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पञ्चाङ्ग 6 मई 2026

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*



*🎈दिनांक 6 मई 2026*
*🎈 वार-  बुधवार *
*🎈 मास -  ज्येष्ठ मास*
*🎈 पक्ष - कृष्ण पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर    पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि    -    चतुर्थी    07:50:46 तत्पश्चात्*पंचमी*
*🎈 नक्षत्र - मूल    15:52:54*
 तक  तत्पश्चात्     पूर्वाषाढा* 
*🎈योग    -         शिव    24:15:35* तक तत्पश्चात्     साध्य*
*🎈करण    -         सिद्ध    25:11:11* तक तत्पश्चात् बालव*
*🎈राहुकाल -03:51pm से 05:30 pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि-    धनु*
*🎈सूर्य राशि     - मेष*
*🎈 सूर्योदय -   05:54:03*
*🎈 सूर्यास्त -        19:09:45* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- उत्तर दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:27 ए एम से 05:10 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- कोई नहीं है.।*
*🎈अमृत काल-    08:42 ए एम से 10:30 ए एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:10 ए एम, मई 07 से 12:53 ए एम, मई 07*
 *🎈 व्रत एवं पर्व विवरण चतुर्थी व्रत आज होगा (मासिक व्रत )
*🎈विशेष - विशेष - चतुर्थी के पवित्र अवसर पर सात्विकता बनाए रखने के लिए मांसाहार, शराब, प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक भोजन का सेवन न करें। इस दिन शुद्धता का विशेष महत्व है, इसलिए घर में बना सादा और शुद्ध भोजन ही करें। इसके साथ ही, अंधेरे में न रहने और क्रोध/कलह से बचने की भी सलाह दी जाती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- जेष्ठ मास महात्म्य *
 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा    गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी    💥सेनाधिपति    चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💥मन्त्री    मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी    धान्याधिपति    बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💥सस्याधिपति    गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी    मेघाधिपति    चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💥धनाधिपति    गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी    नीरसाधिपति    गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
💥रसाधिपति    शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी    फलाधिपति    चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
kundli


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        🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
         *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day




           🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
         💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺

👣🕉️ 🌹🌹 🌹🌹।। 🔶🔶🌹🌹 🌹
  

🔱🌹बलिवैश्वदेव अनुष्ठान के गोपनीय लाभ....... 🌹 



१. अन्न की सूक्ष्म शुद्धि (ऊर्जा रूपांतरण)

जब अन्न पहले अर्पित किया जाता है, तो वह केवल भौतिक भोजन नहीं रहता—

वह संस्कारित होकर “प्रसाद” बन जाता है।
इससे शरीर के साथ-साथ मन और बुद्धि पर भी सात्त्विक प्रभाव पड़ता है।

२. पंचऋणों का संतुलन

मानव पर पाँच ऋण माने गए हैं—देव, ऋषि, पितृ, भूत, मनुष्य। बलिवैश्वदेव इन ऋणों को सूक्ष्म रूप से संतुलित करता है, जिससे जीवन में अकारण बाधाएँ, रुकावटें और अशांति कम होती हैं।

३. अदृश्य शक्तियों का शमन

ग्रंथों में “भूतयज्ञ” का जो भाग है, वह इसी में आता है।
नियमित अर्पण से वातावरण में उपस्थित सूक्ष्म जीव, नकारात्मक शक्तियाँ या अशांत ऊर्जा शांत और संतुष्ट होती हैं, जिससे घर में अदृश्य विघ्न घटते हैं।

४. ग्रह-दोषों पर सूक्ष्म प्रभाव

प्रत्यक्ष रूप से यह कोई ज्योतिषीय उपाय नहीं है,
परंतु नियमित करने से व्यक्ति का आभामंडल संतुलित होता है, जिससे ग्रहों के दुष्प्रभाव की तीव्रता कम अनुभव होती है।

५. अन्न-सिद्धि और धन-संवर्धन

एक गहरा सिद्धांत है—
“जो अन्न देता है, उसके घर अन्न की कमी नहीं होती।”
नियमित बलिवैश्वदेव से:

* घर में अन्न की निरंतरता रहती है
* आर्थिक प्रवाह स्थिर होता है
* अचानक आने वाली कमी या संकट कम होते हैं

६. चित्त-शुद्धि और अहंकार का क्षय

भोजन से पहले अर्पण करना एक साधना है—
यह “मेरा” भाव को घटाकर समर्पण का भाव बढ़ाता है।
इससे धीरे-धीरे:

* क्रोध कम होता है
* लोभ नियंत्रित होता है
* मन में करुणा और संतुलन आता है

७. सूक्ष्म सुरक्षा कवच

नियमित बलिवैश्वदेव करने वाले घर के चारों ओर एक प्रकार का सकारात्मक ऊर्जा कवच बनता है, जो:

* नकारात्मक दृष्टि
* सूक्ष्म बाधाएँ
* अनिष्ट शक्तियों से रक्षा करता है।

८. साधना में तीव्रता

यदि कोई व्यक्ति जप, ध्यान, या तांत्रिक साधना करता है,
तो बलिवैश्वदेव करने से उसका अन्न शुद्ध होता है,
जिससे उसकी साधना में गति और स्थिरता दोनों बढ़ती हैं।

९. पितृ प्रसन्नता

अर्पण का एक भाग पितरों के लिए भी होता है।
नियमित रूप से यह करने पर:

* पितृदोष के प्रभाव कम होते हैं
* स्वप्न में पितरों का आशीर्वाद मिल सकता है
* वंश में शांति और उन्नति होती है

१०. धर्म-चक्र की स्थापना

यह अनुष्ठान व्यक्ति को प्रतिदिन यह स्मरण कराता है कि
वह अकेला उपभोक्ता नहीं है, बल्कि सृष्टि का एक अंग है।
इससे धीरे-धीरे जीवन में धर्म (संतुलन और कर्तव्य) स्थापित होता है।
         🙇 #जयश्रीसीताराम 🙇
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹।      💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ  🇪🇬🔱🔥🔱
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