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पञ्चाङ्ग 04 सितंबर 2026

 *💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*

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*🎈दिनांक  04 सितंबर 2026*
*🎈 वार-  शुक्रवार*
*🎈 मास - भाद्रपद मास*
*🎈 पक्ष -  कृष्ण पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर     पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - रितु वर्षा*
*🎈तिथि     अष्टमी - 12:13 ए एम, सितम्बर 05 तक  तत्पश्चात     नवमी* 
*🎈 नक्षत्र- रोहिणी - 11:04 पी एम तक तत्पश्चात मृगशीर्ष*
*🎈योग    - हर्षण - 03:44 पी एम तक
 तत्पश्चात् वज्र*
*🎈करण-  बालव - 01:20 पी एम तक
 तत्पश्चात् कोलव, तैतिल*
*🎈राहुकाल- 10:59 ए एम से 12:34 पी एम(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
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(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
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🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️
*🎈सूर्योदय-06:15 ए एम*
*🎈सूर्यास्त-06:53 पी एम*
*🎈चंद्र राशि- वृषभ*
*🎈सूर्य राशि- सिंह*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:45 ए एम से 05:30 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:09 पी एम से 012:59 पी एम*
*🎈अमृत काल - 08:03 पी एम से 09:33 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त -12:11 ए एम, सितम्बर 05 से 12:57 ए एम, सितम्बर 05*
*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण-   जन्माष्टमी के व्रत या पूजा के दिन सामान्य अनाज, दालें, और तामसिक भोजन जैसे [लहसुन-प्याज, मांस और मदिरा] का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। व्रत के दौरान साधारण नमक और गैर-व्रत वाले खाद्य पदार्थों से परहेज किया जाता है।

🛟आप के दैनिक विवरण के अनुसार, 04 सितंबर 2026, शुक्रवार का दिन सभी 12 राशियों के लिए मिला-जुला और खास रहने वाला है। इस दिन जन्माष्टमी और शुभ योगों का प्रभाव भी, जैसा कि  में बताया गया है, कई राशियों के लिए लाभदायक है।
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 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
     🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
       *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day



          🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
★√*★√*★√*★√*★√*★
     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
 
   ‼️💢आज का राशिफल💢‼️

🛟सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल‼️

💥 मेष: “आपको रुका हुआ धन मिल सकता है।” ऊर्जा का स्तर ऊंचा रहेगा और काम में सफलता मिलेगी।

🌺वृषभ: “आर्थिक मामलों में आज का दिन शुभ रहेगा।” पुराने काम पूरे होंगे, लेकिन खर्चों पर काबू रखें।

🌺मिथुन: “आध्यात्मिक कामों के लिए है खास दिन।” मन शांत रहेगा, हालांकि अनावश्यक खर्चों से बचना होगा।

🌺कर्क: “सामाजिक दायरे में सफलता पाएंगे।” आत्मविश्वास बढ़ेगा, पर बजट का ध्यान रखें।

🌺सिंह: “धन लाभ होता दिख रहा है।” करियर के मोर्चे पर नई शुरुआत या फैसले अच्छे परिणाम देंगे।

🌺कन्या: भक्तिभाव में मन लगेगा। परिवार के सहयोग से रिश्तों में प्रेम और मजबूती आएगी।

🌺तुला: “पैसों के मामले में आज विशेष रूप से शुभ दिन है।” आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा, पर गलतफहमियों से बचें।

🌺वृश्चिक: धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। व्यापारिक समझौतों और साझेदारियों के लिए समय अनुकूल है।

🌺धनु: “परिस्थितियां आपको व्यावहारिक बनने के लिए प्रेरित करेंगी।” कार्यक्षेत्र में धैर्य से काम लें.

🌺मकर: रचनात्मकता और कार्यस्थल पर कूटनीति से सफलता हासिल होगी।

🌺कुंभ: “भाग्य का सपोर्ट आज बना रहेगा।” परिवार और दोस्तों के साथ बेहतरीन समय बीतेगा।

🌺मीन: नई योजनाओं पर काम शुरू करने के लिए दिन अच्छा है, धैर्य से निर्णय लें। 

💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏
  ➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
   🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️

🌹|| ✨ 🌹// 🕉️ ✨ 🌺 कुंडली में चौथा भाव मकान, ज़मीन और प्रॉपर्टी के सुख का होता है और इसके मुख्य कर्ता-धर्ता मंगल, शनि और शुक्र हैं। जब इन ग्रहों में असंतुलन होता है तो इंसान ज़िंदगी भर दूसरों के मकानों का किराया भरता रह जाता है। 

‼️जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के अवतरण की होती है, जो पूरे ब्रह्मांड के मालिक हैं। अगर अपना खुद का घर बनाने का सपना पूरा नहीं हो रहा, तो इस जन्माष्टमी पर लकड़ी या अच्छे गत्ते का एक सुंदर सा छोटा घर खुद अपने हाथों से लाकर या बाज़ार से लाकर उसे रंग-बिरंगी रोशनी, गोटे और फूलों से सजाएं। जन्माष्टमी की मध्यरात्रि जब बाल गोपाल का जन्मोत्सव हो, तो उनका पंचामृत से अभिषेक करके उन्हें नए वस्त्र पहनाकर उस सुंदर छोटे घर के भीतर पूरे लाड़-प्यार से स्थापित करें। उस घर के मुख्य द्वार पर शुद्ध देसी गाय के घी का एक चौमुखी दीपक जलाएं और कान्हा जी को माखन-मिश्री का भोग लगाकर पूरी श्रद्धा और भावना से प्रभु का नाम लें, और हाथ जोड़कर प्रार्थना करें कि हे प्रभु, आज मैंने आपको आपका यह सुंदर आशियाना समर्पित किया है, अब मेरे सिर पर भी मेरे अपने घर की छत का प्रबंध करना आपकी ज़िम्मेदारी है। इस पोस्ट को लाइक और शेयर ज़रूर करें, ताकि पूर्ण फल मिल सके ।।

💢🚩 रावण भी कांप उठा था अयोध्या के राजा की शक्ति देखकर! 

😱  रघुकुल के संस्थापक 'महाराज रघु' की अद्भुत मंत्र-शक्ति और अयोध्या के सिंहासन का वह रहस्य जिसने रावण की पोल खोल दी थी... 

🏹✨अयोध्या के चक्रवर्ती सम्राट रघु ने ही उस महान ‘रघुवंश’ की नींव रखी थी, जिसमें आगे चलकर भागीरथ, दिलीप, दशरथ और स्वयं प्रभु श्रीराम ने जन्म लिया। रघुकुल अपने सत्य, वचन पालन और शौर्य के लिए जाना जाता है।

📖 जब रावण आया अयोध्या:
रावण त्रिकालदर्शी था, वह जानता था कि उसकी मृत्यु अयोध्यापति के हाथों होगी। इसलिए वह हमेशा अयोध्या के विनाश का सपना देखता था। एक बार वह ब्राह्मण का वेश धरकर अयोध्या पहुंचा। उस समय राजसिंहासन पर महाराज रघु विराजमान थे।
🪞 राजसिंहासन का चमत्कार:
एक दिन जब दरबार खाली था, ब्राह्मण वेशधारी रावण निर्भय होकर सिंहासन के पास पहुंचा। स्वर्ण चबूतरे पर रखे उस सिंहासन के पीछे बड़े-बड़े दर्पण लगे थे। रावण सिंहासन पर बैठने का लोभ रोक न सका। लेकिन जैसे ही उसने सीढ़ियां चढ़नी शुरू कीं, दर्पणों में 'ब्राह्मण' नहीं बल्कि 'लंकापति रावण' का असली रूप दिखने लगा! डरकर वह नीचे उतरा तो फिर से ब्राह्मण दिखने लगा। रावण समझ गया कि अयोध्या के सिंहासन के सामने मायावी कपट नहीं टिक सकता।
💦 महाराज रघु की अद्भुत मंत्र-शक्ति:
विद्वान रावण वहां से सरयू तट पर पहुंचा, जहां महाराज रघु संध्यावंदन कर रहे थे। पूजा समाप्त होने पर रावण ने टोकते हुए कहा- "राजन्! आप अशुद्ध संध्या कर रहे हैं। आपने मंत्र-जल का आचमन करने के बजाय उसे पूर्व दिशा में क्यों फेंक दिया?"
तब महाराज रघु ने उत्तर दिया- "विप्र! जब मैंने जल हाथ में लिया, तब सरयू के उस पार एक सिंह ने गाय पर हमला कर दिया था। धर्मरक्षा के लिए मैंने 'अघमर्षण मंत्र' पढ़कर वह जल सिंह पर फेंका, जिससे सिंह वहीं ढेर हो गया और गाय बच गई।"
🦁 रावण का भय:
सच्चाई जानने के लिए रावण नदी के उस पार गया। वहां सच में सिंह मरा पड़ा था और गाय के खुरों के निशान थे! यह देखकर रावण के पसीने छूट गए। उसने सोचा- "जिस राजा की मंत्र-शक्ति इतनी प्रबल है, अगर उसने वह मंत्र-जल लंका की ओर फेंक दिया, तो मेरी लंका का विनाश तय है!"
दूर से ही महाराज रघु को प्रणाम कर रावण चुपचाप लंका लौट गया और संकल्प लिया कि वह महाराज रघु के रहते कभी अयोध्या नहीं आएगा।
ऐसे प्रतापी राजा थे महाराज रघु, जिनकी प्रतिज्ञा आज भी गाई जाती है:
"रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई।" 🙏🚩

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 💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
  ✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
           *🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏     
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 *💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
          *बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
       🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*♥️~*अपने घर, ऑफिस, और फैक्ट्री वास्तु के साथ सफल बनाये। जन्मकुंडली, प्रश्नन कुंडली, अंककुंडली, रत्न, जड़, एवं रुद्राक्ष आदि के लिये सम्पर्क करे।*
‼️*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय  बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
vipul


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