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पञ्चाङ्ग -5 मार्च 2026

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

jyotis


*🎈दिनांक -5 मार्च 2026*
*🎈 वार- गुरुवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈 मास - चैत्र मास*
*🎈 पक्ष - कृष्ण पक्ष,*
*🎈तिथि-     द्वितीया    16:48:21* तत्पश्चात् तृतीया*
*🎈 नक्षत्र -        उत्तर फाल्गुनी    08:16:42* तक    तत्पश्चात्         हस्त    👇
*🎈 योग    - शूल    07:44:33* तक तत्पश्चात्             गण्ड, वृद्धि    *
*🎈करण    -     गर    17:03:04* तक तत्पश्चात्     वणिज*
*🎈राहुकाल -02:14 pm से 03: 42pm(नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈चन्द्र राशि    -   कन्या    *
*🎈सूर्य राशि-      कुम्भ    *
*🎈 सूर्योदय-06:56:37*
*🎈सूर्यास्त -        18:36:48*pm* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*

*🎈दिशा शूल- दक्षिण दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)

*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:17 ए एम से 06:06 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:23 पी एम से 01:10 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:22 ए एम, मार्च 06 से 01:11 ए एम, मार्च 06*
*🎈  अमृत काल    -03:11 ए एम, मार्च 06 से 04:52 ए एम, मार्च 06*
*🎈 व्रत एवं पर्व व्रत प्रतिपदा व्रत*
*🎈विशेष चैत्र मास महात्म्य *
kundli


 🙏 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🙏
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    *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
   नागौर, राजस्थान, (भारत)    
   मानक सूर्योदय के अनुसार।*
day

🛟

    
        *🛟चोघडिया, रात्🛟*
night

*🛟 
 


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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
🌿✨  #*🕉️ #🌺#🎉💕💢💥💤💤
 🌹🙏  ।। जय श्रीराम।।

।। पंचकन्या : पाँच दिव्य स्त्रियों का रहस्य ।।

ये पाँच नाम रोज जपिए… जीवन के बड़े से बड़े संकट शांत हो सकते हैं।

ये केवल स्त्रियाँ नहीं, धैर्य और धर्म की जीवित मिसाल हैं।

सनातन परंपरा में “पंचकन्या” का स्मरण अत्यंत पवित्र माना गया है। एक प्रसिद्ध श्लोक है —

अहल्या द्रौपदी कुंती तारा मंदोदरी तथा।
पंचकन्या स्मरेन्नित्यं महापातक नाशनम्॥

अर्थात जो व्यक्ति इन पाँच दिव्य स्त्रियों का नित्य स्मरण करता है, उसके बड़े से बड़े पाप भी नष्ट हो जाते हैं।

यहाँ “कन्या” शब्द का अर्थ केवल अविवाहित स्त्री नहीं, बल्कि ऐसी दिव्य चेतना से है जो कठिनतम परिस्थितियों में भी पवित्रता, शक्ति और धर्म का पालन करे।

1=अहल्या – तप और क्षमा की प्रतीक

अहल्या ऋषि गौतम की पत्नी थीं।

 देवताओं और ऋषियों में उनका सौंदर्य और तेज अद्वितीय माना जाता था।

 इंद्र के छल के कारण उन्हें श्राप मिला और वे शिला बन गईं।

लेकिन उनका जीवन केवल श्राप की कथा नहीं है,
 बल्कि प्रतीक्षा, तप और पुनर्जागरण की कथा है।

 भगवान श्रीराम के चरण स्पर्श से उनका उद्धार हुआ।

अहल्या हमें सिखाती हैं कि भूल या भ्रम के बाद भी पश्चाताप और धैर्य से पुनः प्रतिष्ठा प्राप्त की जा सकती है। वे क्षमा, धैर्य और आत्मशुद्धि की प्रतीक हैं।

2=द्रौपदी – आत्मसम्मान और शक्ति की मूर्ति

महाभारत की केंद्रीय नायिका द्रौपदी पांचों पांडवों की पत्नी थीं। 
उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा। 

द्यूतसभा में अपमान की चरम सीमा देखी, परंतु उन्होंने अन्याय के सामने सिर नहीं झुकाया।

उनकी पुकार पर श्रीकृष्ण ने उनकी लाज की रक्षा की।
द्रौपदी साहस, आत्मसम्मान और धर्म के पक्ष में अडिग रहने का संदेश देती हैं। 

वे बताती हैं कि स्त्री केवल सहनशील नहीं, बल्कि परिवर्तन की धुरी भी हो सकती है।

3=कुंती – त्याग और मातृत्व की शक्ति

कुंती पांडवों की माता थीं। 

उन्हें वरदान प्राप्त था कि वे किसी भी देवता का आह्वान कर संतान प्राप्त कर सकती थीं।

उन्होंने जीवन में अनेक कष्ट झेले — विवाह से पूर्व पुत्र जन्म, वनवास, राजकीय संघर्ष — परंतु उन्होंने अपने पुत्रों को धर्म के मार्ग पर चलाया।

कुंती त्याग, धैर्य और आंतरिक शक्ति की प्रतिमूर्ति हैं। 

वे सिखाती हैं कि कठिन परिस्थितियाँ भी व्यक्ति को महान बना सकती हैं।

4=तारा – नीति और बुद्धिमत्ता की देवी

तारा वानरराज बाली की पत्नी थीं।

 वे अत्यंत बुद्धिमान और दूरदर्शी थीं। 

जब बाली और सुग्रीव के बीच संघर्ष हुआ, तब तारा ने नीति और विवेक का परिचय दिया।

उन्होंने बाली को सावधान किया, परंतु उनके परामर्श को अनसुना किया गया।

तारा हमें सिखाती हैं कि स्त्री केवल गृहस्थी की धुरी नहीं, बल्कि राज्य और समाज की नीति-निर्माता भी हो सकती है।

5=मंदोदरी – धर्मनिष्ठा और मर्यादा की प्रतीक

मंदोदरी रावण की पत्नी थीं।

 वे अत्यंत सद्गुणी और शिवभक्त थीं। 

उन्होंने रावण को कई बार सीता हरण के परिणामों के प्रति चेताया, परंतु रावण ने अहंकारवश उनकी बात नहीं मानी।

मंदोदरी का जीवन बताता है कि धर्मपरायणता व्यक्ति की आंतरिक पहचान है, चाहे परिस्थितियाँ कितनी ही विपरीत क्यों न हों।

।। पंचकन्या का आध्यात्मिक संदेश ।।

इन पाँचों स्त्रियों का जीवन साधारण नहीं था। 

प्रत्येक ने सामाजिक आलोचना, संघर्ष और परीक्षा का सामना किया।

 फिर भी उन्होंने अपनी आंतरिक शक्ति, धैर्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा।

पंचकन्या हमें यह सिखाती हैं कि

1• परिस्थितियाँ चाहे जैसी हों, आत्मबल बनाए रखें।

2• अन्याय के सामने मौन नहीं, साहस रखें।

3• त्याग और धैर्य से महानता जन्म लेती है।

4• स्त्री शक्ति केवल सहनशीलता नहीं, बल्कि परिवर्तन की प्रेरणा है।

इन दिव्य नारियों का स्मरण केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन की दिशा है।


           🙇#जयश्रीसीताराम 🙇
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.     💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥

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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
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vipul

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