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पञ्चाङ्ग 3 मई 2026

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

jyotis


*🎈दिनांक 3 मई 2026*
*🎈 वार-  रविवार *
*🎈 मास -  ज्येष्ठ मास*
*🎈 पक्ष - कृष्ण पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर    पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि    -    द्वितीया    27:01:20*तत्पश्चात्* तृतीया*
*🎈 नक्षत्र -             विशाखा    07:09:07*
 तक  तत्पश्चात्     अनुराधा*
*🎈योग    -         वरियान    22:27:03* तक तत्पश्चात्     परिघ*
*🎈करण    -         तैतुल    13:53:46 तक तत्पश्चात् कौलव*
*🎈राहुकाल -05:29  पी.एम से 07:08 पी. एम (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि-       वृश्चिक*
*🎈सूर्य राशि     - *मेष*
*🎈 सूर्योदय -   05:56:01*
*🎈 सूर्यास्त -        19:07:58* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:29 ए एम से 05:12 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त-  12:06 पी एम से 12:59 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:10 ए एम, मई 04 से 12:53 ए एम, मई 04*
*🎈अमृत काल    -10:21 पी एम से 12:08 ए एम, मई 04*
*🎈 त्रिपुष्कर योग    -05:55 ए एम से 07:10 ए एम*
 *🎈 व्रत एवं पर्व विवरण- द्वितीया व्रत आज होगा (मासिक व्रत )
*🎈विशेष - विशेष - द्वितीया के पवित्र अवसर पर सात्विकता बनाए रखने के लिए मांसाहार, शराब, प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक भोजन का सेवन न करें। इस दिन शुद्धता का विशेष महत्व है, इसलिए घर में बना सादा और शुद्ध भोजन ही करें। इसके साथ ही, अंधेरे में न रहने और क्रोध/कलह से बचने की भी सलाह दी जाती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- जेष्ठ मास महात्म्य *
 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा    गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी    💥सेनाधिपति    चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💥मन्त्री    मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी    धान्याधिपति    बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💥सस्याधिपति    गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी    मेघाधिपति    चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💥धनाधिपति    गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी    नीरसाधिपति    गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
💥रसाधिपति    शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी    फलाधिपति    चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
kundli


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        🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
         *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day




       🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
         💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺

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🔱🌹🌹   #ज्योतिष में कुंडली के लग्न से 5th(पांचवे भाव )🌹 

 
कुंडली के  पंचम भाव  को पंचमेश भाव कहा गया है। 
पंचम भाव एक त्रिकोण भाव है। कुंडली के तीन त्रिकोण स्थान, अर्थात **प्रथम, **पंचम व नवम स्थान में से पंचम स्थान बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह भाव संचित पूर्व-पुण्य, अर्थात पूर्व जन्म के कर्मों के संग्रह को दर्शाता है। इसलिए इसका एक नाम पूर्व पुण्य भाव भी है| व्यक्ति के पूर्वजन्म के कर्म उसके वर्तमान जीवन को प्रभावित करते हैं, इसलिए पंचम भाव सर्वाधिक महत्वपूर्ण भाव है|
           💕 पंचम भाव और शिक्षा क्षेत्र 💕 
❤️ यदि पंचम भाव, पंचमेश व बुध पर शुभ ग्रहों का प्रभाव हो तो व्यक्ति अत्यंत ज्ञानी व कुशाग्र बुद्धि का हो सकता है| इसके विपरीत इन घटकों पर पाप प्रभाव व्यक्ति को जड़ मति बनाकर मनोरोग दे सकता है
                         💕 पंचम भाव 💕
❤️ प्राथमिक शिक्षा, निवास और भवन को दर्शाता है। पंचम भाव गणित, विज्ञान, कला आदि से संबंधित होता है। इससे तात्पर्य है कि आप किस विषय में विशेषज्ञता प्राप्त करेंगे अध्ययन में अभिरुचि- यह भाव मूलतः ज्ञान का स्थान है, अतः किसी भी प्रकार के ज्ञान को अर्जित करने इस स्थान से संबंधित है परंतु यह कहना ज्यादा उचित होगा कि मनुष्य की रूचि जिस प्रकार के शास्त्र अध्ययन में होगी यह भाव उसमें सहायता करेगा। 
❤️ पंचम भाव विशेष विषयों में उच्च शिक्षा, फैलोशिप, पोस्ट ग्रेजुएशन, लेखन, पढ़ना, वाद-विवाद, रिसर्च, मानसिक खोज और कौशल को दर्शाता है।
पंचम भाव प्रेम-प्रसंग, किस प्रेम-प्रसंग में सफलता ओर असफलता के संकेत देता है। 
अक्सर माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर चिन्तित रहते हैं। उनकी शिकायत होती है कि उनके बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगताहै इसका मुख्य कारण भी पँचम भाव का पीडित होना ही है। 
❤️  जन्म कुंडली के पँचम भाव से ही सन्तान सम्बन्धी जानकारी ज्ञात होती है। 
❤️ संतान सुख कैसे होगा, इसके लिए भी हमें पंचम स्थान का ही विश्लेषण करना होगा। पंचम स्थान का मालिक किसके साथ बैठा है, यह भी जानना होगा। पंचम स्थान में गुरु शनि को छोड़कर पंचम स्थान का अधिपति पाँचवें हो तो संतान संबंधित शुभ फल देता है।
❤️  यदि पंचम स्थान का स्वामी आठवें, बारहवें हो तो संतान सुख नहीं होता। यदि हो भी तो सुख मिलता नहीं या तो संतान नष्ट होती है या अलग हो जाती है।
❤️ यदि पंचम स्थान का अधिपति सप्तम, नवम, ग्यारहवें, लग्नस्थ, द्वितीय में हो तो संतान से संबंधित सुख शुभ फल देता है। द्वितीय स्थान के स्वामी ग्रह पंचम में हो तो संतान सुख उत्तम होकर लक्ष्मीपति बनता 
है।
      💕 सन्तान सुख कैसा होगा 💕
इसके लिए भी हमें पंचम स्थान का ही विश्लेषण करना होगा. ??
❤️ पंचम स्थान का मालिक किसके साथ बैठा है, यह भी जानना होगा. पंचम स्थान में गुरु शनि को छोड़कर पंचम स्थान का अधिपत पाँचवें भाव में हो तो संतान संबंधित शुभ फल देता है।
❤️ यदि पंचम स्थान का स्वामी आठवें, बारहवें भाव में हो तो संतान सुख नहीं होता. यदि हो भी तो सुख मिलता नहीं. या तो संतान नष्ट होती है या अलग हो जाती है
❤️ यदि पंचम स्थान का अधिपति सप्तम, नवम, ग्यारहवें, लग्नस्थ, द्वितीय भाव में हो तो संतान से संबंधित सुख शुभ फल देता है। 
❤️ यदि कुंडली मेंपंचम स्थान पर राहु या केतु हो तो पितृदोष, दैविक दोष, जन्म दोष होने से भी संतान नहीं होती। यदि पंचम भाव पर पितृदोष या पुत्रदोष बनता हो तो उस दोष की शांति करवाने के बाद संतान प्राप्ति संभव है।
❤️ यदि कुंडली मेपंचम स्थान पर स्थित *मंगल +राहु गर्भपात कराता है। यदि पंचम भाव में गुरु के साथ राहु हो तो चांडाल योग बनता है और संतान में बाधा डालता है यदि यह योग स्त्री की कुंडली में हो तो। यदि यह योग पुरुष कुंडली में हो तो संतान नहीं होती।
 ❤️ नीच का राहु भी संतान नहीं देता। पंचम स्थान में पड़ा चँद्र, शनि, राहु भी संतान बाधक होता है। 
❤️ संतति सुख के लिए पंचम स्थान, पंचमेश, पंचम स्थान पर शुभाशुभ प्रभाव व बृहस्पति का विचार मुख्‍यत: किया जाता है।
❤️ ज्योतिष के अनुसार मेष, मिथुन, सिंह, कन्या ये राशियाँ अल्प प्रसव राशियाँ हैं। वृषभ, कर्क, वृश्चिक, धनु, मीन ये बहुप्रसव राशियाँ हैं।
❤️ पंचम स्थान में पाप ग्रह हो तो संतति सुख में बाधा आती है।
❤️  पंचमेश यदि 6, 8,12 में हो या 6, 8,12 के स्वामी पंचम में हो तो संतान सुख बाधित होता है।
❤️  पंचमेश अशुभ नक्षत्र में हो तो संतान प्राप्ति में विलंब होता है।।

         🙇 #जयश्रीसीताराम 🙇
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹।      💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
♨️  ⚜️ 🕉🌞  🌞🕉 ⚜🚩*♥️~💕

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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*♥️~अपने घर, ऑफिस, और फैक्ट्री वास्तु के साथ सफल बनाये। जन्मकुंडली, प्रश्नन कुंडली, अंककुंडली, रत्न, जड़, एवं रुद्राक्ष आदि के लिये सम्पर्क करे।*
‼️अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ  🇪🇬🔱🔥🔱
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