*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक 27 अप्रैल 2026*
*🎈 वार- सोमवार *
*🎈 मास - वैशाख मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि -एकादशी 18:15:18*तत्पश्चात्* द्वादशी*
*🎈 नक्षत्र - पूर्व फाल्गुनी 21:17:44* तक तत्पश्चात् उत्तर फाल्गुनी *
*🎈योग - ध्रुव 21:34:40* तक तत्पश्चात् व्याघात*
*🎈करण - वणिज 06:07:15 तक तत्पश्चात् विष्टि भद्र*
*🎈राहुकाल - 7:39am से 09:17 am (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि- सिंह*till 27:34:47*
*🎈चन्द्र राशि- कन्या from 27:34:47
*🎈सूर्य राशि - *मेष*
*🎈 सूर्योदय - 06:01:18*
*🎈 सूर्यास्त - 19:04:39*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:33 ए एम से 05:17 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:07 पी एम से 12:59 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:11 ए एम, अप्रैल 27 से 12:54 ए एम, अप्रैल 27*
*🎈 अमृत काल- 06:01 पी एम से 07:38 पी एम*
*🎈रवि योग- 06:01 ए एम से 08:27 पी एम*
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण- एकादशी व्रत आज होगा (मासिक व्रत )
*🎈विशेष - विशेष - एकादशी के पवित्र अवसर पर सात्विकता बनाए रखने के लिए मांसाहार, शराब, प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक भोजन का सेवन न करें। इस दिन शुद्धता का विशेष महत्व है, इसलिए घर में बना सादा और शुद्ध भोजन ही करें। इसके साथ ही, अंधेरे में न रहने और क्रोध/कलह से बचने की भी सलाह दी जाती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- वैशाख मास महात्म्य *
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💥सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💥मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💥सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💥धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
💥रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
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🔱#चलिए जानते है लगन के अनुसार कौन सा रत्न धारण करने से कौन सी #बीमारी ठीक या #बीमारी नहीं होते हैं।
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💢#मेषलग्न: आपकी लग्न का स्वामी मंगल है। आपको थकान और सिर दर्द शीघ्र परेशान करता है तथा पाचन तंत्र विकार और नेत्र रोगों से ग्रसित रहना पड़ता है। सर्वप्रथम आपको सदैव स्वस्थ बने रहने के लिए मंगल रत्न मूंगा जीवन भर के लिए धारण करना चाहिए। मूंगा रक्त विकार दूर करता है। रक्तचाप को नियंत्रित रखने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अतिरिक्त मूंगे के साथ मोती एवं पुखराज धारण करें। मोती आपको मानसिक तनाव में और पुखराज आपको लिवर समस्याओं से बचाएगा।
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💢#वृषलग्न: आपका लग्नेश शुक्र है। आपको गले, नाक और छाती के रोग हो सकते हैं तथा भोजन में अशुद्धता के कारण उल्टी, दस्त और पेट में जलन की समस्या आपको सामान्य रुप से हो सकती है। साथ ही आपके उच्च अथवा निम्न रक्तचाप से भी पीड़ित होने की संभावनाएं बनी रहती हैं। अतः आप हीरा रत्न धारण कर अपने स्वास्थ्य को सकारात्मक बनाए रखें। आप हीरे के साथ पन्ना भी पहनें। पन्ना आपको त्वचा रोग व रक्तचाप से मुक्ति और स्वस्थ बनाए रखेगा।
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💢#मिथुनलग्न: बुध आपकी लग्न के स्वामी हैं। आपको गैस, चर्म रोग और अपच की शिकायत प्रायः होगी। इसके अलावा जीवन में पक्षाघात, मिर्गी, श्वांसनली और अस्थमा रोगों से बचने का प्रयास करना चाहिए। बुध रत्न पन्ना धारण करना आपके स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखेगा। स्वास्थ्य सुख के लिए पन्ना रत्न के साथ हीरा व नीलम भी धारण करें । हीरा रत्न आपको मधुमेह और नीलम आपको गठिया रोगों से बचाएगा।
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💢#कर्कलग्न: आपके लग्न का स्वामी चंद्र है। आपको खांसी, जुकाम, छाती में दर्द, ज्वर रोग भी समय-समय पर कष्ट देते रहते हंै। आपका पाचन तंत्र शीघ्र खराब हो जाता है। आप आजीवन मोती रत्न धारण करें, साथ-साथ आप मूंगा और पुखराज भी धारण करें। यह हृदय, दिमागी व रक्त विकारों को दूर रखने में सहयोग करेगा। इसके अतिरिक्त पुराना दमा, किडनी, हैजा आदि रोग और स्त्रियों को माहवारी में भी कष्ट से राहत मिलती है।
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💢#सिंहलग्न: आपके लग्न का स्वामी सूर्य है। आपको रक्त विकार, रक्त स्राव और रक्त की कमी जैसे रोग हो सकते हंै। इसके अतिरिक्त आपको पीठ, कमर एवं जोड़ों के दर्द भी शीघ्र अपने प्रभाव में ले सकते हैं अतः सूर्य रत्न माणिक्य धारण करना आपके स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद रहेगा। इस रत्न की शुभता से आपका अस्थितंत्र मजबूत होगा और ह्रदय गति पहले से अच्छी होगी।
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💢#कन्यालग्न: आपके लग्न का स्वामी बुध है। आपको उदर रोग, छोटी और बड़ी आंत, कमर दर्द और अनिद्रा जैसे रोगों के कारण स्वास्थ्य विकारों का सामना करना पड़ता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आप पन्ना धारण करें। इसे धारण करने से मानसिक रोग आपको अधिक कष्ट नहीं दे पायेंगे। इसके साथ-साथ नीलम रत्न आपको जोड़ों के दर्द में राहत देगा।
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💢#तुलालग्न: आपके लग्न का स्वामी शुक्र है। जनेन्द्रियों, कमर, नाभि से संबंधित रोगों के कारण आपका स्वास्थ्य कष्टमय हो सकता है। लग्नेश शुक्र का हीरा रत्न धारण करने से आपके स्वास्थ्य सुख में वृद्धि होगी। यह रत्न #थायराॅइड को भी शीघ्र दूर करने में सहयोग करेगा। आपके लिए नीलम एवं पन्ना रत्न धारण करना भी उत्तम रहेगा। पन्ना रत्न आपको एलर्जी और नीलम रत्न आपके गठिया रोगों में कमी करेगा।
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💢#वृश्चिकलग्न: आपके लग्न का स्वामी मंगल है। आपको रक्त चाप, सिर दर्द व मानसिक अशांति हो सकती है। स्वयं को स्वस्थ बनाए रखने के लिए आप मूंगा धारण करें। यह रत्न आपके रक्त एवं हृदय विकारों को दूर करेगा। साथ ही आप पुखराज और मोती भी धारण करें। पुखराज आपको मांसपेशियों से संबंधित और मोती आपके मानसिक व नेत्र रोगों का निवारण करेगा।
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💢#धनुलग्न: आपके लग्न का स्वामी गुरु है। आपको कूल्हे, जांघ और मांसपेशियों में खिंचाव जैसी परेशानियां बार-बार हो सकती हैं। साथ ही मोटापा भी आपको रोग्रग्रस्त कर सकता है। इसलिए आप पुखराज रत्न धारण करें। पुखराज की शुभता से आपको लिवर, जिगर व पेट के रोगों से राहत मिलेगी। इसके साथ माणिक्य भी धारण करें। माणिक्य आपको रक्त चाप व हृदय रोग से बचाएगा।
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💢#मकरलग्न: आपके लग्न का स्वामी शनि है। आपको गठिया, रक्त विकार, चर्म रोगों से पीड़ित होने के योग बनते हंै। शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए आप शनि रत्न नीलम धारण करें। इसके साथ ही नीलम रत्न आपको दिमागी रोगों और निराशा से भी मुक्त करेगा। इसके अतिरिक्त हीरा एवं पन्ना रत्न भी धारण करें। हीरा आपको जननेन्द्रिय संबंधी रोग और पन्ना आपको गुर्दा रोग व एलर्जी में रक्षा करेगा।
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💢#कुंभलग्न: आपके लग्न का स्वामी शनि है। आपको पैरों से संबंधित रोग, नेत्र रोग व रक्त विकार दे सकता है। इसके साथ ही इसके कारण आपको शुगर एवं पेट के रोग परेशान कर सकते हैं। रोगों में कमी करने के लिए आप नीलम रत्न धारण करें। साथ ही आप पन्ना और हीरा रत्न भी पहनें। पन्ना आपको आंत के रोगों और हीरा आपको थायराॅइड जैसे रोगों में लाभ देगा।
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💢#मीनलग्न: आपके लग्न का स्वामी गुरु है। आपको संक्रामक रोग, मानसिक तनाव एवं मोटावा परेशान कर सकता है। इसके अतिरिक्त लिवर के रोग भी आपको कष्ट देंगे। लग्नेश गुरु का पुखराज रत्न धारण करना आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहेगा। इसके साथ ही आप मोती और मूंगा भी धारण कर स्वयं को निरोगी रख सकते हैं। मोती रत्न आपको दमा और मूंगा आपको रक्त संबंधी रोगों को दूर करने में सहयोग करेगा। रोग ग्रह रत्न, धातु एवं अंगुली बवासीर चंद्र मरियम, स्वर्ण, कनिष्ठा गुर्दा रोग बुध किडनी स्टोन, स्वर्ण, अनामिका हृदय रोग, रक्तचाप सूर्य अंबर, स्वर्ण, अनामिका पेट के रोग सूर्य माणिक्य, स्वर्ण, अनामिका मानसिक अवसाद चंद्रमा मोती, स्वर्ण, कनिष्ठा मधुमेह शुक्र सफेद मूंगा, स्वर्ण, अनामिका दमा केतु टाइगर आई, पंचधातु, अनामिका संतान बाधा, स्त्री #कुंडली #राहु गोमेद, अष्टधातु, मध्यमा संतान बाधा, पुरूष कुंडली केतु टाइगर आई, पंचधातु, अनामिका थायराॅइड शुक्र ओपल, स्वर्ण, अनामिका एलर्जी, पिंत्त विकार बुध ओनेक्स, स्वर्ण, अनामिका मतिभ्रम राहु गोमेद, अष्टधातु, मध्यमा सिर दर्द शनि चुंबक, तांबा, मध्यमा रक्त की कमी मंगल, गुरु मूंगा, अनामिका, पुखराज, तर्जनी, स्वर्ण नेत्र रोग सूर्य माणिक्य, स्वर्ण, अनामिका गठिया शनि एक्वामरिन, अष्टधातु, मध्यमा कैंसर शनि, राहु नीलम, गोमेद, अष्टधातु, मध्यमा रोग का निदान न होने पर सभी ग्रह नवरत्न, स्वर्ण, तर्जनी |
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🌿ॐ नमो नारायणाय
🙏हर हर महादेव🌿
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🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹। 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*♥️~अपने घर, ऑफिस, और फैक्ट्री वास्तु के साथ सफल बनाये। जन्मकुंडली, प्रश्नन कुंडली, अंककुंडली, रत्न, जड़, एवं रुद्राक्ष आदि के लिये सम्पर्क करे।*
‼️अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱🔥🔱




