*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक 26 अप्रैल 2026*
*🎈 वार- रविवार *
*🎈 मास - वैशाख मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि -दशमी 18:06:20*तत्पश्चात्* एकादशी*
*🎈 नक्षत्र - मघा 20:26:13* तक तत्पश्चात् पूर्व फाल्गुनी *
*🎈योग - वृद्वि 22:26:49* तक तत्पश्चात् ध्रुव*
*🎈करण - वणिज 06:07:15 तक तत्पश्चात् विष्टि भद्र*
*🎈राहुकाल - 05:am से 07:04 am (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि- सिंह*
*🎈सूर्य राशि - *मेष*
*🎈 सूर्योदय - 06:02:00*
*🎈 सूर्यास्त - 19:04:06*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:33 ए एम से 05:17 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:07 पी एम से 12:59 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:11 ए एम, अप्रैल 27 से 12:54 ए एम, अप्रैल 27*
*🎈 अमृत काल- 06:01 पी एम से 07:38 पी एम*
*🎈 अमृत - 08:57 पी एम से 06:03 ए एम, अप्रैल 24*
*🎈रवि योग- 06:01 ए एम से 08:27 पी एम*
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण- दशमी व्रत आज होगा (मासिक व्रत )
*🎈विशेष - विशेष - दशमी के पवित्र अवसर पर सात्विकता बनाए रखने के लिए मांसाहार, शराब, प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक भोजन का सेवन न करें। इस दिन शुद्धता का विशेष महत्व है, इसलिए घर में बना सादा और शुद्ध भोजन ही करें। इसके साथ ही, अंधेरे में न रहने और क्रोध/कलह से बचने की भी सलाह दी जाती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- वैशाख मास महात्म्य *
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💥सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💥मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💥सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💥धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
💥रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
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🌹🌿 🔱#जब माता #पार्वती ने #महादेव से उनके गले में मौजूद मुंडों का रहस्य जान लिया, तब उन्होंने अमर होने की इच्छा प्रकट की। इसी के फलस्वरूप महादेव ने उन्हें #अमर_कथा सुनाई..
माता पार्वती के हठ करने पर भगवान शिव उन्हें #अमरत्व_का_ज्ञान देने के लिए तैयार हुए। उन्होंने एक ऐसे स्थान का चयन किया जहाँ कोई अन्य जीव उस गोपनीय कथा को न सुन सके। इसके लिए उन्होंने #अमरनाथ गुफा को चुना।
गुफा की ओर जाते समय महादेव ने अपने सभी आभूषणों और गणों का त्याग किया (जैसे नंदी को पहलगाम में, चंद्रमा को चंदनवाड़ी में और सर्पों को शेषनाग झील पर छोड़ा)।
गुफा में प्रवेश कर महादेव ने चारों ओर अग्नि प्रज्वलित कर दी ताकि कोई भी जीवित प्राणी अंदर न आ सके।
कथा शुरू होने से पहले, गुफा के भीतर एक सुख चुके पेड़ के खोखल में एक तोते का अंडा पड़ा था। महादेव की उपस्थिति और वहां की ऊर्जा से वह अंडा फूट गया और उसमें से एक छोटा सा शुक (तोता) निकला। अग्नि के घेरे के कारण वह बाहर नहीं जा सका और चुपचाप वहीं छिपा रहा।
महादेव ने माता पार्वती को अमर कथा (ब्रह्म ज्ञान) सुनाना शुरू किया। कथा बहुत लंबी थी। सुनते-सुनते माता पार्वती को थकान महसूस हुई और वे गहरी निद्रा में सो गईं।
महादेव को लगा कि माता कथा सुन रही हैं क्योंकि बीच-बीच में "हुंकारी" (हूँ-हूँ की आवाज) सुनाई दे रही थी।
वास्तव में, वह हुंकारी माता पार्वती नहीं, बल्कि वह छोटा तोता 🐦भर रहा था ताकि कथा रुक न जाए।
जब कथा समाप्त हुई, तब महादेव ने देखा कि पार्वती जी तो सो रही हैं। उन्होंने आश्चर्य से पूछा कि "फिर हुंकारी कौन भर रहा था?" तभी उनकी दृष्टि उस छोटे तोते पर पड़ी। महादेव क्रोधित हो गए कि एक पक्षी ने अमर कथा सुन ली है। वे उसे मारने के लिए दौड़े।
वह तोता अपनी जान बचाकर भागा और सीधे महर्षि #वेदव्यास जी के आश्रम पहुँचा।
वहां व्यास जी की पत्नी वाटिका जम्हाई ले रही थीं। वह छोटा तोता सूक्ष्म रूप धारण कर उनके मुख के रस्ते उनके गर्भ में प्रविष्ट हो गया।
वह बालक १२ वर्षों तक गर्भ से बाहर नहीं आया क्योंकि उसे डर था कि बाहर आते ही वह माया के जाल में फंस जाएगा।
स्वयं भगवान #कृष्ण के आश्वासन के बाद वह बालक बाहर आया, जो आगे चलकर महान ज्ञानी महर्षि #शुकदेव कहलाए।
चूंकि शुकदेव जी ने भगवान #शिव के मुख से स्वयं अमर कथा सुनी थी, इसलिए वे जन्म से ही आत्मज्ञानी और माया से मुक्त थे। उन्होंने ही बाद में राजा परीक्षित को #श्रीमद्भागवत_महापुराण की कथा सुनाई थी।
🌿ॐ नमो नारायणाय
🙏हर हर महादेव🌿
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🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹। 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
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