*💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
*🎈दिनांक 22 सितंबर 2026*
*🎈वार- मंगलवार*
*🎈मास - भाद्रपद मास*
*🎈पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 208 यू3*
*🎈संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈अयन - दक्षिणायन*
*🎈ऋतु - शरद*
*🎈तिथि- एकादशी - 09:43 पी एम तक तत्पश्चात द्वादशी*
*🎈नक्षत्र- उत्तराषाढा - 07:06 ए एम तक तत्पश्चात श्रवण*
*🎈करण - तैतिल - 06:58 ए एम तक तत्पश्चात् विष्टि, बव*
*🎈योग- अतिगण्ड - 04:29 पी एम तक तत्पश्चात्* सुकर्मा*
*🎈राहुकाल- 03:30 पी एम से 05:01 पी एम(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय-06:23.00 एy एम*
*🎈सूर्यास्त-06:32. पी एम*
*🎈चंद्र राशि- मकर*
*🎈सूर्य राशि- कन्या*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- उत्तर दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:48 ए एम से 05:36 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:03 पी एम से 12:52 पी एम*
*🎈अमृत काल - 09:52 पी एम से 11:36 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त 12:04 ए एम, सितम्बर 23 से 12:52 ए एम, सितम्बर 23*
*🎈रवि योग -06:23 ए एम से 07:06 ए एम*
*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण- 🏵️ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🙏
🗓️ परिवर्तिनी एकादशी: 22 सितंबर 2026, मंगलवार
🗓️ एकादशी तिथि: 21 सितंबर रात लगभग 08:00 बजे से
🛟ब्रह्मवैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, एकादशी तिथि के दिन शिम्बी (सेम की फली) खाना वर्जित (निषिद्ध) है। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी के दिन सेम खाने से पुत्र का नाश (वंश या संतान को हानि) होता है।
💥22 सितंबर 2026 मंगलवार के दिन चंद्रमा मकर राशि में संचार करेंगे, जिससे सभी 12 राशियों के लिए दिन मिलाजुला और ऊर्जावान रहने की संभावना है।
‼️💢आज का राशिफल💢‼️
🛟सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल‼️
♈ मेष (Aries)आत्मविश्वास और ऊर्जा में वृद्धि होगी, रुके हुए कार्य पूरे होंगे। जल्दबाजी में कोई भी बड़ा निर्णय लेने से बचें।
♉ वृषभ (Taurus)कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी। आर्थिक मामलों में सुधार होगा, हालांकि अनावश्यक खर्चों पर लगाम रखें।
♊ मिथुन (Gemini)परिवार का सहयोग मिलेगा। किसी पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है। व्यापार में नए अवसर सामने आएंगे।
♋ कर्क (Cancer)मन थोड़ा भावुक हो सकता है। कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाकर चलें। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।
♌ सिंह (Leo)नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी। उच्च अधिकारियों का समर्थन मिलेगा, जिससे करियर में प्रगति होगी।
♍ कन्या (Virgo)व्यक्तिगत प्रगति और भविष्य के लक्ष्यों पर विचार करने का उत्तम दिन है। दिनचर्या में छोटे सकारात्मक बदलाव लाभ देंगे।
♎ तुला (Libra)सृजनात्मक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। आर्थिक लाभ के नए रास्ते खुलेंगे। दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी।
♏ वृश्चिक (Scorpio)रणनीतिक सोच और पुराने अनुभवों से आपको लाभ मिलेगा। वित्तीय मामलों में नए अवसर आएंगे, लेकिन भावनाओं में बहकर निर्णय न लें।
♐ धनु (Sagittarius)भाग्य का साथ मिलेगा। यात्रा के योग बन रहे हैं जो भविष्य में फायदेमंद साबित होंगी। पारिवारिक माहौल सुखद रहेगा।
♑ मकर (Capricorn)चंद्रमा आपकी ही राशि में हैं, जिससे कार्यक्षेत्र में आपकी स्थिति मजबूत होगी। मान-सम्मान बढ़ेगा और नए उत्तरदायित्व मिल सकते हैं।
♒ कुंभ (Aquarius)खर्चों की अधिकता रह सकती है, इसलिए बजट का ध्यान रखें। विरोधियों से सतर्क रहें और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न बरतें।
♓ मीन (Pisces)धन लाभ के योग बन रहे हैं। रुके हुए कार्य गति पकड़ेंगे। परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का अवसर मिलेगा।
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
*🛟चोघडिया, रात का🛟*
💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏
➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️
🌹|| ✨ 🌹// 🕉️ ✨ 🌺 🦚 🌼
🕉️ 🌸*🌙 🐘 🙏🐚🪔 🌿 🌺🪷
🏛️ माँ सती का महात्याग और उनके 108 दिव्य नाम
🌺 जब माँ सती के क्रोध से कांप उठा ब्रह्मांड — 108 दिव्य नामों और शक्तिपीठों की अद्भुत कथा 🌺
क्या होता है जब स्वयं आदिशक्ति का अपमान किया जाता है?
क्या होता है जब अहंकार इतना बढ़ जाए कि मनुष्य भगवान शिव के महत्व को ही चुनौती देने लगे?
देवी सती की कथा हमें उसी महाप्रसंग तक ले जाती है, जब एक पिता के अहंकार ने यज्ञ को विनाश के द्वार पर खड़ा कर दिया और माँ सती ने अपने योगबल से अपनी देह का त्याग कर दिया।
यह केवल एक देहत्याग की कथा नहीं है।
यह कथा है शक्ति, स्वाभिमान, भक्ति, त्याग और अहंकार के अंत की।
🌺 दक्ष का महायज्ञ
प्राचीन काल में प्रजापति दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया।
दूर-दूर से ऋषि-मुनि, देवता, गंधर्व और अनेक दिव्य शक्तियाँ उस यज्ञ में आमंत्रित की गईं।
लेकिन एक व्यक्ति को जानबूझकर आमंत्रित नहीं किया गया—
भगवान शिव को।
दक्ष के मन में महादेव के प्रति सम्मान के स्थान पर अहंकार और द्वेष था।
जब माता सती को अपने पिता के इस महायज्ञ का समाचार मिला, तो उनके मन में पिता के घर जाने की इच्छा हुई।
वह कैलाश से दक्ष के यज्ञस्थल पर पहुँचीं।
लेकिन वहाँ पहुँचकर उन्होंने देखा कि उनके पति महादेव के लिए न सम्मान था और न ही उचित स्थान।
सती ने अपने पिता से पूछा कि आखिर भगवान शिव के प्रति इतना तिरस्कार क्यों?
लेकिन दक्ष का अहंकार शांत होने के बजाय और बढ़ गया।
उन्होंने सभा के सामने महादेव का अपमान करना शुरू कर दिया।
🌋 सती का क्रोध
अपने आराध्य और पति का अपमान सुनकर माता सती का हृदय व्यथित हो उठा।
उन्होंने दक्ष से कहा—
“जिस महादेव को तुम अपमानित कर रहे हो, वही इस चराचर जगत की चेतना के आधार हैं। जिनके बिना सृष्टि की गति संभव नहीं, उन्हें तुम अपने अहंकार की दृष्टि से कैसे देख सकते हो?”
सती ने स्पष्ट कर दिया कि वह उस शरीर को और धारण नहीं करेंगी जो दक्ष से प्राप्त हुआ था और जिसके कारण उन्हें आज अपने आराध्य का अपमान सुनना पड़ रहा है।
फिर उन्होंने बाहरी अग्नि की प्रतीक्षा नहीं की।
अपने योगबल से उन्होंने अपने भीतर का दिव्य तेज प्रकट किया और उसी तेज में अपनी देह का त्याग कर दिया।
क्षण भर में यज्ञस्थल का वातावरण बदल गया।
जहाँ मंत्रों की ध्वनि गूंज रही थी, वहाँ अब शोक और भय का वातावरण था।
🌺 टूट गया दक्ष का अहंकार
माता सती के देहत्याग के बाद दक्ष का अभिमान भी टूटने लगा।
उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ।
जिस पुत्री को उन्होंने अपने सामने खो दिया था, वही अब उनके अहंकार का सबसे बड़ा दर्पण बन चुकी थीं।
देवता और ऋषि भी इस घटना से स्तब्ध थे।
यज्ञ का वातावरण अशांत हो चुका था।
और महादेव तक जब सती के देहत्याग का समाचार पहुँचा, तब आगे की कथा ने और भी भयंकर रूप ले लिया।
लेकिन इस महाप्रसंग से पहले माता सती ने अपनी दिव्य सत्ता का एक अद्भुत रहस्य प्रकट किया था।
🌸 सती के 108 दिव्य स्वरूप
माता सती ने बताया कि आदिशक्ति किसी एक स्थान या एक स्वरूप तक सीमित नहीं हैं।
वह संसार के प्रत्येक कण में व्याप्त हैं।
फिर भी साधकों के कल्याण के लिए उनके अनेक पावन स्वरूप विभिन्न तीर्थों और धामों में पूजित होते हैं।
परंपरा में वर्णित कुछ प्रसिद्ध स्वरूप इस प्रकार बताए जाते हैं—
🌺 वाराणसी — विशालाक्षी
🌺 नैमिषारण्य — लिङ्गधारिणी
🌺 प्रयाग — ललिता
🌺 गन्धमादन — कामाक्षी
🌺 मानसरोवर — कुमुदा
🌺 मन्दराचल — कामचारिणी
🌺 हस्तिनापुर — जयन्ती
🌺 कान्यकुब्ज — गौरी
🌺 एकाम्रक — कीर्तिमती
🌺 पुष्कर — पुरुहूता
🌺 केदार — मार्गदायिनी
🌺 गोकर्ण — भद्रकर्णिका
🌺 थानेश्वर — भवानी
🌺 श्रीशैल — माधवी
🌺 ऋषिकेश/मायापुरी — कुमारी
🌺 जगन्नाथपुरी — विमला
🌺 हरिद्वार — रतिप्रिया
🌺 द्वारका — रुक्मिणी
🌺 वृन्दावन — राधा
🌺 मथुरा — देवकी
🌺 चित्रकूट — सीता
🌺 विन्ध्य पर्वत — विन्ध्याधिवासिनी
🌺 कोल्हापुर — महालक्ष्मी
🌺 बदरी क्षेत्र — उर्वशी
🌺 वैद्यनाथ — अरोगा
🌺 महाकाल — महेश्वरी
🌺 जालंधर — विश्वमुखी
🌺 वेदवदन — गायत्री
🌺 शिव-सन्निधि — पार्वती
इसी प्रकार देवी के अनेक अन्य स्वरूप भी विभिन्न स्थानों, शक्तियों और दिव्य अवस्थाओं से जोड़े गए हैं।
🌺 हर रूप में वही एक शक्ति
कहीं वह विशालाक्षी हैं...
कहीं ललिता...
कहीं भवानी...
कहीं महालक्ष्मी...
कहीं राधा...
और कहीं सीता।
नाम अलग हैं।
स्थान अलग हैं।
स्वरूप अलग हैं।
लेकिन शक्ति एक ही है—
आदिशक्ति।
इसीलिए देवी के इन स्वरूपों की परंपरा केवल तीर्थों की सूची नहीं है, बल्कि यह उस भाव को दर्शाती है कि दिव्य शक्ति संसार के विभिन्न रूपों में विद्यमान है।
🙏 108 नामों के स्मरण का महात्म्य
पौराणिक परंपराओं में देवी के इन दिव्य नामों और तीर्थों के स्मरण का विशेष महात्म्य बताया गया है।
भक्त श्रद्धापूर्वक देवी के नामों का स्मरण करते हैं, उनके धामों का दर्शन करते हैं और उनके स्वरूपों का ध्यान करते हैं।
मान्यता है कि देवी की आराधना मनुष्य के भीतर भय को दूर करती है, आत्मविश्वास बढ़ाती है और उसे धर्म तथा भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ाती है।
कई पुराणिक वर्णनों में इन नामों के स्मरण को अत्यंत पुण्यदायक बताया गया है।
🌺 माँ सती की कथा हमें क्या सिखाती है?
माता सती की कथा केवल क्रोध और देहत्याग की कथा नहीं है।
यह हमें बताती है कि—
अहंकार चाहे कितना भी बड़ा हो, सत्य के सामने टिक नहीं सकता।
शक्ति का अर्थ केवल सामर्थ्य नहीं, बल्कि धर्म के प्रति अडिग रहना भी है।
और भक्ति का अर्थ केवल पूजा करना नहीं, बल्कि अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण रखना भी है।
दक्ष का यज्ञ समाप्त हो गया...
सती की देह का अंत हुआ...
लेकिन आदिशक्ति का अंत नहीं हुआ।
क्योंकि शक्ति कभी नष्ट नहीं होती।
वह केवल एक रूप से दूसरे रूप में प्रकट होती है।
यही कारण है कि सती आगे चलकर हिमालय के घर पार्वती के रूप में पुनः प्रकट हुईं और फिर से भगवान शिव के साथ उनका दिव्य मिलन हुआ।
🌺 सती से शक्ति तक की अनंत यात्रा
सती का देहत्याग अंत नहीं था।
वह एक नए अध्याय की शुरुआत थी।
एक रूप समाप्त हुआ...
लेकिन शक्ति बनी रही।
एक जीवन समाप्त हुआ...
लेकिन दिव्यता बनी रही।
और यही सनातन परंपरा का गहरा संदेश है—
देह बदल सकती है, स्वरूप बदल सकता है, युग बदल सकते हैं; लेकिन आदिशक्ति अनंत है।
🌺 जय माँ सती
🔱 जय माँ पार्वती
🙏 हर हर महादेव
🚩 आदिशक्ति जगदंबा की जय!
आपने इनमें से किन-किन देवी स्वरूपों या शक्तिधामों के दर्शन किए हैं?
कमेंट में “जय माता दी” लिखकर माँ का स्मरण जरूर करें। 🙏🌺
🌺‼️जय श्री कृष्णा! 🦚🚩 🌺🙏
🧨🚩⛳💥❤️🕉️🌴🍀🎈🌀🌿
💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
*🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹
*💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
*बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
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💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️




