*💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
*🎈दिनांक 22 अक्टूबर 2026*
*🎈वार- गुरुवार*
*🎈मास - आश्विन मास*
*🎈पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 2083*
*🎈संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈अयन - दक्षिणायन*
*🎈ऋतु - शरद*
*🎈तिथि-एकादशी - 08:48.05 पी एम तक तत्पश्चात द्वादशी *
*🎈नक्षत्र- शतभिषा - 07:47 पी एम तक तत्पश्चात पूर्व भाद्रपदा*
*🎈करण- विष्टि - 02:11 पी एम तक तत्पश्चात्, बव*
*🎈योग- वृद्धि - 23:38.40 ए एम, तकतत्पश्चात्, ध्रुव*
*🎈राहुकाल- 01:44 पी एम से 03:09 पी एम (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय- 06:39.50 ए एम*
*🎈सूर्यास्त- 05:58.47 पी एम*
*🎈चंद्र राशि- कुंभ*
*🎈सूर्य राशि- तुला*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- दक्षिण दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:58 ए एम से 05:48 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 11:57 ए एम से 12:42 पी एम*
*🎈अमृत काल- 01:18 पी एम से 02:58 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त -11:54 पी एम से 12:45 ए एम, अक्टूबर 23*
*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण- 🏵️ ☀️
☀️☀️22 अक्टूबर 2026 एकादशी दिन पर्व🏓🏓🏓
👁️"विष्णु भगवान की जय हो "🙏 🌹
💢.ब्रह्मवैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29) के अनुसार, एकादशी तिथि के दिन सेम की फली (शिम्बी) खाना वर्जित माना गया है। इसके अलावा सामान्य धार्मिक और शास्त्रों के नियमों के अनुसार एकादशी पर चावल, सभी प्रकार के अन्न (गेहूं, जौ आदि) और दालें नहीं खाई जाती हैं।
💢सेम की फली (शिम्बी): ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार एकादशी को सेम खाना निषिद्ध है
🛟22 अक्टूबर 2026 को चंद्रमा कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में रहेंगे, जिससे सभी राशियों के लिए नए विचारों, आर्थिक प्रबंधन और कार्यक्षेत्र में संभलकर कदम रखने का दिन रहेगा। आज बुधादित्य और वृद्धि योग का शुभ प्रभाव भी देखने को मिलेगा।
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
‼️💢आज का राशिफल💢‼️
🏓🏓सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल
💢• मेष (Aries): सरकारी कार्यों में सफलता मिलेगी, पर आर्थिक मामलों में संयम रखें और पिता की सलाह का सम्मान करें।
💢• वृषभ (Taurus): बचत और परिवार की आर्थिक स्थिति पर पूरा ध्यान दें, समझदारी से कदम आगे बढ़ाएं।
💢• मिथुन (Gemini): तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे, नौकरी बदलने का मनचाहा अवसर मिल सकता है।
💢• कर्क (Cancer): पारिवारिक खर्चों की वजह से मानसिक दबाव रहेगा, भावनाओं पर काबू रखें।
💢• सिंह (Leo): साझा धन, कर्ज और पुराने वादों को लेकर बहुत सावधानी बरतें।
💢• कन्या (Virgo): अपने बिलों, बजट और भविष्य के खर्चों को सही तरह से व्यवस्थित करें।
💢• तुला (Libra): खर्च करने के अपने तरीकों और प्राथमिकताओं की दोबारा समीक्षा करें।
💢• वृश्चिक (Scorpio): घर के रख-रखाव, घरेलू खर्चों और संपत्ति से जुड़ी योजनाओं पर ध्यान केंद्रित रहेगा।
💢• धनु (Sagittarius): पढ़ाई और यात्रा से जुड़े मामलों में समझदारी भरे लक्ष्य तय करें।
💢• मकर (Capricorn): आय में स्थिरता बनी रहेगी और उच्चाधिकारियों या वरिष्ठों से अच्छा तालमेल रहेगा।
💢• कुंभ (Aquarius): रिश्तों में उत्साह रहेगा, कार्यक्षेत्र की नई चुनौतियों का सामना करें और लाभ उठाएं।
💢• मीन (Pisces): छुपे हुए खर्चों पर नजर रखें और पैसों की योजना पूरी अनुशासन के साथ बनाएं।
💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏
➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं आज से नवरात्रि संपूर्ण हो चला है आज एकादशी पर्व चल रहा है।महापर्व ॥🏓
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
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👇 🏓 विशेष💥💥
💢ब्रह्माजी के शाप से जब देवर्षि नारद गंधर्व योनि में राजा चित्ररथ के पुत्र 'उपबर्हण' बनकर जन्मे, तो पचास परम सुंदरी कन्याओं के पति बने! लेकिन जब पुष्कर तीर्थ में महर्षि भृगु के आश्रम पर भगवान शिव के तांडव नृत्य और संकीर्तन का उत्सव हुआ, तो गंधर्व उपबर्हण ने ताल-सुर में ऐसी कौन सी धृष्टता कर दी कि ब्रह्माजी ने भरी सभा में उसे उसी क्षण निष्प्राण होकर मरने का भयंकर शाप दे दिया?
👉सूतजी कहते हैं — हे शौनक आदि परम ज्ञानी मुनियो! पूर्वकाल में जब ब्रह्माजी ने अपने मानस पुत्र नारद को सृष्टि रचने और विवाह करने की आज्ञा दी थी, तब नारदजी ने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति को ही सर्वोपरि मानकर पिता की आज्ञा ठुकरा दी थी।क्रोध में आकर ब्रह्माजी ने उन्हें शाप दिया था — तू स्त्रियों के वशीभूत होकर कामुक गंधर्व बनेगा और उसके बाद शूद्र योनि में जन्म लेगा।ब्रह्माजी के उसी शाप के प्रभाव से नारदजी का वह तेज गंधर्वराज चित्ररथ की महारानी के गर्भ में प्रविष्ट हुआ।उचित समय आने पर रानी ने एक परम तेजस्वी, अत्यंत सुंदर और सर्वांग-सुंदर बालक को जन्म दिया। वह बालक संगीत, रूप और लावण्य में साक्षात कामदेव के समान था। गंधर्वों ने उसका नाम 'उपबर्हण' रखा।
💢उपबर्हण जब युवा हुए, तो उनके अलौकिक सौंदर्य और मधुर गायन पर तीनों लोकों की कन्याएं मोहित होने लगीं।चित्ररथ के मित्र गंधर्वराज द्रुमिल ने अपनी पचास अत्यंत रूपवती, सुशीला और संगीत-विद्या में निपुण कन्याओं का पाणिग्रहण उपबर्हण के साथ कर दिया।उन पचास पत्नियों में 'माला' नाम की गंधर्व-कन्या पटरानी और उपबर्हण के प्राणों से भी अधिक प्रिय थी। उपबर्हण अपनी पत्नियों के साथ गंधर्वलोक, नंदनवन और सुमेरु पर्वत की सुंदर कंदराओं में विहार करते हुए राग-रंग और संगीत के आनंद में दिन बिताने लगे। वे अपने पूर्वजन्म के ज्ञान को पूरी तरह भूलकर सांसारिक सुखों में लीन हो गए।
💢एक समय की बात है, परम पावन पुष्कर तीर्थ में महर्षि भृगु के विशाल यज्ञ के अवसर पर समस्त देवता, सिद्ध, गंधर्व और अप्सराएं एकत्र हुईं। वहाँ साक्षात देवाधिदेव महादेव, सृष्टिकर्ता ब्रह्मा और समस्त ऋषि-मुनि विराजमान थे।उस पावन सभा में भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य चरित्रों का गान और कीर्तन आरंभ हुआ।स्वयं भगवान आशुतोष शिव प्रेम में विह्वल होकर तांडव नृत्य करने लगे। महादेव के उस अलौकिक नृत्य के साथ ताल और लय मिलाने के लिए गंधर्व उपबर्हण को संगीत और गायन की सेवा सौंपी गई।उपबर्हण वीणा बजाते हुए गाने लगे। समस्त सभा उस संगीत के प्रवाह में मंत्रमुग्ध हो गई।
💢उसी समय सभा में स्वर्ग की परम सुंदरी अप्सरा 'रंभा' ने प्रवेश किया।रंभा के हाव-भाव और कामुक कटाक्ष को देखकर उपबर्हण का मन विचलित हो गया। उनकी दृष्टि भगवान शिव के दिव्य कीर्तन से हटकर रंभा के रूप-सौंदर्य पर टिक गई।मन में कामवासना का वेग उठते ही उपबर्हण की उंगलियां वीणा पर लड़खड़ा गईं। उन्होंने गाते-गाते ताल और स्वर (लय) को पूरी तरह बिगाड़ दिया!
भगवान के संकीर्तन और महादेव के दिव्य नृत्य के बीच ताल-भंग होना एक असहनीय अपराध था।
💞भगवान शिव का नृत्य रुक गया। सभा में सन्नाटा छा गया।सृष्टिकर्ता ब्रह्माजी ने देखा कि उपबर्हण भगवान के पवित्र कीर्तन को छोड़कर एक अप्सरा को देखकर कामुक हो रहा है और उसने सभा की मर्यादा को कलंकित कर दिया है।ब्रह्माजी की आंखें क्रोध से लाल हो गईं। उन्होंने भरी सभा में गरजते हुए कहा 🎉—अरे दुर्मते! तूने इस पावन भगवद्-सभा में साक्षात महादेव के संकीर्तन का अपमान किया है! काम के वशीभूत होकर तूने ताल और स्वर को भ्रष्ट कर दिया। इसलिए तू अभी, इसी क्षण अपने इस सुंदर गंधर्व शरीर को त्यागकर निर्जीव (मृत) हो जा! और अपने इस पाप के दंडस्वरूप तू अगली योनि में एक शूद्र (दासी) के गर्भ से जन्म लेगा!
💥सूतजी कहते हैं — हे ऋषियो! ब्रह्माजी के मुख से शाप के ये शब्द निकलते ही, एक भीषण आकाशीय वज्रपात जैसी ध्वनि हुई।
उपबर्हण के शरीर से तुरंत प्राण-पखेरू उड़ गए। वह सुंदर गंधर्व अपनी वीणा सहित धरती पर निष्प्राण होकर गिर पड़ा!पति को भरी सभा में अचानक मृत देखकर उसकी पत्नी माला और अन्य उनचास रानियां छाती पीट-पीटकर करुण विलाप करने लगीं। उनके आंसुओं से पुष्कर तीर्थ की भूमि भीग गई।उपबर्हण के निष्प्राण शरीर को गोद में लेकर रानी माला ने यमराज और विधाता को ललकारते हुए सती होने और अपने तपोबल से पति को पुनः जीवित कराने का दृढ़ संकल्प लिया।
🌺‼️जय श्री कृष्णा! 🦚🚩 🌺🙏
🧨🚩⛳💥❤️🕉️🌴🍀🎈🌀🌿
💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
*🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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*💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
*बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
♨️ ⚜️ 🕉🌞 🌞🕉 ⚜🚩*♥️💕💥*अगर ?🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है l
‼️*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏*हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न, रुद्राक्ष, वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे उसके बाद उपयोग करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️






