*स्थाई लोक अदालत मेड़ता का निर्णय*
*गोगानाडा व ढ़ाढ़रिया में अतिवृष्टि से फसलें नष्ट, बीमा कंपनी दे किसानों को क्लेम।*
*इंडसइंड जनरल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड के विरूद्ध निर्णय।*
नागौर ,18 जुलाई, 2026/ स्थाई लोक अदालत मेड़ता ने फसल बीमा के दो प्रकरणों में निर्णय देते हुए बीमा कंपनी को दोनों मामलों में फसल बीमा की राशि देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने माना है कि फसल खराबे के बावजूद बीमा कंपनी ने पीड़ित किसानों को बीमित फसल का मुआवजा नहीं देकर सेवा दोष का कृत्य किया है। *इंडसइंड जनरल इंश्योरेंस कम्पनी ने नहीं दिया क्लेम* बीमा कम्पनी इंडसइंड जनरल इंश्योरेंस कम्पनी ने गोगानाडा, नागौर निवासी श्रीमती रूकमणी एवं ढाढरिया कलां निवासी जगदीश राम के मामलों में फसल खराबे के बावजूद उन्हें क्लेम राशि नहीं दी जबकि उन्होंने प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना के तहत अपने खातेदारी खेत में 2022 के दौरान बोई फसल का बीमा करवा रखा था और प्राकृतिक आपदा अतिवृष्टि के चलते उनकी फसलें नष्ट हो गई थी। *अदालत का निर्णय* अदालत के अध्यक्ष सुशील कुमार शर्मा व सदस्य बलवीर खुड़खुड़िया ने अपने निर्णयों में कहा कि बीमा कम्पनी इंडसइंड जनरल इंश्योरेंस कम्पनी गोगानाडा, नागौर निवासी श्रीमती रूकमणी को 185362 रूपये 61 पैसे एवं ढाढरिया कलां निवासी जगदीश राम को 225261 रूपये 79 पैसे फसल खराबे की क्लेम राशि अदा करें। अदालत ने बीमा क्लेम राशि आदेश की तिथि से एक माह में परिवादी किसानों को देने के आदेश दिए हैं। एक माह में किसानों को उक्त क्लेम राशि अदा नहीं करने पर बीमा कम्पनी को भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक साधारण की दर से ब्याज सहित राशि अदा करनी होगी। *न्याय आपके द्वार में परिवाद* गोगानाडा, नागौर निवासी श्रीमती रूकमणी का प्रकरण राजस्थान विधिक सेवा प्राधिकरण के न्याय आपके द्वार अभियान के तहत दर्ज कर प्रकरण की प्रभावी पैरवी के लिए न्याय रक्षक अधिवक्ताओं की नियुक्ति की गई, जिस पर अदालत मे न्याय रक्षक एवं लीगल एड डिफेन्स काउंसिल परीक्षित सिखवाल एवं चन्द्र प्रकाश सोनी ने पैरवी की तथा अदालत ने अभियान के तहत दर्ज मामले का त्वरित निस्तारण किया। न्याय रक्षक अधिवक्ता सिखवाल ने बताया कि ऐसे मामलों का त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण आमजन को शीघ्र न्याय उपलब्ध कराने तथा वैकल्पिक विवाद निस्तारण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ढाढरिया निवासी जगदीश राम के मामले में परिवादी की ओर से अधिवक्ता जगदीश सारस्वत व धीरज देवल ने पैरवी की।

