*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक -7 मार्च 2026*
*🎈 वार- शनिवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈 मास - चैत्र मास*
*🎈 पक्ष - कृष्ण पक्ष,*
*🎈तिथि- चतुर्थी 19:16:37* तत्पश्चात् पंचमी*
*🎈 नक्षत्र - चित्रा 11:14:36* तक तत्पश्चात् स्वाति 👇
*🎈 योग - ध्रुव 31:02:48* तक तत्पश्चात् ध्रुव *
*🎈करण - बालव 19:16:37* तक तत्पश्चात् कौलव*
*🎈राहुकाल -02:14 pm से 03: 42pm(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈चन्द्र राशि- तुला*
*🎈सूर्य राशि- कुम्भ *
*🎈 सूर्योदय - 06:53:30*
*🎈सूर्यास्त - 18:38:30*pm*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:15 ए एम से 06:04 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:23 पी एम से 01:10 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:21 ए एम, मार्च 08 से 01:10 ए एम, मार्च 08*
*🎈 अमृत काल -03:53 ए एम, मार्च 08 से 05:38 ए एम, मार्च 08*
*🎈 सर्वार्थ सिद्धि योग- 11:15 ए एम से 06:52 ए एम, मार्च 08*
*🎈 व्रत एवं पर्व व्रत चतुर्थी व्रत*
*🎈विशेष चैत्र मास महात्म्य *
🙏 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🙏
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*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*
🛟
*🛟चोघडिया, रात्🛟*
*🛟
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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🌹🙏 ।। जय श्रीराम।।
चतुर्थी की रात्रि में सिद्ध होने वाला श्री गणपति वीर शाबर मंत्र🌺
चतुर्थी तिथि को चंद्रोदय के समय भगवान गणपति की एक अत्यंत प्राचीन और प्रभावशाली शाबर साधना की जाती है। तांत्रिक परंपराओं में इसे गणपति वीर साधना कहा जाता है।
यह मंत्र लोकपरंपरा और नाथ-तांत्रिक साधना में प्रचलित है और कहा जाता है कि श्रद्धा व नियम से जप करने पर साधक की मनोकामना शीघ्र पूर्ण होती है।
इस साधना में गणपति को वीर रूप में स्मरण किया जाता है। यह रूप साधक के मार्ग की बाधाओं को नष्ट करता है, भय को दूर करता है और इच्छित फल प्राप्त करने में सहायक माना जाता है।
गणपति वीर शाबर मंत्र
ॐ गनपत वीर, भूखे मसान,
जो फल माँगूँ, सो फल आन।
गनपत देखे, गनपत के छत्र से बादशाह डरे।
राजा के मुख से प्रजा डरे, हाथा चढ़े सिन्दूर।
औलिया गौरी का पूत गनेश, गुग्गुल की धरुँ ढेरी,
रिद्धि-सिद्धि गनपत धनेरी।
जय गिरनार-पति।
ॐ नमो स्वाहा।
साधना का संक्षिप्त विधान
चतुर्थी की रात जब चंद्रमा उदित हो जाए तब स्नान करके स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें।
गणपति की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक और धूप प्रज्वलित करें।
गुग्गुल की धूप विशेष रूप से इस साधना में उपयोगी मानी जाती है।
इसके बाद गणपति को सिंदूर अर्पित कर इस मंत्र का 108 बार जप करें।
मन में जिस फल या कार्य की इच्छा हो उसे स्पष्ट भाव से गणपति के सामने प्रार्थना में रखें।
साधना से मिलने वाले लाभ
इस मंत्र को तांत्रिक परंपरा में मनोकामना पूर्ति, कार्य सिद्धि, बाधा निवारण और साहस की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि गणपति वीर साधक के मार्ग में आने वाली अदृश्य बाधाओं को हटाते हैं और उसके कार्यों को सरल बनाते हैं।
सावधानी
शाबर मंत्र लोकपरंपरा के शक्तिशाली मंत्र होते हैं। इन्हें श्रद्धा, संयम और शुद्ध भाव से ही जपना चाहिए।
किसी को हानि पहुँचाने या गलत उद्देश्य से प्रयोग करना तांत्रिक नियमों के विरुद्ध माना गया है।
🙇#जयश्रीसीताराम 🙇
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. 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
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*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
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