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पञ्चाङ्ग 11 अक्टूबर 2026

 *💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*

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*🎈दिनांक  11 अक्टूबर 2026*
*🎈वार-   रविवार*
*🎈मास - आश्विन मास*
*🎈पक्ष -  कृष्ण पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 2083*
*🎈संवत्सर     पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈अयन - दक्षिणायन*
*🎈ऋतु - शरद*
*🎈तिथि-प्रतिपदा - 21:30:25 पी एम तक तत्पश्चात द्वितीया* 
*🎈नक्षत्र- चित्रा - 22:31:40 पी एम तक तत्पश्चात, स्वाती*
*🎈करण    - किंस्तुघ्न - 09:20:59 ए एम तत्पश्चात् बव*
*🎈योग-    वैद्युति - 21:04:33 पी एम, अक्टूबर 09 तक तत्पश्चात्, विषकुंभ * 
*🎈राहुकाल- 04:42 पी एम से 06:09 पी एम(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय- 06:33.37 ए एम*
*🎈सूर्यास्त- 06:09:28 पी एम*
*🎈चंद्र राशि-कन्या*till 10:03:09तत्पश्चात तुला from10.03.09
*🎈सूर्य राशि- कन्या*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:54 ए एम से 05:43 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 11:58 ए एम से 12:45 पी एम*
*🎈अमृत काल    - 03:55 पी एम से 05:34 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त -11:57 पी एम से 12:47 ए एम, अक्टूबर 12*
*🎈  द्विपुष्कर योग    09:30 पी एम से 10:32 पी एम*
*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण-  🏵️ ☀️☀️☀️11 अक्टूबर 2026:प्रथम नवरात्रि🏓🏓🏓
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💥।। *घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
*।।💥
प्रात: 8:00 बजे से 9:31बजे चर वेला,दिन में 9:28 बजे से 12:45 बजे तक लाभ-अमृत वेला,दोपहर 12:01 बजे से 12:47 बजे तक अभिजित वेला में देवी का आह्वान, घट स्थापना व पूजन करने का सर्व श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा।


👁️"विष्णु भगवान की जय हो "🙏 🌹

🛟ब्रह्म वैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, प्रतिपदा तिथि को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा या पेठा) खाना वर्जित माना गया है।

💥11 अक्टूबर 2026 को प्रमुख ग्रहों का गोचर और स्थिति इस प्रकार है:
☀️• चंद्रमा का गोचर: चंद्रमा सुबह 10:04 बजे के बाद कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेंगे और चित्रा नक्षत्र (रात 10:33 बजे तक) में रहेंगे।
☀️• त्रिग्रह योग और कलात्मक योग: तुला राशि में चंद्रमा, बुध और वक्री शुक्र की युति से त्रिग्रह योग तथा चंद्रमा और शुक्र के संयोग से कलानिधि योग / कलात्मक योग का निर्माण हो रहा है।
☀️• सूर्य का नक्षत्र परिवर्तन: सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में गोचर करेंगे।
☀️• अन्य ग्रह स्थिति: सूर्य कन्या राशि में, बुध तुला राशि में, वक्री शुक्र तुला राशि में और मंगल कर्क राशि में (नीच के) स्थित हैं।

💢विशेष पर्व व पंचांग (11 अक्टूबर 2026)↘️

💓• तिथि: आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा (रात 09:32 बजे तक)।
💓• विशेष: इस दिन से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है।
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   👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
     🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
       *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day



          🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
★√*★√*★√*★√*★√*★
     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
   
    ‼️💢आज का राशिफल💢‼️

🏓🏓सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल💕

🏓* मेष राशि: बच्चों के करियर से जुड़ी कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। दिन मिलाजुला और उत्साहजनक रहेगा, हालांकि सुबह किसी बात पर मन थोड़ा संवेदनशील हो सकता है।
🏓• वृषभ राशि: लग्जरी आइटम्स या व्यवसाय में बंपर मुनाफा और आर्थिक लाभ के योग हैं। किस्मत का पूरा साथ मिलेगा।
🏓• मिथुन राशि: नए ऑर्डर और प्रभावशाली लोगों से मुलाकात के योग हैं, लेकिन बातचीत में और धन निवेश में थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह है।
🏓• कर्क राशि: परिवार और बाहर की जिम्मेदारियों के बीच सामंजस्य बिठाने की जरूरत रहेगी। मानसिक तौर पर अधिक जुड़ाव महसूस करेंगे।
🏓• सिंह राशि: शारदीय नवरात्रि और गोचर के प्रभाव से आपकी इनकम बढ़ेगी, टारगेट आसानी से पूरे होंगे और व्यापार में बड़ा लाभ मिलेगा।
🏓• कन्या राशि: सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। आर्थिक मामलों में समझदारी से फैसले लें, दिन लाभकारी रहेगा।
🏓• तुला राशि: चंद्रमा आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं तथा बुध-शुक्र के साथ त्रिग्रह व कलात्मक योग बन रहा है। मान-सम्मान और शुभ परिणामों की प्राप्ति होगी।
🏓• वृश्चिक राशि: बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद से भाग्य का साथ मिलेगा। गुप्त शत्रुओं और लेन-देन में सावधानी बरतें।
🏓• धनु राशि: नौकरीपेशा लोगों को आकर्षक पैकेज या नए ऑफर मिल सकते हैं। व्यापारिक मामलों में बड़ा लाभ होने के योग हैं।
🏓• मकर राशि: कार्यक्षेत्र में नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ेंगे। पुराने डर और झिझक को छोड़कर नए लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने का सही समय है।
🏓• कुंभ राशि: रिकॉर्ड तोड़ सेल और व्यावसायिक लाभ मिल सकता है, परंतु जल्दबाजी और क्रोध से बचने की खास सलाह है।
🏓• मीन राशि: स्वास्थ्य और शरीर की देखभाल पर ध्यान दें। योग व विश्राम से मानसिक शांति मिलेगी और कार्यक्षेत्र में सुधार होगा।
💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏
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 ➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं आज  से नवरात्रि पर्व चल रहा है। ☀️

#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
🌹|| ✨ 🌹// 🕉️ ✨ 🌺 🦚 🌼 
🌿 🌿 👉 🌷 शारदीय नवरात्रि महापर्व ॥ 🌷😱👇  
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👉*  📖 🌷🌷 ॥  🌷🌷

🌺 राजा सुरथ और समाधि वैश्य की कथा, श्रीदुर्गासप्तशती का महात्म्य तथा भगवती महामाया का दिव्य संदेश 🌺

🙏 जय माता दी! जय जगदम्बे! 🙏

🌼 नवरात्रि केवल नौ दिनों का उपवास नहीं, बल्कि अपने भीतर सोई हुई दिव्य शक्ति को जागृत करने, मोह-माया के बंधनों को समझने और माँ भगवती की शरण में जाकर जीवन को नई दिशा देने का पावन अवसर है।

मनुष्य जब सुखी होता है, तब उसे संसार अपना दिखाई देता है; लेकिन जब विपत्तियाँ आती हैं, अपने ही साथ छोड़ देते हैं और जीवन की सारी उपलब्धियाँ हाथ से निकल जाती हैं, तब उसे यह अनुभव होता है कि बाहरी संसार पर उसका अधिकार कितना सीमित है।

ऐसी परिस्थितियों में मनुष्य के सामने एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न खड़ा होता है—

यदि संसार परिवर्तनशील है, यदि अपने भी कभी पराए हो जाते हैं और यदि धन, पद तथा प्रतिष्ठा स्थायी नहीं हैं, तो मनुष्य किसका आश्रय ले?

सनातन धर्म इसका उत्तर भगवती आद्याशक्ति महामाया की उपासना में देखता है।

श्रीमार्कण्डेयपुराण में वर्णित देवीमाहात्म्य, जिसे सामान्यतः श्रीदुर्गासप्तशती अथवा चण्डीपाठ कहा जाता है, इसी सत्य का अत्यंत सुंदर निरूपण करता है।

इसमें भगवती की महिमा के साथ-साथ मनुष्य के मोह, अहंकार, आसक्ति, संघर्ष, आत्मज्ञान और मुक्ति का भी गहन आध्यात्मिक विवेचन मिलता है।

आइए, राजा सुरथ और समाधि वैश्य की कथा के माध्यम से श्रीदुर्गासप्तशती के दिव्य संदेश को समझें।

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🌺 १. जब राजा का राज्य छिन गया और वैश्य को अपने ही परिवार ने त्याग दिया 🌺
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प्राचीन काल में सुरथ नाम के एक प्रतापी राजा थे। वे प्रजा का पालन-पोषण अपने पुत्रों के समान करते थे। उनके राज्य में प्रजा सुखी थी और राजा अपने कर्तव्यों का पालन करने में तत्पर रहते थे।

किन्तु संसार में परिस्थितियाँ सदा एक समान नहीं रहतीं।

राजा सुरथ के विरुद्ध शत्रुओं ने षड्यंत्र रचा। युद्ध में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। उनके राज्य की शक्ति क्षीण हो गई और उनके अपने ही कुछ लोगों ने उनके अधिकारों का हरण कर लिया।

जो राजा कभी विशाल साम्राज्य का स्वामी था, उसे अपना राज्य छोड़कर वन की ओर जाना पड़ा।

वन में पहुँचकर भी राजा का मन शांत नहीं हुआ।

वे बार-बार अपने राज्य के विषय में सोचते। उनके मन में अपनी प्रजा, अपने हाथियों, घोड़ों, सैनिकों, राजकोष और राज्यव्यवस्था की चिंता उठती रहती।

उनके मन में प्रश्न उठता—

जिन लोगों और वस्तुओं से मेरा अधिकार छिन चुका है, उनके प्रति मेरा मन अब भी इतना व्याकुल क्यों है?

क्या यह उचित है कि जिन परिस्थितियों पर अब मेरा नियंत्रण नहीं रहा, उन्हीं के विचार में मेरा चित्त निरंतर अशांत रहे?

इन्हीं विचारों में डूबे हुए राजा सुरथ वन में भ्रमण कर रहे थे।

उसी समय उनकी भेंट समाधि नाम के एक वैश्य से हुई।

समाधि वैश्य कभी अत्यंत धनवान थे। उनके पास पर्याप्त धन-संपत्ति थी और उनका परिवार भी था। किन्तु धन के लोभ में उनके अपने ही पुत्रों और पत्नी ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया तथा उन्हें घर से अलग कर दिया।

वे सब कुछ छोड़कर वन में आ गए थे।

राजा सुरथ ने जब उन्हें दुःखी देखा, तो उनसे उनके दुःख का कारण पूछा।

वैश्य ने अपनी व्यथा सुनाई। आश्चर्य की बात यह थी कि जिन लोगों ने उन्हें घर से निकाल दिया था, जिनके व्यवहार से उन्हें इतनी पीड़ा पहुँची थी, उनके प्रति भी उनका मन ममता से भरा हुआ था।

वे अब भी सोचते थे—

मेरे पुत्र कैसे होंगे? मेरी पत्नी का क्या होगा? मेरे परिवार का पालन-पोषण कैसे होगा?

जिन्होंने मुझे स्वीकार नहीं किया, उनके कल्याण की चिंता मेरा मन क्यों कर रहा है?

राजा सुरथ ने अपनी व्यथा भी उनके सामने रखी।

दोनों की परिस्थितियाँ अलग थीं, लेकिन उनके मन की समस्या एक ही थी।

राजा अपने छिन चुके राज्य के प्रति आसक्त थे और वैश्य अपने परिवार के प्रति मोह से बँधे हुए थे।

दोनों विचारशील थे। वे जानते थे कि संसार में परिवर्तन स्वाभाविक है, फिर भी उनका मन अपने पुराने संबंधों और अधिकारों को छोड़ नहीं पा रहा था।

यहीं से इस कथा का वास्तविक आध्यात्मिक पक्ष आरम्भ होता है।

मनुष्य का दुःख केवल वस्तुओं के खो जाने से उत्पन्न नहीं होता; कई बार वह उन वस्तुओं, व्यक्तियों और परिस्थितियों को मन से न छोड़ पाने के कारण भी बना रहता है, जो अब उसके नियंत्रण में नहीं हैं।

लेकिन क्या इस मोह से मुक्ति संभव है?

इसी प्रश्न का उत्तर खोजने के लिए राजा सुरथ और समाधि वैश्य महर्षि मेधा के आश्रम पहुँचे।
🙏 ।। श्री देवी महापुराण की जय ।। 

🌺‼️जय श्री कृष्णा! 🦚🚩 🌺🙏

🧨🚩⛳💥❤️🕉️🌴🍀🎈🌀🌿

 💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
  ✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
           *🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏     
 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹          

 *💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
          *बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
       🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
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