*💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
*🎈दिनांक 12 अक्टूबर 2026*
*🎈वार- सोमवार*
*🎈मास - आश्विन मास*
*🎈पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 2083*
*🎈संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈अयन - दक्षिणायन*
*🎈ऋतु - शरद*
*🎈तिथि-द्वितीया - 21:30:25 पी एम तक तत्पश्चात तृतीया*
*🎈नक्षत्र- स्वाती - 22:31:40 पी एम तक तत्पश्चात,विशाखा*
*🎈करण - बव - 09:20:59 ए एम तत्पश्चात् कौलव*
*🎈योग- विषकुंभ - 21:04:33 पी एम, अक्टूबर 09 तक तत्पश्चात्, प्रीति *
*🎈राहुकाल- 048:01 पी एम से 09:28 पी एम(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय- 06:34.09 ए एम*
*🎈सूर्यास्त- 06:08:26 पी एम*
*🎈चंद्र राशि- तुला*
*🎈सूर्य राशि- कन्या*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:54 ए एम से 05:44 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 11:58 ए एम से 12:45 पी एम*
*🎈अमृत काल - 02:36 पी एम से 04:16 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त -11:57 पी एम से 12:46 ए एम, अक्टूबर 13*
*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण- 🏵️ ☀️
☀️☀️12 अक्टूबर 2026: द्वितीय नवरात्रि🏓🏓🏓
👁️"विष्णु भगवान की जय हो "🙏 🌹
🛟ब्रह्मवैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, द्वितीया तिथि को बृहती (छोटा बैंगन, वनभाँटा या कटेहरी) खाना निषिद्ध (वर्जित) है
🛟12 *अक्टूबर 2026 को गोचर की स्थिति के अनुसार (चंद्रमा वृश्चिक राशि में और शुक्र वक्री होकर तुला/वृश्चिक प्रभाव में हैं)* (सोमवार) को चंद्रमा तुला राशि में (स्वाति नक्षत्र) गोचर कर रहे हैं और सूर्य कन्या राशि में स्थित हैं, साथ ही शुक्र तुला राशि में अस्त हैं।
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
★√*★√*★√*★√*★√*★
🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
‼️💢आज का राशिफल💢‼️
🏓🏓सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल💕
💕• मेष (Aries): चंद्रदेव आपकी राशि से सप्तम भाव में हैं। साझेदारों और जीवनसाथी से बातचीत में समझदारी से काम लें। नए काम की शुरुआत का विचार आ सकता है, घर में मेहमानों के आने से रौनक रहेगी।
💕• वृष (Taurus): पैसों के मामले में संयम और बजट में अनुशासन रखने की जरूरत है। बिना शर्तों को समझे किसी को उधार न दें। समाज में आपकी प्रतिष्ठा और मेहनत को सम्मान मिल सकता है।
💕• मिथुन (Gemini): आय और खर्च के बीच बेहतर संतुलन बनाकर रखें। यात्रा या किसी खास मुलाकात से उपयोगी जानकारी मिल सकती है। स्वास्थ्य को लेकर बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें।
💕• कर्क (Cancer): आपकी राशि में नीच के मंगलदेव स्थित हैं, इसलिए भावनाओं या गुस्से में आकर पैसों का कोई बड़ा फैसला न लें। कार्यक्षेत्र में कोई नई उपलब्धि मिल सकती है, पर सेहत का ध्यान रखें।
💕• सिंह (Leo): पारंपरिक कारोबार से जुड़े लोगों को नई संभावनाएं मिलेंगी। कार्यक्षेत्र में अनुशासन और गंभीरता से लाभ होगा। वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा और वित्तीय मामलों में धीरज रखना होगा।
💕• कन्या (Virgo): आपकी राशि में सूर्यदेव के विराजमान होने से आप पैसों और हिसाब-किताब को अच्छे से संभालेंगे। टैक्स या पुराने आर्थिक मामलों से राहत मिलने के योग हैं।
💕• तुला (Libra): चंद्रमा और वक्री शुक्र आपकी ही राशि में हैं। अपनी प्राथमिकताओं पर ध्यान दें और रिश्तों तथा कामकाज में संतुलित व्यवहार रखें। शत्रुओं पर आपका वर्चस्व बना रहेगा।
💕• वृश्चिक (Scorpio): छिपे हुए खर्चों से बचाव करें और पैसों की बातों को गोपनीय रखें। किसी के दबाव में आकर आर्थिक निर्णय न लें। शांत सोच से तनाव दूर रहेगा।
💕• धनु (Sagittarius): तुला राशि के चंद्रमा मित्रों और जान-पहचान के लोगों के जरिए आय के नए साधन या लाभ दिला सकते हैं। छात्रों को पढ़ाई या स्कॉलरशिप से जुड़ी अच्छी खबर मिल सकती है।
💕• मकर (Capricorn): दशम भाव पर विशेष प्रभाव रहने से कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन होगा। वित्तीय मामलों और बजट की अनदेखी बिल्कुल न करें।
💕• कुंभ (Aquarius): नई योजनाओं की जांच-परख करें और संपर्कों का पूरा लाभ उठाएं। इंपोर्ट-एक्सपोर्ट या कारोबार से जुड़े जातकों को बड़ा मुनाफा मिल सकता है।
💕• मीन (Pisces): साझा आर्थिक मामलों में सावधानी बरतें। पेंडिंग कार्यों को पूरा करने का प्रयास करें। मानसिक शांति रहेगी, हालांकि कुछ अंदरूनी चिंताएं बनी रह सकती हैं।
💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
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🌿 🌿 👉 🌷 शारदीय नवरात्रि
👉* 📖 🌷🌷 ॥ 🌷🌷
।। शारदीय नवरात्र,द्वितीय स्वरूप ।।
🎉 ।। माँ ब्रह्मचारिण्यै नमो नमः ।।🛟
💢नवरात्रि के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा क्यों की जाती है?
🏵️जानिए माता की महिमा, पूजा विधि, ध्यान मंत्र, स्तोत्र, कवच और वह पौराणिक कथा, जो प्रत्येक भक्त को अवश्य जाननी चाहिए।
🏵️🏵️।। माँ ब्रह्मचारिणी ।।🏵️🏵️
🛟नवरात्रि के दूसरे दिन माँ दुर्गा के द्वितीय स्वरूप माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। माता का यह स्वरूप तपस्या, त्याग, संयम, श्रद्धा और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है।
☀️माँ ब्रह्मचारिणी की उपासना से साधक को कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
🛟माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरूप एवं महिमा=
🛟माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और तेजस्वी है। इनके दाहिने हाथ में जप की माला तथा बाएँ हाथ में कमंडल सुशोभित है। माता श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और तपस्विनी के रूप में पूजित होती हैं।
🎉‘ब्रह्मचारिणी’ शब्द का अर्थ है ब्रह्म अर्थात तप, ज्ञान और परम सत्य के मार्ग पर आचरण करने वाली। देवी का यह स्वरूप साधक को सिखाता है कि सच्ची सफलता के लिए धैर्य, अनुशासन, आत्मसंयम और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
🌺नवदुर्गाओं में माँ ब्रह्मचारिणी दूसरा स्वरूप हैं। नवरात्रि के द्वितीय दिन इनकी पूजा करने की परंपरा है। भक्त श्रद्धापूर्वक माता का स्मरण करके अपने जीवन में शांति, सद्बुद्धि, साहस और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं।
🌺माँ ब्रह्मचारिणी की पौराणिक कथा=
🌺पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माँ ब्रह्मचारिणी ने पर्वतराज हिमालय के घर देवी पार्वती के रूप में जन्म लिया। वे भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने की इच्छा रखती थीं। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने कठोर तपस्या की।
कथा के अनुसार, माता ने अनेक वर्षों तक कठिन साधना की। उन्होंने लंबे समय तक फल-फूल खाकर तप किया और बाद में पत्तों का भी त्याग कर दिया। उनकी कठोर तपस्या के कारण वे ‘अपर्णा’ नाम से भी प्रसिद्ध हुईं।
🌺देवी की तपस्या, अटूट श्रद्धा और दृढ़ संकल्प से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।
🌺माँ ब्रह्मचारिणी की यह कथा हमें सिखाती है कि जीवन में किसी श्रेष्ठ उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए धैर्य, त्याग, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। सच्ची साधना केवल बाहरी तपस्या नहीं, बल्कि अपने विचारों, व्यवहार और कर्मों को शुद्ध बनाने का मार्ग भी है।
🌺माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि=
🏓नवरात्रि के दूसरे दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल को स्वच्छ करके माँ दुर्गा और माँ ब्रह्मचारिणी का ध्यान करें।
🎉सर्वप्रथम भगवान गणेश और अपने इष्टदेव का स्मरण करें।
🎉माता के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें।
💥माता को पुष्प, अक्षत, चंदन और धूप अर्पित करें।
💥परंपरा के अनुसार दूध, मिश्री, शक्कर या फल का भोग लगा सकते हैं।
💫माँ ब्रह्मचारिणी के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें।
➡️माता की कथा सुनें या पढ़ें तथा अंत में आरती करके परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
➡️पूजा में सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा, पवित्र भावना और सदाचार।
➡️अपनी सामर्थ्य के अनुसार पूजा करें और किसी भी प्रकार की कठिन साधना योग्य मार्गदर्शन के बिना न करें।
➡️माँ ब्रह्मचारिणी का ध्यान मंत्र=
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
‼️माँ ब्रह्मचारिणी का मूल मंत्र=
‼️ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥‼️
💕इस मंत्र का अपनी श्रद्धा और सुविधानुसार जप करें। जप करते समय मन को शांत रखें और माता के तपस्विनी स्वरूप का ध्यान करें।
➡️माँ ब्रह्मचारिणी की स्तुति.=
‼️या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
‼️माँ ब्रह्मचारिणी की प्रार्थना=
➡️हे माँ ब्रह्मचारिणी! आप तप, त्याग, संयम और साधना की अधिष्ठात्री देवी हैं। हमें कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखने, सही मार्ग पर चलने और अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करने की शक्ति प्रदान करें।
💥हमारे मन से आलस्य, निराशा और नकारात्मक विचारों को दूर करें। हमारे जीवन में सद्बुद्धि, आत्मविश्वास, शांति और भक्ति का संचार करें। हमें अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें।
💥हे जगदम्बे! सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें और समस्त संसार का कल्याण करें।
💥माँ ब्रह्मचारिणी की आरती=💥
जय अम्बे ब्रह्मचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुखदाता॥
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो॥
ब्रह्म मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सरल संसारा॥
जय गायत्री वेद की माता।
जो जन जिस दिन तुम्हें ध्याता॥
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए॥
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने॥
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर॥
आलस छोड़ करे गुणगाना।
माँ तुम उसको सुख पहुँचाना॥
ब्रह्मचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम॥
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी॥
जय माता दी।
💥माँ ब्रह्मचारिणी की उपासना का आध्यात्मिक महत्व=
💥नवरात्रि का दूसरा दिन हमें याद दिलाता है कि जीवन में स्थायी सफलता केवल इच्छा करने से नहीं, बल्कि अनुशासन, परिश्रम और धैर्य से प्राप्त होती है।
💥माँ ब्रह्मचारिणी का तपस्विनी स्वरूप हमें अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने तथा विपरीत परिस्थितियों में भी आशा बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
💥नवरात्रि में माता की उपासना करते हुए अपने आचरण को बेहतर बनाने, दूसरों के प्रति सद्भाव रखने और सत्य के मार्ग पर चलने का संकल्प लें।
💥माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, सद्बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति हो।
💥नवरात्रि के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें और उनके चरणों में अपनी प्रार्थना अर्पित करें।
🌺।। माँ ब्रह्मचारिण्यै नमो नमः ।।🌺
🙏 ।। श्री देवी महापुराण की जय ।।
🌺‼️जय श्री कृष्णा! 🦚🚩 🌺🙏
🧨🚩⛳💥❤️🕉️🌴🍀🎈🌀🌿
💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
*🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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*💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
*बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*♥️~*अपने घर, ऑफिस, और फैक्ट्री वास्तु के साथ सफल बनाये। जन्मकुंडली, प्रश्नन कुंडली, अंककुंडली, रत्न, जड़, एवं रुद्राक्ष आदि के लिये सम्पर्क करे।*
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💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️





