*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक 20 अप्रैल 2026*
*🎈 वार- सोमवार *
*🎈 मास - वैशाख मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तृतीया 07:27:02*तत्पश्चात्
*🎈तिथि चतुर्थी 28:14:21*(क्षय )पंचमी*
*🎈 नक्षत्र - रोहिणी 26:07:32* तक तत्पश्चात् मृगशीर्षा *
*🎈योग - सौभाग्य 16:10:16*तक तत्पश्चात् शोभन*
*🎈करण - गर 07:27:02तक तत्पश्चात्
करण वणिज 17:49:00 तक होगा।*
*🎈राहुकाल -07:48 pm से 09:24pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि - वृषभ *
*🎈सूर्य राशि - *मेष "
*🎈 सूर्योदय - 06:07:29*
*🎈 सूर्यास्त - 19:00:50*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:38 ए एम से 05:22 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:08 पी एम से 01:00 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:12 ए एम, अप्रैल 21 से 12:56 ए एम, अप्रैल 21*
*🎈 अमृत काल- 11:16 पी एम से 12:42 ए एम, अप्रैल 21*
*🎈 सर्वार्थ सिद्धि योग- पूरे दिन*
*🎈 रवि योग -06:06 ए एम से 02:08 ए एम, अप्रैल 21*
*🎈 अमृत सिद्धि योग 02:08 ए एम, अप्रैल 21 से 06:05 ए एम, अप्रैल 21*
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण- अक्षय तृतीया व्रत आज होगा (मासिक व्रत )
*🎈विशेष - विशेष - अक्षय तृतीया (19 अप्रैल 2026) के पवित्र अवसर पर सात्विकता बनाए रखने के लिए मांसाहार, शराब, प्याज, लहसुन और अन्य तामसिक भोजन का सेवन न करें। इस दिन शुद्धता का विशेष महत्व है, इसलिए घर में बना सादा और शुद्ध भोजन ही करें। इसके साथ ही, अंधेरे में न रहने और क्रोध/कलह से बचने की भी सलाह दी जाती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
*🎈विशेष:- वैशाख मास महात्म्य *
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💥सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💥मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💥सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💥धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
💥रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
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💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
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🌹🌿 *🔹गुरु राहु चांडाल दोष 🔹*
👉अक्षय तृतीया पर अक्षय पात्र (अन्न-धन की वृद्धि के लिए) बनाने के लिए, सुबह स्नान कर पूजा स्थान पर पीतल/चांदी के एक पात्र में अक्षत (चावल), हल्दी, साबुत धनिया, 3 सिक्के और 1 साबुत हल्दी की गांठ रखें। इसे हल्दी-कुमकुम से तिलक कर विष्णु-लक्ष्मी की पूजा करें और मंदिर या तिजोरी में स्थापित करें।
अक्षय पात्र बनाने की चरण-दर-चरण विधि
1. सही समय: अक्षय तृतीया के दिन सुबह सूर्योदय के बाद या शुभ मुहूर्त में।
2. सामग्री: एक छोटा पीतल, चांदी या मिट्टी का पात्र (कटोरी या डिब्बा), अक्षत (साफ चावल), हल्दी, कुमकुम, 3-4 कौड़ियां (यदि उपलब्ध हों), और 3 सिक्के (चांदी या सामान्य)।
3. पात्र की शुद्धि: पात्र को गंगाजल या साफ पानी से धोकर शुद्ध करें।
4. सामग्री रखना: पात्र में पहले अक्षत भरें, फिर उसमें सिक्के, कौड़ी और साबुत हल्दी की गांठ डालें।
5. तिलक और पूजा: पात्र को हल्दी और कुमकुम से तिलक करें। माँ लक्ष्मी और विष्णु जी की प्रतिमा के सामने रखकर पूजा करें।
6. मंत्र: पूजा के दौरान "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" या "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।
7. स्थान: इस पात्र को स्थापित करने के बाद वर्ष भर के लिए अपने घर के मंदिर या तिजोरी में रख दें।
अक्षय तृतीया से संबंधित अन्य अनुष्ठान:
दान: इस दिन साबुत धनिया, पीले/लाल वस्त्र, चावल, चीनी, और ककड़ी का दान करना बहुत शुभ माना जाता है।
पूजा: सुबह जल्दी स्नान कर लाल या पीले कपड़े पहनें। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
यह परंपरा घर में सुख, समृद्धि और बरकत लाने के लिए की जाती है।
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🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹। 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
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