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आज का पञ्चाङ्ग

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

jyotis


*🎈दिनांक  25 मई 2026*
*🎈 वार-  सोमवार*
*🎈 मास - अधिक ज्येष्ठ मास प्रारंभ*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर    पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि    -    दशमी    29:10:18*तत्पश्चात्* एकादशी*
*🎈 नक्षत्र -  उत्तर फाल्गुनी    28:07:51* तत्पश्चात् हस्त*
*🎈योग    -     वज्र    27:14:20* तक तत्पश्चात्     सिद्वि*
*🎈करण    - तैतुल    16:46:00* तक तत्पश्चात् गर*
*🎈राहुकाल -05:38pm से 07:20pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि-    सिंह    till 09:06:20
*🎈चन्द्र राशि-      कन्या    from 09:06:20*
*🎈सूर्य राशि-       वृषभ    *
*🎈 सूर्योदय -   05:43:55*
*🎈 सूर्यास्त -        19:20:26* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:20 ए एम से 05:01 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त-  12:05 पी एम से 12:59 पी एम*
*🎈अमृत काल-    08:33 पी एम से 10:14 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:11 ए एम, मई 26 से 12:53 ए एम, मई 26*
*🎈रवि योग- पूरे दिन*

 *🎈 व्रत एवं पर्व विवरण. दशमी व्रत  (मासिक व्रत )*
*🎈विशेष - ब्रह्म वैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, दशमी तिथि के दिन कलम्बी (कलमी/करेमू) का साग खाने की मनाही होती है。मान्यता है कि इस तिथि पर इस विशेष पत्तेदार सब्जी का सेवन करने से बचना चाहिए।
*🎈विशेष:- अधिक जेष्ठ मास महात्म्य *
 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा    गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी    💢सेनाधिपति    चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री    मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के 💢स्वामी    धान्याधिपति    बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति    गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी    
🛟मेघाधिपति    चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति    गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी    नीरसाधिपति    
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति    शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी    फलाधिपति    
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
kundli


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        🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
         *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day




           🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
         💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺

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🔱🌹🌸💢 हनुमान चालीसा, प्राणायाम का उच्च स्तर और अष्टसिद्धि विज्ञान 💢🔱
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🔱क्या आप जानते हैं कि हनुमान चालीसा केवल एक पारंपरिक भक्ति पाठ नहीं, बल्कि 'प्राण विद्या', क्वांटम थ्योरी, सूर्य विज्ञान और नाद योग (Sound Yoga) का एक अत्यंत गूढ़ विज्ञान है? हनुमान जी स्वयं 'पवनपुत्र' हैं, जिनका सीधा संबंध हमारे शरीर की 'प्राण वायु' (Breath) और उसकी परम क्षमताओं से है।
💥​जब कोई उच्च कोटि का योगी, प्राणायाम सिद्ध साधक या महान कलाकार हनुमान चालीसा या इससे जुड़े सूत्रों को प्रकट करता है, तो ध्वनि तरंगें सीधे हमारे डीएनए (DNA) और चक्रों को प्रभावित करती हैं। आइए गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा वर्णित अष्टसिद्धियों (अणिमा-गरिमा), सूर्यग्राही विज्ञान और भारत की महान विभूतियों के चश्मे से इसका एक गहरा विश्लेषण करते हैं।
​🔬 1. अणिमा सिद्धि: सूक्ष्मता और शून्यता का विज्ञान (The Law of Ultimate Contraction)
🌺​"सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥"🌺
​जब हनुमान जी लंका में माता सीता से मिलने गए, तो उन्होंने 'अणिमा' रूप धारण किया—यानी वे एक अणु (Atom) से भी छोटे सूक्ष्म रूप में आ गए।
🌺​प्राणायाम का स्तर (The Exhalation Mastery): अणिमा का सीधा संबंध प्राणायाम की 'रेचक' (Complete Exhalation) और 'बाह्य कुंभक' (सांस को पूरी तरह बाहर निकालकर रोक देना) से है। जब फेफड़ों से पूरी हवा बाहर निकल जाती है, तो शरीर के भीतर का कार्बन और अहंकार शून्य होने लगता है।
​क्वांटम फिजिक्स और मन की अवस्था: आधुनिक विज्ञान कहता है कि एक परमाणु (Atom) का 99.999% हिस्सा खाली (Empty Space) होता है। अणिमा का अर्थ है—अपने भीतर की उस शून्यता (Pure Consciousness) से जुड़ जाना।
🌺​दैनिक जीवन में इसका लाभ: जब आप प्राणायाम के माध्यम से अपने भीतर अणिमा के गुण को जाग्रत करते हैं, तो आपका मन 'एकाग्र' और 'इतना सूक्ष्म' हो जाता है कि आप जटिल से जटिल समस्याओं के मूल कारण (Root Cause) को आसानी से देख लेते हैं। यह आपके फोकस को लेजर जैसी सटीकता देता है।
​⛰️ 2. गरिमा सिद्धि: गुरुत्व और अचल संकल्प का विज्ञान (The Law of Cosmic Density)
🌺​"भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे॥"🌺
​गरिमा सिद्धि का अर्थ है—अपने शरीर के भार (Weight) और घनत्व (Density) को इतना बढ़ा लेना कि ब्रह्मांड की कोई भी शक्ति आपको हिला न सके। महाभारत में भीम जैसा बलशाली वीर भी हनुमान जी की पूंछ तक नहीं उठा पाया था।
🌺​प्राणायाम का स्तर (The Inhalation Mastery): गरिमा का संबंध प्राणायाम की 'पूरक' (Deep Inhalation) और 'आंतरिक कुंभक' (सांस को पूरी तरह अंदर भरकर रोक लेना) से है। जब प्राण वायु को फेफड़ों में पूरी क्षमता के साथ भरकर मूलाधार और मणिपुर चक्र पर लॉक (बंध) किया जाता है, तो शरीर के भीतर एक 'ऊर्जा केंद्र' बनता है जो गुरुत्वाकर्षण (Gravity) की तरह काम करता है।
🌺​न्यूरोसाइंस और आत्मबल: जब शरीर में प्राण का घनत्व बढ़ता है, तो नर्वस सिस्टम अत्यंत मजबूत हो जाता है। इसे 'बायो-इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेट' कहते हैं।
​दैनिक जीवन में इसका लाभ: गरिमा सिद्धि का मानसिक रूपांतरण है—'अचल संकल्प'। जिस साधक के भीतर यह ऊर्जा जाग्रत होती है, विपरीत परिस्थितियां, डिप्रेशन, मानसिक तनाव या दुनिया का कोई भी डर उसे अपनी जगह से डिगा नहीं सकता। वह हर संकट के सामने 'हिमालय' की तरह अडिग खड़ा रहता है।
​☀️ 3. सूर्यग्राही विज्ञान: प्राण का महा-ब्रह्मांडीय संकर्षण
🌺​"जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥"🌺
​हनुमान चालीसा की यह चौपाई केवल सूर्य की दूरी (Earth to Sun Distance) का सटीक प्रमाण नहीं है, बल्कि यह 'सूर्यग्राही प्राणायाम' का गुप्त सूत्र है।
​पिंगला नाड़ी (Solar Energy): हमारे दाहिने स्वर को 'सूर्य स्वर' कहा जाता है। हनुमान जी द्वारा सूर्य को निगलने का आध्यात्मिक अर्थ है—ब्रह्मांड की संपूर्ण तापीय और जीवनी शक्ति (Solar Energy) को प्राणायाम के माध्यम से अपने भीतर आत्मसात कर लेना।
​सूर्यग्राही अवस्था: जब साधक सूर्य स्वर को जाग्रत करके कुंभक लगाता है, तो उसके भीतर अदम्य साहस, तेज (Radiance) और असाधारण जीवनी शक्ति का संचार होता है। यही 'सूर्यग्राही' विज्ञान है, जो बुढ़ापे और बीमारियों को भस्म कर देता है।
🌺​🎵 उच्च प्राणायाम और नाद-योग के महा-साधक (The Masters of Breath & Energy)
​इस प्राण विद्या और नाद-योग को समझने के लिए हमें इन अद्वितीय महापुरुषों और कला-साधकों के श्वास-नियंत्रण को देखना होगा:
🌺​पंडित जसराज (मेवाती घराना): शास्त्रीय संगीत के सूर्य। इनका श्वास नियंत्रण आध्यात्मिक स्तर का था। जब वे हनुमान स्तवन या कृष्ण भजनों में 'मूर्छना' और लंबे आलाप लेते थे, तो आंतरिक कुंभक की वजह से ऐसा लगता था मानो समय ठहर गया हो। उनकी आवाज सीधे आज्ञा चक्र पर चोट करती है।
​पंडित हरिप्रसाद चौरसिया (बांसूरी सम्राट): बांसुरी वादन पूरी तरह से 'महा-प्राणायाम' है। बिना एक भी शब्द बोले, केवल फूंक (Breath Control) के जरिए तीन-तीन घंटे तक रागों की रचना करना और चक्रों को जाग्रत कर देना, यह केवल वही योगी कर सकता है जिसने अपनी वायु (प्राण) पर पूर्ण विजय प्राप्त कर ली हो।
🌺​सूर्यगायत्री (Sooryagayatri): आध्यात्मिक संगीत की नई और सबसे दिव्य युवा आवाज। सूर्यगायत्री के भजनों और हनुमान चालीसा में जो ठहराव (Stability) और स्वरों की शुद्धता है, वह उनकी गहरी 'कंठ और नाभि साधना' को दर्शाती है। बिना किसी उतावलेपन के, बहुत ही शांत और नियंत्रित श्वास के साथ गाकर वे सुनने वाले के मन को तुरंत ध्यान (Meditative State) में उतार देती हैं। उनकी गायकी प्राण वायु को पूरी तरह स्थिर करने का आधुनिक उदाहरण है।
🌺​सुभद्रा कुमारी चौहान (वीर रस की चेतना): हनुमान चालीसा में जो 'वीर रस' है, उसे काव्य में उतारने वाली महाकवियित्री। वीर रस की कविताओं का पाठ करने के लिए 'सिंह गर्जना' (Throat & Navel Activation) की आवश्यकता होती है, जो बिना उच्च प्राण बल के संभव ही नहीं है।
​पंडित छन्नूलाल मिश्रा (बनारस घराना): इनका नाभि (मणिपुर चक्र) से उठने वाला स्वर और फेफड़ों का बल (Lung Capacity) अद्भुत है। उच्च पिच (High Pitch) पर भी बिना सांस तोड़े स्पष्ट और शुद्ध उच्चारण करना इनके नाद-योग को सिद्ध करता है।
🌺​शंकर महादेवन: कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के उस्ताद, जो अपनी 'Breathless' गायकी के लिए प्रसिद्ध हैं। हनुमान चालीसा में जो तीव्र वेग, गति और प्राण-ऊर्जा उन्होंने फूंकी है, वह शरीर के सुप्त तंतुओं को जाग्रत कर देती है।
💥​💡 मुख्य संदेश (The Key Takeaway)
​हनुमान चालीसा का पाठ केवल होठों से शब्दों को दोहराना नहीं है। जब आप प्राणायाम सिद्ध गायकों, चौरसिया जी की बांसुरी के स्वर, सूर्यगायत्री की दिव्य वाणी या सुभद्रा कुमारी जी जैसी वीर रस की चेतना के साथ जुड़ते हैं, तो उनके शब्दों और धुनों के पीछे का 'प्राण बल' (Pranic Frequency) आपके भीतर सोई हुई अणिमा (Focus), गरिमा (Mental Strength) और सूर्यग्राही तेज (Divine Radiance) को एक्टिवेट कर देता है। ​📢 ​📍 

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹।      💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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🙏हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
Vipul


*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ  🇪🇬🔱🔥🔱🌿

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