उर्स मुबारक -2026
सूफी हमीदुद्दीन नागौरी का उर्स संपन्न, कुल में उमड़े जायरीन
नमाज के बाद कुल की रस्म, मजार पर चढ़ी चादर, धागे बांध मन्नत में मांगी खुशहाली
नागौर जिला मुख्यालय स्थित हजरत सूफी हमीदुद्दीन नागौरी रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह में चल रहे 775वें उर्स का शुक्रवार को कुल की रस्म के साथ समापन हुआ। दरगाह सदर शमशेर खान ने बताया उर्स के आखिरी दिन दरगाह में बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचे। असर की नमाज के बाद कुल की रस्म अदा की गई।
इसके साथ ही जायरीन ने सूफी साहब की मजार पर चादर चढ़ाकर, मन्नतों के धागे बांधकर और दुआएं मांगकर अमन-चैन की कामना की। उर्स संपन्न होने के बाद जायरीन अपने घरों के लिए रवाना होने लगे। उर्स के आखिरी दिन दरगाह के मेला मैदान में भी लोगों की भारी भीड़ रही। दुकानों पर जायरीन ने खरीदारी की, वहीं बच्चों ने झूलों का आनंद लिया। मेले में सोहन हलवे की दुकानों पर विशेष रौनक दिखाई दी। जायरीन ने अपने घरों और रिश्तेदारों के लिए सोहन हलवा पैक करवाया। लोगों ने दरगाह परिसर में तस्वीरें भी खिंचवाई। उर्स के दौरान लंगर सहित विभिन्न स्थानों पर व्यवस्थाएं संभालने वाले पंजाब से आए सिख समाज के लोगों का दरगाह कमेटी की ओर से सम्मान किया गया। सदर हाजी शमशेर खान ने कहा कि सिख समाज के लोगों ने सेवा भाव से व्यवस्थाओं में सहयोग दिया है।
उर्स के दौरान दावते इस्लामी के सदस्यों ने रोजाना व्यवस्थाएं संभालीं।
आखिरी दिन हाजी अमजद अत्तारी और हाजी एजाज अत्तारी सहित अन्य पदाधिकारी भी नागौर पहुंचे और कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान टीम ब्लूज के अली शेर खान, चैतराम भादू, डॉ. राजदीप, अशोक शर्मा, जगदीश टांडी, दिनेश मिर्धा, सुरेंद्र बेड़ा, नवीन भाकल, डॉ. लेखा मील, पोकर राम, रवींद्र और विनय सहित अन्य सहयोगियों का सम्मान किया गया।
कव्वाली में गूंजे सूफी साहब की शान में कलाम
शुक्रवार दोपहर जुमे की नमाज के बाद महफिलखाने में कव्वाली का आयोजन हुआ। कव्वालों ने सूफी साहब की शान में एक से बढ़कर एक कलाम पेश किए। वहीं, जुम्मे की नमाज से पहले मस्जिद में उलेमाओं ने तकरीर की। दरगाह कमेटी अध्यक्ष हाजी शमशेर खान ने बताया कि कुल की रस्म के दिन जुम्मे की नमाज होने से बड़ी संख्या में नमाजी शामिल हुए। उलेमाओं ने कहा कि हजरत सूफी हमीदुद्दीन नागौरी की शिक्षाएं इंसानियत, त्याग, एकता और भाईचारे का संदेश देती हैं। सभी को उनके बताए रास्ते पर चलते हुए जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए और ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जिससे दूसरे धर्म के लोगों को परेशानी हो।


