*💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
*🎈दिनांक 07 नवंबर 2026*
*🎈वार- शनिवार*
*🎈मास - कार्तिक मास*
*🎈पक्ष - कृष्ण पक्ष*
*🎈विक्रम संवत् - 2083*
*🎈संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈अयन - दक्षिणायन*
*🎈ऋतु - शरद*
*🎈तिथि- त्रयोदशी - 10:47:15 ए एम तक तत्पश्चात चतुर्दशी*
*🎈नक्षत्र- चित्रा - 04:51.36 ए एम, नवम्बर 06 तक तत्पश्चात स्वाति*
*🎈 करण-विष्टि भद्रा- 11:23:22 ए एम तक तत्पश्चात् शकुनि, चतुष्पद*
*🎈योग- प्रीति - 03:26:47 ए एम, नवम्बर 06 तक तत्पश्चात् आयुष्मान*
*🎈राहुकाल- 09:35 पी एम से 10:57 पी एम(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय- 06:50.27 ए एम*
*🎈 सूर्यास्त- 05:47.18 पी एम*
*🎈चंद्र राशि-कन्या* till 05:14:16
तत्पश्चात तुला*
*🎈सूर्य राशि- तुला*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:05 AM to 05:57 AM*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 11:57 AM to 12:41 PM*
*🎈अमृत काल- 11:10 PM to 12:50 AM, Nov 08*
*🎈 निशिता मुहूर्त -11:53 PM to 12:45 AM, Nov 08*
*🎈 सर्वार्थ सिद्धि योग-05:52 AM, Nov 08 to 06:50 AM, Nov 08*
*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण- 🏵️
☀️🏵️ दीपावली पूजन मुहूर्त🏵️
💢 पंच दिवसीय दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं💕
💥नरक चतुर्दशी / छोटी दिवाली — 8 नवंबर सुबह🎉
🏵️*तिथि:* चतुर्दशी 7 नवंबर सुबह 10:47 बजे से 8 नवंबर सुबह 11:27 बजे तक
👉*महत्व:* इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था।
👉- *अभ्यंग स्नान मुहूर्त:* सुबह *05:41 से 06:38* बजे तक
- *रूप चौदस:* उबटन, एमएम तिल के तेल से मालिश करके स्नान — रूप, सौंदर्य और आरोग्य के लिए
‼️- *काली चौदस:* 7 नवंबर रात को हनुमान जी और माँ काली की पूजा
‼️> चतुर्दशी 7 नवंबर को लग रही है, पर अभ्यंग स्नान सूर्योदय से पहले चतुर्दशी में होना चाहिए, इसलिए स्नान *8 नवंबर सुबह* ही माना जाएगा।
🚩*दीपावली मुहूर्त वि. सं. 2083*(सन् 2026)
💥 दिनांक 8 नवंबर 2026 रविवार (कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी) को प्रदोष व्यापिनि अमावस्या में दीपावली का महालक्ष्मी पूजन उत्सव है। इस दिन गादी स्थापना, स्याही भरने, कलम-दवात संवारने व प्रतिष्ठानों में पूजन हेतू श्रेष्ठ समय चंचल वेला में प्रातः 08.13 बजे से 09.35 बजे तक, लाभ अमृत वेला में प्रातः 09.35 बजे से दोपहर 12.19 बजे तक, अभिजीत वेला में दोपहर 11.57 बजे से 12.40 बजे तक तथा शुभ वेला में दोपहर 01.40 बजे से 03.02 बजे तक है।
👉*दिन में पूजन मुहूर्त -* श्री पूजन हेतु दिन में श्रेष्ठ समय वृश्चिक स्थिर लग्न प्रातः 07.33 बजे से 09.51 बजे तक तथा कुंभ लग्न में दोपहर 01.39 बजे से 03.07 बजे तक है के श्रेष्ठ मुहूर्त है।
👉*श्री महालक्ष्मी पूजन मुहूर्त -* श्री पूजन हेतु श्रेष्ठ समय सायं गोधूलि प्रदोष वेला सायं 05.46 बजे से रात्रि 08.22 बजे तक, वृषभ लग्न सायं 06.10 बजे से रात्रि 08.07 बजे तक, मिथुन लग्न रात्रि 08.07 से 10.21 बजे, निशिथकाल मध्यरात्रि 11.53 से 12.45 बजे, शुभ-अमृत चौघड़िया सायं 05.46 बजे से रात्रि 09.03 बजे तक सिंह लग्न रात्रि 12.40 बजे से 02.56 बजे तक श्रेष्ठ मुहूर्त है।
🌹*श्री रोकड़ मिलान -* दिनांक 10 नवंबर 2026 मंगलवार (कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा) को रोकड़ मिलान का श्रेष्ठ समय चंचल वेला प्रातः 09.36 बजे से प्रातः 10.57 बजे तक तथा लाभ अमृत वेला प्रातः 10:57 बजे से दोपहर 01.40 बजे तक है।
(उपरोक्त मुहूर्त स्थानीय नागौर नगर उदयकाल मुहूर्त पर आधारित है।)
🏓🏓
🏵️चतुर्भुज नाथ की जय हो "🙏 🛟
🏓🏓7 नवंबर, 2026 को चंद्रमा कन्या से तुला राशि में गोचर करेंगे, और कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी/चतुर्दशी तिथि रहेगी।
💢.ब्रह्मवैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-38) के अनुसार, चतुर्दशी तिथि के दिन तिल का तेल खाना और शरीर में लगाना (मालिश करना) पूरी तरह से निषिद्ध (वर्जित) माना गया है। ↘️
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
‼️💥 सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल इस प्रकार है:➡️💥
🏵️ • मेष: व्यापार में लाभ और मनपसंद काम मिलेगा, लेकिन फिजूलखर्ची से बचें।
🏵️• वृषभ: नए विचार आएंगे और आर्थिक मजबूती रहेगी, पर निवेश से पहले जांच कर लें।
🏵️• मिथुन: काम का दबाव रहेगा, जिसे संभाल लेंगे; मेहनत का फल और आध्यात्मिक शांति मिलेगी।
🏵️• कर्क: भाग्य का साथ मिलेगा, रुके काम आगे बढ़ेंगे; उधार देने से बचें।
🏵️• सिंह: मन थोड़ा बेचैन हो सकता है, जिम्मेदारी बढ़ेगी; ध्यान से मानसिक स्थिति सुधारें।
🏵️• कन्या: बातचीत और संपर्क से लाभ होगा, नौकरी में नए अवसर मिलेंगे; सकारात्मक रहें।
🏵️• तुला: रिश्तों में सुधार होगा, सम्मान बढ़ेगा और आर्थिक सुरक्षा महसूस करेंगे।
🏵️• वृश्चिक: पुरानी मेहनत का फल दिखेगा; बजट का ध्यान रखें और गुस्से पर काबू रखें।
🏵️• धनु: काम पर ध्यान बना रहेगा, नए लोगों से मुलाकात होगी; तनाव दूर करने के लिए आराम करें।
🏵️• मकर: आत्मविश्वास बढ़ेगा, सीनियर्स का सहयोग मिलेगा और मानसिक शांति मिलेगी।
🏵️• कुंभ: भावुकता रह सकती है, पारिवारिक सहयोग मिलेगा और सकारात्मक रवैया रहेगा।
🏵️• मीन: नौकरी में बदलाव या नई जिम्मेदारी मिल सकती है; सेहत पर ध्यान दें।
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
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🌹|| ✨ 🌹// 🕉️ ✨ 🌺 🦚 🌼
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💥।। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।।💥
✨।। जय माता महाकाली ।।
।। जय श्रीकृष्ण ।।
।। काली चौदस या रूप चौदस 2026 ।।
छोटी दिवाली, नरक चतुर्दशी एवं भूत चतुर्दशी का धार्मिक महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा
सनातन धर्म में दीपावली से एक दिन पहले आने वाली कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व है।
इस दिन को काली चौदस, रूप चौदस, नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली और भूत चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है।
यह पर्व केवल दीप जलाने और उत्सव मनाने का दिन नहीं है, बल्कि अपने भीतर के अंधकार, भय, नकारात्मकता, आलस्य और अहंकार को समाप्त करके जीवन में प्रकाश, शुद्धता और सकारात्मकता लाने का प्रतीक भी है।
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण, माता महाकाली, भगवान हनुमान और यमराज की पूजा का विशेष विधान माना जाता है।
1. काली चौदस 2026 की तिथि एवं शुभ मुहूर्त
काली चौदस एवं नरक चतुर्दशी:= शनिवार, 7 नवंबर 2026
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 7 नवंबर 2026, सुबह 10:49 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 8 नवंबर 2026, सुबह 11:29 बजे
काली पूजा का रात्रिकालीन मुहूर्त: 7 नवंबर रात 11:41 से 8 नवंबर रात 12:33 तक।
विशेष: =अलग-अलग परंपराओं में नरक चतुर्दशी के स्नान, दीपदान और काली पूजा के लिए अलग-अलग समय का विचार किया जाता है। अपने नगर के पंचांग के अनुसार स्थानीय मुहूर्त अवश्य देख लें।
2. काली चौदस का धार्मिक महत्व
(1) नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
काली चौदस को शक्ति उपासना का विशेष पर्व माना जाता है। इस दिन माता महाकाली की आराधना करके भय, अज्ञान, नकारात्मक विचारों और आसुरी प्रवृत्तियों से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
(2) अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति की कामना
इस दिन भगवान यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है। इसे यमदीपदान कहते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यमराज को दीप अर्पित करने से परिवार की सुख-शांति और दीर्घायु की मंगलकामना की जाती है।
(3) आरोग्य और सौंदर्य की प्राप्ति
रूप चौदस के दिन प्रातःकाल अभ्यंग स्नान अर्थात तेल से मालिश करके स्नान करने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे शरीर की शुद्धि, सौंदर्य और आरोग्य की कामना पूर्ण होती है।
(4) बुरी प्रवृत्तियों का अंत
नरक चतुर्दशी हमें यह संदेश देती है कि मनुष्य को अपने भीतर के क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और नकारात्मक विचारों का नाश करना चाहिए।
3. नरक चतुर्दशी की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार प्राचीन काल में नरकासुर नामक एक अत्यंत शक्तिशाली और अत्याचारी असुर था।
उसने अपनी शक्ति के अहंकार में देवताओं, ऋषियों और सामान्य प्रजा को परेशान करना शुरू कर दिया था। उसने अनेक राजाओं को पराजित किया और लगभग 16,000 राजकुमारियों को बंदी बनाकर अपने कारागार में रखा था।
उसके अत्याचारों से सभी लोग अत्यंत दुखी थे। तब देवताओं ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता की प्रार्थना की।
भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ नरकासुर के विरुद्ध युद्ध किया। युद्ध में सत्यभामा ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अंततः नरकासुर का वध हुआ।
भगवान श्रीकृष्ण ने बंदी बनाई गई राजकुमारियों को मुक्त कराया और संसार को उसके आतंक से छुटकारा दिलाया।
इसी विजय की स्मृति में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है।
यह कथा हमें संदेश देती है कि अधर्म और अत्याचार चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः धर्म और सत्य की विजय होती है।
4. माता महाकाली और काली चौदस का महत्व
काली चौदस को माता महाकाली की उपासना के लिए भी विशेष माना जाता है।
माता काली को आदिशक्ति का उग्र स्वरूप माना गया है।
उनका स्वरूप अधर्म, अन्याय, अहंकार और दुष्ट शक्तियों के विनाश का प्रतीक है।
माता काली की उपासना से साधक शक्ति, साहस, आत्मविश्वास और निर्भयता की प्रार्थना करता है।
पश्चिम भारत और गुजरात की कुछ परंपराओं में काली चौदस की रात्रि में विशेष शक्ति पूजा की जाती है। कुछ स्थानों पर इसे भूत चतुर्दशी भी कहा जाता है।
5. रूप चौदस पर क्या करना चाहिए?
रूप चौदस के दिन निम्नलिखित कार्य करने की परंपरा है।
प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
स्नान से पहले शरीर पर तिल के तेल की मालिश करें।
सुगंधित उबटन का प्रयोग करें।
स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान श्रीकृष्ण और माता लक्ष्मी का स्मरण करें।
घर की साफ-सफाई करें।
घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं।
शाम को भगवान यमराज के निमित्त दीपदान करें।
अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र दान करें।
घर और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
6. यमदीपदान की विधि=
नरक चतुर्दशी की संध्या को यमराज के निमित्त दीपदान करना शुभ माना जाता है।
विधि:=
मिट्टी का एक दीपक लें।
उसमें तिल का तेल भरें।
रुई की बत्ती लगाएं।
भगवान यमराज का स्मरण करें।
दक्षिण दिशा की ओर दीपक रखकर परिवार की रक्षा और दीर्घायु की प्रार्थना करें।
प्रार्थना मंत्र:=
ॐ यमाय नमः।
धार्मिक मान्यता के अनुसार यमदीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होने और परिवार की मंगलकामना का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
7. काली चौदस पर क्या करें और क्या न करें?
क्या करें?
माता महाकाली का स्मरण और पूजन करें।
हनुमान जी की आराधना करें।
यमदीपदान करें।
घर में स्वच्छता बनाए रखें।
जरूरतमंदों की सहायता करें।
सात्विक भोजन और सदाचार का पालन करें।
अपने मन से नकारात्मक विचारों को दूर करने का संकल्प लें।
क्या न करें?
किसी का अपमान या अहित न करें।
क्रोध, विवाद और झूठ से बचें।
किसी निर्दोष जीव को कष्ट न पहुंचाएं।
‼️‼️जय श्री हरि‼️‼️
🌺‼️जय श्री कृष्णा! 🦚🚩 🌺🙏
🧨🚩⛳💥❤️🕉️🌴🍀🎈🌀🌿
💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
*🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
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*💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
*बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️























