*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक 08 जून 2026*
*🎈 वार-सोमवार*
*🎈 मास - अधिक ज्येष्ठ मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि - अष्टमी 27:23:07**
*तत्पश्चात्*नवमी*
*🎈 नक्षत्र - शतभिष 09:08:54* तत्पश्चात् पूर्व भाद्रपद*
*🎈योग - विश्कुम्भ 09:27:06* तक तत्पश्चात् प्रीति*
*🎈करण - बालव 15:29:22* तक तत्पश्चात् कौलव*
*🎈राहुकाल -07:25pm से 09:08pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि- कुम्भ *till 27:35:37*
*🎈चन्द्र राशि- मीन from 27:35:37*
*🎈सूर्य राशि- वृषभ *
*🎈 सूर्योदय - 05:41:19*
*🎈 सूर्यास्त - 19:27:11*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:18 ए एम से 04:59 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:07 पी एम से 01:02 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:14 ए एम, जून 09 से 12:55 ए एम, जून 09*
*🎈 अमृत काल- 01:29 ए एम, जून 09 से 03:07 ए एम, जून 09*
*🎈 द्वितीय पञ्चक - पूरे दिन*
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण. ब्रह्म वैवर्त पुराण (विशेषकर ब्रह्म खंड अध्याय 27) के अनुसार, अष्टमी तिथि के दिन भूलकर भी नारियल का फल (या नारियल से बनी चीजें) नहीं खाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन नारियल का सेवन करने से बुद्धि का नाश होता है और विवेक कमज़ोर पड़ता है।
*🎈विशेष - धर्म शास्त्रों और पुराणों (विशेषकर ब्रह्म वैवर्त पुराण) के अनुसार, तिल का तेल: अष्टमी, चतुर्दशी, अमावस्या, पूर्णिमा, संक्रांति, रविवार या किसी भी व्रत के दिन तिल के तेल का सेवन करने और शरीर पर लगाने की सख्त मनाही होती है।
*🎈विशेष:- अधिक जेष्ठ मास महात्म्य *
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💢सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के 💢स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी
🛟मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
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🌺#शंकर_ने_दौड़कर_क्रीड़ा_करती_हुई_मोहिनी_को ज़बरदस्ती पकड़ लिया।महादेव शिव शंकर की तत्कालीन दयनीय अवस्था का चित्र देखना हो तो श्रीमद्भागवत, स्कन्द 8,अध्याय 12, देखने का कष्ट करें जिसमें लिखा है-
आत्मानं मोचयित्वाङग सुरर्षभभजान्तरात्।
प्रादवत्सापृथु श्रोणी माया देवविनिम्र्मता ।। 30 ।।
तस्यासौ पदवीं रूद्रो विष्णोरद्भुत कम्मर्णः।
प्रत्यपदत्तकामेन वैदिणेव निनिर्जितः ।। 31 ।।
तस्यानुधावती रेतश्चल्कन्दार्माघरेतसः।
शुष्मिणो यूथपस्येव वासितामनु धावतः ।। 32 ।।
अर्थात् : हे महाराजा ! तदन्तर देवों में श्रेष्ठ शंकर के दोनों बाहुओं के बीच से अपने को छुड़ाकर वह नारायणनिर्मिता विपुक्ष नितंबिनी माया (मोहिनी) भागचली॥
अपने वैरी कामदेव से मानो परास्त होकरमहादेव जी भी विचित्र चरित्र वाले विष्णु का मायामय मोहिनी रूप के पीछे-पीछे दौड़ने लगे॥
पीछा करते-करते ऋतुमती हथिनी के अनुगामी हाथी की तरह अमोघवीर्य महादेव का वीर्य स्खलित होने लगा॥
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मोहिनी अवतार विभिन्न पुराण मे उल्लेखा
मोहिनीi हिन्दू भगवान विष्णु का एकमात्र स्त्री रूप अवतार है। इसमें उन्हें ऐसे स्त्री रूप में दिखाया गया है जो सभी को मोहित कर ले। उसके प्रेम में वशीभूत होकर कोई भी सब भूल जाता है, चाहे वह भगवान शिव ही क्यों न हों। इस अवतार का उल्लेख महाभारत में भी आता है। समुद्र मंथन के समय जब देवताओं व असुरों को सागर से अमृत मिल चुका था, तब देवताओं को यह डर था कि असुर कहीं अमृत पीकर अमर न हो जायें। तब वे भगवान विष्णु के पास गये व प्रार्थना की कि ऐसा होने से रोकें। तब भगवान विष्णु ने मोहिणि अवतार लेकर अमृत देवताओं को पिलाया व असुरों को मोहित कर अमर होने से रोका।
कई विभिन्न कथाओं के अनुसार मोहिनी रूप के विवाह का प्रसंग भी आया है, जिसमें शिव से विवाह व विहार का विशेष विवरण आता है। इसके अलावा भस्मासुर प्रसंग भी प्रसिद्ध है।
सन्दर्भ
धार्मिक ग्रन्थों का संदर्भ
अग्नि पुराण ३.१२ (अमृत वितरण हेतु विष्णु द्वारा मोहिनी रूप धारण, रुद्र की मोहिनी पर आसक्ति व वीर्यपात आदि)
गणेश पुराण २.३९.२० (भस्मासुर द्वारा शिव को मारने की चेष्टा पर विष्णु का मोहिनी रूप में प्रकट होना),
गरुड़ पुराण १.२१.४(वामदेव शिव की १३ कलाओं में से एक),
गर्ग संहिता १०.१७.२०(राजा नारीपाल की पत्नी, नारीपाल का वृत्तान्त),
१०.१७.४६(रानी सुरूपा को पूर्व जन्म का स्मरण : मोहिनी अप्सरा द्वारा तप से सुरूपा रूप में जन्म),
नारद पुराण १.६६.१२७(निरञ्जन की शक्ति मोहिनी का उल्लेख),
१.९१.८०(वामदेव शिव की १२वीं कला),
२.७(राजा रुक्माङ्गद को धर्मपथ से विचलित करने के लिए ब्रह्मा द्वारा
मोहिनी की उत्पत्ति),
२.२३(मोहिनी द्वारा रुक्माङ्गद राजा से एकादशी व्रत न करने का दुराग्रह),
२.३२+ (मोहिनी द्वारा रुक्माङ्गद से पुत्र धर्माङ्गद के मस्तक की मांग),
२.३५+ (देवताओं द्वारा मोहिनी को वरदान की चेष्टा, रुक्माङ्गद - पुरोहित के शाप से मोहिनी का भस्म होना, यम लोक में यातनाएं, दशमी के अन्त भाग में स्थान की प्राप्ति, पुन: शरीर प्राप्ति),
२.८२(वसु ब्राह्मण के उपदेश से मोहिनी द्वारा तीर्थ यात्रा का उद्योग, दशमी तिथि के अन्त भाग में स्थित होना),
पद्म पुराण २.३४.३९(सखियों द्वारा सुनीथा को पुरुष विमोहिनी विद्या का उपदेश),
२.११८(विष्णु द्वारा मोहिनी रूप धारण कर विहुण्ड के विमोहन का वृत्तान्त),
४.१०(समुद्र मन्थन से अमृत उत्पन्न होने पर विष्णु का मोहिनी रूप धारण कर दैत्यों का विमोहन और देवों को अमृत प्रदान),
६.४९(वैशाख शुक्ल मोहिनी एकादशी व्रत का माहात्म्य : धनपाल वैश्य के दुष्ट पुत्र धृष्टबुद्धि की मुक्ति),
६.२२०(मोहिनी वेश्या की प्रयाग जल से मुक्ति, जन्मान्तर में हेमाङ्गी रानी बनना),
ब्रह्मवैवर्त्त पुराण ४.३१+ (मोहिनी का रम्भा से संवाद, काम स्तोत्र, ब्रह्मा से संवाद, ब्रह्मा को शाप),
ब्रह्माण्ड पुराण २.३.४.१०(अमृत वितरणार्थ विष्णु द्वारा धारित मोहिनी रूप पर शिव की आसक्ति),
३.४.१०.२७(मोहिनी अवतार द्वारा देवों को अमृतपान कराने का वर्णन, मोहिनी दर्शन से शिव का वीर्यपात),
३.४.१९.६५(कामदेव की ५ बाण शक्तियों में से एक),
३.४.१९.७४ (गीतिचक्र रथेन्द्र के पञ्चम पर्व पर स्थित १६ शक्तियों में से एक),
भविष्य पुराण ३.२.१८(गौरीदत्त व धनवती - पुत्री, शूली आरोपित चोर से विवाह, प्रहेलिका का अर्थ बताने वाले पण्डित से गर्भ धारण आदि),
भागवत पुराण १.३.१७(विष्णु के २१ अवतारों में १३वें मोहिनी अवतार का उल्लेख),
८.८+ (मोहिनी द्वारा अमृत वितरण का आख्यान),
८.१२(मोहिनी की क्रीडा का वर्णन, मोहिनी द्वारा शिव का मोहन),
मत्स्य पुराण २५१.७(मोहिनी अवतार द्वारा असुरों के मोहन व देवों को अमृत प्रदान का कथन),
वायु पुराण २५.४८(मधु - कैटभ से पीडित होने पर ब्रह्मा के समक्ष मोहिनी माया के प्रकट होने का कथन, ब्रह्मा द्वारा मोहिनी माया के नामकरण, मधु - कैटभ द्वारा मोहिनी से पुत्रत्व वर की प्राप्ति),
२५.५० (महाव्याहृति : ब्रह्मा द्वारा मोहिनी माया को महाव्याहृति नाम प्रदान),
शिव पुराण ३.२०(मोहिनी के रूप से शिव के वीर्य की च्युति, हनुमान का जन्म),
स्कन्द पुराण १.१.१२(मोहिनी रूपी विष्णु द्वारा दैत्यों की अमृतपान से वंचना),
लक्ष्मीनारायण १.९२(मोहिनी रूप धारी विष्णु द्वारा अमृत के वितरण की कथा),
१.१६२.४२(मधु - कैटभ वध हेतु विष्णु द्वारा महामाया की सहायता से मोहिनी रूप धारण),
१.१८४.५८(शिव को समाधि से बाहर लाने के लिए कृष्ण द्वारा मोहिनी रूप धारण, मोहिनी के दर्शन से ब्रह्मा, काम आदि के वीर्य का पतन, कामदेव की सहायता से मोहिनी द्वारा शिव को मोहित करना आदि),
१.१९९.१६(शिव द्वारा दानवों को मोहित करनेv वाली मोहिनी के रूप के दर्शन की इच्छा, मोहिनी के दर्शन से वीर्यपात आदि का वृत्तान्त),
१.२८६.१५(ब्रह्मा द्वारा राजा रुक्माङ्गद के व्रत को भङ्ग करनेv के लिए मोहिनी का सृजन तथा रुक्माङ्गद के प्रति प्रेषण),
१.२८७-२९२(रुक्माङ्गद - मोहिनी आख्यान),
१.५१५.३(ब्रह्मा की मानसी कन्या मोहिनी द्वारा ब्रह्मा के सेवन का हठ, ब्रह्मा द्वारा उपेक्षा पर ब्रह्मा तथा ऋषियों को अपूज्यत्व तथा षण्ढत्व का शाप, षण्ढत्व नाश हेतु मोहिनी की अर्चना का कथन),
२.५७.७८(निद्रा देवी का अपर नाम),
२.२४६.९०(अज्ञानमूलक वृक्ष के रूपक में मोहिनी के रसतृष्णा होने का उल्लेख),
३.१६.८५(व्याघ्रानल असुर के वध हेतु लक्ष्मी द्वारा मोहिनी रूप धारण करना, व्याघ्रानल असुर का मोहिनी को देख जडीभूत होना आदि),
३.१७०.१९(विष्णु के ३३वें धाम के रूप में मोहिनी का उल्लेख),
कथासरित्सागर ८.३.११८(याज्ञवल्क्य ऋषि द्वारा सूर्यप्रभ को मोहिनी विद्या प्रदान करना )
शंकर ने दौड़कर क्रीड़ा करती हुई मोहिनी को ज़बरदस्ती पकड़ लिया।महादेव शिव शंकर की तत्कालीन दयनीय अवस्था का चित्र देखना हो तो श्रीमद्भागवत, स्कन्द 8,अध्याय 12, देखने का कष्ट करें जिसमें लिखा है- आत्मानं मोचयित्वाङग सुरर्षभभजान्तरात्। प्रादवत्सापृथु श्रोणी माया देवविनिम्र्मता ।। 30 ।। तस्यासौ पदवीं रूद्रो विष्णोरद्भुत कम्मर्णः। प्रत्यपदत्तकामेन वैदिणेव निनिर्जितः ।। 31 ।। तस्यानुधावती रेतश्चल्कन्दार्माघरेतसः। शुष्मिणो यूथपस्येव वासितामनु धावतः ।। 32 ।। अर्थात् : हे महाराजा ! तदन्तर देवों में श्रेष्ठ शंकर के दोनों बाहुओं के बीच से अपने को छुड़ाकर वह नारायणनिर्मिता विपुक्ष नितंबिनी माया (मोहिनी) भागचली॥
अपने वैरी कामदेव से मानो परास्त होकरमहादेव जी भी विचित्र चरित्र वाले विष्णु का मायामय मोहिनी रूप के पीछे-पीछे दौड़ने लगे॥
पीछा करते-करते ऋतुमती हथिनी के अनुगामी हाथी की तरह अमोघवीर्य महादेव का वीर्य स्खलित होने लगा॥
शेष भाग ओर है......
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹। 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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