*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक - 17 फरवरी 2026*
*🎈 दिन- मंगलवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शरद*
*🎈 मास - फाल्गुन मास*
*🎈 पक्ष - कृष्ण पक्ष*
*🎈तिथि- अमावस्या 17:30:08*। तक तत्पश्चात् प्रतिपदा*
*🎈 नक्षत्र - धनिष्ठा 21:15:11* तक तत्पश्चात् शतभिष👇
*🎈 योग - परिघ 24:27:44* तक तत्पश्चात् शिव*
*🎈करण - नाग 17:30:08* तक तत्पश्चात् किन्स्तुघ्न*
*🎈राहुकाल -03:39 pm से 05: 93pm(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈चन्द्र राशि - मकरtill 09:04:46*
*🎈चन्द्र राशि- कुम्भ from 09:04:46*
*🎈सूर्य राशि- कुम्भ *
*🎈 सूर्योदय-07:11:33am*
*🎈सूर्यास्त - 18:26:48* pm*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- उत्तर दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:29 ए एम से 06:20 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त-12:27 पी एम से 01:12 पी एम*
*🎈 अमृत काल-01:03 पी एम से 02:47 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:23 ए एम, फरवरी 18से 01:14 ए एम, फरवरी 18*
*🎈 व्रत एवं पर्व- ...अमावस्या व्रत *
*🎈विशेष फाल्गुन मास महात्म्य *
🙏 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🙏
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*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
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*🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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🌿✨ #*🕉️ #🌺 श्री साम्ब शिवाय नमः 🌺।। त्रिदेवों का एकत्व।।
अपने पिता ब्रह्माजीसे प्रजोत्पादनकी आज्ञा प्राप्तकर महर्षि अत्रि अपनी धर्मपत्नी, सतीशिरोमणि देवी अनसूयाको साथ लेकर कुलाद्रि ऋक्षपर्वतपर तपस्याके निमित्त गये। वहाँ जाकर उन्होंने सौ वर्षतक एक पैरपर खड़े रहकर, केवल वायुभक्षणकर, मनोनिग्रहके लिये प्राणायामका साधन किया और यह संकल्प किया कि जो कोई इस संसारके स्वामी हैं, वे कृपाकर मुझे अपने ही समान पुत्ररत्न प्रदान करें, मैं उन्हींकी शरण हूँ।
उनकी घोर तपस्याके प्रभावसे ऋषिके मस्तकमेंसे एक अग्नि प्रादुर्भूत हुई जो प्राणायामसे वृद्धिको प्राप्तकर समस्त त्रिलोकीको सन्तप्त करने लगी। यह देखकर जगत्के तीनों अधीश्वर - ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश्वर ऋषिके आश्रममें एक साथ पहुँचे। उनके प्रकट होते ही ऋषिका अन्तःकरण उद्भासित हो गया और ज्यों ही उन्होंने आँखें खोलीं तो क्या देखते हैं कि तीनों देवता अपने-अपने वाहनों-हंस, गरुड़ एवं वृषभके साथ अपने-अपने चिह्नोंको धारण किये हुए ऋषिके सामने उपस्थित हैं। ऋषि तुरंत भूमिपर लोट गये और दण्डवत्-प्रणाम करके उन्होंने तीनोंकी विधिवत् पूजा की। किंतु वह अधिक देरतक उनके प्रकाशको न सह सके, अतः नेत्र मूंदकर तीनोंका ध्यान करते हुए हर्ष-गद्गद एवं पुलकित होकर, हाथ जोड़ स्तुति करने लगे और बोले- मैंने तो सन्तानकी कामनासे आपलोगों में से केवल एकका ही स्मरण किया था, अहोभाग्य मेरे कि आप तीनोंने ही मुझ दीनपर अनुग्रह किया।
इसपर तीनों देवता एक साथ बोल उठे -'मुनिवर्य ! तुम्हारे सत्-संकल्पका ही यह फल है कि हम तीनोंको तुम्हारे पास आना पड़ा। तुम जिस तत्त्वका ध्यान करते थे, वह हम तीनों ही हैं। 'यद्वै ध्यायति ते वयम्' अर्थात् स्वरूपसे हम तीन हैं, तत्त्वतः एक ही हैं।' इतना कहकर और मुनिको इच्छित वर देकर तीनों देव अन्तर्धान हो गये।
समय पाकर अनसूयाजीके ब्रह्माजीके अंशसे चन्द्रमा, विष्णुके अंशसे दत्तात्रेय और महादेवके अंशसे सुलभकोप महर्षि दुर्वासा उत्पन्न हुए। इस इतिहाससे त्रिदेवोंकी अभिन्नता सिद्ध होती है । [श्रीमद्भागवत]
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. 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध वि12:19 ए एम, जनवरी 19 से 01:12 ए एम, जनवरी 19शेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
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