*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक - 08 फरवरी 2026*
*🎈 दिन- रविवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शरद*
*🎈 मास - फाल्गुन मास*
*🎈 पक्ष - कृष्ण पक्ष*
*🎈तिथि- सप्तमी 29:00:33*तक* तत्पश्चात अष्टमी*
*🎈 नक्षत्र - स्वाति 29:01:45* तक तत्पश्चात् विशाखा👇
*🎈 योग - शूल 23:39:26* तक तत्पश्चात् गण्ड*
*🎈करण - विष्टि भद्र 15:53:56* तक तत्पश्चात् बव*
*🎈राहुकाल -04:59 पी एम से 06:22 पी एम(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈चन्द्र राशि- तुला*
*🎈सूर्य राशि- मकर *
*🎈 सूर्योदय-07:18:17am*
*🎈सूर्यास्त - 18:19:45 pm*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:34 ए एम से 06:25 ए एम(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:27 पी एम से 01:12 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:23 ए एम, फरवरी 09 से 01:15 ए एम, फरवरी 09*
*🎈 अमृत काल -07:18 पी एम से 09:04 पी एम*
*🎈 रवि योग 07:17 ए एम से 05:02 ए एम, फरवरी 09*
*🎈 व्रत एवं पर्व- ... सप्तमी*
*🎈विशेष फाल्गुन मास महात्म्य *
🙏 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🙏
🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।
*🛟
*🛟चोघडिया, रात्🛟*
*🛟
★√*★√*★√*★√*★√*★√*★√*
🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🌷❤️💐🌼🪔❤️💐👉 ✍️ ★√*🛡️🌹
🌿✨ #स्वर्णाकर्षण भैरव: गरीबी के अंधेरे को चीरकर स्वर्णिम वैभव की वर्षा करने वाले परम दयालु
जब जीवन की हर सांस कर्ज के बोझ तले दबी हो, जब मेहनत के बावजूद हाथ खाली रह जाएँ, जब लक्ष्मी जी की चंचलता से मन टूट जाए और हर द्वार पर निराशा खड़ी हो, तब एकमात्र नाम जो हृदय में आशा की ज्योति जला देता है।
वह है **स्वर्णाकर्षण भैरव**।
भगवान शिव के सात्विक, धनदायक स्वरूप, जो न केवल धन देते हैं, बल्कि जन्मों की दरिद्रता को जड़ से उखाड़ फेंकते हैं।
रुद्र यामल तंत्र की गहन गाथा सुनिए—एक समय देवासुर संग्राम में सौ वर्षों की लड़ाई से कुबेर जी का खजाना खाली हो गया, माता लक्ष्मी भी धन-हीन हो गईं। सभी देवता महादेव की शरण में पहुँचे। शिवजी ने नंदी जी के माध्यम से स्वर्णाकर्षण भैरव की महिमा बताई। बद्रीनाथ के निकट ऊँचे पर्वतों पर कठोर तप कर लक्ष्मी और कुबेर ने इस साधना को सिद्ध किया। भैरव प्रसन्न हुए—अनंत ब्रह्मांड से स्वर्ण की धारा बहाई, देवताओं के भंडार भर दिए, और वैभव लौट आया। यही महिमा आज भी सच्चे भक्तों के लिए जीवंत है। जो भैरव के चरण पकड़ लेता है, उसे कभी गरीबी नहीं सताती।
यह साधना केवल धन की नहीं, यह आत्मा की मुक्ति की है। स्वर्णाकर्षण भैरव पीतवर्ण के, चतुर्भुज, त्रिनेत्र, स्वर्ण कलश धारण करने वाले हैं—जिनका स्वरूप स्वयं अक्षय धन का प्रतीक है:
> पीतवर्णं चतुर्बाहुं त्रिनेत्रं पीतवाससम्।
> अक्षयं स्वर्णमाणिक्य तड़ित्-पूरितपात्रकम्॥
उनका ध्यान मात्र करने से मन में विश्वास जागता है—कि दरिद्रता अब भाग रही है, और स्वर्ण की वर्षा शुरू हो गई है।
**इस साधना की शक्ति क्या है?**
- **अष्ट-दारिद्र्य का नाश** — जन्मों की गरीबी, कर्ज का बोझ, रुका हुआ धन—सब समाप्त।
- **अचानक धन प्राप्ति** — अप्रत्याशित स्रोतों से धन आना, व्यापार में वृद्धि, नौकरी में उन्नति।
- **लक्ष्मी की स्थिरता** — लक्ष्मी चंचल हैं, लेकिन भैरव की कृपा से वे स्थिर हो जाती हैं।
- **आर्थिक बाधाओं का अंत** — जो अन्य साधनाएँ फल नहीं देतीं, यहाँ चमत्कार होता है।
- **मानसिक शांति और आत्मबल** — धन के साथ-साथ मन की शांति, भय का नाश।
शास्त्र कहते हैं—यह साधना इतनी शक्तिशाली है कि कुबेर और लक्ष्मी को भी धन देने वाले भैरव मनुष्य को धनवान बनाने में क्या संकोच करेंगे? लेकिन सफलता की कुंजी है **पूर्ण श्रद्धा, निःस्वार्थ भक्ति और गुरु दीक्षा**। बिना श्रद्धा के जप शब्दों का ढेर है, लेकिन जब हृदय से पुकार उठे—"हे स्वर्णाकर्षण भैरव! मेरी दरिद्रता दूर करो, विपुल धन दो"—तब भैरव स्वयं साधक के जीवन में अवतरित हो जाते हैं।
**स्तोत्र की अमृत वर्षा**
रोज़ स्वर्णाकर्षण भैरव स्तोत्र का पाठ करें, जो मार्कण्डेय जी को नंदी जी ने सुनाया था। कुछ पंक्तियाँ सुनिए, जो हृदय को स्पर्श करती हैं:
> ॐ नमस्ते भैरवेशाय ब्रह्मविष्णुशिवात्मने।
> त्रैलोक्यवन्द्याय वरदाय परात्मने॥
> नमः स्वर्णाभ-पाराय स्वर्ण-काञ्ची-सुशोभिने।
> नमस्ते स्वर्ण-जंघाय भक्त-काम-दुघात्मने॥
> नमो लोक-त्रेशाय स्वानन्द-निहिताय ते।
> नमः श्रीबीज-रुपाय सर्व-काम-प्रदायिने॥
यह स्तोत्र पढ़ते ही मन में भक्ति की लहरें उठती हैं, और भैरव की कृपा बहने लगती है। मंत्र जप के साथ स्तोत्र पाठ से प्रभाव दोगुना हो जाता है।
**भक्त का संकल्प**
हे साधक! आज का समय कठिन है—महँगाई, कर्ज, संघर्ष। लेकिन भैरव कहते हैं—मैं हूँ न! उठो, शुद्ध होकर उनके चरणों में समर्पित हो जाओ। पीले वस्त्र, उत्तराभिमुख, रात्रि में जप, गुड़ की रोटी का भोग, कुत्ते को प्रसाद—ये सब महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सबसे ऊपर है **भक्ति का अग्निकुंड**।
जो भैरव पर पूर्ण विश्वास करता है, वह कभी हारा नहीं। उनकी कृपा से जीवन स्वर्णिम हो जाता है—धन आता है, शांति मिलती है, और आत्मा मुक्त हो जाती है।
**जय स्वर्णाकर्षण भैरव!**
**जय भैरव नाथ!**
**ॐ ह्रीं स्वर्णाकर्षण भैरवाय नमः**
श्रद्धा से पुकारो, भक्ति से जपो—और देखो कैसे गरीबी भागती है, और स्वर्ण की अनंत धारा तुम्हारे जीवन में बहने लगती है।
बिना गुरु साधना ना करें। यहां हमारे लिखने का उद्देश्य आपको भक्ति मार्ग से जोड़ना है।
स्वामी त्रिभुवन दास 🖍️ 099908 69098
हर हर महादेव! जय भैरव!
🙏🧡
〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰
. 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
♨️ ⚜️ 🕉🌞 🌞🕉 ⚜🚩
अगर आपको हमारा पंचांग नियमित चाहिए तो आप मुझे फॉलो करे
https://whatsapp.com/channel/0029Va65aSaKrWR4DbSSCq0r
♨️ ⚜️ 🕉🌞 🌞🕉 ⚜🚩
🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध वि12:19 ए एम, जनवरी 19 से 01:12 ए एम, जनवरी 19शेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱🔥🔱




