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पंचांग - 30-08-2025

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

JYOTIS


*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈 दिनांक - 30 अगस्त 2025*
*🎈 दिन शनिवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शरद*
*🎈 मास - भाद्रपद*
*🎈 पक्ष - शुक्ल*
*🎈तिथि -   सप्तमी    22:45:57 pm तत्पश्चात्  अष्टमी* 
*🎈नक्षत्र -         विशाखा    14:36:20 pm तक तत्पश्चात्     अनुराधा*
*🎈योग -             ऐन्द्र    15:08:25 pm
 तक तत्पश्चात्     वैधृति*
*🎈 करण    -    विष्टि भद्र    11:54:03 am तक    तत्पश्चात्     विष्टि भद्र*
*🎈 राहुकाल_हर जगह का अलग  है-   09:25 am से 11:00 am तक (राजस्थान प्रदेश नागौर मानक समयानुसार)*
*🎈चन्द्र राशि    -  वृश्चिक*
*🎈सूर्य राशि -     सिंह*
*🎈सूर्योदय - 06:14:57am*
*🎈सूर्यास्त - 06:55:16pm* (सूर्योदय एवं सूर्यास्त राजस्थान प्रदेश नागौर मानक समयानुसार)* 
*🎈दिशा शूल - पूर्व दिशा में*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:43 से प्रातः 05:28 तक (राजस्थान प्रदेश नागौर मानक समयानुसार)* 
*🎈अभिजीत मुहूर्त - 12:10 पी एम से 01:01 पी एम*
*🎈निशिता मुहूर्त - 12:13 ए एम, अगस्त 31 से 12:58 ए एम, अगस्त 31*
*🎈त्रिपुष्कर योग    06:13 ए एम से 02:37 पी एम*
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     *🛟चोघडिया, दिन🛟*
   नागौर, राजस्थान, (भारत)    
       सूर्योदय के अनुसार।

काल-06:15-07:50अशुभ*

शुभ-07:50-09:25 शुभ*

रोग-09:25-11:00अशुभ*

उद्वेग-11:00-12:35अशुभ*

चर-12:35-14:11शुभ*

लाभ-14:11-15:46शुभ*

अमृत-15:46-17:21शुभ*

काल-17:21-18:56 अशुभ*

  *🛟चोघडिया, रात्🛟*

लाभ-18:56 20:21शुभ*

उद्वेग-20:21-21:46 अशुभ*

शुभ-21:46 -23:11शुभ*

अमृत-23:11-24:36*शुभ*

चर-24:36* -26:00*-शुभ*

रोग-26:00* --27:25*अशुभ*

काल-27:25* -28:50*अशुभ*

लाभ-28:50* --30:15*शुभ*
kundli



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🌹हमेशा हम राहु केतु के अशुभ प्रभावों के बारे में ही सुनते या पढ़ते आए हैं। लेकिन आपको बता दें कि राहु और केतु मिलकर किसी जातक की कुंडली में #राजयोग का निर्माण भी करते हैं।

🌹जब किसी जातक की कुंडली में राहु और केतु की दशा शुभ होती है, तो जातक को शुभ #परिणाम प्राप्त होते हैं।
🌹अगर राहु या केतु केंद्र में त्रिकोण के स्वामी के साथ विराजमान होता है, तो राहु केतु #राजयोग बनता है।
वहीं अगर राहु #केंद्र या #त्रिकोण के स्वामी के साथ एकादश भाव में स्थित हो और यही संबंध राहु के स्थान पर केतु से बन रहे हो, तब राहु केतु #राजयोग बनता है

🌹जब राहु या केतु केंद्रीय त्रिकोण में अन्य किसी स्थान में विराजमान हो और कुंडली के #केन्द्रेश एवं #त्रिकोणेश दोनों से संबंध हो, तो राहु केतु राजयोग बनता है।

🌹🌹अशुभ राहु केतु के कुछ सामान्य लक्षण

🌹मानसिक तनाव और चिंता. 
आर्थिक नुकसान और धन की कमी. 
परिवार में कलह और झगड़े. 
अचानक होने वाली घटनाएं और दुर्घटनाएं. 
बुरी लत, जैसे शराब और तंबाकू. 
निर्णय लेने में कठिनाई. 
रिश्तों में कड़वाहट. 
डरावने सपने आना. 

🌹केतु के लक्षण:
शारीरिक कमजोरी और दर्द. 
चर्म रोग. 
जोड़ों में दर्द. 
नसों में कमजोरी. 
अचानक चोट लगना या घाव होना. 
कुत्ते का काटना. 
अपने ही लोगों से धोखा मिलना. 
कम सुनाई देना. 
घर में कलह. 
संतान का विरोधी होना.

👉👉जिस जातक की कुंडली में राहु की दशा सही नहीं है, उस जातक को ॐ रां राहवे नमः  मंत्र का रोजाना जाप करना चाहिए।

👉👉वही रोजाना पक्षियों को बाजरा खिलाना चाहिए। इससे राहु की दशा सही हो जाती है।

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*☠️🐍जय श्री महाकाल सरकार ☠️🐍*🪷* मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...*

*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
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