Type Here to Get Search Results !

पञ्चाङ्ग 25 सितंबर 2026

 *💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*

jyotis


*🎈दिनांक 25 सितंबर 2026*
*🎈वार-  शुक्रवार*
*🎈मास - भाद्रपद मास*
*🎈पक्ष -  शुक्ल पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 2083*
*🎈संवत्सर     पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈अयन - दक्षिणायन*
*🎈ऋतु - शरद*
*🎈तिथि-    चतुर्दशी - 11:06 पी एम तक तत्पश्चात पूर्णिमा* 
*🎈नक्षत्र- शतभिषा - 11:22 ए एम तक तत्पश्चात पूर्वभाद्रपद*
*🎈करण    - गर - 11:17 ए एम तक तत्पश्चात् वाणिज, विष्टि*
*🎈योग-    शूल - 02:51 पी एम तक तत्पश्चात् गंड*
*🎈राहुकाल- 01:58 पी एम से 03:28 पी एम(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय-06:24.00 एy एम*
*🎈सूर्यास्त-06:30. पी एम*
*🎈चंद्र राशि- कुम्भ* 
*🎈सूर्य राशि- कन्या*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- दक्षिण दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:49 ए एम से 05:37 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:03 पी एम से 12:51 पी एम*
*🎈अमृत काल - 03:56 ए एम, सितम्बर 25 से 05:35 ए एम, सितम्बर 25*
*🎈 निशिता मुहूर्त 12:03 ए एम, सितम्बर 25 से 12:51 ए एम, सितम्बर 25*
*🎈 रवि योग-    10:35 ए एम से 06:25 ए एम, सितम्बर 25*
day

night



*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण-  🏵️ ☀️☀️☀️☀️अनंतचतुर्दशी व्रत🏓🏓🏓
अनंत चौदस "25 सितंबर, शुक्रवार 2026 को है।
अनंत चतुर्दशी की कथा और गणेश विसर्जन - एक साथ क्यों ?

हर साल भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को दो बड़े पर्व एक साथ होते हैं - *अनंत चतुर्दशी* और *गणेश विसर्जन।* इस बार 2026 में अनंत चौदस "25 सितंबर, शुक्रवार को है।

🏓1. अनंत चतुर्दशी की कथा

पांडवों ने अपना सब राज-पाट जुए में खो दिया था। तब श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा - तुम अनंत व्रत करो, सब ठीक होगा।

🏓कथा ऐसी है -

बहुत समय पहले *सुमंत* नाम के ब्राह्मण थे, उनकी बेटी *सुशीला*। सुशीला का विवाह *कौंडिन्य* ऋषि से हुआ।

🏓एक बार कौंडिन्य ऋषि को बहुत गरीबी आ गई। तब सुशीला ने देखा कि कुछ स्त्रियाँ सुंदर वस्त्रों में अनंत भगवान की पूजा कर रही हैं। पूछने पर पता चला - आज अनंत चतुर्दशी है, जो 14 गांठों वाला अनंत सूत बांधता है, अनंत भगवान उसकी सारी मनोकामना पूरी करते हैं।

🏓सुशीला ने भी व्रत किया और अनंत सूत अपनी भुजा पर बांध लिया। देखते ही देखते कौंडिन्य ऋषि फिर से धनवान हो गए।

🏓एक दिन अहंकार में कौंडिन्य ने सुशीला के हाथ से अनंत सूत तोड़कर आग में फेंक दिया। उसी क्षण से उनका सब कुछ नष्ट हो गया, घर में दरिद्रता आ गई।

तब पश्चाताप में कौंडिन्य जंगल में अनंत भगवान को ढूंढने निकल पड़े। उन्हें रास्ते में कभी गाय, कभी पेड़, कभी गधा मिला - सबने कहा हमें अनंत नहीं पता। अंत में उन्हें एक बूढ़े ब्राह्मण के रूप में स्वयं *अनंत भगवान - विष्णु जी* मिले।

भगवान ने कहा - मैं ही अनंत हूँ, मैं ही आदि और अंत हूँ। तुमने मेरा अपमान किया था, इसलिए दुख पाया। अब फिर से व्रत करो।

कौंडिन्य ने 14 साल तक लगातार अनंत व्रत किया और उन्हें सब कुछ वापस मिल गया।

🏓मान्यता : इस दिन 14 गांठ वाला अनंत सूत पुरुष दाएं हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में बांधती हैं। ये 14 गांठें 14 लोकों का प्रतीक हैं और विष्णु जी की रक्षा का बंधन है।

🏓 2. इसी दिन गणेश विसर्जन क्यों होता है?

गणेश चतुर्थी से 10 दिन तक गणपति जी हमारे घर मेहमान बनकर रहते हैं। अनंत चतुर्दशी उनके जाने का दिन है।

🏓इसके दो कारण हैं -

A. गणेश जी का अनंत में विलीन होना :
गणेश जी बुद्धि के देवता हैं, और अनंत - विष्णु जी सृष्टि के पालनकर्ता। शास्त्र कहते हैं बुद्धि को हमेशा अनंत में - ईश्वर में विलीन होना चाहिए। इसलिए अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी को अनंत सागर में विसर्जित किया जाता है।

🏓B. लोक मान्यता :
महाराष्ट्र में लोकमान्य तिलक जी ने गणेश उत्सव को सार्वजनिक रूप दिया था। 10 दिन के उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी को ही रखा गया ताकि भक्तों को लंबा समय मिले और अंत में सब एक साथ विसर्जन कर एकता दिखाएं।

🏓संदेश : गणेश विसर्जन हमें सिखाता है - जो आया है वो जाएगा, शरीर मिट्टी है, पर आत्मा अनंत है। इसलिए हमें मोह नहीं, अनंत ईश्वर से जुड़ना चाहिए।

🏵️"आया है सो जाएगा, पर भक्ति अनंत है - गणपति बाप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ!"🙏

👁️"विष्णु भगवान की जय हो गणपति बप्पा मोरया"🙏 🌹

🛟ब्रह्मवैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, चतुर्दशी तिथि (अनंत चतुर्दशी सहित) के दिन तिल का तेल खाना और शरीर पर लगाना पूरी तरह निषिद्ध (वर्जित) है।
💥25 सितंबर 2026 को सभी 12 राशियों के लिए दिन मिला-जुला और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहेगा, जिसमें अटके हुए कार्य पूरे होने और आत्मविश्वास बढ़ने के योग हैं।
   
    ‼️💢आज का राशिफल💢‼️

🛟सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल‼️

♈ मेष (Aries): लंबे समय से टाले जा रहे काम को आज नजरअंदाज करना मुश्किल होगा; कार्यक्षेत्र में प्रतिस्पर्धा आपके पक्ष में रहेगी।

🏵️वृषभ (Taurus): आज का दिन आपके आसपास की व्यवस्था और जिम्मेदारियों को सरल बनाने के लिए अनुकूल है।

🏵️मिथुन (Gemini): मन में नए विचार और संभावनाएं रहेंगी, लेकिन किसी पुराने या अधूरे काम को पहले पूरा करना बेहतर होगा।

🏵️कर्क (Cancer): किसी महत्वपूर्ण विषय पर सही निर्णय लेने से आपको मानसिक और भावनात्मक राहत मिलेगी।

🌺सिंह (Leo): अधूरे पड़े कार्य आपके आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए समय पर काम पूरा करें।

🏵️कन्या (Virgo): जटिल और उलझे हुए मामलों को अपनी व्यावहारिक सोच से सुलझाने में आप सफल रहेंगे।

🏵️तुला (Libra): जीवन के जिस हिस्से में अनिश्चितता बनी हुई है, वहां संतुलन स्थापित करने का प्रयास करें।

🏵️वृश्चिक (Scorpio): आज का दिन मामलों को निजी तौर पर और दृढ़ता के साथ संभालने के लिए अनुकूल है।

🏵️धनु (Sagittarius): रचनात्मक और सकारात्मक सोच से मित्रों तथा सहकर्मियों का सहयोग प्राप्त होगा।

🏵️मकर (Capricorn): अपने व्यावसायिक लक्ष्यों की दोबारा समीक्षा करें और आगे की दिशा तय करें।

🏵️कुंभ (Aquarius): अपनी दिनचर्या में कुछ नया बदलाव करने और अच्छे विचारों को अपनाने से लाभ होगा।

🏵️मीन (Pisces): अपनी भावनात्मक सीमाओं का ध्यान रखें और खुद के लिए भी थोड़ा समय निकालें।

💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏
  ➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
   🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️
🌹|| ✨ 🌹// 🕉️ ✨ 🌺 🦚 🌼 

🕉️ 🌸*🌙 🐘 🙏🐚🪔 🌿 🌺🪷
🏛️ 🪷श्री वामन जयंती विशेष🪷
💢।।  पितृ देव की जय  ।।

क्या गया जी में श्राद्ध करने के बाद तर्पण करना बंद कर देना चाहिए?
जानिए इस बात की शास्त्रीय सच्चाई।

स्रोत:= 

नारद पुराण गया-माहात्म्य में गया क्षेत्र में तर्पण और श्राद्ध का उल्लेख; श्राद्ध-विधि में तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण-सत्कार का वर्णन। 

क्या गया जी में श्राद्ध करने के बाद तर्पण नहीं करना चाहिए?

आज भी समाज में एक बात बहुत सुनने को मिलती है कि यदि गया जी जाकर पिंडदान और श्राद्ध कर दिया गया है, तो उसके बाद जीवनभर पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध या दान करने की आवश्यकता नहीं रहती।

लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है?

सनातन परंपरा में श्राद्ध का मूल आधार श्रद्धा है। पितरों के निमित्त किए जाने वाले कर्मों में श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, दान और ब्राह्मण-सत्कार का अपना-अपना महत्व माना गया है।

 सामान्य श्राद्ध-विधि के विवरण में भी तर्पण और पिंडदान को श्राद्ध से जुड़े प्रमुख कर्मों में गिना गया है। 

गया जी का महत्व क्या है?

गया को पितृकर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ माना गया है। नारद पुराण के गया-माहात्म्य में गया क्षेत्र में पिंडदान के साथ तर्पण संबंधी विधियों का भी उल्लेख मिलता है। 

इसी कारण गया में किया गया श्राद्ध और पिंडदान विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

लेकिन इसका यह अर्थ निकालना उचित नहीं कि गया श्राद्ध के बाद पितरों के लिए किए जाने वाले प्रत्येक अन्य कर्म को हमेशा के लिए बंद कर देना चाहिए।

पितृपक्ष में तर्पण और श्राद्ध की परंपरा अलग से भी प्रचलित है। वर्तमान 2026 के पितृपक्ष में भी गया सहित विभिन्न स्थानों पर पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध किए जाने की परंपरा जारी है।

इसलिए सामान्य रूप से यह समझना अधिक उचित है कि:
गया जी में श्राद्ध करना पितृकर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ-कर्म है, लेकिन इसे पितरों के प्रति आजीवन स्मरण और अपने कुलाचार से जुड़े सभी कर्मों के पूर्ण विराम के रूप में नहीं समझना चाहिए।

सनातन परंपरा में मनुष्य के छह नित्य कर्म बताए जाते हैं, जिन्हें दैनिक जीवन में धर्म और आत्मशुद्धि से जोड़ा गया है जैसे=

1=स्नान — शरीर की शुद्धि और दिन की शुभ शुरुआत।

2=संध्या-वंदन — प्रातः और सायं ईश्वर का स्मरण एवं उपासना।

3=जप — मंत्र या भगवान के नाम का श्रद्धापूर्वक स्मरण।

4=देवपूजन — अपने इष्टदेव की पूजा और आराधना।

5=श्राद्ध और तर्पण — देव, ऋषि और पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना।

6=स्वाध्याय — वेद, गीता, पुराण अथवा धर्मग्रंथों का अध्ययन।

इनका उद्देश्य केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि शरीर, मन, बुद्धि और आचरण को अनुशासित करना भी माना गया है।

गया श्राद्ध के बाद भी अपने पितरों के निमित्त हर साल पितृपक्ष में तिथि श्राद्ध के दिन पिंड दान तर्पण ब्राह्मण भोजन अवश्य करना चाहिए क्योंकि जो काम रोज करना चाहिए उसका त्याग आप कैसे कर सकते हैं ।

यदि परिवार में वार्षिक श्राद्ध की परंपरा है, तो उसे अपने कुलाचार, पारिवारिक परंपरा और संबंधित शास्त्रीय विधि के अनुसार करना चाहिए।

इसी प्रकार पितृपक्ष में तर्पण आदि के विषय में भी अपने परिवार की परंपरा और योग्य आचार्य के निर्देश का पालन करना उचित है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गया श्राद्ध की महिमा को समझें, लेकिन उसके नाम पर प्रचलित हर लोक-मान्यता को शास्त्रीय नियम न मान लें।

पितरों के प्रति श्रद्धा केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है।
गया जी का पिंडदान अपनी जगह विशेष है और पितृ-स्मरण, तर्पण तथा परंपरागत श्राद्ध-कर्म का अपना स्थान है।

कर्म वही करें जिसकी विधि आपके कुलाचार और प्रमाणित शास्त्रीय परंपरा के अनुरूप हो।

पितृ-स्मरण केवल कर्मकांड नहीं, अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का संस्कार भी है।

#गयाजी #गयाश्राद्ध #पिंडदान #पितृपक्ष #पितृतर्पण #श्राद्ध #पितृकर्म #पितृदोष #सनातनधर्म #सनातनसंस्कृति #हिंदूधर्म #पूर्वज #पितृस्मरण #धार्मिकज्ञान #शास्त्रज्ञान

स्रोत:= नारद पुराण गया-माहात्म्य में गया क्षेत्र में तर्पण और श्राद्ध का उल्लेख; श्राद्ध-विधि में तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण-सत्कार का वर्णन। 🙏🌺

🌺‼️जय श्री कृष्णा! 🦚🚩 🌺🙏

🧨🚩⛳💥❤️🕉️🌴🍀🎈🌀🌿

 💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
  ✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
           *🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏     
 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹          

 *💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
          *बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
       🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।
      ♨️  ⚜️ 🕉🌞  🌞🕉 ⚜🚩
🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय  बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️
vipul

Tags

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Below Post Ad