*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक - 31 जनवरी 2026*
*🎈 दिन- शनिवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शरद*
*🎈 मास - माघ मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈तिथि- त्रयोदशी 08:25:03
तिथि चतुर्दशी 29:52:07*(क्षय ) तक* तत्पश्चात पूर्णिमा 27:38:16*
*🎈 नक्षत्र -पुनर्वसु 25:33:13* तकतत्पश्चात्
पुष्य *👇
*🎈 योग -विश्कुम्भ 13:32:27 तकतत्पश्चात् विश्कुम्भ*
*🎈करण - तैतुल 08:25:03 तकतक तत्पश्चात् गर *
*🎈राहुकाल -10:05 ए एम से 11:27 ए एम (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈चन्द्र राशि-मिथुन*08:01 पी एम तक तत्पश्चात् कर्क*
*🎈सूर्य राशि- मकर *
*🎈 सूर्योदय-07:22am*
*🎈सूर्यास्त - 06:16 pm*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:37 ए एम से 06:29 ए एम*(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:27 पी एम से 01:10 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:22 ए एम, फरवरी 01 से 01:15 ए एम, फरवरी 01*
*🎈रवि योग- 07:22 ए एम से 01:34 ए एम, फरवरी 01*
*🎈 अमृत काल 11:21 पी एम से 12:49 ए एम, फरवरी 01*
*🎈 व्रत एवं पर्व- ... द्वादशी प्रदोषव्रत*
*🎈विशेष माघ मास महात्म्य *
माघ मास प्रयागराज में कल्पवास चल रहा है*
🙏 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🙏
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*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।
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*🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
🌷 ✍️💥गुप्त नवरात्रि माघ💥
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⏳🌺#वास्तु_शास्त्र_में_16_वास्तु_जोन (#16_Zones) का सिद्धांत वास्तु पुरुष मंडल पर आधारित है, जो प्राचीन क विज्ञान का एक प्रमुख भाग है। यह मंडल घर या भवन को 81 पदों (9×9 ग्रिड) में विभाजित करता है, जिसमें केंद्र में #ब्रह्मस्थान (Brahmasthan) स्थित होता है, जहाँ ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता) विराजमान हैं। चार मुख्य दिशाओं (उत्तर, पूर्व, दक्षिण, पश्चिम) और चार कोणीय दिशाओं (ईशान, आग्नेय, नैऋत्य, वायव्य) को आगे 22.5° के अंतराल पर विभाजित करने से कुल 16 जोन बनते हैं।
यह विभाजन सूर्य की गति, पृथ्वी के #चुंबकीय_क्षेत्र, #पंचमहाभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) और खगोलीय गणना पर आधारित है। सूर्य सिद्धांत (जो खगोलशास्त्र का प्रमुख ग्रंथ है, जिसमें सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना गया है) से सूर्य की किरणों और ऊर्जा प्रवाह का समन्वय होता है, जबकि #वास्तु_पुरुष_मंडल का वर्णन मत्स्य पुराण, बृहत्संहिता (वराहमिहिर), विश्वकर्मा प्रकाश, मयमत, मानसार, समरांगण सूत्रधार और अपराजित पृच्छा जैसे प्रमाणित ग्रंथों में मिलता है।
#बृहत्संहिता में वर्णित है कि #वास्तु_पुरुष का सिर ईशान (उत्तर-पूर्व) में और पैर नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) में हैं, जो वैदिक खगोल और भू-चुंबकत्व का समन्वय दर्शाता है। ये 16 जोन जीवन के विभिन्न पहलुओं (धन, स्वास्थ्य, ज्ञान, संबंध, सफलता आदि) को प्रभावित करते हैं। प्रत्येक जोन में एक प्रमुख देवता, तत्व और ऊर्जा होती है।
#ब्रह्मस्थान (केंद्र – Brahmasthan)
यह घर का हृदय है, जहाँ ब्रह्मा (या ब्रह्म ऊर्जा) स्थित हैं। तत्व: आकाश (Space)। प्रभाव: समस्त ऊर्जा का केंद्र, शांति, संतुलन और सृष्टि शक्ति। यहाँ कुछ नहीं होना चाहिए – कोई भारी फर्नीचर, स्तंभ, बीम, सीढ़ी, शौचालय, रसोई, भंडारण या भारी निर्माण नहीं। इसे खुला, स्वच्छ और हल्का रखें। हल्की पूजा या #क्रिस्टल_लोटस/तांबे का यंत्र रख सकते हैं। भारी वस्तु या निर्माण से ऊर्जा अवरुद्ध हो जाती है, जिससे स्वास्थ्य, मानसिक शांति और समृद्धि प्रभावित होती है।
#16_वास्तु_जोन_का_विस्तृत_विवेचन (प्रमुख देवता, तत्व, प्रभाव, क्या रखें और क्या नहीं)
ये जोन वास्तु पुरुष मंडल के 32 बाहरी देवताओं से निकलते हैं, जो जोड़कर 16 ऊर्जा क्षेत्र बनाते हैं। प्रत्येक जोन 22.5° का होता है।
#ईशान (North-East – NE) देवता: ईशान या शिव (Ishana) / अदिति (देवताओं की माता)। तत्व: जल + आकाश। प्रभाव: आध्यात्मिकता, ज्ञान, स्वास्थ्य, सुरक्षा, सकारात्मक ऊर्जा। क्या होना चाहिए: पूजा घर, ध्यान कक्ष, जल स्रोत (फाउंटेन), खुला स्थान। क्या नहीं: शौचालय, रसोई, भारी फर्नीचर। दोष: स्वास्थ्य और ज्ञान में कमी।
#उत्तर_ईशान (North of NE – NNE) देवता: अदिति या संबंधित ऊर्जा। तत्व: जल + पृथ्वी। प्रभाव: स्वास्थ्य, रोग प्रतिरोधक क्षमता, स्थिरता। क्या होना चाहिए: वाटर प्यूरीफायर, हल्का वेलनेस कोना। क्या नहीं: अग्नि संबंधी वस्तु।
#उत्तर (North – N) देवता: कुबेर। तत्व: जल। प्रभाव: धन, अवसर, आय। क्या होना चाहिए: कैश लॉकर, सेल्स डेस्क, जल तत्व (नीला रंग)। क्या नहीं: अग्नि या भारी निर्माण।
#उत्तर_वायव्य (North of NW – NNW) देवता: संबंधित वायु-जल ऊर्जा। तत्व: वायु + जल। प्रभाव: आकर्षण, अंतरंगता, संबंध। क्या होना चाहिए: गेस्ट लाउंज, सॉफ्ट सीटिंग। क्या नहीं: भारी वस्तु।
#वायव्य (North-West – NW) देवता: वायु देव। तत्व: वायु। प्रभाव: सहायता, यात्रा, सामाजिक संबंध। क्या होना चाहिए: अतिथि कक्ष, वेंटिलेशन। क्या नहीं: रसोई या अग्नि।
#पश्चिम_वायव्य (West of NW) देवता: वायु संबंधित। प्रभाव: रचनात्मकता, समर्थन। क्या होना चाहिए: स्टडी या क्रिएटिव स्पेस।
#पश्चिम (West – W) देवता: वरुण। तत्व: जल। प्रभाव: प्रसिद्धि, आत्मविश्वास, अध्ययन। क्या होना चाहिए: स्टडी रूम, बच्चों का कमरा। क्या नहीं: शौचालय।
#दक्षिण_पश्चिम (South-West – SW) देवता: पितृ या नैऋत्य। तत्व: पृथ्वी। प्रभाव: स्थिरता, संबंध, माता-पिता स्वास्थ्य। क्या होना चाहिए: मास्टर बेडरूम, हैवी स्ट्रक्चर। क्या नहीं: खुला स्थान या शौचालय।
#दक्षिण_नैऋत्य (South of SW) प्रभाव: सुरक्षा, स्थिरता। क्या होना चाहिए: हैवी स्टोरेज।
#दक्षिण (South – S) देवता: यम। तत्व: अग्नि प्रभावित। प्रभाव: स्वास्थ्य, धैर्य, प्रसिद्धि। क्या होना चाहिए: हैवी वॉल, मास्टर बेडरूम। क्या नहीं: जल तत्व।
#दक्षिण_आग्नेय (South of SE) देवता: अग्नि संबंधित। प्रभाव: परिवर्तन, ऊर्जा।
#आग्नेय (South-East – SE) देवता: अग्नि देव। तत्व: अग्नि। प्रभाव: धन, स्वास्थ्य, रसोई ऊर्जा। क्या होना चाहिए: रसोई, इलेक्ट्रिकल उपकरण। क्या नहीं: शयन कक्ष या जल। दोष: स्वास्थ्य और धन हानि।
#पूर्व_आग्नेय (East of SE) प्रभाव: परिवर्तन, अग्नि।
#पूर्व (East – E) देवता: इंद्र या सूर्य। तत्व: अग्नि + आकाश। प्रभाव: प्रगति, प्रसिद्धि, निर्णय शक्ति। क्या होना चाहिए: मुख्य द्वार, खुला स्थान। क्या नहीं: शौचालय।
#पूर्व_ईशान (East of NE) देवता: इंद्र या संबंधित। प्रभाव: प्रगति, ज्ञान।
उत्तर-पूर्व (NE का मुख्य) – पहले वर्णित।
ये 16 जोन पंचतत्व के संतुलन से जुड़े हैं। विश्वकर्मा प्रकाश और मयमत में दिशाओं के देवताओं और तत्वों का वर्णन है, जो सूर्य की किरणों (#सूर्य_सिद्धांत से) और चुंबकीय ऊर्जा से प्रभावित होते हैं। यदि जोन में विपरीत तत्व रखा जाए (जैसे अग्नि जोन में जल), तो दोष उत्पन्न होता है, जो स्वास्थ्य, धन और संबंधों पर प्रभाव डालता है।
वास्तु पुरुष मंडल वैदिक और वैज्ञानिक समन्वय है – सूर्य की ऊर्जा (खगोल), पृथ्वी का चुंबकत्व (भूगोल) और मानव शरीर की संरचना (जीव विज्ञान) का। इसे अपनाने से जीवन में संतुलन आता है।
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. 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध वि12:19 ए एम, जनवरी 19 से 01:12 ए एम, जनवरी 19शेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱




