नागौर। राजस्थान उच्च न्यायालय में उत्पन्न परिस्थितियों तथा न्यायिक व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन एवं राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन, जोधपुर द्वारा किए जा रहे आंदोलन एवं उनकी मांगों के समर्थन में जिला अधिवक्ता संघ, नागौर द्वारा न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया जा रहा है। यह कार्य बहिष्कार आज भी जारी रहा तथा दिनांक 06 सितंबर 2026 तक जारी रहेगा।
जिला अधिवक्ता संघ नागौर के अध्यक्ष डॉ. पवन श्रीमाली, एडवोकेट ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि न्यायिक संस्थाओं की गरिमा, निष्पक्षता, स्वतंत्रता, पारदर्शिता तथा आम नागरिक का न्यायपालिका में विश्वास बनाए रखने के उद्देश्य से है। हाईकोर्ट की दोनों बार एसोसिएशनों की संयुक्त बैठक में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्यों से विरत रखने, राजस्थान उच्च न्यायालय में स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति तथा संपूर्ण राजस्थान में लागू टार्गेटेड फाइल सिस्टम को तत्काल बंद करने सहित तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं।
डॉ. श्रीमाली ने कहा कि विशेष रूप से टार्गेटेड फाइल सिस्टम को लेकर प्रदेश के अधिवक्ताओं में गंभीर चिंता है। पुराने प्रकरणों को निर्धारित लक्ष्य के आधार पर शीघ्र निस्तारित करने के दबाव से न्यायालयों के साथ-साथ अधिवक्ताओं पर भी अनावश्यक दबाव बढ़ रहा है। न्याय केवल प्रकरण का निस्तारण नहीं है, बल्कि प्रत्येक पक्ष को अपना पक्ष रखने, आवश्यक साक्ष्य एवं दस्तावेज प्रस्तुत करने और विधि के अनुसार समुचित अवसर मिलने के बाद न्यायपूर्ण निर्णय तक पहुंचने की प्रक्रिया है।
न्याय में अनावश्यक विलंब उचित नहीं है, लेकिन केवल लक्ष्य पूरा करने की जल्दबाजी में न्याय की गुणवत्ता और पक्षकारों को मिलने वाले उचित अवसर से समझौता भी नहीं होना चाहिए। हाईकोर्ट की संयुक्त बैठक में भी टार्गेटेड फाइल सिस्टम के कारण अधिवक्ताओं के कार्य-जीवन संतुलन पर प्रभाव तथा बार सदस्यों में असंतोष और कठिनाइयां उत्पन्न होने की बात रखी गई है। उन्होंने कहा कि बार और बेंच न्याय व्यवस्था के दो अभिन्न अंग हैं और दोनों का उद्देश्य आम व्यक्ति को निष्पक्ष एवं प्रभावी न्याय दिलाना है। इसलिए जिला अधिवक्ता संघ नागौर हाईकोर्ट बार की न्यायोचित मांगों के समर्थन में है और 06 सितंबर 2026 तक न्यायिक कार्यों से विरत रहेगा। इस दौरान न्यायालयों से भी अपेक्षा है कि अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार को देखते हुए उनके पक्षकारों के विरुद्ध अनुपस्थिति के कारण कोई प्रतिकूल आदेश पारित न कर सहयोग प्रदान किया जाए।





