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पञ्चाङ्ग 19 अप्रैल 2026

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

jyotis



*🎈दिनांक 19 अप्रैल 2026*
*🎈 वार-  रविवार *
*🎈 मास - वैशाख मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर    पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*

*🎈तिथि-     द्वितीया    10:48:48* तत्पश्चात्
*🎈तृतीया    07:27:02*
*🎈तिथि    चतुर्थी    28:14:21*(क्षय )
*🎈 नक्षत्र -     भरणी    07:09:09
नक्षत्र    कृत्तिका    28:34:23* तक  तत्पश्चात् रोहिणी    *
*🎈योग    -     आयुष्मान    20:01:02*तक तत्पश्चात्     सौभाग्य*
*🎈करण    -     कौलव    10:48:48* तक तत्पश्चात्   तैतुल होगा।*
*🎈राहुकाल -05:25 pm से 07:02pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि-    *मेष*till 12:30:16
*🎈चन्द्र राशि    -   वृषभ    from 12:30:16*
*🎈सूर्य राशि     - *मेष    "
*🎈 सूर्योदय -   06:08:29*
*🎈 सूर्यास्त -        19:00:21* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:38 ए एम से 05:23 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त-  12:09 पी एम से 01:00 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:12 ए एम, अप्रैल 20 से 12:56 ए एम, अप्रैल 20*
*🎈 अमृत काल-    02:26 ए एम, अप्रैल 20 से 03:52 ए एम, अप्रैल 20*
*🎈 त्रिपुष्कर योग-    07:10 ए एम से 10:49 ए एम*
*🎈  रवि योग    04:35 ए एम, अप्रैल 20 से 06:06 ए एम, अप्रैल 20*
 
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण-  द्वितीया व्रत आज होगा (मासिक व्रत )
*🎈विशेष - विशेष - प्रति पदा और व्रत के दिन स्त्री सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- वैशाख मास महात्म्य *
 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा    गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी    💥सेनाधिपति    चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💥मन्त्री    मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी    धान्याधिपति    बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💥सस्याधिपति    गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी    मेघाधिपति    चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💥धनाधिपति    गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी    नीरसाधिपति    गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
💥रसाधिपति    शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी    फलाधिपति    चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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        🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
         

*🛟चोघडिया, दिन का🛟*

day





       🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
         💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺

👣🕉️ 🌹🌹 🌹🌹।। 🔶🔶🌹🌹 🌹
🌹🌿    *🔹गुरु राहु चांडाल दोष  🔹*
                   
👉गुरु ज्ञान, तो राहु कुतर्क।
गुरु कंप्यूटर ज्ञान तो राहु इंटरनेट। 
यदि इस युति में गुरु बलवान तो पॉजिटिव रिजल्ट 
राहु बलवान तो नेगेटिव रिजल्ट 
यदि राहु के ऊपर कारक ग्रहों का प्रभाव राशि नक्षत्र दृष्टि और युति के द्वारा पड़ता है।
तो गुरु राहु की युति व्यक्ति को उच्च कोटि का तर्कसंगत वकील बन सकती है। 
यदि गुरु कमजोर पड़ता है।
और राहु पर अकारक ग्रह का प्रभाव होता है।
तो फिर ऐसा व्यक्ति बिना कारण लोगों से कुतर्क करके अपनी बुद्धि खराब करने वाला दूसरे की बुद्धि खराब करने वाला और जीवन में परेशान किस्म का व्यक्ति होता है।
क्योंकि गुरु पांच भाव का कारक होता है और जब राहु के कारण गुरु पीड़ित हो जाता है तो फिर जीवन की तमाम प्रकार की समस्याओं का उसे सामने करना पड़ता है। 
इसलिए गुरु और राहु की युति किस प्रकार का शुभ और अशुभफल यह राहु के नक्षत्र राशि नवमांश स्वामी राहु के ऊपर दृष्टि और युति के द्वारा प्रभाव डालने वाले ग्रहों के द्वारा निर्धारितहोती है।
यदि राहु की स्थिति शुभ ग्रहों के द्वारा शुभ फल देने वाली बना दी जाती है तब फिर ऐसा चांडाल योग व्यक्ति को अच्छा वकील अच्छा रिसर्चर 
इंटरनेट का विशेष जानकार बना सकती है।
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*💵 मकान की नींव में सर्प और कलश क्यों गाड़ा जाता है? 
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श्रीमद्भागवत महापुराण के पांचवें स्कंद में लिखा है कि पृथ्वी के नीचे पाताल लोक है और इसके स्वामी शेषनाग हैं। भूमि से दस हजार योजन नीचे अतल, अतल से दस हजार योजन नीचे वितल, उससे दस हजार योजन नीचे सतल, इसी क्रम से सब लोक स्थित हैं। अतल, वितल, सतल, तलातल, महातल, रसातल, पाताल ये सातों लोक पाताल स्वर्ग कहलाते हैं। इनमें भी काम, भोग, ऐश्वर्य, आनन्द, विभूति ये वर्तमान हैं। दैत्य, दानव, नाग ये सब वहां आनन्द पूर्वक भोग विलास करते हुए रहते हैं। इन सब पातालों में अनेक पुरियां प्रकाशमान रहती हैं। इनमें देवलोक की शोभा से भी अधिक बाटिका और उपवन हैं। इन पातालों में सूर्य आदि ग्रहों के न होने से दिन रात्रि का विभाग नहीं है। इस कारण काल का भय नहीं रहता है। यहां बड़े बड़े नागों के सिर की मणियां अंधकार दूर करती रहती हैं। पाताल में ही नाग लोक के पति वासुकी

आदि नाग रहते हैं। श्री शुकदेव के मतानुसार पाताल से तीस हजार योजन दूर शेषजी विराजमान हैं। शेषजी के सिर पर पृथ्वी रखी है। जब ये शेष प्रलय काल में जगत के संहार की इच्छा करते हैं, तो क्रोध से कुटिल भृकुटियों के मध्य तीन नेत्रों से युक्त 11 रुद्र त्रिशूल लिए प्रकट होते हैं। पौराणिक ग्रंथों में शेषनाग के फण (मस्तिष्क) पर पृथ्वी टिकी होने का उल्लेख मिलता है।

शेष चाकल्पयद्देवमनन्तं विश्वरूपिणम् । यो धारयति भूतानि धरां चेमां सपर्वताम् ॥

-महाभारत/भीष्मपर्व 67/13

अर्थात् इन परमदेव ने विश्वरूप अनंत नामक देवस्वरूप शेषनाग को उत्पन्न किया, जो पर्वतों सहित इस सारी पृथ्वी को तथा भूतमात्र को धारण किए हुए है।

उल्लेखनीय है कि हजार फणों वाले शेषनाग समस्त नागों के राजा हैं। भगवान् की शव्या बनकर सुख पहुंचाने वाले, उनके अनन्य भक्त हैं और बहुत बार भगवान् के साथ साथ अवतार लेकर उनकी लीला में सम्मिलित भी रहते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता के 10वें अध्याय के 29वें श्लोक में भगवान् कृष्ण ने कहा है, अनन्तश्चास्मि नागानाम्' अर्थात् मैं नागों में शेषनाग हूं।

नींव पूजन का पूरा कर्मकांड इस मनोवैज्ञानिक विश्वास पर आधारित है कि जैसे शेषनाग अपने फण पर संपूर्ण पृथ्वी को धारण किए हुए है, ठीक उसी प्रकार मेरे इस भवन की नींव भी प्रतिष्ठित किए हुए चांदी के नाग के फण पर पूर्ण मजबूती के साथ स्थापित रहे। शेषनाग क्षीरसागर में रहते हैं, इसलिए पूजन के कलश में दूध, दही, घी डालकर मंत्रों से आह्वान कर शेषनाग को बुलाया जाता है, ताकि वे साक्षात् उपस्थित होकर भवन की रक्षा का भार वहन करें। विष्णुरूपी कलश में लक्ष्मी स्वरूप सिक्का डालकर पुष्प व दूध पूजन में अर्पित किया जाता है, जो नागों को अतिप्रिय है। भगवान् शिवजी के आभूषण तो नाग है ही। लक्ष्मण और बलराम शेषावतार माने जाते हैं। इसी विश्वास से यह प्रथा जारी है।

।। जय श्री कृष्ण ।।
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🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹।      💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ  🇪🇬🔱🔥🔱
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