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पञ्चाङ्ग 22 अप्रैल 2026

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

jyotis


*🎈दिनांक 22 अप्रैल 2026*
*🎈 वार-  बुधवार *
*🎈 मास - वैशाख मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर    पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि    -षष्ठी    22:48:59*तत्पश्चात्
सप्तमी    *
*🎈 नक्षत्र -     आद्रा    22:12:07* तक  तत्पश्चात्         पुनर्वसु    *
*🎈योग    -     अतिगंड    09:07:21*तक तत्पश्चात्     सुकर्मा*
*🎈करण    -     कौलव    12:00:41 तक तत्पश्चात्
तैतुल *
*🎈राहुकाल -12:34 pm से 02:11pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि    -   मिथुन    *
*🎈सूर्य राशि     - *मेष    "
*🎈 सूर्योदय -   06:05:37*
*🎈 सूर्यास्त -        19:01:55* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- उत्तर दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:36 ए एम से 05:20 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त-  कोई नहीं*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:11 ए एम, अप्रैल 23 से 12:55 ए एम, अप्रैल 23*
*🎈 अमृत काल-    12:57 पी एम से 02:26 पी एम*
*🎈  रवि योग    -06:04 ए एम से 10:13 पी एम*
*🎈 अमृत सिद्धि योग    02:08 ए एम, अप्रैल 21 से 06:05 ए एम, अप्रैल 21*

 *🎈 व्रत एवं पर्व विवरण-  पंचमी व्रत आज होगा (मासिक व्रत )
*🎈विशेष - विशेष - पंचमी के पवित्र अवसर पर सात्विकता बनाए रखने के लिए मांसाहार, शराब, प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक भोजन का सेवन न करें। इस दिन शुद्धता का विशेष महत्व है, इसलिए घर में बना सादा और शुद्ध भोजन ही करें। इसके साथ ही, अंधेरे में न रहने और क्रोध/कलह से बचने की भी सलाह दी जाती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- वैशाख मास महात्म्य *
 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा    गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी    💥सेनाधिपति    चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💥मन्त्री    मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी    धान्याधिपति    बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💥सस्याधिपति    गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी    मेघाधिपति    चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💥धनाधिपति    गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी    नीरसाधिपति    गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
💥रसाधिपति    शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी    फलाधिपति    चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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        🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
         *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day




       🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
         💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺

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🌹🌿    🔱हमारे प्राचीन ऋषि जिन शब्दों को उच्चारित करते थे वे तुरंत फल देते थे। इसका राज था वाक शुद्धि। उसी प्राचीन भारतीय विज्ञान को समझते हैं जो शब्दों को सृष्टि का मजबूत आदेश बना सकता है। 
वेदों और उपनिषदों में वाक को ब्रह्म की शक्ति माना गया है।
ऋग्वेद के वाक सूक्त में देवी वाक स्वयं कहती हैं कि वे ब्रह्मांड को धारण करती हैं।
 मांडूक्य उपनिषद में ओमकार को ब्रह्मांड का आधार बताया गया है।
 विज्ञान भैरव तंत्र में शिव पार्वती को बताते हैं कि शुद्ध वाक से शब्द पत्थर की लकीर बन जाते हैं।
वाक शुद्धि में जीभ को तालु से स्पर्श करने की प्रक्रिया खेचरी मुद्रा से प्रेरित है। 
प्राचीन ग्रंथों में इसे 72000 नाड़ियों को संरेखित करने और पीनियल ग्लैंड को सक्रिय करने वाला बताया गया है। 
आधुनिक विज्ञान भी जीभ की स्थिति के प्रभावों का अध्ययन कर रहा है।
वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि जीभ को तालु (roof of the mouth) पर रखने से पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होता है। इससे हृदय गति और तनाव कम होता है।
 कुछ शोध vagus nerve के माध्यम से रिलैक्सेशन बढ़ने का संकेत देते हैं।
एक अध्ययन में जीभ की स्थिति, अनिवार्य मांसपेशी गतिविधि और हृदय गति परिवर्तनशीलता का परीक्षण किया गया।
 तालु पर जीभ रखने से शरीर में रिलैक्सेशन संबंधी बदलाव देखे गए।
 इससे न्यूरोप्लास्टिसिटी प्रभावित हो सकती है जो आदतों और सोच को बदलने में मदद करती है।
ध्यान और मुद्राओं से संबंधित शोध में पीनियल ग्लैंड की अखंडता बढ़ने और मेलाटोनिन जैसे हार्मोन के प्रभाव का उल्लेख है। कुछ योग अध्ययनों में खेचरी जैसी प्रैक्टिस से सेरोटोनिन स्तर बढ़ने और मूड बेहतर होने की बात कही गई है।
परीक्षण की पुष्टि और शब्दों का प्रभाव वैज्ञानिक रूप से भी देखा गया है। शोध में आत्म-पुष्टि से मस्तिष्क के स्व-प्रसंस्करण क्षेत्र सक्रिय होते हैं।
 इससे व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आते हैं और तनाव कम होता है। 
न्यूरोप्लास्टिसिटी के जरिए पुरानी नेगेटिव पैटर्न टूट सकते हैं।
आधुनिक जीवन में 2 मिनट की सरल प्रैक्टिस: शांत जगह पर बैठें। रीढ़ सीधी रखें। आंखें बंद करें। गहरी सांस लें और जीभ को पीछे मोड़कर तालु से स्पर्श करें।
 जब हल्का कंपन महसूस हो तो “अहं ब्रह्मास्मि” या “मैं यूनिवर्स की उच्चतम ऊर्जा से जुड़ा हूं” का जाप करें।
इसे रात 11 या सुबह ब्रह्म मुहूर्त 3:40 पर करें। 21 दिनों तक निरंतर अभ्यास से मस्तिष्क की न्यूरोप्लास्टिसिटी प्रभावित हो सकती है। प्राचीन शास्त्र और आधुनिक शोध दोनों ही शुद्ध वाक और सकारात्मक कंपन के महत्व को रेखांकित करते हैं।
वेदों का संदेश है कि शुद्ध वाक से असंभव भी संभव हो जाता है। प्राचीन ज्ञान और विज्ञान दोनों ही बताते हैं कि हमारे शब्द और उनकी डिलीवरी हमारी वास्तविकता को आकार दे सकते हैं। अपनी जिंदगी का नया अध्याय शुरू करें।
मांडूक्य उपनिषद में ओंकार को पूरे ब्रह्मांड का प्रतीक बताया गया है। यह चार अवस्थाओं का वर्णन करता है और बताता है कि ध्वनि और कंपन ही चेतना का आधार हैं। 
जब जीभ तालु से जुड़ती है तो शरीर की 72000 नाड़ियां एक साथ संरेखित होती हैं और पीनियल ग्लैंड सक्रिय होता है।
योग कुंडलिनी उपनिषद और अन्य तंत्र ग्रंथों में खेचरी मुद्रा का वर्णन है।
 जीभ को पीछे मोड़कर तालु से स्पर्श करने से अमृत की धारा बहती है, प्राण शक्ति जागृत होती है और चेतना उच्च आयामों से जुड़ती है। यह मुद्रा ब्रह्म को जानने का प्राचीन मार्ग है।
विज्ञान भैरव तंत्र में भगवान शिव माता पार्वती को बताते हैं कि जीभ का तालु से संपर्क एक शक्तिशाली मुद्रा है। इससे साधक की चेतना ब्रह्मांड की ऊर्जा से जुड़ जाती है। शिव कहते हैं कि शुद्ध वाक वाले व्यक्ति के शब्द पत्थर की लकीर बन जाते हैं।
वाक की चार अवस्थाएं हैं - परा, पश्यंती, मध्यमा और वैखरी। वेदांत और भरतहरि के वाक्यपदीय में इनका विस्तार से वर्णन है।
 जब वाक शुद्ध होती है तो परा अवस्था से सीधा manifestation होता है। नेगेटिव बोलने से वाक अशुद्ध हो जाती है और सिग्नल कमजोर पड़ जाता है।
प्राचीन भारतीय शास्त्रों में कहा गया है कि वाक सिद्धि पाने वाला व्यक्ति जो बोलता है वह सच हो जाता है। क्योंकि उसके शब्द क्वांटम क्षेत्र में मजबूत कंपन बनाते हैं। 
ऋषियों की यही शक्ति थी जिससे उनके वचन तुरंत फलित होते थे।
यूनिवर्स आपके शब्दों को नहीं, आपकी शुद्ध कंपन और भावना को सुनता है। प्राचीन वेदों और उपनिषदों का यही संदेश है - शुद्ध वाक से असंभव भी संभव हो जाता है।
आधुनिक जीवन में 2 मिनट की सरल प्रैक्टिस: 
शांत जगह पर बैठें, रीढ़ सीधी रखें, आंखें बंद करें। गहरी सांस लें और जीभ को पीछे मोड़कर तालु से स्पर्श करें। जब हल्का कंपन महसूस हो तो “अहं ब्रह्मास्मि” या “मैं यूनिवर्स की उच्चतम ऊर्जा से जुड़ा हूं” का जाप करें।
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🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹।      💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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🙏हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ  🇪🇬🔱🔥🔱
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