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पञ्चाङ्ग 18 अप्रैल 2026

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

JYOTIS



*🎈दिनांक 18 अप्रैल 2026*
*🎈 वार-   शनिवार *
*🎈 मास - वैशाख मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर    पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*

*🎈तिथि-     प्रथमा    14:10:08* तत्पश्चात्
द्वितीया*
*🎈 नक्षत्र -     अश्विनी    09:41:44* तक तत्पश्चात्         भरणी तत्पश्चात् कृत्तिका    28:34:23*
*🎈योग    -     प्रीति    23:55:07*तक तत्पश्चात्     आयुष्मान*
*🎈करण    -     बव    14:10:08* तक तत्पश्चात्   बालव होगा।*
*🎈राहुकाल -09:21 pm से 10:58pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि-    *मेष*
*🎈सूर्य राशि     - *मेष    "
*🎈 सूर्योदय -   06:09:27*
*🎈 सूर्यास्त -        18:59:49* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:39 ए एम से 05:24 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त-  12:09 पी एम से 01:01 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:12 ए एम, अप्रैल 19 से 12:56 ए एम, अप्रैल 19*
*🎈 अमृत काल-    02:52 ए एम, अप्रैल 19 से 04:18 ए एम, अप्रैल 19*
 
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण-  प्रतिपदा व्रत आज होगा (मासिक व्रत )
*🎈विशेष - विशेष - प्रति पदा और व्रत के दिन स्त्री सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- वैशाख मास महात्म्य *
 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा    गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी    💥सेनाधिपति    चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💥मन्त्री    मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी    धान्याधिपति    बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💥सस्याधिपति    गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी    मेघाधिपति    चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💥धनाधिपति    गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी    नीरसाधिपति    गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
💥रसाधिपति    शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी    फलाधिपति    चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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        🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
         *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day




       🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
         💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺

👣🕉️ 🌹🌹 🌹🌹।। 🔶🔶🌹🌹 🌹
🌹🌿    *🔹एक बहुत ही प्रभावशाली उपाय बता रहा हूं। इसे अवश्य ही संभलकर रखे। 🔹*
Guruwar Upay: सप्ताह का गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है। अगर आपकी कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर है या आपके हर में कोई न कोई बाधा आती रहती है तो गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा जरूर करें। केले के पेड़ का सीधा संबंध देवगुरु बृहस्पति से है। यही वजह है कि गुरुवार के दिन केले के पेड़ की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। माना जाता है कि ऐसा करने से न केवल बृहस्पति देव प्रसन्न होते हैं, बल्कि साधक पर भगवान विष्णु की असीम कृपा भी बनी रहती है, जिससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इसके अलावा गुरुवार के दिन केले के पेड़ में यह खास चीज भी चढ़ाने से भाग्य के द्वार खुल जाते हैं और व्यक्ति को किस्मत का भरपूर साथ मिलने लगता है। तो यहां जानिए कि गुरुवार को केले के पेड़ में जल के साथ और क्या चढ़ाना चाहिए।

गुरुवार को केले के पेड़ में क्या चढ़ाएं?
हिंदू धर्म में केले के पेड़ को अत्यंत ही पूजनीय माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि केले के पेड़ में जगत के पालनहार भगवान विष्णु का वास होता है। विष्णु जी को गुड़ और चने की दाल अत्यंत ही प्रिय है। तो गुरुवार के दिन केले के पेड़ में गुड़ और चने की जाल चढ़ाएं। केले के पेड़ की जड़ में हल्दी मिला जल चढ़ाने से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इस उपाय को करने से सोया हुआ भाग्य जाता है।

पूजा की सही विधि 
गुरुवार को प्रात:काल उठकर स्नान आदि करने के बाद पीले वस्त्र पहनकर पूजा का संकल्प लें।
इसके बाद तांबे या पीतल के लोटे में जल लें, उसमें हल्दी, चने की दाल और गुड़ मिलाएं। आप चाहे तो सिर्फ हल्दी मिला जल भी चढ़ा सकते हैं।
अब केले के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाते समय 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' मंत्र का जाप करें।
केले के पेड़ के पास घी का एक दीपक जलाएं और परिक्रमा करें

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*💵 अमावस्या के दिन आपको काला धागा लेना है। अब आपको अपने सिर की चोटी से लेकर पैर के अंगूठे तक उसे नाप लेना है। फिर उसका 3 गुना धागा ले ले। 

अब आपको एक नारियल को धागा लपेट लेना है। उस नारियल को रात को सोते समय अपने पास में रखकर सोना है। 

एक सप्ताह तक उसे नित्य ऐसे ही रात को लेकर सो जाए। 

इन सात दिन तक आपको दिन में नारियल को अपने दाहिने हाथ में रखकर नीचे दिए हुए मंत्र की 3 माला जप करना है। 

ॐ हूं फट हूं फट हूं फट बंधय बंधय स्वाहा। 

उसके बाद गाय के उपले के साथ आपको 8 वे दिन नारियल को जला देना है। जब तक नारियल जले तब तक जप करतें रहे। 

आपका कार्य हो गया। 

ये प्रयोग आपकी समस्त नकारात्मक ऊर्जा को खत्म कर देते है और बंध मार्ग और लक्ष्मी बंधन को खोल देता है। 

श्री सीताराम  🚩  


🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹।      💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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‼️अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
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🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ  🇪🇬🔱🔥🔱

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