*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक - 14 जनवरी 2026*
*🎈 दिन- बुधवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शरद*
*🎈 मास - माघ मास*
*🎈 पक्ष - कृष्ण पक्ष*
*🎈तिथि- एकादशी (व्रत) 17:52:11 तक तत्पश्चात् द्वादशी*
*🎈 नक्षत्र - अनुराधा 27:02:50 तक तक तत्पश्चात् ज्येष्ठा *
*🎈 योग - गण्ड 19:54:42 तक*pm तत्पश्चात् वृद्वि*
*🎈करण - बालव 17:52:11pm तक तत्पश्चात् कौलव*
*🎈राहुकाल -हर जगह का अलग है- 12:44:00am to 02:03 pm तक (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈चन्द्र राशि- वृश्चिक *
*🎈सूर्य राशि- धनु*till 15:05:50
*🎈सूर्य राशि- मकर from 15:05:50*
*🎈सूर्योदय - :07:27:32am*
*🎈सूर्यास्त - 18:00:52pm*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल - उत्तर दिशा में*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:39 ए एम से 06:33 ए एम*(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:17 ए एम, जनवरी 15 से 01:11 ए एम, जनवरी 15*
*🎈 अमृत सिद्धि योग- 07:26 ए एम से 03:03 ए एम, जनवरी 15*
*🎈 व्रत एवं पर्व- ..... एकादशी*
*🎈विशेष माघ मास महात्म्य *
माघ मास प्रयागराज में कल्पवास चल रहा है*
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*🛟चोघडिया, दिन🛟*
नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।
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*🛟चोघडिया, रात्🛟*
*🛟*
🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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√●*🛡️पौष मास में जब सूर्यदेव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो इस दिन मकर संक्राति का त्यौहार मनाया जाता है।
उत्तरायण शुरू होने के साथ ही खरमास समाप्त हो जाता है, इस दिन से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। मकर संक्रांति से ही ऋतु में परिवर्तन होने लगता है, शरद ऋतु क्षीण होने लगती है और बसंत का आगमन शुरू हो जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं। चूंकि शनि मकर व कुंभ राशि के स्वामी है। इसलिए यह पर्व पिता-पुत्र के अनोखे मिलन से भी जुड़ा है।
मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं, सूर्य का उत्तरायण होना बेहद शुभ माना जाता है।
पुराणों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान करने पर सभी कष्टों का निवारण होता है, इसीलिए इस दिन तीर्थ या गंगा में स्नान और दान करने की प्राचीन परंपरा है।
14 जनवरी 2026, बुधवार को सूर्यदेव दोपहर 3 बजकर 05 मिनट के आसपास मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
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★★★★🔴 क्या आपका मंगल आपको भीतर ही भीतर जला रहा है?
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★🔴 क्रोध, टकराव, अचानक नुकसान, कर्ज़, चोट या ब्लड से जुड़ी परेशानियाँ…
अगर ये स्थितियाँ बार-बार आपके जीवन में आ रही हैं, तो इसे संयोग मत समझिए।
★🔴 🔔 अक्सर इसका मूल कारण होता है — कुंडली का असंतुलित मंगल।
मंगल केवल युद्ध और क्रोध नहीं है।
मंगल है साहस, रक्त, ऊर्जा, भूमि, भाई-बहन और निर्णय शक्ति।
जब यही मंगल उग्र हो जाए, तो व्यक्ति भीतर से अशांत रहने लगता है और बाहर परिस्थितियाँ टकराने लगती हैं।
📜 लाल किताब, वास्तु और वैदिक ज्योतिष के शास्त्रसम्मत समन्वय से नीचे दिए गए ये 5 उपाय
सरल हैं, व्यावहारिक हैं और सही ढंग से किए जाएँ तो शीघ्र प्रभाव दिखाने की क्षमता रखते हैं।
★🔴 🔥 1. तांबे का जल उपाय
(लाल किताब + वैदिक ज्योतिष)
मंगलवार को तांबे के लोटे में स्वच्छ जल भरें।
उसमें थोड़ा सा गुड़ डालें।
सूर्योदय के समय यह जल किसी पौधे की जड़ में अर्पित करें।
✨ फल:
➡️ मंगल की उग्र अग्नि शीतल होती है
➡️ क्रोध, झगड़े और दुर्घटनात्मक योग शांत होते हैं
➡️ निर्णय शक्ति संतुलित होती है
🧱 2. दक्षिण दिशा मंगल संतुलन
(वास्तु + लाल किताब)
घर की दक्षिण दिशा में
❌ टूटे लोहे
❌ जंग लगे औजार
❌ बेकार भारी वस्तुएँ
बिल्कुल न रखें।
यहाँ
✔️ लाल रंग का छोटा कपड़ा
या
✔️ मिट्टी का दीपक रखें।
✨ फल:
➡️ भूमि, भवन और प्रॉपर्टी से जुड़े तनाव घटते हैं
➡️ भाई-बहनों से टकराव कम होता है
➡️ साहस सही दिशा में प्रवाहित होता है
🩸 3. रक्तदान या लाल वस्तु दान
(शुद्ध ज्योतिष सिद्धांत)
मंगल रक्त और जीवन-ऊर्जा का कारक है।
मंगलवार को
✔️ रक्तदान करें
या यदि असमर्थ हों तो
✔️ लाल मसूर
✔️ लाल वस्त्र
दान करें।
✨ फल:
➡️ मंगल का नकारात्मक दबाव कर्म में परिवर्तित होता है
➡️ अचानक नुकसान के योग कमजोर होते हैं
➡️ शरीर की ऊर्जा सुधरती है
🌿 4. हनुमान तत्व सक्रिय उपाय
(लाल किताब आधारित)
मंगलवार को
हनुमान जी को
✔️ सिंदूर
✔️ चमेली का तेल
अर्पित करें।
⚠️ ध्यान रखें:
सिंदूर घर में न रखें।
वहीं अर्पण करके लौट आएँ।
✨ फल:
➡️ मंगल का उग्र दोष नियंत्रित होता है
➡️ अदृश्य रक्षा कवच बनता है
➡️ भय और आंतरिक अस्थिरता घटती है
🧘 5. शयन कक्ष सुधार
(वास्तु + मनोविज्ञान)
सोते समय सिर
✔️ दक्षिण
या
✔️ पूर्व
की ओर रखें।
❌ बिस्तर के नीचे
लोहे की वस्तु
या जूते न रखें।
✨ फल:
➡️ अनावश्यक चिड़चिड़ापन कम होता है
➡️ दाम्पत्य तनाव घटता है
➡️ मानसिक स्थिरता बढ़ती है
📌 एक महत्वपूर्ण शास्त्रीय सत्य
मंगल को दबाना नहीं,
मंगल को संतुलित करना ही शास्त्रों का उद्देश्य है।
हर कुंडली अलग होती है।
इसलिए उपाय का प्रभाव भी
👉 मंगल की स्थिति, दृष्टि और योग पर निर्भर करता है।
🌟 लेकिन लाभ सब को होगा।
📩 निजी मार्गदर्शन के लिए
यदि आप जानना चाहते हैं कि
आपकी कुंडली में मंगल कहाँ और क्यों समस्या दे रहा है,
तो शास्त्रसम्मत व्यक्तिगत मार्गदर्शन के लिए
👉 इनबॉक्स में संदेश भेजें।
🔱 समाधान होगा, पर सही दिशा में।
. 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱




