*💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
*🎈दिनांक 31 अगस्त 2026*
*🎈 वार- सोमवार*
*🎈 मास - भाद्रपद मास*
*🎈 पक्ष - कृष्णा पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - रितु वर्षा*
*🎈तिथि तृतीया - 08:50 ए एम तक तत्पश्चात चतुर्थी*
*🎈 नक्षत्र- रेवती - 03:23 ए एम, सितम्बर 01 तक तत्पश्चात अश्विनी*
*🎈योग - गण्ड - 01:51 ए एम, सितम्बर 01 तक तत्पश्चात् वृद्धि*
*🎈करण- विष्टि - 08:50 ए एम तक तत्पश्चात् बव,बालव*
*🎈राहुकाल- 07:50 ए एम से 09:25 ए एम (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय-06:14:13 ए एम*
*🎈सूर्यास्त-06:57:00 पी एम*
*🎈चंद्र राशि- मीन - 03:23 ए एम, सितम्बर 01 तक*तत्पश्चात् मेष*
*🎈सूर्य राशि- सिंह*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:44 ए एम से 05:29 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:10 पी एम से 01:01 पी एम*
*🎈अमृत काल - 01:01 ए एम, सितम्बर 01 से 02:36 ए एम, सितम्बर 01*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:13 ए एम, सितम्बर 01 से 12:58 ए एम, सितम्बर 01*
*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण- ब्रह्मवैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों में तृतीया तिथि के दिन परवल खाना वर्जित (निषिद्ध) माना गया है।
🛟31 अगस्त 2026 को चंद्रमा मीन राशि में रहेंगे और सूर्य पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। यह दिन सभी 12 राशियों के लिए मिला-जुला रहेगा। आत्मबल, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक सहयोग में उतार-चढ़ाव के बीच कार्यक्षेत्र में सूझबूझ से लाभ मिलेगा।
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
★√*★√*★√*★√*★√*★
🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
💢आज का राशिफल💢
🛟सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल‼️
💥 मेष: आत्मविश्वास बढ़ेगा। कार्यक्षेत्र में सक्रियता रहेगी। जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचें।
💥वृषभ: धन लाभ के योग हैं। खर्चों पर नियंत्रण रखें। परिवार के साथ समय अच्छा बीतेगा।
💥मिथुन: बातचीत में सावधानी बरतें। दोस्तों का सहयोग मिलेगा। व्यापार में उन्नति होगी।
💥कर्क: आर्थिक मामलों में सुधार होगा। मानसिक शांति बनाए रखें।
💥सिंह: मान-सम्मान बढ़ेगा। सूर्य के नक्षत्र परिवर्तन से कार्यक्षेत्र में लाभ होगा। सेहत का ध्यान रखें।
💥कन्या: कार्यभार अधिक रहेगा। विरोधी शांत रहेंगे। गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें।
💥तुला: कला और संगीत में रुचि बढ़ेगी। रिश्तों में मधुरता आएगी। निवेश में सावधानी रखें।
💥वृश्चिक: पुराने मित्रों से मुलाकात होगी। नौकरी में पदोन्नति के योग हैं। यात्रा टालें।
💥धनु: भाग्य का साथ मिलेगा। धार्मिक कार्यों में मन लगेगा। रुका हुआ धन प्राप्त होगा।
💥मकर: कार्य में सफलता मिलेगी। अधिकारी वर्ग से सहयोग प्राप्त होगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।
💥कुंभ: आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। वाणी पर संयम रखें।
💥मीन: चंद्रमा आपकी ही राशि में हैं। मन प्रसन्न रहेगा। व्यापार और नौकरी में अनुकूलता बनी रहेगी। अत्यधिक भावुकता से बचें।
💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏
➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️
🌹|| ✨ 🌹// #बीज_मंत्र: #अर्थ, #महत्व_और_लाभ //🌹
******************************
सभी वैदिक मंत्रो का सार बीज मंत्रो को माना गया है। हिन्दू धर्म में सबसे बड़ा बीज मंत्र ” ॐ ” है। अन्य शब्दों में बीज मंत्र किसी भी वैदिक मंत्र का वह लघु रूप है जिसे मंत्र के साथ प्रयोग करने पर वह आलोकिक कार्य करता है।
बीज मंत्र जिसे वैदिक बीज मंत्र के रूप में भी जाना जाता है मुख्य मंत्र हैं या महान आध्यात्मिक शक्तियों से संपन्न ध्वनियां हैं, इन्हें अक्सर हिंदू धर्म में प्रमुखता से सभी देवता का श्रव्य बीज संस्करण कहा जाता है । बीजस कई मंत्र रचनाओं का हिस्सा हैं और इसलिए वे मंत्रों की बैटरी की तरह हैं। ऐसा माना जाता है कि जब एकाग्रता से जप किया जाता है तो बीजे मंत्र भक्तों की इच्छाओं को पूरा कर सकते हैं और उनके चारों ओर एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकते हैं और सभी खतरों और दुश्मनों से रक्षा कर सकते हैं।
बीज मंत्र बहुत शक्तिशाली मंत्र है जिनका उपयोग हिंदू धर्म में देवी-देवताओं के आह्वान के लिए किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह छोटे मंत्र ब्रह्मांड के निर्माण के दौरान बनाई गई ध्वनि तरंगों से पैदा हुए थे। इनमें से प्रत्येक मंत्र एक अर्थ से जुड़ा हुआ है। प्रत्येक बीज मंत्र के जाप के दौरान जो ध्वनि आवृत्ति बनती है, वह देवी का आह्वान करने का काम करती है। उनकी ब्रह्मांडीय ऊर्जा को शरीर में प्रवाहित करने में मदद करती है। यदि कोई दिव्य आकृतियों की शक्तियों को प्राप्त करने का इरादा रखता है, इन मंत्रों का जाप लगातार इस संदर्भ में चमत्कारी काम करता है। वास्तव में प्रत्येक देवता को समर्पित मंत्रों का जाप करना और उनमें बीज मंत्र जोड़ना, यह देवी-देवताओं को अधिक प्रसन्न करता है। इन बीज मंत्रों में शक्ति होती है। ये शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखते हैं।
बीज मंत्र जाप के दौरान बोले जाने वाले प्रत्येक शब्द का एक महत्वपूर्ण अर्थ होता है, क्योंकि यह मंत्र की नींव बीज की तरह होती है। लेकिन शब्दों या ध्वनि को तोड़कर सरल और समझने योग्य भाषा में बदलना सही नहीं है। इन मंत्रों के पीछे के विज्ञान को समझने में काफी समय लग सकता है, फिर भी यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाते हैं। ये प्राकृतिक रूप से प्रकट हुए हैं। इसके बाद ऋषियों द्वारा उनके छात्रों तक पहुंचा और अंत में शेष दुनिया में इसका प्रसारा हुआ। समय के साथ इन मंत्रों ने अपना स्थान बना लिया है। कई अलग-अलग बीज मंत्र हैं, जो अलग-अलग देवी-देवताओं को समर्पित हैं। लेकिन ऐसे बीज मंत्र भी मौजूद हैं, जो विभिन्न ग्रहों को समर्पित हैं, जिनके उपयोग से उस ग्रह को शांत किया जा सकता है, जो व्यक्ति विशेष की कुंडली में गड़बड़ी का कारण बन रहा हो या खुद को ग्रह के अशुभ प्रभावों से बचाना हो।
ये बीज मंत्र अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावी हैं। जब दृढ़ विश्वास और पवित्र मन से इनका जाप किया जाता है, तो जातक की कोई भी इच्छा पूरी हो जाती है। इस मंत्र का जाप करने के लिए मन का स्थिर एवं शांत होना जरूरी है। शांत मन और ध्यान केंद्रित करने के लिए निरंतर "ओम" मंत्र का उच्चारण किया जा सकता है। इसके बाद विशिष्ट बीज मंत्र का जाप शुरू करना चाहिए। मंत्र को एक समान "ओम" से समाप्त करने से मंत्र पूरे चक्र में आ जाता है।
बीज मंत्र कुछ इस प्रकार होते हैं :-
ॐ, क्रीं, श्रीं, ह्रौं, ह्रीं, ऐं, गं, फ्रौं, दं, भ्रं,
धूं, हलीं, त्रीं, क्ष्रौं, धं, हं, रां, यं, क्षं, तं II
ये दिखने में छोटे से बीज मंत्र अपने भीतर बहुत से शब्दों को समाये हुए होते है। सभी बीज मंत्र अत्यंत कल्याणकारी है जो अलग-अलग देवी-देवताओं के प्रतिनिधत्व करते है। बीज मंत्रों के जप से देवी-देवता अति शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्त का उद्धार करते है। बीज मंत्रों का उच्चारण आपके आस-पास एक सकारात्मक उर्जा या शुद्ध आभामंडल का संचार करता है।
कौमुदी सिद्धांत के अनुसार वैदिक व्याकरण को तीन सूत्रों द्वारा स्पष्ट किया गया है : (1) – मोनुस्वारः, (2) – यरोनुनासिकेनुनासिको तथा (3) - अनुस्वारस्य ययि पर सवर्णे।
बीज मंत्र के शुद्ध उच्चारण में सस्वर पाठ भेद के उदात्त तथा अनुदात्त अन्तर को स्पष्ट किए बिना शुद्ध जाप असम्भव है और इस अशुद्धि के कारण ही मंत्र का सुप्रभाव नहीं मिल पाता। इसलिए सर्वप्रथम किसी बौद्धिक व्यक्ति से अपनेअनुकूल मंत्र को समय-परख कर उसका विशुद्ध उच्चारण अवश्य जान लें। अपने अनुरूप चुना गया बीज मंत्र जप अपनी सुविधा और समयानुसार चलते-फिरते उठते-बैठते अर्थात किसी भी अवस्था में किया जा सकता है। इसका उद्देश्य केवल शुद्ध उच्चारण एक निश्चित ताल और लय से नाड़ियों में स्पदन करके स्फोट उत्पन्न करना है।
कां– पेट सम्बन्धी कोई भी विकार और विशेष रूप से आंतों की सूजन में लाभकारी।
गुं– मलाशय और मूत्र सम्बन्धी रोगों में उपयोगी।
शं– वाणी दोष, स्वप्न दोष, महिलाओं में गर्भाशय सम्बन्धी विकार औेर हर्निया आदि रोगों में उपयोगी।
घं– काम वासना को नियंत्रित करने वाला और मारण-मोहन-उच्चाटन आदि के दुष्प्रभावके कारण जनित रोग-विकार को शांत करने मेंसहायक।
ढं– मानसिक शांति देने में सहायक। अप्राकृतिक विपदाओं जैसे मारण, स्तम्भन आदि प्रयोगों से उत्पन्न हुए विकारों में उपयोगी।
पं– फेफड़ों के रोग जैसे टी.बी., अस्थमा, श्वास रोग आदि के लिए गुणकारी।
बं– शूगर, वमन, कफ, विकार, जोडों के दर्द आदि में सहायक।
यं– बच्चों के चंचल मन के एकाग्र करने में अत्यत सहायक।
रं– उदर विकार, शरीर में पित्त जनित रोग, ज्वर आदि में उपयोगी।
लं- महिलाओं के अनियमित मासिक धर्म, उनके अनेक गुप्त रोग तथा विशेष रूप से आलस्य को दूर करने में उपयोगी।
मं– महिलाओं में स्तन सम्बन्धी विकारों में सहायक।
धं– तनाव से मुक्ति के लिए मानसिक संत्रास दूर करने में उपयोगी ।
ऐं- वात नाशक, रक्त चाप, रक्त में कोलेस्ट्राॅल, मूर्छा आदि असाध्य रोगों में सहायक।
द्वां– कान के समस्त रोगों में सहायक।
ह्रीं– कफ विकार जनित रोगों में सहायक।
ऐं– पित्त जनित रोगों में उपयोगी।
वं– वात जनित रोगों में उपयोगी।
शुं– आंतों के विकार तथा पेट संबंधी अनेक रोगों में सहायक ।
हुं– यह बीज एक प्रबल एन्टीबॉयटिक सिद्ध होता है। गाल ब्लैडर, अपच, लिकोरिया आदि रोगों में उपयोगी।
अं– पथरी, बच्चों के कमजोर मसाने, पेट की जलन, मानसिक शान्ति आदि में सहायक I
विभिन्न बीज मंत्र इस प्रकार हैं :-
```````````````````````````````````````````
ॐ- परमपिता परमेश्वर की शक्ति का प्रतीक है.
ह्रीं- माया बीज,
श्रीं- लक्ष्मी बीज,
क्रीं- काली बीज,
ऐं- सरस्वती बीज,
क्लीं- कृष्ण बीज
बीजमंत्र के लाभ :-
```````````````````````````````````````
कं- मृत्यु के भय का नाश, त्वचारोग व रक्त- विकृति में..
ह्रीं- मधुमेह हृदय की धड़कन में
घं- स्वप्नदोष व प्रदररोग में
भं- बुखार दूर करने के लिए
क्लीं– पागलपन में
सं- बवासीर मिटाने के लिए
वं- भूख प्यास रोकने के लिए
लं- थकान दूर करने के लिए
बं– वायु रोग और जोदो के दर्द के लिये
शेष भाग आगे.........
*🙏🌺 🌺🙏
🧨🚩⛳💥❤️🕉️🌴🍀🎈🌀🌿
💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
*🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹
*💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
*बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
♨️ ⚜️ 🕉🌞 🌞🕉 ⚜🚩*♥️💕💥*अगर आपको हमारा पंचांग नियमित चाहिए तो आप मुझे इस चैनल को फॉलो करे*
*https://whatsapp.com/channel/0029Va65aSaKrWR*
♨️ ⚜️ 🕉🌞 🌞🕉 ⚜🚩
🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*♥️~*अपने घर, ऑफिस, और फैक्ट्री वास्तु के साथ सफल बनाये। जन्मकुंडली, प्रश्नन कुंडली, अंककुंडली, रत्न, जड़, एवं रुद्राक्ष आदि के लिये सम्पर्क करे।*
‼️*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏*हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️




