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पञ्चाङ्ग -12 मार्च 2026

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

jyotis


*🎈दिनांक -12 मार्च 2026*
*🎈 वार- गुरुवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈 मास - चैत्र मास*
*🎈 पक्ष - कृष्ण पक्ष,*
*🎈तिथि-     नवमी    30:28:28* तत्पश्चात् दशमी*
*🎈 नक्षत्र -        मूल    24:42:44* तक    तत्पश्चात्     पूर्वाषाढा    👇
*🎈 योग    -             सिद्वि    09:57:41* तक तत्पश्चात्  व्यतिपत    *
*🎈करण    -     तैतुल    17:26:29* तक तत्पश्चात्     गर*
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*🎈राहुकाल -02:14 pm से 03: 43pm(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈चन्द्र राशि-       धनु    *
*🎈सूर्य राशि-       कुम्भ    *
*🎈 सूर्योदय -    06:49:14*
*🎈सूर्यास्त -        18:40:41*pm* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- उत्तर दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:11 ए एम से 06:00 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:21 पी एम से 01:09 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:20 ए एम, मार्च 13 से 01:09 ए एम, मार्च 13*
*🎈  अमृत काल    -05:36 पी एम से 07:23 पी एम*
*🎈 व्रत एवं पर्व नवमी व्रत*
*🎈विशेष चैत्र मास महात्म्य *
kundli


 🙏 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🙏
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    *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
   नागौर, राजस्थान, (भारत)    
   मानक सूर्योदय के अनुसार।*
day

🛟

    
        *🛟चोघडिया, रात्🛟*
night

*🛟 
 


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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
🌿✨  #*🕉️ #🌺#🎉💕💢💥💤💤
 🌹🙏🛑 🌹#चन्द्र_कुण्डली_में_अष्टमेश छिपाता है ब्रह्माण्ड का सबसे खतरनाक रहस्य: "मृत्यु के बाद भी जीवित रहने" का परमाणु-स्तरीय वैदिक कोड जो कोई ज्योतिषी कभी नहीं बताता!

#वैदिक_ज्योतिष की गहनतम गहराइयों में उतरें तो एक ऐसा परत मिलती है जो सदियों से छिपी रही है—चन्द्र लग्न (#चन्द्र_कुण्डली) से अष्टमेश की स्थिति। यहाँ अष्टमेश सिर्फ आयु, अचानक घटनाएँ या #गुप्त_धन का कारक नहीं रह जाता, बल्कि यह जीव की मृत्यु के बाद भी निरन्तर #ऊर्जा_चक्र में बने रहने का सूक्ष्मतम संकेत बन जाता है। 

यह रहस्य इतना गुप्त है कि पारम्परिक ग्रन्थों में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं, बल्कि वेदों के "मृत्युंजय" मंत्र, पुराणों के "कुण्डलिनी जागरण" वर्णन और आधुनिक भौतिकी के "#क्वांटम_एंटेंगलमेंट" तथा "एन्ट्रॉपी" सिद्धान्तों के मेल से ही यह खुलता है।

#वेदों_से_पुराण_तक: अष्टमेश का चन्द्र-आधारित "अमरत्व चक्र"

#ऋग्वेद (10.14.7-8) में #यम_और_मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा का वर्णन है, जहाँ "अग्नि" और "सोम" (चन्द्र) मिलकर जीवन-ऊर्जा को पुनर्जनन देते हैं। पुराणों में (विशेषकर शिव पुराण और देवी भागवत) कुण्डलिनी शक्ति को मूलाधार से सहस्रार तक ले जाने वाला मार्ग #अष्टम_भाव से जुड़ा बताया गया है—क्योंकि अष्टम भाव "मृत्यु का द्वार" है, पर चन्द्र कुण्डली में यह "#पुनर्जन्म का छिपा द्वार" बन जाता है।

#चन्द्र_कुण्डली में #अष्टमेश जब स्वयं चन्द्र से 8वें स्थान पर हो या उसकी दृष्टि चन्द्र पर पड़े, तो जातक की मनो-ऊर्जा (चन्द्र) मृत्यु के बाद भी "क्वांटम स्तर" पर बनी रहती है। यहाँ "परमाणु" स्तर पर विचार करें: प्रत्येक परमाणु में #इलेक्ट्रॉन्स, प्रोटॉन्स और न्यूट्रॉन्स की ऊर्जा कभी नष्ट नहीं होती (ऊर्जा संरक्षण नियम), बस रूप बदलती है। ठीक वैसे ही, चन्द्र कुण्डली का अष्टमेश जीव की सूक्ष्म ऊर्जा को "एन्ट्रॉपी" (विकार) के बजाय "#रिवर्स_एन्ट्रॉपी" (पुनर्संघटन) की ओर ले जाता है।

दैनिक जीवन में इसका भौतिक आधार: "#अचानक _जागरण" का रहस्य

मान लीजिए किसी की चन्द्र कुण्डली में #अष्टमेश_मंगल है और वह वृश्चिक राशि में स्थित है, तो यह जातक को "अचानक मृत्यु-जैसे अनुभव" (near-death experience) देता है—पर उसमें छिपा रहस्य है कि मृत्यु के क्षण में मन (चन्द्र) #अष्टमेश_की_दृष्टि से "#कुण्डलिनी_विस्फोट" जैसा अनुभव करता है। भौतिक उदाहरण: जैसे परमाणु बम में न्यूक्लियर फिशन से ऊर्जा निकलती है, वैसे ही यह योग जातक के अवचेतन में "#फिशन" जैसा परिवर्तन लाता है—पुरानी मानसिक संरचनाएँ टूटती हैं और नई, अत्यन्त सूक्ष्म जागृति जन्म लेती है।

दैनिक आधार पर: ऐसे जातक रात में नींद में "#ल्यूसिड_ड्रीम" या "आउट ऑफ बॉडी" अनुभव करते हैं। वे सुबह उठकर महसूस करते हैं कि "मैं मर गया था पर जीवित हूँ"—यह कोई भ्रम नहीं, बल्कि अष्टमेश द्वारा चन्द्र की "#क्वांटम_टनलिंग" है, जहाँ मन समय-स्थान की सीमाओं को पार कर जाता है। पुराणों में भगवान शिव का "#तीसरा_नेत्र" इसी से जुड़ा है—#अष्टमेश जब चन्द्र से जुड़ता है तो "अज्ञात रहस्य" खुलते हैं, जैसे "मैं शरीर नहीं, ऊर्जा हूँ" का प्रत्यक्ष बोध।

शोधात्मक विवेचन: क्यों यह आज तक अज्ञात रहा?

ज्योतिष की दुनिया में चन्द्र कुण्डली को सिर्फ "#मानसिक_स्थिति" या "मातृ सुख" तक सीमित रखा गया। पर गहन अध्ययन (जैसे विस्ति लार्सन या प्राचीन नाड़ी ग्रन्थों के संकेत) से पता चलता है कि अष्टमेश की दृष्टि चन्द्र पर होने से जातक "मृत्यु के बाद भी स्मृति बोध" रखता है—यह "#पुनर्जन्म_स्मृति" नहीं, बल्कि "मृत्यु के पार की स्मृति" है। 

भौतिकी में इसे "क्वांटम कोहेरेंस" कहते हैं, जहाँ कण अलग-अलग जगह पर भी जुड़े रहते हैं। ठीक वैसे ही, जातक की आत्मा शरीर छोड़ने के बाद भी "चन्द्र-ऊर्जा" से जुड़ी रहती है।

एक उदाहरण: यदि अष्टमेश शनि हो और वह कुम्भ में चन्द्र से दृष्टि डाले, तो जातक जीवन में "अचानक अलगाव" (divorce, loss) झेलता है, पर उस अलगाव के बाद "आध्यात्मिक अमरत्व" का बोध आता है—जैसे परमाणु में इलेक्ट्रॉन अलग होकर भी ऊर्जा स्तर बनाए रखता है। ऐसे लोग मृत्यु भय से मुक्त हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें "अनुभव" हो चुका होता है कि मृत्यु सिर्फ परिवर्तन है, विनाश नहीं।

यह रहस्य इसलिए छिपा रहा क्योंकि इसे समझने के लिए ज्योतिष + वेदान्त + क्वांटम फिजिक्स का मेल जरूरी है—और यह मेल आज के युग में ही सम्भव हुआ है। यदि आपकी कुण्डली में चन्द्र से अष्टमेश की यह गुप्त स्थिति है, तो जान लें—आपका जीवन "मृत्यु के बाद जीने" का जीवन्त प्रयोगशाला है। यह कोई साधारण योग नहीं, बल्कि ब्रह्माण्ड का परमाणु-स्तरीय कोड है जो कहता है: मृत्यु अंत नहीं, नई शुरुआत का छिपा द्वार है।

इस रहस्य को गहराई से समझने वाला पहला व्यक्ति आप ही बन सकते हैं—क्योंकि ज्योतिष की दुनिया अभी तक इस द्वार को खटखटाने से भी डरती है!
.     💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥

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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
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