*💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
*🎈दिनांक 21 सितंबर 2026*
*🎈वार- सोमवार*
*🎈मास - भाद्रपद मास*
*🎈पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 2083*
*🎈संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈अयन - दक्षिणायन*
*🎈ऋतु - शरद*
*🎈तिथि- दशमी- 05:51 पी एम तक तत्पश्चात एकादशी *
*🎈नक्षत्र- उत्तराषाढा - पूर्ण रात्रि तक तत्पश्चात उत्तराषाढ़ा*
*🎈करण - तैतिल - 06:58 ए एम तक तत्पश्चात्,गर, वाणिज*
*🎈योग- शोभन - 04:06 पी एम तक तत्पश्चात्* अतिगन्ड*
*🎈राहुकाल- 05:03 पी एम से 06:34 पी एम(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय-06:23.00 ए एम*
*🎈सूर्यास्त-06:33. पी एम*
*🎈चंद्र राशि- धनु* - 11:15 ए एम तक
तत्पश्चात् मकर*
*🎈सूर्य राशि- कन्या*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:48 ए एम से 05:36 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:04 पी एम से 12:52 पी एम*
*🎈अमृत काल - 12:02 ए एम, सितम्बर 22 से 01:48 ए एम, सितम्बर 22*
*🎈 निशिता मुहूर्त 12:04 ए एम, सितम्बर 22 से 12:52 ए एम, सितम्बर 22*
*🎈रवि योग -पूरे दिन*
*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण- दशामाता व्रत विधान
🌹ब्रह्म वैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, दशमी तिथि के दिन कलम्बी (कलमी साग) का सेवन करना वर्जित (निषिद्ध) माना गया है
🛟21 सितंबर 2026, सोमवार के दिन चंद्रमा मकर राशि में गोचर कर रहे हैं, जिससे सभी 12 राशियों के लिए दिन कामकाज, जिम्मेदारियों और रिश्तों पर ध्यान केंद्रित करने वाला रहेगा।
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
★√*★√*★√*★√*★√*★
🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
‼️💢आज का राशिफल💢‼️
🛟सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल‼️
🎉 मेष राशि: मेष (Aries): कार्यक्षेत्र में आपकी सक्रियता और मेहनत रंग लाएगी, वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। पैसों से जुड़े मामलों में जल्दबाजी न दिखाएं।
🎉वृषभ (Taurus): कार्यस्थल पर अपनी समझदारी और भावुकता की बजाय व्यावहारिक बुद्धिमत्ता का प्रयोग करें। खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा।
🎉मिथुन (Gemini): पेशेवर मामलों में किसी भी तरह की अनिश्चितता या असमंजस से बचें। सुनी-सुनाई बातों या बिना जांचे वादों पर भरोसा न करें।
🎉कर्क (Cancer): कामकाज में टीम वर्क और साझेदारियों से अच्छा लाभ मिलने की संभावना है। बेवजह के गुस्से और भावुक प्रतिक्रियाओं से दूर रहें।
🎉सिंह (Leo): करियर में किसी नए और बड़े कदम की शुरुआत करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। नेतृत्व क्षमता दिखाने का अवसर मिलेगा।
🎉कन्या (Virgo): संवाद और बातचीत के जरिए कामकाज में कोई नया और बेहतरीन अवसर मिल सकता है। सोच-समझकर किए गए निवेश फायदेमंद रहेंगे।
🎉तुला (Libra): पुरानी व स्थापित कार्य प्रणालियों और नियमों पर चलना आपके लिए लाभदायक रहेगा। रिश्तों में विनम्रता बनाए रखें।
🎉वृश्चिक (Scorpio): नेतृत्व और प्रबंधन के मामले आपके लिए मुख्य विषय रहेंगे। महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय धैर्य और संयम का परिचय दें।
🎉धनु (Sagittarius): मानसिक या शारीरिक थकान महसूस हो सकती है, लेकिन जरूरी लक्ष्यों को पूरा करने में आप सफल रहेंगे।
🎉मकर (Capricorn): आज चंद्रमा आपकी ही राशि में हैं, जिससे व्यावसायिक जिम्मेदारियों को आप गंभीरता से निभाएंगे। सेहत को लेकर थोड़ा सतर्क रहें।
🎉कुंभ (Aquarius): पुराने संपर्कों या पुराने अनुभवों से आपको करियर में लाभ मिल सकता है। किसी भी काम में जरूरत से ज्यादा जल्दबाजी से बचें।
🎉मीन (Pisces): दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा और कार्यक्षेत्र की योजनाओं पर पूरा ध्यान दें। पारिवारिक जीवन में सुखद माहौल रहेगा।
💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏
➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️
🌹|| ✨ 🌹// 🕉️ ✨ 🌺 🦚 🌼
🕉️ 🌸*🌙 🐘 🙏🐚🪔 🌿 🌺🪷
🏛️ देवताओं के वास्तुकार विश्वकर्मा थे, तो असुरों के 'मयासुर'! क्या मय दानव ने ही बसाई थी अमेरिका की माया सभ्यता? 🚩
🛟सनातन धर्म के इतिहास में मय दानव (मयासुर) एक ऐसा नाम है, जिसका वास्तु ज्ञान और मायावी विद्या आज के आधुनिक विज्ञान को भी पीछे छोड़ देती है। रामायण से लेकर महाभारत तक, इस महान असुर शिल्पी के निर्माण का डंका बजता था। आइए जानते हैं मयासुर से जुड़े कुछ अद्भुत रहस्य:
☀️१. रावण का ससुर और त्रिलोक का महान वास्तुकार
जिस प्रकार देवताओं के मुख्य शिल्पी भगवान विश्वकर्मा हैं, उसी प्रकार असुरों के वास्तुकार मयासुर थे। रामायण के उत्तरकांड के अनुसार, महर्षि कश्यप और दिति के पुत्र मयासुर, लंकापति रावण की पत्नी मंदोदरी के पिता थे। पाताल के सुतल लोक के ठीक नीचे 'तलातल' पर इसी दानवराज मय का राज था। इसके निर्माण की कला इतनी रहस्यमयी थी कि वह अपने निर्माण कार्य के लिए कठोर पत्थरों तक को पिघला सकता था।
☀️२. विज्ञान, खगोलशास्त्र और विमान विद्या का ज्ञाता
मयासुर केवल एक भवन-निर्माता नहीं, बल्कि एक परम खगोलविद भी था। वैदिक ज्योतिष के प्रसिद्ध खगोलीय ग्रंथ 'सूर्य सिद्धांत' की रचना मयासुर ने ही की थी। इसके पास एक विशाल और शक्तिशाली मायावी रथ (विमान) था, जिसका प्रयोग उसने देवासुर संग्राम में किया था। यह विमान आज के किसी आधुनिक लड़ाकू अस्त्र से कम नहीं था।
☀️३. अद्भुत निर्माण: सोने की लंका से लेकर 'त्रिपुरा' तक
मयासुर ने ही तारकासुर के तीन पुत्रों के लिए सोने, चांदी और लोहे के तीन अभेद्य नगरों का निर्माण किया था, जिन्हें 'त्रिपुरा' कहा गया। (बाद में भगवान शिव ने त्रिपुरारी रूप धरकर इन्हें एक ही बाण से नष्ट कर दिया था)। कई मान्यताओं के अनुसार, स्वर्ण लंका की रचना भी रावण के इसी योग्य ससुर ने की थी। उत्तर प्रदेश का 'मेरठ' शहर और कर्नाटक का 'मैसूर' भी इसी मय दानव के नाम के अपभ्रंश माने जाते हैं।
☀️४. क्या अमेरिका की रहस्यमयी 'माया सभ्यता' का जनक मयासुर था?
इतिहासकारों और शोधकर्ताओं का एक वर्ग मानता है कि दक्षिण अमेरिका की प्राचीन 'माया सभ्यता' (Mayan Civilization) का जनक भी मयासुर ही था। माया सभ्यता के पास जो विलक्षण खगोलीय, गणितीय और वास्तु ज्ञान था, वह मयासुर की विद्या से हूबहू मेल खाता है। भिक्षु चमनलाल द्वारा लिखित पुस्तक 'हिन्दू अमेरिका' के अनुसार, अमेरिका के प्राचीन खंडहरों में शिव, गणेश और नरसिंह भगवान से मिलती-जुलती मूर्तियों का मिलना इस बात का बड़ा प्रमाण है कि प्राचीन काल में वहां मयासुर और भारतीय संस्कृति का प्रभाव था।
👌५. महाभारत काल में 'इंद्रप्रस्थ' और मायावी महल का निर्माण
जब खांडव वन दहन के समय अर्जुन ने मयासुर के प्राण बचाए, तो उसने कृतज्ञ होकर पांडवों की सेवा करनी चाही। तब भगवान श्रीकृष्ण की आज्ञा पाकर, मयासुर ने ही पांडवों के लिए 'इंद्रप्रस्थ' नामक उस अद्वितीय और मायावी सभा भवन का निर्माण किया था, जिसे देखकर दुर्योधन भ्रमित होकर पानी में गिर पड़ा था। इतना ही नहीं, मयासुर ने ही अर्जुन को उनका प्रसिद्ध 'देवदत्त' शंख और भीम को एक अत्यंत कठोर रत्नजटित गदा भेंट की थी।
🎉।। जय श्री हरि ।।🌺
क्या आपको रामायण और महाभारत काल के इस महान वास्तुकार के बारे में ये रोचक तथ्य पता थे? अपने विचार कमेंट्स में साझा करें! 👇
🌺‼️जय श्री कृष्णा! 🦚🚩 🌺🙏
🧨🚩⛳💥❤️🕉️🌴🍀🎈🌀🌿
💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
*🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹
*💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
*बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
♨️ ⚜️ 🕉🌞 🌞🕉 ⚜🚩*♥️💕💥*अगर आपको हमारा पंचांग नियमित चाहिए तो आप मुझे इस चैनल को फॉलो करे*
*https://whatsapp.com/channel/0029Va65aSaKrWR*
♨️ ⚜️ 🕉🌞 🌞🕉 ⚜🚩
🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*♥️~*अपने घर, ऑफिस, और फैक्ट्री वास्तु के साथ सफल बनाये। जन्मकुंडली, प्रश्नन कुंडली, अंककुंडली, रत्न, जड़, एवं रुद्राक्ष आदि के लिये सम्पर्क करे।*
‼️*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏*हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️




