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आज का पञ्चाङ्ग

 *🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*

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*🎈दिनांक  21 जून 2026*
*🎈 वार- रविवार योग दिवस*
*🎈 मास -  ज्येष्ठ मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर    पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि    -    सप्तमी    15:20:07*
*तत्पश्चात अष्टमी*
*🎈 नक्षत्र -             पूर्व फाल्गुनी    09:30:31 तक* तत्पश्चात्  उत्तर फाल्गुनी*
*🎈योग    -         सिद्वि    11:20:27* तक तत्पश्चात्  व्यतिपत *
*🎈करण-    वणिज    15:20:07* तक तत्पश्चात् विष्टि भद्र*
*🎈राहुकाल -05:48pm  से 07:31 pm (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि-    सिंह    *till 15:39:08
*🎈चन्द्र राशि-      कन्या    from from 15:39:08*
*🎈सूर्य राशि-       मिथुन*
*🎈 सूर्योदय -   05:42:25*
*🎈 सूर्यास्त -        19:31:15* 
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
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*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:20 ए एम से 05:01 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त-  12:09 पी एम से 01:05 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:17 ए एम, जून 22 से 12:57 ए एम, जून 22*
*🎈 अमृत काल-    02:55 ए एम, जून 22 से 04:34 ए एम, जून 22*
*🎈 त्रिपुष्कर योग    -09:31 ए एम से 03:20 पी एम*
*🎈सर्वार्थ सिद्धि योग    09:31 ए एम से 05:41 ए एम, जून 22*
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण. ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार सप्तमी तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है, जिसके तहत इस तिथि के लिए कुछ नियम और वर्जनाएं बताई गई हैं।1. आहार से संबंधित नियम (बेल का सेवन)क्या न करें: पुराण के अनुसार, पंचमी तिथि को बेल का फल (Bael fruit) नहीं खाना चाहिए।क्या मान्यता है: इस दिन बेल खाने से व्यक्ति को कलंक लगता है।
*🎈विशेष - अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Day of Yoga) रविवार, 21 जून को मनाया जा रहा है。इस वर्ष का मुख्य विषय (Theme) 'स्वस्थ आयु के लिए योग' है, जो लोगों को इसे अपनी रोज़मर्रा की जीवनशैली का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
*🎈विशेष:- जेष्ठ मास महात्म्य *
 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा    गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी    💢सेनाधिपति    चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री    मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के 💢स्वामी    धान्याधिपति    बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति    गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी    
🛟मेघाधिपति    चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति    गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी    नीरसाधिपति    
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति    शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी    फलाधिपति    
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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        🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
         *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day




           🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
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     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
  #🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
         💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺

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       ➡️ *।। ॐ श्री गणेशाय नमः ।।
    🌺🌷🏓.#👉शादी का असली उद्देश्य ~न वा अरे जायायै कामाय जाया प्रिया भवति, आत्मनस्तु कामाय जाया प्रिया भवति।

मैत्रेयी ब्राह्मण में, ऋषि याज्ञवल्क्य बताते हैं कि किसी भी चीज़ से इसलिए प्यार नहीं किया जाता कि वह अपने आप में प्यारी है; बल्कि, उससे प्यार इसलिए किया जाता है क्योंकि उसका संबंध 'आत्मा' से होता है।
अगर कोई व्यक्ति सच में यह मानता है कि धर्म ही हमेशा बने रहने वाले कल्याण का स्रोत है, तो धर्म के प्रति प्यार अपने आप पैदा हो जाता है। इसके साथ ही, उन सभी के प्रति कृतज्ञता का भाव भी आता है जो धर्म के रास्ते पर चलने में मदद करते हैं: जैसे आचार्य, माता-पिता, जीवनसाथी, बच्चे, गायें और धार्मिक जीवन में सहारा देने वाले अन्य सभी।
कई शादियाँ सीमित उद्देश्यों पर टिकी होती हैं, जैसे एक-दूसरे से प्यार करना, एक-दूसरे को खुश रखना, हमेशा एक जैसा बने रहना या बस एक-दूसरे का ख्याल रखना।
 ऐसी उम्मीदें अक्सर अस्थिर साबित होती हैं क्योंकि इंसानी भावनाएँ, हालात और खुद लोग भी बदलते रहते हैं।
विवाह सूक्त में कहा गया है कि, "दुल्हन को, दूल्हे को अग्नि देवता सौंपते हैं।"
इस विवाह को माता-पिता की मंज़ूरी और देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है, और यह पति-पत्नी दोनों को मिलकर कई धार्मिक कर्तव्य निभाने का अधिकार देता है। जीवनसाथी के अच्छे गुणों का फ़ायदा सिर्फ़ एक व्यक्ति को नहीं मिलता; बल्कि बच्चों, माता-पिता और यहाँ तक कि पितरों को भी मिलता है। 
विवाह सूक्त में दूल्हा-दुल्हन को बुढ़ापे तक साथ रहने का निर्देश भी दिया गया है। इसका भाव यह है कि एक बार विवाह हो जाने के बाद, दोनों का यह कर्तव्य है कि वे साथ रहें और एक-दूसरे के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाएँ।
अगर हम धर्म से कमाए गए धन, धर्म से पूरी की गई इच्छाओं और धर्म से मिलने वाली शांति का महत्व समझ सकते हैं, तो फिर हम धर्म के माध्यम से मिले जीवनसाथी का महत्व क्यों नहीं समझ सकते और उनसे प्रेम क्यों नहीं कर सकते?
मनु ने विवाह के आठ प्रकार बताए हैं,
ब्राह्मो दैवस्तथैवार्षः प्राजापत्यस्तथाऽसुरः ।
गान्धर्वो राक्षसश्चैव पैशाचश्चाष्टमोऽधमः ॥

अपवादों की बात नहीं हो रही है। हर व्यक्ति को लगता है कि उसका मामला खास है। शायद बहुत कम मामलों में, रिश्ते से ज़्यादा धर्म ज़रूरी होता है।
पहले शादी से पहले प्यार में पड़ना आम बात नहीं थी। आज यह बहुत आम हो गया है। प्यार के आधुनिक विचारों को गंभीरता से लेना मुश्किल है, क्योंकि इसकी परिभाषा भी स्थिर नहीं है। अगर किसी व्यक्ति ने शादी से पहले कई पार्टनर बदले हैं, तो यह पूछना वाजिब है कि क्या गारंटी है कि वही लगाव अगले पैंसठ सालों तक वैसा ही बना रहेगा।
आज, धार्मिक दायरे के कई लोग भी मानते हैं कि शादी से पहले प्यार ज़रूरी है। इस वजह से, वे धीरे-धीरे अरेंज्ड मैरिज (तयशुदा शादी) को नज़रअंदाज़ करने लगते हैं।
 उनमें और दूसरों में अक्सर बस यही फ़र्क होता है कि वे शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाने से बचते हैं। पूरी तरह से अस्थायी चीज़ों पर बने रिश्ते के हमेशा बने रहने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
एक ऊँचे मकसद, यानी धर्म के पालन पर केंद्रित शादी ज़्यादा मज़बूत आधार पर टिकी होती है। जब पति-पत्नी धार्मिक अनुष्ठान, गर्भाधान, बच्चों की सही परवरिश, उनके संस्कार और उपनयन जैसे पवित्र कर्तव्यों को निभाने के लिए एक साथ आते हैं, तो शादी का सामान्य सुख-आशीर्वाद स्वाभाविक रूप से मिलता है। 
आपसी देखभाल, स्नेह, साथ और सहयोग धर्म के प्रति साझा प्रतिबद्धता का नतीजा होते हैं, न कि उसका एकमात्र आधार।
धर्म कभी दुख का कारण नहीं बन सकता।
सांब सदाशिव।।
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" नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम् "

         🛟॥ श्री हरिः ॐ ॥☀️

    
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🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹।      💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
      बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
     🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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‼️अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे।
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ  🇪🇬🔱🔥🔱🌿
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