*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक 25 अप्रैल 2026*
*🎈 वार- शनिवार *
*🎈 मास - वैशाख मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि -नवमी 18:27:27*तत्पश्चात्
दशमी*
*🎈 नक्षत्र - आश्लेषा 20:03:52* तक तत्पश्चात् मघा *
*🎈योग - गण्ड 23:42:18* तक तत्पश्चात् वृद्वि*
*🎈करण - बालव 06:50:07 तक तत्पश्चात् कौलव*
*🎈राहुकाल - 09:18am से 10:55 am (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि - कर्क * till 20:03:52
*🎈चन्द्र राशि- सिंह from 20:03:52*
*🎈सूर्य राशि - *मेष *
*🎈 सूर्योदय - 06:03:47*
*🎈 सूर्यास्त - 19:03:00*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:34 ए एम से 05:18 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:07 पी एम से 12:59 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:11 ए एम, अप्रैल 26 से 12:55 ए एम, अप्रैल 26*
*🎈 अमृत काल- 06:29 पी एम से 08:04 पी एम*
*🎈 अमृत सिद्धि योग- 08:57 पी एम से 06:03 ए एम, अप्रैल 24*
*🎈रवि योग- पूरे दिन*
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण- नवमी व्रत आज होगा (मासिक व्रत )
*🎈विशेष - विशेष - नवमी के पवित्र अवसर पर सात्विकता बनाए रखने के लिए मांसाहार, शराब, प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक भोजन का सेवन न करें। इस दिन शुद्धता का विशेष महत्व है, इसलिए घर में बना सादा और शुद्ध भोजन ही करें। इसके साथ ही, अंधेरे में न रहने और क्रोध/कलह से बचने की भी सलाह दी जाती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- वैशाख मास महात्म्य *
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💥सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💥मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💥सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💥धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
💥रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
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🌹🌿 🔱#कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध को रोकने के लिए भगवान कृष्ण शांतिदूत बनकर हस्तिनापुर गए थे। दुर्योधन ने कृष्ण को प्रभावित करने के लिए बहुत बड़ी तैयारी की थी। उसने सोने की थालियों में छप्पन प्रकार के व्यंजन बनवाए और सोचा कि कृष्ण इन सुख-सुविधाओं से प्रसन्न हो जाएंगे।
जब कृष्ण सभा में पहुँचे, तो दुर्योधन ने उन्हें भोजन के लिए आमंत्रित किया। लेकिन कृष्ण ने बड़ी विनम्रता और स्पष्टता से कहा
"दुर्योधन, भोजन के केवल दो कारण होते हैं—या तो खिलाने वाले के मन में प्रेम हो, या खाने वाले को बहुत भूख हो। यहाँ न तो तुम्हें मुझसे प्रेम है और न ही मुझे भूख है। इसलिए तुम्हारा यह अहंकारी भोजन मुझे स्वीकार नहीं।"
दुर्योधन के राजमहल को छोड़कर कृष्ण सीधे महात्मा विदुर के घर पहुँचे। विदुर जी उस समय घर पर नहीं थे, केवल उनकी पत्नी सुलभा (विदुरानी) घर पर थीं। जब उन्होंने देखा कि साक्षात द्वारिकाधीश उनके द्वार पर खड़े हैं, तो वे सुध-बुध खो बैठीं।
वे इतनी भावुक हो गईं कि उन्हें समझ नहीं आया कि भगवान का स्वागत कैसे करें। उनके पास न तो बैठने के लिए कोई कीमती आसन था और न ही खिलाने के लिए कोई पकवान।
विदुरानी जी ने भगवान को बिठाया और घर में रखे हुए कुछ केले लेकर आईं। भगवान कृष्ण ने कहा, "काकी, मुझे बड़ी भूख लगी है, जल्दी से कुछ खाने को दो।"
भगवान की भूख का सुनकर विदुरानी और भी व्याकुल हो गईं। वे कृष्ण के चेहरे को एकटक निहारते हुए केले छीलने लगीं। प्रेम की अतिशयता और तल्लीनता में उन्होंने केला तो फेंक दिया और छिलका कृष्ण के हाथ में दे दिया।
भगवान कृष्ण भक्त के उस प्रेममयी पागलपन को देख रहे थे। उन्होंने बिना कुछ कहे बड़े चाव से वह छिलका खाना शुरू कर दिया। वे ऐसे खा रहे थे जैसे उन्होंने इससे अधिक स्वादिष्ट वस्तु कभी चखी ही न हो।
इतने में विदुर जी घर आए और यह दृश्य देखकर चौंक गए। उन्होंने चिल्लाकर कहा, "अरी ओ पगली! यह तू क्या कर रही है? साक्षात भगवान को केले के छिलके खिला रही है!"
विदुरानी होश में आईं और अपनी भूल पर लज्जित होकर रोने लगीं। विदुर जी ने तुरंत केले का गूदा (फल) कृष्ण की ओर बढ़ाया। कृष्ण ने एक ग्रास खाया और मुस्कुराकर कहा:
"विदुर जी, इस केले में वह स्वाद कहाँ, जो काकी के उन छिलकों में था! वह छिलके केवल छिलके नहीं थे, वे शुद्ध प्रेम में डूबे हुए थे।"
यह कथा हमें 'प्रेम-लक्षणा भक्ति' का परिचय देती है।
निष्कपटता: भगवान को दिखावा पसंद नहीं है।
शरणागति: विदुरानी के पास कुछ नहीं था, लेकिन जो था (प्रेम), वह पूर्ण था।
ईश्वर का स्वभाव: भगवान भक्तों के दोष नहीं देखते, वे केवल उनके हृदय के भाव को ग्रहण करते हैं।
इसीलिए भक्त गाते हैं:
* "सबसे ऊँची प्रेम सगाई, दुर्योधन की मेवा त्यागी, साग विदुर घर खाई।"
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🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹। 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱🔥🔱




