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पञ्चाङ्ग 8 मई 2026

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

jyotis


*🎈दिनांक 8 मई 2026*
*🎈 वार-  शुक्रवार *
*🎈 मास -  ज्येष्ठ मास*
*🎈 पक्ष - कृष्ण पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर    पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि    -    षष्ठी    12:21:07 तत्पश्चात्*सप्तमी*
*🎈 नक्षत्र - उत्तराषाढा     21:19:01*
 तक  तत्पश्चात्     श्रवण*
*🎈योग    -         शुभ    26:29:02* तक तत्पश्चात्     शुक्ल*
*🎈करण    -         वणिज    12:21:07* तक तत्पश्चात् विष्टि भद्र*
*🎈राहुकाल -10:52pm से 12:32 pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि    - मकर*
*🎈सूर्य राशि     - मेष*
*🎈 सूर्योदय -   05:52:40*
*🎈 सूर्यास्त -        19:10:53* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:26 ए एम से 05:09 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:05 पी एम से 12:58 पी एम*
*🎈अमृत काल-    02:15 पी एम से 04:01 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:10 ए एम, मई 09 से 12:53 ए एम, मई 09*
*🎈 रवि योग    05:51 ए एम से 09:20 पी एम*
*🎈 सर्वार्थ सिद्धि योग    -09:20 पी एम से 05:51 ए एम, मई 09*
 *🎈 व्रत एवं पर्व विवरण पंचमी व्रत आज होगा (मासिक व्रत )*
*🎈विशेष - विशेष - पंचमी के पवित्र अवसर पर सात्विकता बनाए रखने के लिए मांसाहार, शराब, प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक भोजन का सेवन न करें। इस दिन शुद्धता का विशेष महत्व है, इसलिए घर में बना सादा और शुद्ध भोजन ही करें। इसके साथ ही, अंधेरे में न रहने और क्रोध/कलह से बचने की भी सलाह दी जाती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- जेष्ठ मास महात्म्य *
 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा    गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी    💥सेनाधिपति    चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💥मन्त्री    मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी    धान्याधिपति    बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💥सस्याधिपति    गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी    मेघाधिपति    चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💥धनाधिपति    गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी    नीरसाधिपति    गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
💥रसाधिपति    शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी    फलाधिपति    चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
kundli


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        🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
         *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day




           🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
         💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺

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🔱🌹श्री साधना में ललिता सहस्रनाम का महत्व....... 🌹 

श्री साधना में ललिता सहस्रनाम का महत्व अत्यंत गहरा और आध्यात्मिक है। इसे न केवल एक स्तोत्र, बल्कि ब्रह्मांड की सर्वोच्च शक्ति (शक्ति) से जुड़ने का एक शक्तिशाली मार्ग माना जाता है।
​इसके महत्व को हम निम्नलिखित बिंदुओं से समझ सकते हैं:
​1. देवी का साक्षात स्वरूप
​श्री विद्या साधना में ललिता सहस्रनाम को केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि देवी ललिता त्रिपुर सुंदरी का शब्दात्मक विग्रह माना जाता है। इसके प्रत्येक नाम में एक विशेष ऊर्जा और स्पंदन (Vibration) होता है जो साधक के अंतर्मन को जागृत करता है।
​2. कुंडलिनी जागरण में सहायक
​माना जाता है कि इस स्तोत्र के नाम मूलधार चक्र से लेकर सहस्रार चक्र तक की ऊर्जा को संतुलित करते हैं। साधना के दौरान इनका पाठ करने से शरीर के ऊर्जा केंद्रों (चक्रों) का शुद्धिकरण होता है, जिससे आध्यात्मिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है।
​3. पंचदशाक्षरी मंत्र का विस्तार
​ललिता सहस्रनाम को 'श्री विद्या' के गुप्त पंचदशाक्षरी मंत्र का विस्तृत स्वरूप माना जाता है। जो साधक कठिन मंत्र साधना नहीं कर पाते, उनके लिए इस सहस्रनाम का भक्तिपूर्वक पाठ करना उसी फल के समान फलदायी बताया गया है।
​4. मानसिक शांति और संकल्प शक्ति
​साधना के दौरान इसके नियमित पाठ से:
​चित्त की शुद्धि: मन के नकारात्मक विचार दूर होते हैं।
​एकाग्रता: ध्यान (Meditation) में गहराई आती है।
​संकल्प पूर्ति: श्री साधना का मुख्य उद्देश्य आत्मज्ञान और सांसारिक व आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त करना है, जिसमें यह पाठ सहायक होता है।
​5. ब्रह्मांडीय ज्ञान का समावेश
​इन १००० नामों में ब्रह्मांड की उत्पत्ति, स्थिति और लय के रहस्य छिपे हैं। साधना में इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह साधक को यह बोध कराता है कि वह स्वयं उस अनंत शक्ति का एक अंश है।

महालक्ष्मी मंत्र: समृद्धि और सौभाग्य का रहस्य

लोग लक्ष्मी को तिजोरी में खोजते हैं। पर महालक्ष्मी तिजोरी में नहीं ठहरती, वह स्वभाव में ठहरती है। जहाँ स्वच्छता है, जहाँ कृतज्ञता है, जहाँ देने का साहस है, वहीं वह कमल पर बैठ जाती है।

यह कथा उज्जैन के मोहन की है। बर्तन की छोटी दुकान, कर्ज बड़ा।

1. खाली तिजोरी

मोहन मेहनती था। सुबह सात बजे दुकान खोलता, रात दस बजे बंद करता। पर ग्राहक कम, उधारी ज्यादा। पत्नी सुनीता कहती, "कुछ पूजा कर लो।" मोहन हँसता, "पूजा से पेट नहीं भरता।"

दीपावली आई। सबने लक्ष्मी पूजन किया। मोहन ने भी किया, पर मन में शिकायत थी। "माँ, सबको देती हो, मुझे क्यों नहीं।"

उसी रात दुकान के बाहर एक वृद्धा बैठी थी। सफेद साड़ी, माथे पर लाल बिंदी, हाथ में स्फटिक माला। बोली, "पानी मिलेगा?"

मोहन ने पानी दिया। वृद्धा ने पूछा, "तू लक्ष्मी से नाराज है?"

मोहन चौंका। वृद्धा हँसी, "मैं महालक्ष्मी की दासी हूँ। नाम गिरिजा। तू धन माँगता है, वह धन नहीं, श्री देती है। फर्क समझेगा तो द्वार खुलेगा।"

2. मंत्र मिला

गिरिजा ने उसे अगले दिन क्षिप्रा घाट पर बुलाया। भोर में कोहरा था। उसने मोहन के कान में एक मंत्र दिया।

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद
श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।

मोहन बोला, "इससे पैसा आएगा?"

गिरिजा बोली, "इससे तू आएगा। पैसा तो पीछे आएगा। सुन अर्थ।"

श्रीं बीज है समृद्धि का, जो भीतर फैलती है। ह्रीं बीज है लज्जा और शुद्धि का, जो अहंकार गलाता है। कमले कमलालये, हे कमल पर बैठने वाली, तू कीचड़ में भी खिलती है। प्रसीद प्रसीद, प्रसन्न हो। दो बार इसलिए कि पहले तू प्रसन्न हो, फिर जगत प्रसन्न हो।"

मोहन ने पूछा, "जप कैसे करूँ?"

गिरिजा ने तीन नियम दिए।

3. तीन नियम

पहला, स्थान शुद्धि। रोज दुकान खोलने से पहले झाड़ू खुद लगाओ। लक्ष्मी वहाँ आती है जहाँ धूल नहीं, अहंकार नहीं।

दूसरा, वाणी शुद्धि। ग्राहक से झूठ मत बोलो। कम तोलो मत। ह्रीं का अर्थ है पवित्र लज्जा, जो गलत करने से रोकती है।

तीसरा, हाथ शुद्धि। हर शुक्रवार जो कमाई हो, उसका एक हिस्सा पहले निकालो। दसवाँ हिस्सा किसी भूखे को, किसी विद्यार्थी को। लक्ष्मी बहती है, रुकती नहीं।

जप विधि सरल। सुबह नहा कर, एक घी का दीपक। 108 बार मंत्र। जपते समय कमल की कल्पना करो, जो हृदय में खिल रहा है। हर श्रीं पर पंखुड़ी खुलती है।

4. परिवर्तन

मोहन ने शुरू किया। पहले हफ्ते कुछ नहीं बदला। दूसरे हफ्ते उसने देखा, दुकान साफ रहने लगी तो ग्राहक रुकने लगे। तीसरे हफ्ते उसने एक बूढ़े कुम्हार का सारा उधार माफ कर दिया। मन हल्का हुआ।

एक दिन एक महिला आई, शादी के बर्तन चाहिए थे। मोहन ने सही दाम बताया। महिला ने कहा, "इतना सस्ता क्यों?" मोहन हँसा, "माँ ने सिखाया है, ज्यादा लोभ में लक्ष्मी रूठती है।" महिला ने पूरे मोहल्ले में बता दिया।

छह महीने में कर्ज आधा हुआ। पर असली चमत्कार तब हुआ जब मोहन बीमार पड़ा। दुकान बंद। सुनीता घबराई। उसी शाम वही महिला, जिसके बर्तन लिए थे, अपने पति के साथ आई। उन्होंने एडवांस ऑर्डर दिया। बोले, "आपने हमें ईमानदारी दी, हम आपको समय देंगे।"

मोहन रो पड़ा। गिरिजा की बात याद आई, लक्ष्मी धन नहीं, श्री देती है। श्री का अर्थ है साख, विश्वास, सौभाग्य।

5. सौभाग्य का रहस्य

एक साल बाद गिरिजा फिर आई। मोहन ने पैर छुए। "माँ, अब तिजोरी भर रही है।"

गिरिजा बोली, "अब असली परीक्षा है।"

"क्या?"

"जब नहीं था तब तू माँगता था। अब है तो बाँट। महालक्ष्मी कमल पर बैठती है, क्योंकि कमल कीचड़ से लेता है, पर कीचड़ को लौटाता नहीं, फूल देता है। तू भी वही कर।"

मोहन ने दुकान के पीछे एक छोटा पुस्तकालय खोला। गरीब बच्चों के लिए। हर शुक्रवार वहाँ जप होता। ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं। बच्चे आते, प्रसाद लेते।

धीरे धीरे मोहल्ले में चोरी कम हुई, झगड़े कम हुए। लोग कहते, मोहन की दुकान पर बरकत है। मोहन कहता, बरकत मेरी नहीं, मंत्र की है।

6. महालक्ष्मी का दर्शन

एक दीपावली पर मोहन ने महालक्ष्मी पूजन किया। घी का दीपक, कमल का फूल। जप करते करते उसे लगा, सामने कोई बैठा है। न सोना, न चाँदी। एक स्त्री, श्वेत वस्त्र, हाथ में कमल, आँखों में करुणा।

उसने कुछ माँगा नहीं। केवल कहा, प्रसीद।

भीतर आवाज आई, "मैं प्रसन्न हूँ। तूने मुझे तिजोरी में नहीं, स्वभाव में रखा। तूने श्रीं को जपा, तो समृद्धि आई। तूने ह्रीं को जिया, तो शुद्धि आई। अब तू कमलालय है। जहाँ तू बैठेगा, वहीं मैं बैठूँगी।"

मोहन की आँखें खुलीं। सामने केवल दीपक था। पर हृदय में कमल खिल चुका था।

7. रहस्य

आज मोहन की दुकान बड़ी हो गई है। पर वह अब भी सुबह झाड़ू खुद लगाता है। अब भी पहला ग्राहक भगवान मान कर जल छिड़कता है। अब भी शुक्रवार को दान निकालता है।

नए लोग पूछते हैं, "महालक्ष्मी मंत्र से क्या होता है?"

वह हँस कर कहता है, "मंत्र तुम्हें अमीर नहीं बनाता, तुम्हें योग्य बनाता है। समृद्धि का रहस्य पैसा खींचना नहीं, पात्र बनना है। श्रीं तुम्हारे भीतर जगह बनाता है। ह्रीं तुम्हारा अहंकार धोता है। कमले तुम्हें सिखाता है, कीचड़ में भी खिलो। प्रसीद तुम्हें कहता है, पहले प्रसन्न रहो, फिर प्रसन्नता बाँटो।"

"और सौभाग्य?"

"सौभाग्य वह नहीं जो लॉटरी से मिले। सौभाग्य वह है जब लोग तुम्हारे नाम पर भरोसा करें। जब तुम्हारी अनुपस्थिति में भी तुम्हारी दुकान चले। जब तुम्हारा दिया हुआ किसी का जीवन बदले। वही महालक्ष्मी है।"

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इसलिए जब तुम मंत्र जपो, केवल धन मत माँगो। कहो,

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।

हर श्रीं पर अपने हृदय का कमल खोलो। हर ह्रीं पर अपना लोभ धो डालो। हर प्रसीद पर मुस्कुराओ।

तब तुम देखोगे, लक्ष्मी बाहर से नहीं आएगी, वह भीतर से उठेगी। और जहाँ महालक्ष्मी भीतर बैठती है, वहाँ बाहर की समृद्धि अपने आप चल कर आती है। यही समृद्धि और सौभाग्य का सबसे पुराना रहस्य है।
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         🙇 #जयश्रीसीताराम 🙇
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹।      💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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‼️अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
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