*💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
*🎈दिनांक 26 सितंबर 2026*
*🎈वार- शनिवार*
*🎈मास - भाद्रपद मास*
*🎈पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 2083*
*🎈संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈अयन - दक्षिणायन*
*🎈ऋतु - शरद*
*🎈तिथि- पूर्णिमा - 11:06 पी एम तक तत्पश्चात पूर्णिमा*
*🎈नक्षत्र- पूर्व भाद्रपद - 11:32 ए एम तक तत्पश्चात उत्तर भाद्रपद*
*🎈करण - विष्टि - 10:46 ए एम तक तत्पश्चात् बव, बालव*
*🎈योग- गण्ड - 01:17 पी एम तक तत्पश्चात् वृद्धि*
*🎈राहुकाल- 09:26 ए एम से 10:56 ए एम(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय-06:25.00 एy एम*
*🎈सूर्यास्त-06:27. पी एम*
*🎈चंद्र राशि- मीन*
*🎈सूर्य राशि- कन्या*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:50 ए एम से 05:37 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:02 पी एम से 12:50 पी एम*
*🎈अमृत काल - 06:24 ए एम, सितम्बर 27 से 07:59 ए एम, सितम्बर 27*
*🎈 निशिता मुहूर्त 12:02 ए एम, सितम्बर 27 से 12:50 ए एम, सितम्बर 27.*
*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण- 🏵️ ☀️☀️☀️☀️पूर्णिमा व्रत 26 sept 2026को🏓🏓🏓
👁️"विष्णु भगवान की जय हो "🙏 🌹
🛟ब्रह्मवैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, पूर्णिमा के दिन तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, अंडा, लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए।
💥26 सितंबर 2026, शनिवार का दिन सभी 12 राशियों के लिए मिला-जुला और समझदारी से काम लेने का रहेगा। जिसमें अटके हुए कार्य पूरे होने और आत्मविश्वास बढ़ने के योग हैं। आप साहस रखे अच्छा होगा।
‼️💢आज का राशिफल💢‼️
🏓🏓सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल💕
💝 मेष राशि: मन शांत रहेगा और कामकाज में ध्यान बना रहेगा। पैसों के मामलों में लेन-देन करते समय जल्दबाजी न करें, धीरज रखें।
💝वृषभ राशि: काम में जोश और नया करने का मन रहेगा। आर्थिक स्थिति ठीक रहेगी, लेकिन अपनी और दूसरों की जरूरतों में तालमेल बनाकर चलें।मिथुन राशि: दिमाग में नए और अलग विचार आएंगे। रोज के खर्चों और अपने बजट पर खास ध्यान देने की जरूरत है।
💝कर्क राशि: दिन संतुलित और शांत रहेगा। पैसों के फैसलों पर अपनी भावनाओं को हावी न होने दें और गुस्से से बचें।
💝सिंह राशि: मेहनत का अच्छा नतीजा मिलेगा और ऑफिस में आपका भरोसा बढ़ेगा। कागजी कामों की जांच साफ-सुथरी रखें।
💝कन्या राशि: आत्मविश्वास मजबूत रहेगा और काम में निखार आएगा। बजट का हिसाब दुरुस्त रखें और समझदारी से काम लें।
💝तुला राशि: दफ्तर में आपकी पहचान और नया भरोसा बनेगा। दिमाग तेज चलेगा और आर्थिक मामलों में स्थिति सुधरेगी।
💝वृश्चिक राशि: पुरानी बचत पर ध्यान दें और बातचीत व तालमेल से अपने अधूरे काम पूरे करें।
💝धनु राशि: आपके सामने नए अवसर आएंगे और काम के प्रति उत्साह बना रहेगा। पैसों के मामलों में जमीनी सच्चाई देखकर ही आगे बढ़ें।
💝मकर राशि: परिवार से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। काम से अच्छी कमाई होगी और बातचीत में मिठास बनाए रखें।
💝कुंभ राशि: मन थोड़ा बेचैन हो सकता है, इसलिए बेवजह की बहस और विवादों से दूर रहें। लंबी योजनाओं से लाभ मिल सकता है।
💝मीन राशि: कामकाज में थोड़ी व्यवस्था और संयम रखें। अटके हुए कामों का हिसाब करें और शांत रहकर प्रयास करें।
💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏
➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️
🌹|| ✨ 🌹// 🕉️ ✨ 🌺 🦚 🌼
🕉️ 🌸*🌙 🐘 🙏🐚🪔 🌿 🌺🪷
🏛️ 🪷🪷
💢।। श्राद्ध अनुष्ठान करने हेतु अनुकूल तिथियाँ💥
🌺धर्म ग्रन्थों के अनुसार, एक वर्ष में लगभग 96 दिन श्राद्ध कर्म करने हेतु श्रेष्ठ माने गये हैं। पितृ पक्ष सहित निम्नलिखित दिन भी श्राद्ध कर्म करने के लिये उपयुक्त होते हैं।
💝12 अमावस्या तिथियाँ (12)
💝12 संक्रान्ति अथवा संक्रमण के दिन (जिस समय सूर्य अगली राशि में प्रवेश करता है) (24)
💝15 पितृ पक्ष के दिन(अर्थात महालय के 15 दिन) (39)
💥12 वैधृति योग के दिन (51)
💥12 व्यतिपात योग के दिन (63)
💥14 मन्वादि तिथियाँ अथवा मन्वन्तर (77)
पूर्वेदु, अष्टक एवं अन्वष्टक दिवस (92)
4 युगादि दिन (अर्थात कृत, त्रेता, द्वापर, कलि) (96)
💥ऊपरोक्त 96 दिनों के अतिरिक्त, निम्नलिखित अन्य दिन भी श्राद्ध अनुष्ठान करने हेतु उपयुक्त होते हैं।
💥7 कल्पादि तिथियाँ💥
भीष्म अष्टमी दिवस
वार्षिक श्राद्ध दिवस
शुभ दिन, उदाहरणार्थ पुत्र का जन्मदिवस आदि
जिस समय किसी के पास श्राद्ध करने के लिये पर्याप्त सामग्री हो
किसी उपयुक्त ब्राह्मण का आगमन होने पर
💝सम्पात दिवस
💝गजच्छाया योग
💝सूर्य ग्रहण एवं चन्द्र ग्रहण
☀️श्राद्ध करने की तीव्र इच्छा होने पर
☀️अमावस्या तिथि श्राद्ध परिवार के उन मृतक सदस्यों के लिये किया जाता है, जिनकी मृत्यु अमावस्या तिथि, पूर्णिमा तिथि तथा चतुर्दशी तिथि को हुयी हो। यदि कोई सम्पूर्ण तिथियों पर श्राद्ध करने में सक्षम न हो, तो वो मात्र अमावस्या तिथि पर सभी के लिये श्राद्ध कर सकता है। 💝अमावस्या तिथि पर किया गया श्राद्ध, परिवार के सभी पूर्वजों की आत्माओं को प्रसन्न करने के लिये पर्याप्त है। जिन पूर्वजों की पुण्यतिथि ज्ञात नहीं है, उनका श्राद्ध भी अमावस्या तिथि पर किया जा सकता है। इसीलिये अमावस्या श्राद्ध को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है।
साथ ही
🤙पूर्णिमा तिथि पर मृत्यु प्राप्त करने वालों के लिये महालय श्राद्ध भी अमावस्या श्राद्ध तिथि पर किया जाता है, न कि भाद्रपद पूर्णिमा पर। हालाँकि, भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध पितृ पक्ष से एक दिन पहले पड़ता है, किन्तु यह पितृ पक्ष का भाग नहीं है। सामान्यतः पितृ पक्ष, भाद्रपद पूर्णिमा श्राद्ध के अगले दिन से आरम्भ होता है। अमावस्या श्राद्ध को अमावस श्राद्ध के रूप में भी जाना जाता है। पश्चिम बंगाल में महालय अमावस्या नवरात्रि उत्सव के आरम्भ का प्रतीक है। देवी दुर्गा के भक्तों का मानना है कि, इस दिन देवी दुर्गा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था।
पितृ पक्ष श्राद्ध पार्वण श्राद्ध होते हैं। इन श्राद्धों को सम्पन्न करने के लिये कुतुप, रौहिण आदि मुहूर्त शुभ मुहूर्त माने गये हैं। अपराह्न काल समाप्त होने तक श्राद्ध सम्बन्धी अनुष्ठान सम्पन्न कर लेने चाहिये। श्राद्ध के अन्त में तर्पण किया जाता है।
सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष की अन्तिम तिथि होती है, जिसे सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के श्राद्ध हेतु अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना गया है। गरुड़पुराण में प्राप्त वर्णन के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को अपने पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, अथवा तिथि विशेष पर श्राद्ध करने में असमर्थता हो, तो अश्विन कृष्ण अमावस्या के दिन सर्वपितृ अमावस्या के रूप में श्राद्ध करना श्रेयस्कर होता है।
इस तिथि को महालय अमावस्या भी कहा जाता है। महालय का अर्थ है - "वह महान तिथि जिसमें समस्त पितरों का आवाहन कर उनका एक साथ पूजन किया जाये।" मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष में पितृगण पृथ्वीलोक पर आते हैं तथा अमावस्या को विदा होते हैं। अतः इस दिन विधिपूर्वक किया गया श्राद्ध, तर्पण एवं पिण्डदान समस्त पितरों की तृप्ति हेतु किया जाता है, चाहे वे ज्ञात हों या अज्ञात। जिनका विधिवत् अन्त्येष्टि संस्कार सम्भव नहीं हो पाया, उनका श्राद्ध इस तिथि को करने से उन्हें भी शान्ति मिलती है। इसके अतिरिक्त, जिनका विवाह नहीं हुआ अथवा जिनका कोई वंशज नहीं है, उनके लिये भी सर्वपितृ अमावस्या को सामूहिक रूप से श्राद्ध करने का प्रावधान है।
सर्वपितृ अमावस्या को विशेष पुण्यकारी माना गया है। इस दिन ब्राह्मण भोज, वस्त्रदान, तिलदान, कुयें या जल स्रोतों पर जलदान, दीपदान तथा गाय को हरा चारा अर्पित करना अत्यन्त शुभ फलदायक होता है। इस पावन अवसर पर श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीविष्णुसहस्रनाम अथवा रुद्रपाठ का पाठ कर पितरों की आत्मा की शान्ति के लिये प्रार्थना की जाती है।
इस दिन किया गया श्रद्धापूर्वक श्राद्ध कर्म व्यक्ति को पितृ ऋण से मुक्त करता है तथा पारिवारिक कल्याण, विवाह, सन्तान, धन, सुख-समृद्धि एवं मानसिक शान्ति की प्राप्ति में सहायक होता है। यह तिथि पितृगणों के प्रति श्रद्धा, सम्मान एवं कृतज्ञता प्रकट करने की एक विशेष अवसर के रूप में सम्पूर्ण हिन्दु समाज द्वारा मनायी जाती 🙏🌺
🌺‼️जय श्री कृष्णा! 🦚🚩 🌺🙏
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💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
*🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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*💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
*बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️




