वनस्पति शास्त्र की सहायक आचार्य ज्योत्सना भाटी को मिली पीएच.डी. की उपाधि
नागौर की फ्लोराइड समस्या पर किया महत्वपूर्ण शोध, बैक्टीरियल कंसोर्टियम से फसल उत्पादन बढ़ाने की दिशा में अध्ययन
नागौर की मूल निवासी है ज्योत्सना
मकोड़ी, बालेसर, अलाय की मिट्टी से सम्बंधित है शोध कार्य
जयपुर, 22 सितम्बर 2026।
वनस्पति शास्त्र की सहायक आचार्य ज्योत्सना भाटी ने अपने शोध कार्य का सफलतापूर्वक डिफेन्स वाइवा प्रस्तुत कर पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। उनका शोध कार्य “Bioremediation of Fluoride Contaminated Soil Using Bacterial Consortium” जीवाणु समुदाय द्वारा फ्लोराइड-दूषित मृदा का जैव-शोधन
विषय पर आधारित रहा।
ज्योत्सना भाटी ने अपने शोध में विशेष रूप से नागौर क्षेत्र की फ्लोराइड-प्रदूषित मृदा की समस्या को केंद्र में रखते हुए अध्ययन किया। शोध के दौरान फ्लोराइड से प्रभावित मिट्टी के पौधों की वृद्धि एवं कृषि उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन किया गया।
शोध में विभिन्न लाभकारी बैक्टीरिया के बैक्टीरियल कंसोर्टियम का उपयोग करते हुए यह अध्ययन किया गया कि किस प्रकार सूक्ष्मजीवों की सहायता से फ्लोराइड-प्रदूषित मृदा के दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है तथा पौधों की वृद्धि और उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। अध्ययन में जैव-उपचार (Bioremediation) की संभावनाओं पर महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए।
सहायक आचार्य ज्योत्सना भाटी का डिफेन्स वाइवा 22 सितम्बर 2026 को आयोजित किया गया। इस दौरान उन्होंने अपने शोध के विभिन्न पहलुओं, प्रयोगात्मक परिणामों तथा कृषि क्षेत्र में इसके संभावित उपयोग के संबंध में विस्तृत प्रस्तुति दी।
शोध के परीक्षक (Examiner) प्रो. राजेश धनकड़ रहे, जबकि शोध कार्य का निर्देशन प्रो. रेखा विजयवर्गीय ने किया। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. आर. ए. शर्मा सहित 50 से अधिक शिक्षक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।
शोध में फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों की मृदा के लिए सूक्ष्मजीव आधारित तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। यह अध्ययन विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी हो सकता है जहां फ्लोराइड की अधिकता के कारण मृदा की गुणवत्ता तथा कृषि उत्पादन प्रभावित होता है।
सहायक आचार्य ज्योत्सना भाटी की इस उपलब्धि पर विभाग के शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने उन्हें बधाई दी तथा उनके उज्ज्वल अकादमिक एवं शोध भविष्य की शुभकामनाएं दीं।


