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पञ्चाङ्ग 23 सितंबर 2026

 *💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
*🎈दिनांक 23 सितंबर 2 026*

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*🎈वार-  बुधवार*
*🎈मास - भाद्रपद मास*
*🎈पक्ष -  शुक्ल पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 208 यू3*
*🎈संवत्सर     पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈अयन - दक्षिणायन*
*🎈ऋतु - शरद*
*🎈तिथि-    द्वादशी - 10:50 पी एम तक तत्पश्चात त्रयोदशी* 
*🎈नक्षत्र- बव - 10:21 ए एम तक तत्पश्चात बालव, कोलव*
*🎈करण    - तैतिल - 06:58 ए एम तक तत्पश्चात् विष्टि, बव*
*🎈योग-    सुकर्मा - 04:27 पी एम तक तत्पश्चात्*धृति*
*🎈राहुकाल- 12:27 पी एम से 01:58 पी एम(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय-06:24.00 एy एम*
*🎈सूर्यास्त-06:31. पी एम*
*🎈चंद्र राशि- नकर - 09:57 पी एम तक  तत्पश्चात् कुम्भ* 
*🎈सूर्य राशि- कन्या*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- उत्तर दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:49 ए एम से 05:36 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: कोई नहीं*
*🎈अमृत काल - 11:34 पी एम से 01:15 ए एम, सितम्बर 24*
*🎈 निशिता मुहूर्त 12:04 ए एम, सितम्बर 24 से 12:51 ए एम, सितम्बर 24*

*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण-  🏵️ द्वादशी व्रत
🛟ब्रह्मवैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, द्वादशी तिथि के दिन शिम्बी (सेम की फली) खाना वर्जित (निषिद्ध) है। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी के दिन सेम खाने से पुत्र का नाश (वंश या संतान को हानि) होता है।

💥23 सितंबर 2026 (बुधवार) का दिन सभी 12 राशियों के लिए करियर, धन और पारिवारिक मामलों में मिलाजुला रहने वाला है
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    ‼️💢आज का राशिफल💢‼️

🛟सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल‼️

♈ मेष राशि: परिवार का भरपूर सहयोग मिलेगा। नौकरीपेशा लोगों को तरक्की और नए अवसर मिलने के योग हैं। रिश्तेदारों से चल रही अनबन दूर हो सकती है।

♉ वृषभ राशि: आपकी स्किल्स और टैलेंट से कठिन काम भी आसान होंगे। बिजनेस में कोई फायदेमंद कॉन्ट्रैक्ट मिल सकता है, लेकिन दूसरों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने से बचें।

♊ मिथुन राशि: लंबे समय से चली आ रही परेशानी दूर होगी। प्रॉपर्टी से जुड़े कामों में सफलता मिलेगी और आर्थिक स्थिति बेहतर होने के योग हैं।


♋ कर्क राशि: निवेश के लिए दिन अच्छा है और पुराने दोस्तों से मुलाकात हो सकती है. काम की व्यस्तता रहेगी, लेकिन महत्वपूर्ण कार्य समय पर पूरे होंगे।

♌ सिंह राशि: कमाई बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने से अच्छा मुनाफा मिलेगा। जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, जिन्हें आप बखूबी निभाएंगे।

♍ कन्या राशि: लंबी दूरी की यात्रा या किसी धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिल सकता है। खान-पान में लापरवाही न बरतें और तेलीय भोजन से दूर रहें।

♎ तुला राशि: रोमांचक यात्रा के योग हैं। पुराने समय की मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा, और बड़े-बुजुर्गों की सलाह आपके लिए फायदेमंद रहेगी।

♏ वृश्चिक राशि: बिजनेस में खर्चों को लेकर सावधानी बरतें। धन लाभ के योग हैं और करियर से जुड़ी समस्याएं हल हो सकती हैं।

♐ धनु राशि: पैसों के मामले में किसी एक्सपर्ट की सलाह लाभदायक साबित होगी। नौकरी में बदलाव या यात्रा के योग हैं, हालांकि निर्णय सोच-समझकर लें।

♑ मकर राशि: पॉजिटिव सोच रखने से स्वास्थ्य में लाभ मिलेगा। रुके हुए काम पूरे होंगे और नए कार्यों की रूपरेखा बनेगी।

♒ कुंभ राशि: मनचाही डील मिलने की संभावना है। स्वास्थ्य का ध्यान रखें और पैसों के लेन-देन में पूरी स्पष्टता और सावधानी रखें।

♓ मीन राशि: गॉसिप या फालतू की बातों से दूर रहें। धन लाभ के योग हैं और करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे।

💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏
  ➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
   🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️
🌹|| ✨ 🌹// 🕉️ ✨ 🌺 🦚 🌼 

🕉️ 🌸*🌙 🐘 🙏🐚🪔 🌿 🌺🪷
🏛️ प्राचीन काल में एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण और उसकी ब्राह्मणी रहते थे। उनके कोई संतान नहीं थी, जिसके कारण वे अत्यंत दुखी रहते थे। ब्राह्मण दंपत्ति ने भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की कठोर तपस्या की, जिसके फलस्वरूप ब्राह्मणी ने एक अत्यंत रूपवती और गुणवती कन्या को जन्म दिया।
🛟कन्या बाल्यावस्था से ही अत्यंत धर्मपरायण थी। वह नित्य प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करती, भगवान विष्णु का ध्यान करती और प्रतिदिन पाठशाला जाते समय अपनी हथेली में मुट्ठी भर जौ लेकर निकलती। मार्ग में जो भी दीन-दुखी या भिक्षुक मिलता, वह वह अन्न उन्हें देती जाती।

🛟बृहस्पति देव कन्या की निश्छल भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए। कन्या के हाथों से दान किए गए जौ के दाने मार्ग में गिरते ही स्वर्ण (सोने) में परिवर्तित होने लगे। एक दिन जब कन्या पाठशाला से लौटते समय उन स्वर्ण के दानों को साधारण बाँस के सूप से बीनकर साफ कर रही थी, तब उसकी माँ ने कहा— "पुत्री! यह तो साक्षात स्वर्ण है। इसे बाँस के सूप से साफ करना इसका अनादर है, इसे फटकने और साफ करने के लिए तो सोने का ही सूप होना चाहिए।"
🛟कन्या ने अगले गुरुवार (बृहस्पतिवार) को भगवान की पूजा करते हुए हाथ जोड़कर प्रार्थना की— "हे देवाधिदेव बृहस्पति देव! यदि मेरी सेवा और भक्ति सच्ची है, तो मेरी माता की इच्छानुसार मुझे एक सोने का सूप प्रदान करने की कृपा करें।"
🛟बृहस्पति देव ने उसकी निष्कपट प्रार्थना स्वीकार की। दूसरे दिन जब कन्या पाठशाला से लौट रही थी, तो उसे मार्ग में एक अत्यंत सुंदर, चमचमाता स्वर्ण-सूप पड़ा मिला। कन्या ने उसे प्रभु का प्रसाद समझकर सिर से लगाया और घर ले आई।

🛟एक दिन कन्या अपने घर के आंगन में बैठकर सोने के सूप से स्वर्ण जौ साफ कर रही थी। उसी समय उस राज्य का राजकुमार अपनी सेना के साथ वहाँ से निकला। उसने एक अत्यंत निर्धन झोपड़ी के बाहर एक दिव्य तेज वाली कन्या को सोने के सूप से काम करते देखा। कन्या के अलौकिक रूप, विनम्रता और सादगी पर राजकुमार मुग्ध हो गया।
राजमहल पहुँचकर राजकुमार ने 
🛟अन्न-जल त्याग दिया और राजा से हठ किया— "मैं केवल उसी ब्राह्मण-कन्या से विवाह करूँगा, जो सोने के सूप से जौ साफ करती है।"
🏵️राजा ने अपने दूत और पुरोहित भेजकर ब्राह्मण के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा। ब्राह्मण अपनी निर्धनता के कारण संकोच में पड़ गया, किंतु राजा के आदरपूर्वक आग्रह को देखकर उसने सहर्ष अपनी पुत्री का विवाह राजकुमार से कर दिया। कन्या राजमहल की कुलवधू बनकर चली गई।
🏵️ब्राह्मण की पुनः निर्धनता और बेटी का उपदेश
कन्या वास्तव में साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप थी। उसके विदा होते ही ब्राह्मण के घर की समस्त बरकत समाप्त हो गई। ब्राह्मण और ब्राह्मणी धीरे-धीरे फिर से उसी घोर दरिद्रता में पहुँच गए और भिक्षाटन को विवश हो गए।
🏵️एक दिन ब्राह्मण अत्यंत दुखी होकर अपनी पुत्री से मिलने राजमहल पहुँचा। महल के वैभव के बीच जब पुत्री ने अपने पिता को जीर्ण-शीर्ण वस्त्रों में देखा, तो उसकी आँखों में आँसू आ गए। उसने पिता को एक संदूक भरकर अपार धन, स्वर्ण मुद्राएं और अन्न दिया। ब्राह्मण प्रसन्न होकर घर लौटा, किंतु प्रारब्ध और गुरु की कृपा के अभाव में वह सारा धन कुछ ही दिनों में नष्ट हो गया।
ब्राह्मण पुनः व्याकुल होकर बेटी के पास पहुँचा। इस बार कन्या ने समझ लिया कि पिता केवल बाह्य धन से कभी समृद्ध नहीं हो सकते। उसने हाथ जोड़कर कहा:

🏵️"पिताजी! किसी के दिए हुए धन से प्रारब्ध की दरिद्रता कभी दूर नहीं होती। हमारे घर की समृद्धि केवल बृहस्पति देव की कृपा से थी। आप और माताजी घर जाकर प्रत्येक बृहस्पतिवार (गुरुवार) को नियमपूर्वक देवगुरु बृहस्पति का व्रत करें। प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें, चने की दाल, गुड़ और मुनक्का अर्पित कर केले के वृक्ष की पूजा करें, पीला चंदन लगाएं और यह व्रत कथा सुनें। भगवान बृहस्पति स्वयं आपके सारे कष्ट हर लेंगे।"

🛟ब्राह्मण ने घर लौटकर अपनी पत्नी को पूरी बात बताई। दोनों ने श्रद्धा और निष्ठा के साथ बृहस्पतिवार का व्रत प्रारंभ किया।
कुछ ही गुरुवार व्रत रखने के पश्चात देवगुरु बृहस्पति उन पर प्रसन्न हुए। ब्राह्मण के घर में स्वतः अन्न, वस्त्र और धन के भंडार भर गए। उनकी दरिद्रता सदा के लिए समाप्त हो गई और वे अंत समय तक सुख-समृद्धि भोगकर मोक्ष को प्राप्त हुए। 🙏🌺

🌺‼️जय श्री कृष्णा! 🦚🚩 🌺🙏

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 💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
  ✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
           *🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏     
 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹          

 *💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
          *बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
       🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
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🙏*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय  बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️
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