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पञ्चाङ्ग 28 सितंबर 2026

 *💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*

jyotis


*🎈दिनांक 28 सितंबर 2026*
*🎈वार-  सोमवार*
*🎈मास - आश्विन मास*
*🎈पक्ष -  कृष्ण पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 2083*
*🎈संवत्सर     पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈अयन - दक्षिणायन*
*🎈ऋतु - शरद*
*🎈तिथि-द्वितीया - प्रतिपदा - 08:58 पी एम तक  तत्पश्चात तृतीया* 
*🎈नक्षत्र- रेवती - 10:16 ए एम तकतत्पश्चात अश्विनी*
*🎈करण    - तैतिल - 08:08 ए एम तक तत्पश्चात् गर,वाणिज, विष्टि*
*🎈योग-    ध्रुव - 08:54 ए एम तक तत्पश्चात् व्याघात*
*🎈राहुकाल- 07:57 पी एम से 09:26 ए एम (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय- 06:27.00 ए एम*
*🎈सूर्यास्त- 06:23. पी एम*
*🎈चंद्र राशि- मीन* till 10:15:14 from मेष - 10:15:14*
*🎈सूर्य राशि- कन्या*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:50 ए एम से 05:38 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:02 पी एम से 12:49 पी एम*
*🎈अमृत काल    -07:57 ए एम से 09:29 ए एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त -12:02 ए एम, सितम्बर 29 से 12:50 ए एम, सितम्बर 29*

*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण-  🏵️ ☀️☀️☀️☀️प्रतिपदा व्रत 27 sept 2026को🏓🏓🏓
👁️"विष्णु भगवान की जय हो "🙏 🌹

🛟ब्रह्मवैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, द्वितीया तिथि के दिन बृहती (छोटा बैंगन, वनभाँटा या कटेहरी) का सेवन करना निषिद्ध (वर्जित) माना गया है।धार्मिक एवं शास्त्रीय नियमवर्जित वस्तु: बृहती (कटेहरी / छोटा बैंगन)मान्यता: शास्त्रों के अनुसार इस तिथि पर इन सब्जियों को खाने से मना किया गया है।

💥28 सितंबर 2026, सोमवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन चंद्रमा मेष राशि से वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे और कई ग्रहों की स्थिति से यह दिन सभी 12 राशियों के लिए मिला-जुला रहने वाला है।
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‼️💢आज का राशिफल💢‼️

🏓🏓सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल💕

💝 ✨मेष (Aries): अपने रुके हुए कार्यों को गति देने और रफ्तार धीमी करने वाली बाधाओं को हटाने का दिन है। शुरुआत में थोड़ी मानसिक उलझन हो सकती है, लेकिन दोपहर तक स्थिति बेहतर होगी।

💝✨वृषभ (Taurus): अपने आस-पास के माहौल और जिम्मेदारियों को सरल बनाने पर ध्यान दें। चंद्रमा का आपकी राशि में प्रवेश आर्थिक मामलों में स्थिरता और लाभ दिलाएगा।

💝✨मिथुन (Gemini): आज एक समय पर कई काम आपका ध्यान भटका सकते हैं। जरूरी कार्यों को प्राथमिकता दें और अनावश्यक भागदौड़ से बचें।


💝✨कर्क (Cancer): मन किसी पुरानी भावनात्मक या भारी बात से मुक्त महसूस करेगा। पारिवारिक जीवन में समझदारी से काम लें और जल्दबाजी में कोई भी बड़ा निर्णय न करें।

💝✨सिंह (Leo): अपनी महत्वाकांक्षाओं पर ध्यान केंद्रित रखें और बीच में आने वाले छोटे-मोटें व्यवधानों को नजरअंदाज करें। कार्यक्षेत्र में ऊर्जा बनी रहेगी।

💝✨कन्या (Virgo): चीजों को व्यवस्थित करने की आपकी प्राकृतिक खूबी आज काम आएगी। केवल उन्हीं मसलों पर ध्यान दें जिन्हें वास्तव में सुधार की जरूरत है।

💝✨तुला (Libra): भ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए कोई एक स्पष्ट और ईमानदार फैसला लें। बातचीत और रिश्तों के मामलों में आपको संभलकर चलने की सलाह है।

💝✨वृश्चिक (Scorpio): पुराने मामलों को निजी तौर पर समेटने और भविष्य की तैयारी करने के लिए दिन अनुकूल है। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।

💝✨धनु (Sagittarius): भाग्य का आपको साथ मिलेगा। कामकाज के सिलसिले में की गई यात्राएं लाभदायक रहेंगी, साथ ही मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा।

💝✨मकर (Capricorn): सुबह से ही भाग्य का सितारा चमकेगा। नौकरी और कारोबार में नए व बेहतरीन रास्ते खुल सकते हैं। शाम को कोई अच्छी खबर मिल सकती है।

💝✨कुंभ (Aquarius): दिन की शुरुआत में थोड़ी उथल-पुथल या मानसिक दबाव रह सकता है, लेकिन दोपहर बाद परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

💝✨मीन (Pisces): आर्थिक मामलों में सावधानी बरतें। भावनाओं में बहकर कोई बड़ा वित्तीय निर्णय लेने से बचें और शांति के साथ दिन बिताएं।

💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏
  ➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
   🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️
🌹|| ✨ 🌹// 🕉️ ✨ 🌺 🦚 🌼 

🕉️ 🌸*🌙 🐘 🙏🐚🪔 🌿 🌺🪷
✨मार्कण्डेय पुराण में रुचि महाराज की कथा - पितरों की कृपा से भोग और मोक्ष दोनों✨
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💝भूमिका 💐 शेष भाग कल से आगे..

💝यह सुनकर रुचि का हृदय कांप गया। जिस वैराग्य को वे मोक्ष समझ रहे थे, वह उनके पितरों के लिए बंधन बन गया था।

💝भाग 2: रुचि कृत पितृ स्तुति - पितृपक्ष का हृदय
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💝अपने पितरों को इस कष्ट में देख रुचि ने हाथ जोड़कर उस स्तुति का गान किया जो आज पितृपक्ष में घर-घर पढ़ी जाती है।

‼️पहला श्लोक - पितरों को नमन:

अर्चितानाममूर्तानां पितॄणां दीप्ततेजसाम्।
नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्॥
- मार्कण्डेय पुराण 97.5

अर्थ - जो अर्चना के योग्य, निराकार, अत्यंत तेजस्वी, ध्यानपरायण और दिव्य दृष्टि वाले हैं, उन पितरों को मैं सदा प्रणाम करता हूँ।

‼️इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा।
सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान्॥

अर्थ - जो इंद्र आदि देवताओं के भी नायक हैं, दक्ष और मरीचि के भी पथप्रदर्शक हैं, सप्तर्षियों के भी पूज्य हैं और मन की कामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं, उन पितरों को प्रणाम।

‼️मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्द्रमसोस्तथा।
तान् नमस्याम्यहं सर्वान् पितॄनप्युदधावपि॥

अर्थ - जो मनु आदि राजाओं, सूर्य-चन्द्र के भी नेता हैं, जो समुद्र में भी व्याप्त हैं, उन सभी पितरों को मैं प्रणाम करता हूँ।

‼️रुचि की इस सच्ची श्रद्धा और स्तुति से प्रसन्न होकर पितर बोले - वत्स, हम तुझ पर प्रसन्न हैं। तू विवाह कर। तेरी पत्नी पतिव्रता और तेरा पुत्र मन्वन्तर का स्वामी होगा।

‼️भाग 3: खोया हुआ राज्य और मन्वन्तर का स्वामी बनना
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➡️पितरों के आशीर्वाद से रुचि ने नदी के किनारे तप किया और पितरों के कहने पर ही स्वयं एक कन्या का मानसिक सृजन किया, जिसका नाम मालिनी हुआ। कुछ मतों में मालिनी नदी ही मानवी रूप में आईं। रुचि ने विधिवत मालिनी से विवाह किया।

➡️विवाह के बाद पितरों की कृपा का फल तुरंत मिला। रुचि के पिता का राज्य जो शत्रुओं ने छीन लिया था, पितरों के तेज से बिना युद्ध के ही प्राप्त हो गया। प्रजा ने स्वयं आकर रुचि को राजा बनाया। रुचि ने धर्मपूर्वक राज्य किया।

💢समय आने पर रुचि और मालिनी को एक तेजस्वी पुत्र प्राप्त हुआ, जिसका नाम रखा गया **रौच्य**।

💢मार्कण्डेय जी कहते हैं -

रुचे: पुत्रो महातेजा रौच्यो नाम मनु: स्मृत:।
त्रयोदशे मनौ काले भविष्ये तस्य शासनम्॥

अर्थ - रुचि का महातेजस्वी पुत्र रौच्य नाम से प्रसिद्ध मनु होगा। भविष्य में तेरहवें मन्वन्तर का स्वामी वही होगा।

और स्वयं रुचि महाराज को अपने सत्य, तप, पितृभक्ति और प्रजा-पालन के गुणों के कारण ब्रह्मा जी ने प्रजापति पद दिया। वे भी एक मन्वन्तर में सप्तर्षियों में पूजित हुए। इस प्रकार एक वैरागी ब्राह्मण पितरों के आशीर्वाद से राजा बना और फिर सृष्टि के विधान का स्वामी बना।

🏓इस कथा का सार यही है -
वैराग्य अपनी जगह, पर पितृऋण से मुक्त हुए बिना मोक्ष नहीं। विवाह और संतान केवल भोग नहीं, पितरों को तारने का यज्ञ है।


🌺‼️जय श्री कृष्णा! 🦚🚩 🌺🙏

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 💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
  ✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
           *🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏     
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 *💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
          *बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
       🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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‼️*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय  बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️
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