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पञ्चाङ्ग 05 अप्रैल 2026

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

JYOTISH



*🎈दिनांक 05 अप्रैल 2026*
*🎈 वार-  रविवार *
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈 मास - वैशाख मास*
*🎈 पक्ष - कृष्ण पक्ष,*
*🎈तिथि-     तृतीया    11:59:16* तत्पश्चात्
तिथि    चतुर्थी*
*🎈 नक्षत्र -     विशाखा    24:06:58* तक तत्पश्चात्     अनुराधा*
*🎈योग    - वज्र    14:42:47*तक तत्पश्चात् सिद्धि*
*🎈करण    -     विष्टि भद्र    11:59:15* तक तत्पश्चात्  बव होगा।
*🎈राहुकाल -09:31 pm से 11:05 pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि-       तुला    *till 17:27:04
*🎈चन्द्र राशि-       वृश्चिक    from 17:27:04
*🎈सूर्य राशि-       मीन*
*🎈 सूर्योदय -   06:22:50*
*🎈सूर्यास्त -        18:53:02pm* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:51 ए एम से 05:37 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 11:47 पी एम से 12::36 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 11:48 पी एम से 12:35 ए एम, अप्रैल 06*
*🎈 विजय मुहूर्त     -02:04 ए एम से 03:15पी एम*
*🎈 व्रत एवं पर्व-  मासिक व्रत 
*🎈विशेष:- वैशाख मास महात्म्य *
 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा    गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी    💥सेनाधिपति    चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💥मन्त्री    मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी    धान्याधिपति    बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💥सस्याधिपति    गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी    मेघाधिपति    चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💥धनाधिपति    गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी    नीरसाधिपति    गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
💥रसाधिपति    शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी    फलाधिपति    चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी

kundli


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नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।

day

*🛟

  
       *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
          


       🛟चोघडिया, रात्🛟*
night

*🛟 
 
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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
         💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺

👣🕉️ 🌹🌹 🌹🌹।। हनुभैरव ।। 🛑 साधकों के लिए खास पढ़े🛑 

श्री हनुमान जयंती की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। आप सभी ने अभी पिछले दिनों में पूरे दिवसभर श्री हनुमान जी तरह तरह की प्रतिमाएं, और तस्वीरे देखी होंगी, लेकिन हमने सोचा के आप सभी को श्री हनुमान का ऐसा एक रूप के बारे में बताएं जो देख के भी आप सिहर उठे !! 
     ये है "हनुभैरव", यानी जब हनुमान जी भैरव बने.. जिन्होंने रामायण ठीक से अभ्यास किया होगा वो तो हनुभैरव से शायद अवगत होगा ही। नेपाल और तिब्बत की तांत्रिक परम्पराओं में आज भी हनुभैरव को संभाल के रखा है, यह श्री हनुमान जी एक शक्तिशाली तांत्रिक रूप है। जो उन्होंने अहिरावण और महिरावण का वध करने के लिए धरा था। 
    शॉर्ट में कहूं तो..जब रावण के भाई अहिरावण और महिरावण, प्रभु श्री राम लक्ष्मण का अपहरण कर के पाताल लोक ले गए, यह दोनो भाई तंत्र और वामाचार के महान साधक कहलाते थे !! कई विधाओं में पारंगत भी थे और उन्होंने उनकी ईष्ट "पातालचंडी" को श्री राम की बलि देने का तय किया !! 
    अब श्री हनुमान जी वहां पहुंच गए,वे भी श्री चंडी के भक्त थे, पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर के उन्होंने देवी पातालचंडी का विसर्जन कर दिया और खुद वो वेदी पे विराजित हो गए। 
     यह बदलाव से अनजान अहिरावण ने जब वामाचार पूजन शुरू किया तो उसके प्रभाव में श्री हनुमान बन गए हनुभैरव..एक शक्तिशाली तांत्रिक भैरव के रूप में उन्होंने अहिरावण द्वारा दी गई सभी तांत्रिक बलि और नैवध को भी ग्रहण किया। यह धोखा नहीं लेकिन एक महारथ थी। हनुमान ने कर्मकांड के अज्ञान को नही ठुकराया, बल्कि उसको आत्मसात कर लिया, उसके प्रभाव को रोकने के बजाए खुद को उसमे ढालने का प्रयास किया।और उसपे विजय प्राप्त कर लिया।
     श्री उच्छिष्ट गणपति की तरह ही श्री हनुभैरव भी साधना,तंत्र और आध्यात्मिकता के एक ऐसे पहलू को दिखाते है जहां पे भक्ति सिर्फ पवित्रता तक सीमित नहीं है। तंत्र साधना एक ऐसा रास्ता है जहां चीज़े एक सामान्य से असामान्य डायमेंशन तक असीमित होती है। साधक इस मार्ग से सोची समझी चीजों के अलावा भी बहुत कुछ महसूस कर लेता है। 
   नेपाल और बौद्ध तंत्र के वज्रयान में हनुभैरब की साधना को एक अलग नजरिए से और सम्मान से देखा जाता है, यह एक तीव्र साधना का प्रकार है, जिसमे साधक में पूर्ण अनुशासन, शौर्य के साथ पूर्ण रूप में अहंकार से विहीन होना भी आवश्यक है। 
 यह साधना हमें सिखाती है के असली ताकत अज्ञान, भय और अंधेरे से बचने में नही है, बल्कि अपना सार खोए बिना उस अज्ञान और अंधेरे के बीच में डट के खड़े रहने में है। 
श्री हनुमान साधकों को हनुभैरव बन के यह सिखाते है के कभी कभी शौर्य, मानसिक जागृति और लक्ष्य के साथ चलने से कठिन से कठिन रास्ते भी साधक आसानी से पार कर लेता है। 
   श्री हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में श्री हनुभैरव को जानना और समझना ही सही मायने में सेलिब्रेशन होगा !! 
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.     💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥

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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ  🇪🇬🔱🔥🔱
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