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पञ्चाङ्ग - 07 फरवरी 2026

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

jyotis


*🎈दिनांक - 07 फरवरी 2026*
*🎈 दिन-   शनिवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शरद*
*🎈 मास - फाल्गुन मास*
*🎈 पक्ष - कृष्ण पक्ष*
*🎈तिथि-     षष्ठी    26:53:44**तक* तत्पश्चात सप्तमी*
*🎈 नक्षत्र -    चित्रा    26:27:27* तक तत्पश्चात्     स्वाति👇
*🎈 योग    -     शूल    23:39:26* तक तत्पश्चात् गण्ड*
*🎈करण    -     गर    14:01:21 तक तत्पश्चात्  गर*
*🎈राहुकाल -11:27 पी एम से 12:49:पी एम. (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈चन्द्र राशि-    कन्या till 13:20:51
*🎈चन्द्र राशि-      तुला    from 13:20:51*
*🎈सूर्य राशि-     मकर    *
*🎈 सूर्योदय-07:18:56am*
*🎈सूर्यास्त -        18:19:45  pm* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:34 ए एम से 06:26 ए एम(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:27 पी एम से 01:11 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:23 ए एम, फरवरी 08 से 01:15 ए एम, फरवरी 08*
 *🎈 अमृत काल    -07:31 पी एम से 09:15 पी एम*
 *🎈 सर्वार्थ सिद्धि योग-    02:28 ए एम, फरवरी 08 से 07:17 ए एम, फरवरी 08*
*🎈 व्रत एवं पर्व- ... षष्ठी*
*🎈विशेष फाल्गुन मास महात्म्य *
 🙏 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🙏
kundli



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    *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
   नागौर, राजस्थान, (भारत)    
   मानक सूर्योदय के अनुसार।*
day

🛟

    
        *🛟चोघडिया, रात्🛟*
night

*🛟 
 


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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🌷❤️💐🌼🪔❤️💐👉 ✍️ ★√*🛡️🌹

🌿✨  #वास्तु_का_अज्ञात_रहस्य_वास्तु_पुरुष_मंडल_वास्तु_शास्त्र -

वास्तु पुरुष मंडल वास्तु शास्त्र का मूलभूत और सबसे गहन सिद्धांत है, जो वैदिक काल से चला आ रहा है। यह भवन को ब्रह्मांड की सूक्ष्म संरचना (माइक्रोकोस्म) के रूप में देखता है, जहाँ पूरा भवन या प्लॉट एक जीवंत पुरुष (#वास्तु_पुरुष) के रूप में परिकल्पित होता है। प्रमाणित ग्रंथों जैसे मत्स्य पुराण, स्कंद पुराण, बृहत्संहिता (वराहमिहिर), समरांगण सूत्रधार, मानसार, मयमत, विश्वकर्मा प्रकाश और अपराजित पृच्छा में इसका विस्तृत वर्णन मिलता है।

#वास्तु_पुरुष_की_उत्पत्ति_और_स्थिति

#मत्स्य_पुराण और अन्य पुराणों के अनुसार, भगवान शिव और अंधकासुर के युद्ध में शिव के पसीने से एक भयंकर राक्षस (वास्तु पुरुष) उत्पन्न हुआ, जो अत्यधिक भूखा था और देवताओं को कष्ट देने लगा। ब्रह्मा, विष्णु और अन्य देवताओं ने उसे पृथ्वी पर #अधोमुख (पेट के बल) गिराकर दबाया। उसके शरीर पर ४५ देवता विराजमान हुए, जिससे उसकी गतिविधियाँ रुक गईं। इसीलिए नाम पड़ा वास्तु पुरुष। उसका सिर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में, पैर नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) में, दाहिना घुटना और कोहनी आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) में तथा बायाँ घुटना और कोहनी वायव्य (उत्तर-पश्चिम) में माने जाते हैं।

यह स्थिति #वैदिक_और_वैज्ञानिक_समन्वय दर्शाती है — ईशान में सिर होने से उत्तर-पूर्व में सकारात्मक ऊर्जा (पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र और सूर्य की प्रातः किरणें) का प्रवेश अधिक होता है, जबकि नैऋत्य में पैर होने से वहाँ #नकारात्मक_ऊर्जा (क्षय, रोग) का प्रभाव अधिक माना गया है। सूर्य सिद्धांत (आर्यभट्ट, वराहमिहिर से प्रेरित) के अनुसार सूर्य की गति और किरणें पूर्व से आती हैं, जो वास्तु में ऊर्जा प्रवाह का आधार बनाती हैं।

#४५_देवताओं_की_स्थिति_और_प्रभाव

वास्तु पुरुष मंडल सामान्यतः #८१_पदों (९×९ ग्रिड) में विभाजित होता है। समरांगण सूत्रधार के अनुसार कुल ४५ देवता हैं — मध्य ९ पदों पर ब्रह्मा स्वयं, चारों ओर मध्यस्थ देवता, कोणों में विशेष देवता और बाहरी ३२ पदों पर अन्य देवता।

#प्रमुख_देवताओं_की_स्थिति और प्रभाव (प्रमुख ग्रंथों के आधार पर):

#ब्रह्मा — केंद्र (ब्रह्म स्थान) में ९ पदों पर। प्रभाव: चेतना, शांति, समग्र संतुलन। अपमान से जीवन में शून्यता, अशांति।

#ईशान_कोण — आप (जल/हिमालय), आपवत्स (उमा/पार्वती)। प्रभाव: ज्ञान, आशीर्वाद, स्वास्थ्य।

#आग्नेय_कोण — सविता (गंगा), सावित्र (गायत्री)। प्रभाव: अग्नि, ऊर्जा, धन, रसोई क्षेत्र।

#नैऋत्य_कोण — जय (इंद्र/हरि), रुद्र (महेश्वर)। प्रभाव: स्थिरता, लेकिन असंतुलन से क्षय/रोग।

#वायव्य_कोण — राजयक्ष्मा (कार्तिकेय), रुद्र। प्रभाव: वायु, परिवर्तन, लेकिन दोष से तनाव।

बाहरी ३२ पदों के प्रमुख देवता (दिशा अनुसार क्रम से):

#पूर्व_दिशा: शिखी (शंकर), पर्जन्य (वर्षा), जयंत (कश्यप), महेंद्र (इंद्र), रवि (सूर्य), सत्य (धर्मराज), भृश (कामदेव), आकाश (नभ)।

#दक्षिण: अनिल (वायु), पूषा (मातृगण), वितथ (अधर्म), गृहत्क्षत (बुध), यम (यमराज), गंधर्व, भृंगराज, मृग (नैऋति)।

#पश्चिम: पितृ, दौवारिक (नंदी), सुग्रीव (मनु), पुष्पदंत, वरुण (जल देव), असुर (राहु), शोष (शनि), पापयक्ष्मा (क्षय)।

#उत्तर: रोग, नाग (वासुकी), मुख्य (विश्वकर्मा), भल्लाट (चंद्र), सोम (कुबेर), भुजग (शेषनाग), अदिति (देवमाता/लक्ष्मी), दिति (दैत्यमाता)।

ये देवता जीवन के विभिन्न पहलुओं (स्वास्थ्य, धन, संबंध, ज्ञान, सफलता) को नियंत्रित करते हैं। उदाहरण: सूर्य देव पूर्व में होने से प्रातः #सूर्य किरणें सकारात्मक प्रभाव देती हैं। असुर/राहु नैऋत्य में होने से वहाँ भारी निर्माण से मानसिक अशांति।

ब्रह्म स्थान, पद व्यास और आयादि गणना का परिचय

#ब्रह्म_स्थान: ९×९ ग्रिड का केंद्र (मध्य १ पद या ३×३ क्षेत्र)। ब्रह्मा का निवास। खुला रखना चाहिए (कोई भारी निर्माण, स्तंभ, शौचालय, सीढ़ी नहीं)। प्रभाव: आकाश तत्व, चेतना केंद्र। वैज्ञानिक रूप से यह भवन का गुरुत्व केंद्र होता है, जहाँ ऊर्जा संतुलन बनता है।

#पद_व्यास: भूखंड को ९×९ या ८×८ पदों में विभाजित करना। प्रत्येक पद देवता के अनुसार उपयोग — जैसे ईशान में पूजा स्थल, आग्नेय में रसोई।

आयादि गणना: वास्तु में आय (लंबाई), व्यास (चौड़ाई), क्षेत्रफल आदि की गणना। प्रमाणित सूत्र: भवन की लंबाई-चौड़ाई अनुपात (जैसे १:१, १:२) शुभ हो। #मानसार_और_मयमत में आयादि षड्वर्ग (आय, व्यय, ढृढ़, स्थिर आदि) का वर्णन है। वैज्ञानिक रूप से यह अनुपात ध्वनि तरंगों, वेंटिलेशन और चुंबकीय संतुलन से जुड़ा है।

वास्तु दोष पहचानने की बेसिक तकनीक

वास्तु दोष मुख्यतः दिशा असंतुलन, कटान (कट), विस्तार (extension) या देवता पद पर अनुचित निर्माण से होता है। बेसिक तकनीकें (#सूर्य_सिद्धांत और प्रमाणित ग्रंथों के आधार पर):

दिशा सत्यापन: वास्तु कंपास या ऐप से ट्रू नॉर्थ चेक करें (सूर्योदय पूर्व में)। मुख्य द्वार पूर्व/उत्तर/ईशान में शुभ।

#ब्रह्म_स्थान_जांच: केंद्र खुला? यदि भारी वस्तु/शौचालय तो स्वास्थ्य/मानसिक अशांति।

कट/एक्सटेंशन: प्लॉट में कट नैऋत्य/वायव्य में हो तो रोग/धन हानि। विस्तार ईशान में शुभ।

#देवता_प्रभाव: जैसे आग्नेय में शौचालय (अग्नि देव अपमान) से आग/स्वास्थ्य समस्या। नैऋत्य में बोरिंग (रोग देव) से रोग।

प्राकृतिक संकेत: घर में बार-बार बीमारी, धन रुकना, झगड़े, नींद न आना आदि दोष के लक्षण।

#कुछ_गहन_रहस्य (शोधात्मक विवेचन)

एक कम ज्ञात रहस्य: वास्तु पुरुष मंडल में ४५ देवता वास्तव में पंचमहाभूत + खगोलीय ऊर्जा के ४५ रूप हैं। ब्रह्म स्थान आकाश तत्व है, लेकिन गहन स्तर पर यह शून्य बिंदु (zero point energy) जैसा है — जहाँ सभी ऊर्जाएँ संतुलित होकर #अनंत_संभावनाएँ उत्पन्न करती हैं। आधुनिक भौतिकी में क्वांटम फील्ड थ्योरी से मिलता-जुलता।

दूसरा_रहस्य: कुछ ग्रंथों में वास्तु पुरुष के ४६वें पद (बाहरी) को वास्तु देव (वास्तु पुरुष स्वयं) माना गया है, जो अदृश्य रहता है। इसका प्रभाव तब आता है जब सभी ४५ देव संतुलित हों, तब भवन "#जीवंत" हो जाता है — जैसे मानव शरीर में प्राण। यह आज भी कम लोगों को ज्ञात है कि वास्तु पुरुष की "सांस" पूर्व से आती सूर्य किरणों से चलती है, और यदि पूर्व बाधित हो तो पूरा मंडल "प्राणहीन" हो जाता है।

वास्तु शास्त्र वैदिक (पुरुष सूक्त से प्रेरित) और वैज्ञानिक (सूर्य पथ, चुंबकत्व, भू-ऊर्जा) का पूर्ण समन्वय है। इसका पालन जीवन को प्रकृति के साथ सामंजस्य में रखता है।
🙏🧡

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.     💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥

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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध वि12:19 ए एम, जनवरी 19 से 01:12 ए एम, जनवरी 19शेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ  🇪🇬🔱🔥🔱
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