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पञ्चाङ्ग 17 अक्टूबर 2026

 *💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*

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*🎈दिनांक  17 अक्टूबर 2026*
*🎈वार-    शनिवार *
*🎈मास - आश्विन मास*
*🎈पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 2083*
*🎈संवत्सर     पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈अयन - दक्षिणायन*
*🎈ऋतु - शरद*
*🎈तिथि-सप्तमी - पूर्ण रात्रि तक तत्पश्चात सप्तमी* 
*🎈नक्षत्र- मूल - 09:47 ए एम तक तत्पश्चात, पूर्वाषाढ़ा*
*🎈करण-    गर - 07:11 पी एम तक तत्पश्चात् वाणिज*
*🎈योग-    अतिगण्ड - 11:03 पी एम तक तत्पश्चात्, सुकर्मा*
*🎈राहुकाल- 09:16 ए एम से 10:45 ए एम (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*

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*🎈सूर्योदय- 06:36.56 ए एम*
*🎈सूर्यास्त- 06:03:28 पी एम*
*🎈चंद्र राशि- धनु*
*🎈सूर्य राशि- कन्या- 07:51:10 पी एम तक तत्पश्चात तुला*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
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*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:56 ए एम से 05:46 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 11:57 ए एम से 12:43 पी एम*
*🎈रवि योग-    06:36 ए एम से 09:47 ए एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त -11:55 पी एम से 12:46 ए एम, अक्टूबर 18*

*🎈 रवि योग    06:47 ए एम से 06:36 ए एम, अक्टूबर 17
*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण-  🏵️ ☀️
☀️☀️17 अक्टूबर 2026: सातवें दिन माँ काल रात्रि नवरात्रि🏓🏓🏓

👁️"विष्णु भगवान की जय हो "🙏 🌹

🛟ब्रह्मवैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, सप्तमी तिथि के दिन ताड़ का फल (या खजूर/ताड़) खाना वर्जित माना गया है।

🛟17 अक्टूबर 2026 को चंद्रमा धनु राशि में तथा सूर्य का कन्या से तुला राशि में गोचर (शाम के समय) होगा, जिससे बुधादित्य और त्रिग्रह योग का प्रभाव बनेगा।
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   👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
     🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
       *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day



          🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
★√*★√*★√*★√*★√*★
     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
   
    ‼️💢आज का राशिफल💢‼️

🏓🏓सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल
🛟 • मेष: भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। रुके हुए कार्यों में प्रगति होगी और आत्मविश्वास बढ़ेगा।
🛟• वृष: आध्यात्मिक साधना और गहन चिंतन के लिए दिन उत्तम है। अनावश्यक खर्चों से बचें।
🛟• मिथुन: जीवनसाथी और साझेदारों के साथ संबंध प्रेमपूर्ण रहेंगे। रचनात्मक कार्यों में मन लगेगा।
🛟• कर्क: शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने का शुभ अवसर है। कार्यस्थल पर अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें।
🛟• सिंह: पुराने कार्यों को पूरा करने का मौका मिलेगा। परिवार के साथ सुखद समय बीतेगा।
🛟• कन्या: कोई भी योजना या विचार आगे बढ़ाने से पहले उसकी बारीकी से जांच कर लें।
🛟• तुला: शाम को सूर्य के इस राशि में आने से पेशेवर प्राथमिकताओं और आर्थिक फैसलों पर विचार करने का मौका मिलेगा। स्पष्ट संवाद रखें।
🛟• वृश्चिक: अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान दें और अपने धन तथा संसाधनों को सुरक्षित रखने की रणनीति बनाएं।
🛟• धनु: चंद्रमा इसी राशि में रहेंगे। नए विचारों और अवसरों की तलाश रहेगी, कर्ज चुकाने में सफलता मिल सकती है।
🛟• मकर: घर के विवादों को बातचीत से सुलझाएं। वाणी पर संयम रखें और जल्दबाजी में निवेश से बचें।
🛟• कुंभ: कार्यक्षेत्र में इच्छित अवसर मिलेंगे और आय के नए स्रोत बनने की संभावना है। स्वास्थ्य पर ध्यान दें।
🛟• मीन: मित्रों के साथ समय बीतेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लेकिन अचानक खर्च सामने आ सकते हैं।
💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏
  
 ➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
🏓शारदीय नवरात्रि महापर्व🏓

🌹|| ✨ 🌹// 🕉️ ✨ 🌺 🦚 🌼 
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👇 🤔 नवरात्री के सातवे दिन आदि शक्ति माँ दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की उपासना विधि एवं दुर्भाग्य नाशक उपाय
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माता कालरात्रि स्वरूप एवं पौरिणीक महात्म्य
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श्री माँ दुर्गा का सप्तम रूप कालरात्रि हैं। ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं। नवरात्रि के सप्तम दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। इस दिन साधक को अपना चित्त भानु चक्र (मध्य ललाट) में स्थिर कर साधना करनी चाहिए। संसार में कालो का नाश करने वाली देवी कालरात्री ही है। भक्तों द्वारा इनकी पूजा के उपरांत उसके सभी दु:ख, संताप भगवती हर लेती है। दुश्मनों का नाश करती है तथा मनोवांछित फल प्रदान कर उपासक को संतुष्ट करती हैं। दुर्गा की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है। इनके शरीर का रंग घने अंधकार की भाँति काला है, बाल बिखरे हुए, गले में विद्युत की भाँति चमकने वाली माला है। इनके तीन नेत्र हैं जो ब्रह्माण्ड की तरह गोल हैं, जिनमें से बिजली की तरह चमकीली किरणें निकलती रहती हैं। इनकी नासिका से श्वास, निःश्वास से अग्नि की भयंकर ज्वालायें निकलती रहती हैं। इनका वाहन ‘गर्दभ’ (गधा) है। दाहिने ऊपर का हाथ वरद मुद्रा में सबको वरदान देती हैं, दाहिना नीचे वाला हाथ अभयमुद्रा में है।

बायीं ओर के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा और निचले हाथ में खड्ग है। माँ का यह स्वरूप देखने में अत्यन्त भयानक है किन्तु सदैव शुभ फलदायक है। अतः भक्तों को इनसे भयभीत नहीं होना चाहिए । दुर्गा पूजा के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है। इस दिन साधक का मन सहस्त्रारचक्र में अवस्थित होता है। साधक के लिए सभी सिध्दैयों का द्वार खुलने लगता है। इस चक्र में स्थित साधक का मन पूर्णत: मां कालरात्रि के स्वरूप में अवस्थित रहता है, उनके साक्षात्कार से मिलने वाले पुण्य का वह अधिकारी होता है, उसकी समस्त विघ्न बाधाओं और पापों का नाश हो जाता है और उसे अक्षय पुण्य लोक की प्राप्ति होती है।

मधु कैटभ नामक महापराक्रमी असुर से जीवन की रक्षा हेतु भगवान विष्णु को निंद्रा से जगाने के लिए ब्रह्मा जी ने इसी मंत्र से मां की स्तुति की थी। यह देवी काल रात्रि ही महामाया हैं और भगवान विष्णु की योगनिद्रा हैं। इन्होंने ही सृष्टि को एक दूसरे से जोड़ रखा है।
देवी काल-रात्रि का वर्ण काजल के समान काले रंग का है जो अमावस की रात्रि से भी अधिक काला है। मां कालरात्रि के तीन बड़े बड़े उभरे हुए नेत्र हैं जिनसे मां अपने भक्तों पर अनुकम्पा की दृष्टि रखती हैं। देवी की चार भुजाएं हैं दायीं ओर की उपरी भुजा से महामाया भक्तों को वरदान दे रही हैं और नीचे की भुजा से अभय का आशीर्वाद प्रदान कर रही हैं। बायीं भुजा में क्रमश: तलवार और खड्ग धारण किया है। देवी कालरात्रि के बाल खुले हुए हैं और हवाओं में लहरा रहे हैं। देवी काल रात्रि गर्दभ पर सवार हैं। मां का वर्ण काला होने पर भी कांतिमय और अद्भुत दिखाई देता है। देवी कालरात्रि का यह विचित्र रूप भक्तों के लिए अत्यंत शुभ है अत: देवी को शुभंकरी भी कहा गया है।

दुर्गा सप्तशती के प्रधानिक रहस्य में बताया गया है कि जब देवी ने इस सृष्टि का निर्माण शुरू किया और ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश का प्रकटीकरण हुआ उससे पहले देवी ने अपने स्वरूप से तीन महादेवीयों को उत्पन्न किया। सर्वेश्वरी महालक्ष्मी ने ब्रह्माण्ड को अंधकारमय और तामसी गुणों से भरा हुआ देखकर सबसे पहले तमसी रूप में जिस देवी को उत्पन्न किया वह देवी ही कालरात्रि हैं। देवी कालरात्रि ही अपने गुण और कर्मों द्वारा महामाया, महामारी, महाकाली, क्षुधा, तृषा, निद्रा, तृष्णा, एकवीरा, एवं दुरत्यया कहलाती हैं।

माँ कालरात्रि पूजा विधि
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देवी का यह रूप ऋद्धि सिद्धि प्रदान करने वाला है। दुर्गा पूजा का सातवां दिन तांत्रिक क्रिया की साधना करने वाले भक्तों के लिए अति महत्वपूर्ण होता है, सप्तमी पूजा के दिन तंत्र साधना करने वाले साधक मध्य रात्रि में देवी की तांत्रिक विधि से पूजा करते हैं। इस दिन मां की आंखें खुलती हैं। षष्ठी पूजा के दिन जिस विल्व को आमंत्रित किया जाता है उसे आज तोड़कर लाया जाता है और उससे मां की आँखें बनती हैं। दुर्गा पूजा में सप्तमी तिथि का काफी महत्व बताया गया है। इस दिन से भक्त जनों के लिए देवी मां का दरवाज़ा खुल जाता है और भक्तगण पूजा स्थलों पर देवी के दर्शन हेतु पूजा स्थल पर जुटने लगते हैं। सप्तमी की पूजा सुबह में अन्य दिनों की तरह ही होती परंतु रात्रि में विशेष विधान के साथ देवी की पूजा की जाती है। इस दिन अनेक प्रकार के मिष्टान एवं कहीं कहीं तांत्रिक विधि से पूजा होने पर मदिरा भी देवी को अर्पित कि जाती है। सप्तमी की रात्रि सिद्धियों की रात भी कही जाती है। कुण्डलिनी जागरण हेतु जो साधक साधना में लगे होते हैं आज सहस्त्रसार चक्र का भेदन करते हैं।

पूजा विधान में शास्त्रों में जैसा वर्णित हैं उसके अनुसार पहले कलश की पूजा करनी चाहिए फिर नवग्रह, दशदिक्पाल, देवी के परिवार में उपस्थित देवी देवता की पूजा करनी चाहिए फिर मां कालरात्रि की पूजा करनी चाहिए। देवी की पूजा से पहले उनका ध्यान करना चाहिए।

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  🌺।। माँ कालरात्रि माता नमो नमः ।।🌺
🙏 ।। श्री देवी महापुराण की जय ।। 
 🌺‼️जय श्री कृष्णा! 🦚🚩 🌺🙏
🧨🚩⛳💥❤️🕉️🌴🍀🎈🌀🌿
💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
  ✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
           *🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏     
 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹          

 *💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
          *बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
       🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
♨️  ⚜️ 🕉🌞  🌞🕉 ⚜🚩*♥️💕💥*

🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ

*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*

‼️*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न, रुद्राक्ष, वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे उसके बाद उपयोग करे।

*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️
vipul

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