिः ॐ ॥☀️
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💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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‼️*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏*हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️






