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पञ्चाङ्ग 29 सितंबर 2026

 *💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
*🎈दिनांक 29 सितंबर 2026*

jyotis


*🎈वार-  मंगलवार*
*🎈मास - आश्विन मास*
*🎈पक्ष -  कृष्ण पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 2083*
*🎈संवत्सर     पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈अयन - दक्षिणायन*
*🎈ऋतु - शरद*
*🎈तिथि-तृतीया - 05:09 पी एम तक तत्पश्चात चतुर्थी* 
*🎈नक्षत्र- अश्विनी - 09:03 ए एम तक तत्पश्चात भरणी*
*🎈करण    - विष्टि - 05:09 पी एम तक तत्पश्चात् गर, बव, बालव*
*🎈योग-    हर्षण - 03:20 ए एम, सितम्बर 30 तक तत्पश्चात् ध्रुव*
*🎈राहुकाल- 03:25 पी एम से 04:54 पी एम (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय- 06:27.00 ए एम*
*🎈सूर्यास्त- 06:24. पी एम*
*🎈चंद्र राशि- मेष - *
*🎈सूर्य राशि- कन्या*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- उत्तर दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:50 ए एम से 05:38 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:00 पी एम से 12:40 पी एम*
*🎈अमृत काल    -03:06 ए एम, सितम्बर 30 से 04:36 ए एम, सितम्बर 30*
*🎈 निशिता मुहूर्त -12:01 ए एम, सितम्बर 30 से 12:50 ए एम, सितम्बर 30*
*🎈सर्वार्थ सिद्धि योग    06:27 ए एम से 09:03 ए एम*
*🎈 अमृत सिद्धि योग    06:27 ए एम से 09:03 ए एम*

*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण-  🏵️ ☀️☀️☀️☀️29 सितंबर 2026: तृतीया श्राद्ध है।🏓🏓🏓
👁️"विष्णु भगवान की जय हो "🙏 🌹

🛟ब्रह्म वैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, तृतीया तिथि को परवल (Pointed Gourd) खाना वर्जित माना गया है।शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन परवल का सेवन करने से शत्रुओं की वृद्धि होती है।सनातन परंपरा में स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति के लिए विभिन्न तिथियों पर कुछ विशेष खाद्य पदार्थों को त्याज्य माना गया है।

💥29 सितंबर 2026, मंगलवार का दिन सभी 12 राशियों के लिए मिला-जुला और नई उम्मीदों से भरा रहेगा।
kundli


 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
     🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
       *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day



          🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
★√*★√*★√*★√*★√*★
     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
   
    ‼️💢आज का राशिफल💢‼️

🏓🏓सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल💕

💝 ✨मेष (Aries): पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा। पुराना फंसा हुआ धन मिलने की संभावना है। ऊर्जा और उत्साह भरपूर रहेगा।

✨💝वृषभ (Taurus): कार्यक्षेत्र में थोड़ी मानसिक तनाव या भागदौड़ हो सकती है। सेहत का विशेष ध्यान रखें।

✨💝मिथुन (Gemini): व्यापार और उद्योग से जुड़े लोगों के लिए दिन सफलतादायक रहेगा। मन की स्थिति शाम तक बेहतर होगी।

✨💝कर्क (Cancer): आपकी प्रतिभा और बुद्धि का विकास होगा। परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा।

✨💝सिंह (Leo): मानसिक शांति में वृद्धि होगी। दिन आपके लिए सबसे ज्यादा भाग्यशाली साबित हो सकता है।

✨💝कन्या (Virgo): जीवन में नई उम्मीदें आएंगी। नौकरीपेशा जातकों को पदोन्नति (प्रमोशन) का लाभ मिल सकता है।

✨💝तुला (Libra): जरूरी और आवश्यक खर्चों को प्राथमिकता देना आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

✨💝वृश्चिक (Scorpio): दिन कामकाज में बड़ी उपलब्धियों और सफलता से भरा रहेगा।

✨💝धनु (Sagittarius): किसी बड़ी योजना को पूरा करने में कई लोगों का सहयोग प्राप्त होगा।

✨💝मकर (Capricorn): व्यापार में बड़ा मुनाफा मिलने के योग हैं। आर्थिक पक्ष मजबूत होगा।

✨💝कुंभ (Aquarius): कार्यक्षेत्र में धैर्य बनाए रखें। छोटी मदद भी बड़ा असर छोड़ेगी।

✨💝मीन (Pisces): दिन थोड़ा सावधानी बरतने का है। बातचीत और कामकाज में सतर्क रहें।
💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏
  ➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
   🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं अभी श्राद्ध पक्ष चल रहा है। ☀️
🌹|| ✨ 🌹// 🕉️ ✨ 🌺 🦚 🌼 

🕉️ 🌸*🌙 🐘 🙏🐚🪔 🌿 🌺🪷
    🌹---:श्राद्ध का रहस्य:---🌹
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💝(वर्ष में 365 दिनों में 16 दिन ऐसे होते हैं जब मृतात्माओं के लिए सवेरा होता है, उनके लिए दिन होता है। 349 दिन उनके लिए रात्रि का अँधेरा रहता है। ये 16  दिन पितृपक्ष के दिन कहलाते हैं। इन महत्वपूर्ण दिनों में मृतात्माओं के नाम पर श्रद्धापूर्वक दिया गया अन्न-जल, वस्त्र ब्राह्मणों को दिया जाता है, वह सूक्ष्मरूप से उन्हें प्राप्त हो जाता है और पितृ लोग संतुष्ट होकर पूरे वर्ष आशीष की वर्षा करते रहते हैं।)

☀️'देश काल च पात्रे च 
       श्रद्धया विधिना च यत्।
पितृनुद्दिश्य विप्रेभ्यो
        दत्तं श्राद्धमुदाहृतम्।।

 💢(देश काल को ध्यान में रखते हुए पात्र व्यक्ति को श्रद्धापूर्वक जो भोजन पितरों के उद्देश्य से ब्राह्मण को दिया जाता है, वह श्राद्ध कहलाता है।) 
 
      ➡️भारतीय दर्शन में श्राद्ध का बहुत महत्व है। चाहे वह वैज्ञानिक दृष्टि से हो या हो आध्यात्मिक दृष्टि से। देखा जाय तो अपने मृत बंधुओं के प्रति श्रद्धापूर्वक किया गया कर्म जो हमें शांति देता है और परलोकगत आत्मा को भी देता है शांति, वह है श्राद्ध।' 
      🌺श्राद्ध-कर्म आदिकाल से हिन्दू धर्म-संस्कृति का मुख्य भाग रहा है। इस पर थोडा विचार करना उचित है। आत्मा की अमरता के सिद्धान्त को स्वयं भगवान् श्रीकृष्ण गीता में वर्णन करते हैं। 'आत्मा जब तक अपने परमात्मा से संयोग नहीं कर लेती तब तक विभिन्न योनियों भटकती रहती है और इस दौरान उसे श्राद्ध-कर्म से संतुष्टि मिलती है।' श्राद्ध की बड़ी महिमा कही गयी है। लेकिन सूक्ष्म रूप से देखें तो श्राद्ध 'श्रद्धा' का दूसरा नाम है जिसमें पितरों केे प्रति भक्ति और कृतज्ञता का समावेश होता है। श्राद्ध-कर्म के विषय में अपस्तंब ऋषि कहते हैं--'जैसे यज्ञ के माध्यम से देवताओं को उनका भाग और शक्ति प्राप्त होती है, उसी प्रकार श्राद्ध और तर्पण से पितृलोक में बैठे पितरों को उनका अंश प्राप्त होता है।
     ‼️ हिन्दू-पंचांग में पितरों के श्राद्धकर्म के लिए विशेष समय निर्धारित किया गया है जिसे 'पितृपक्ष' कहते हैं। यह पितृपक्ष आश्विन मास के कृष्णपक्ष की प्रतिपदा तिथि से अमावस्या तक रहता है जिसमें व्यक्ति अपने दादा, परदादा, मृत पिता या माता का श्राद्ध करता है।( जिनके पितरों की तिथि भाद्रपद पूर्णिमा को पड़ती है उनके लिए पूर्णिमा को ही श्राद्ध का विधान है।) श्राद्ध का समय दिन का तीसरा प्रहर होता है क्योंकि पितरों के लिए तीसरा प्रहर ही निर्धारित किया गया है जो दिन के 12 बजे से 3 बजे तक है। उसी समय प्रेतलोक या पितृलोक से उनका पथ खुलता है, इससे पूर्व नहीं। जो अज्ञानी जल्दबाज लोग सवेरे से ही श्राद्धकर्म करके ब्राह्मण भोजन, दान-पुण्य करने लगते हैं, उनका वह कर्म वृथा जाता है। वह सब पितरों को प्राप्त नहीं हो पाता है। 12 बजकर कुछ क्षणों के बाद पुत्र को उपयुक्त सामग्री लेकर जल पात्र में तिल, जौ, दुग्ध, चीनी, सफेद पुष्प मिलाकर दक्षिण मुख होकर पितरों को श्रद्धा से अर्पित करना होता है। अर्पित करने से पूर्व गोत्र सहित अपना नाम और पिता का नाम लेकर पितरों का नाम लेकर आवाहन करना अनिवार्य है। जलदान करते समय हाथ की दोनों अनामिका उंगलियों में कुश या डाभ की पैंती या स्वर्ण की अंगूठी पहननी आवश्यक है और बाएं हाथ की पैंती की ओर से झुकाकर जलदान करना चाहिए। जल डालते समय ध्यान रखें कि वह नीचे गिरकर पैरों पर उसके छींटे न आएं। उपयुक्त है कि किसी दूसरे बर्तन में जलधार गिराकर उसे अर्पित करें।
     🌺 शास्त्र में पितरों की भी कई श्रेणियाँ बतलायीं गयीं हैं। जिस तिथि में व्यक्ति की मृत्यु होती है, उस तिथि के दिन मृत व्यक्ति का सूक्ष्म शरीर पितृलोक से उस दिन लौट आता है, जहाँ पर उसकी मृत्यु हुई थी। ( पितरों की मृत्यु जिस स्थान पर हुई है वहां पितर पहुंचते हैं, लेकिन श्राद्धकर्ता पुत्र किसी दूसरे स्थान पर है, या उसने दूसरा घर बना लिया है तो उसे पितरों का आवाहन करना पड़ता है। पितृगण तत्काल आवाहन द्वारा उस स्थान पर पहुंच जाते हैं) अगर उसका उस तिथि पर उचित समयावधि में श्राद्ध नहीं होता है, तो वह भूखा-प्यासा दुःखी होकर लौट जाता है और जीवित पुत्र-पौत्रों को श्राप देता है। इससे उस घर पर पितृदोष लग जाता है। घर की सुख-शान्ति चली जाती है। इनके श्राप से कुल का वंश आगे नहीं बढ़ पाता है अर्थात् वह व्यक्ति पुत्रहीन हो जाता है और मरने पर उसे भी अन्न-जल की प्राप्ति नहीं होती है।

☀️---------:मृतात्मा कबतक प्रेतयोनि में रहती है ?:---------
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     💢  मृतात्मा का दूसरा श्राद्ध श्मशान भूमि में किया जाता है, इसलिए कि मृतात्मा स्वयम् के छायाशरीर में प्रवेश न कर सके। जब तक शरीर जलकर भस्म नहीं हो जाता, तब तक मृतात्मा अपनी अतृप्त वासनाओं के वेग के कारण अपने ही छायाशरीर में प्रवेश कर जाती है या अन्य किसी जीवित या मृत शरीर में। यह तभी होता है जब मृतात्मा अपनी वासनाओं के अनुकूल तत्काल शरीर निर्माण नहीं कर् पाती। जैसा कि पूर्व में बतलाया जा चुका है कि वासना के आधार पर स्वनिर्मित शरीर को ही प्रेत शरीर कहते हैं अथवा कहते है प्रेतात्मा। जब तक वासनाओं का वेग समाप्त नहीं हो जाता, तब तक मृतात्मा प्रेतयोनि में ही रहती है। इसकी कोई अवधि नहीं होती, एक वर्ष भी हो सकती है और एक हज़ार वर्ष भी। माता-पिता की मृत्यु

 💥     प्रेतात्माओं का मृतात्मा को अपने समूह में मिलाने का प्रयोजन--

💥       प्रयोजन स्पष्ट है। जो लावारिस मृतात्माएँ होती हैं, जिनका उचित ढंग से अन्तिम संस्कार और क्रिया नहीं की गयी होती है, जिनकी अकाल मृत्यु हुई होती है, वे प्रेतात्माएं अपना एक अलग समूह बनाकर रहती हैं। ये प्रेतात्माएं उन मृतात्माओं को अपने समूह में इसलिये मिलाती हैं या मिलाने का प्रयास करती हैं कि मृतात्मा के परिवार के लोग उसकी सुख-शान्ति के लिए, साथ ही उसकी मुक्ति के लिए जो भी दान-पुण्य करते हैं, ब्राह्मणों को भोजन, वस्त्र, शैय्या आदि उपयोगी वस्तुएं देते हैं, उन सब वस्तुओं और सामग्रियों में जो तत्व होते हैं, वे तत्व प्रेतात्माओं का समूह ले लेता है और बेचारा मृतात्मा निरीह-सा मुंह ताकता रह जाता है।
💥       यही दशा गया श्राद्ध में भी है। गया में जितनी प्रेतात्माएँ हैं, उतनी तो संसार भर में नहीं होंगी। जिस मृतात्मा के लिए गया में श्राद्ध या पिण्डदान आदि होता है, उसे वहां की प्रेतात्माएं अपने अधिकार में ले लेती हैं और जो उसके निमित्त वहां किया जाता है, उन सबका तत्व स्वयम् प्राप्त कर लेती हैं। बड़ी ही विचित्र और रहस्यमयी बात है, सब नहीं समझ सकते इसे।

      💥 इसका कोई उपाय है क्या ?🌺

☀️       उपाय अवश्य है। त्रिपिंडी श्राद्ध और नारायण बलि ही एक ऐसा उपाय है कि उसके अंतर्गत मृतात्मा के निमित्त दिया हुआ दान-पुण्य, भोजन आदि सीधा मृतात्मा को प्राप्त होता है। उन पर प्रेतात्माओं का वश नहीं चलता। उनको ग्रहण करने का सामर्थ्य उनमें नहीं होता।

   🌺🌺स्त्रियों की प्रेतात्माएं☀️

       प्रकृति के नियम के अनुसार प्रायः सभी प्रकार की स्त्रियां वासना शरीरधारिणी प्रेतात्माएं होती हैं। किंतु उनमें कुछ विशेष् प्रेतात्माएं होती हैं जिनकी प्रेतयोनि से मुक्ति की आशा बहुत ही कम होती है। गर्भवती स्त्रियां, रजस्वला स्त्रियां, बाँझ स्त्रियां, प्रसव-काल में मृत स्त्रियां, नाजाइज़ गर्भपात कराने वाली स्त्रियां, शिशु की हत्या करने वाली स्त्रियां मृत्योपरान्त भयंकर प्रेतयोनि को उपलब्ध् होती हैं। जनसाधारण भाषा में ऐसी ही प्रेतिनियों को डायन, चुड़ैल आदि नामों से जाना जाता है। उनमें प्रबल तामसिक शक्ति होती है। वे कुमारी कन्याओं, गर्भवती स्त्रियों, नवप्रसूता स्त्रियों को विशेष् रूप से परेशान करती हैं। नवजात शिशु पर तो वे बराबर छाया की तरह मंडराती रहती हैं। तन्त्र में इनसे बचने के कई उपाय और क्रियाएं हैं।

🌺‼️जय श्री कृष्णा! 🦚🚩 🌺🙏

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 💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
  ✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
           *🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏     
 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹          

 *💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
          *बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
       🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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‼️*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय  बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️
vipul

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