*💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
*🎈दिनांक 15 अगस्त 2026*
*🎈 वार- शनिवार*
*🎈 मास -सावन मास*
*🎈 पक्ष - कृष्णा पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - रितु वर्षा*
*🎈तिथि - तृतीया - 05:28 पी एम तक तक तत्पश्चात चतुर्थी*
*🎈 नक्षत्र - उत्तराफाल्गुनी - 03:25 ए एम, अगस्त 16 तक तत्पश्चात हस्त*
*🎈योग - शिव - 07:09 ए एम तक तत्पश्चात् सिद्ध,साध्य*
*🎈करण- गर - 05:28 पी एम तक तत्पश्चात् वाणिज्य, विष्टि,*
*🎈राहुकाल 09:23 ए एम से 11:01 ए एम (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय-06:07:14ए एम ए एम*
*🎈सूर्यास्त-07:11:21 पी एम*
*🎈चंद्र राशि- सिंह - 09:34 ए एम तक*
*🎈चंद्र राशि-कन्या*
*🎈सूर्य राशि- कर्क*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:39 ए एम से 05:23 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:13 पी एम से 01:06 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:18 ए एम, अगस्त 16 से 01:01 ए एम, अगस्त 16*
*🎈अमृत काल -08:18 पी एम से 09:53 पी एम *
*🎈 रवि योग -06:06 ए एम से 03:25 ए एम, अगस्त 16*
*🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण- ब्रह्म वैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, तृतीया तिथि को परवल खाना वर्जित है। धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार इस दिन परवल का सेवन करने से जीवन में शत्रुओं की वृद्धि होती है और संघर्ष बढ़ता है।
🛟15 अगस्त 2026 को बुध का नक्षत्र गोचर और ग्रहों की स्थिति के कारण सभी 12 राशियों के लिए आत्मविश्वास, आर्थिक सुधार और करियर में नए अवसर मिलने के योग हैं। इस दिन कई राशियों को अपनी मेहनत का पूरा फल मिलेगा और रुके हुए कार्यों में प्रगति होगी।
💥सावन महात्म्य☀️
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
★√*★√*★√*★√*★√*★
🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
💢आज का राशिफल💢
🛟सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल‼️
☀️ मेष मेष राशि: आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, शत्रुओं पर विजय मिलेगी और व्यापारिक स्थिति में सुधार होगा
💥वृषभ राशि: पुराने रुके हुए काम पूरे होंगे, आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा और परिवार में खुशी का माहौल रहेगा।
💥मिथुन राशि: नौकरी में नए प्रोजेक्ट या पद की जिम्मेदारी मिल सकती है, धन का आवक बढ़ेगा।
💥कर्क राशि: मेहनत का पूरा फल मिलेगा, हालांकि किसी भी भावुक निर्णय से बचने की सलाह है।
💥सिंह राशि: नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ेगा, कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।
💥कन्या राशि: कोई अधूरा सपना पूरा हो सकता है, करियर में मनचाही सफलता और आय के नए साधन बनेंगे।
💥तुला राशि: कार्यों में सफलता मिलेगी, आर्थिक योजनाएं सफल होंगी और मान-सम्मान बढ़ेगा।
💥वृश्चिक राशि: कार्यक्षेत्र में गंभीरता और मेहनत रंग लाएगी, बड़े निवेश से फिलहाल दूर रहें।
💥धनु राशि: भाग्य का साथ मिलेगा, धार्मिक या आध्यात्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी।
💥मकर राशि: वित्तीय योजना पर ध्यान दें, ऑफिस की राजनीति से खुद को दूर रखें।कुंभ राशि: नए लोगों से मेल-जोल बढ़ेगा, नेटवर्किंग और पार्टनरशिप से लाभ के योग हैं।
💥मीन राशि: पुराने विवादों का समाधान मिलेगा, कार्यक्षेत्र में प्रभाव और सम्मान में वृद्धि होगी
➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️
💕🌹🕉️ 🌹||#🙏 #ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏
🗓️ आदि शंकराचार्य और भगवती आद्याशक्ति (माँ काली) के बीच का यह प्रसंग अद्वैत दर्शन और शक्ति-तत्व के मिलन की सबसे प्रमाणिक और अलौकिक गाथा है। यह कथा काशी (वाराणसी) की पवित्र भूमि पर घटी थी।
आदि शंकराचार्य ने भारतवर्ष में 'अद्वैत वेदांत' की स्थापना की थी। उनका स्पष्ट मत था—"ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः" (केवल निराकार ब्रह्म ही सत्य है, यह दृश्य जगत मिथ्या है और जीव ब्रह्म से अलग नहीं है)। शंकराचार्य ज्ञानमार्ग के सर्वोच्च शिखर पर थे। वे मानते थे कि संसार का समस्त रूप, आकार, और लीलाएँ केवल माया का खेल हैं।
हालाँकि वे निर्गुण-निराकार ब्रह्म की साधना में इतने लीन थे कि वे साकार रूप, रूप-रंग और शक्ति (दुर्गा/काली) की महत्ता को ब्रह्म की तुलना में गौण या केवल माया का प्रभाव मानते थे। उन्हें लगता था कि केवल ज्ञान ही पूर्ण है और भक्ति या शक्ति का आश्रय केवल शुरुआती साधकों के लिए है।
काशी की घटना: शक्तिहीन शंकराचार्य
एक बार शंकराचार्य अपने शिष्यों के साथ काशी पहुँचे। वहाँ वे अद्वैत सिद्धांत का प्रचार कर रहे थे। एक दिन वे अत्यधिक बीमार पड़ गए (कुछ ग्रंथों के अनुसार उन्हें भीषण ज्वर हुआ था, तो कुछ के अनुसार वे निरंतर कठिन साधना और यात्रा के कारण अत्यधिक अशक्त हो गए थे)।
उनका शरीर इतना दुर्बल हो गया था कि वे गंगा तट की सीढ़ियों पर बैठ गए और उनसे एक कदम भी चला नहीं जा रहा था। उनके शिष्य उस समय उनसे कुछ दूरी पर जल और औषधि लेने गए हुए थे।
तभी वहाँ से एक वृद्ध महिला गुजरी। उनके हाथ में जल का पात्र था। शंकराचार्य ने अत्यंत क्षीण स्वर में उनसे कहा, "हे माते! क्या आप मुझे थोड़ा जल दे सकती हैं? मुझसे उठकर जल के पास जाने की सामर्थ्य नहीं है।"
वृद्ध महिला (जो वास्तव में साक्षात माँ काली/भगवती थीं) वहीं रुक गईं और मुस्कुराते हुए बोलीं, "हे संन्यासी! तुम तो स्वयं महान ज्ञानी हो। यदि तुम्हें जल चाहिए, तो स्वयं उठकर ले लो।"
शंकराचार्य ने कातर भाव से कहा, "माता, आप देख रही हैं कि मुझमें उठने की 'शक्ति' नहीं है। बिना शक्ति के मैं हिल भी नहीं सकता।"
वृद्ध स्त्री के चेहरे पर एक अलौकिक मुस्कान आई। वे बोलीं, "हे ज्ञानी संन्यासी! जरा विचार करो—तुम कहते हो कि ब्रह्म ही सब कुछ है और माया या शक्ति कुछ नहीं। तो फिर आज तुम बिना 'शक्ति' के एक अंगुली भी क्यों नहीं हिला पा रहे हो? यदि ब्रह्म ही सर्वस्व है, तो बिना शक्ति के तुम्हारा ज्ञान और तुम्हारा शरीर निष्प्राण क्यों पड़ा है?"
स्त्री के इन शब्दों में साधारण बोली नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय सत्य की गूंज थी। शंकराचार्य की आँखें खुल गईं। वे समझ गए कि यह कोई साधारण स्त्री नहीं हैं।
उसी क्षण वह वृद्धा अपने वास्तविक अलौकिक रूप में प्रकट हुईं। उनके एक हाथ में खप्पर, दूसरे में वरमुद्रा और चेहरे पर असीम करुणा थी—वे साक्षात महाकाली थीं।
माँ काली ने शंकराचार्य को ज्ञान दिया:
शिव और शक्ति एक ही हैं: जिस प्रकार अग्नि से उसकी उष्णता (गर्मी) को अलग नहीं किया जा सकता, उसी प्रकार निर्गुण ब्रह्म (शिव) से उसकी अभिव्यक्ति यानी क्रियात्मक ऊर्जा (शक्ति/काली) को अलग नहीं किया जा सकता।
शव और शिव का भेद: चेतना जब तक शांत है, वह शिव है। जब वह चेतना गतिमान होती है और संसार की रचना, पालन व संहार करती है, तो वही 'शक्ति' कहलाती है। बिना शक्ति के शिव भी 'शव' (निश्चेष्ट) के समान हैं।
सौंदर्य लहरी और शक्ति की स्वीकृति
माँ काली के इस साक्षात्कार ने शंकराचार्य का बचा-कुचा बौद्धिक अहंकार और यह भ्रम समाप्त कर दिया कि शक्ति केवल एक मिथ्या माया है। उन्होंने माँ काली के चरणों में शीश नवाया और उनसे क्षमा मांगी। माँ के स्पर्श मात्र से उनका शरीर पुनः ऊर्जावान हो गया।
इस दिव्य घटना के बाद ही आदि शंकराचार्य ने केवल ज्ञानमार्ग ही नहीं, बल्कि भक्ति और शक्ति-साधना को भी अद्वैत का ही अंग माना। उन्होंने प्रसिद्ध 'सौंदर्य लहरी' और 'कनकधारा स्तोत्र' जैसे महान शक्ति-ग्रंथों की रचना की।
सौंदर्य लहरी का पहला ही श्लोक इस घटना का प्रमाण देता है:
शिवः शक्त्या युक्तो यदि भवति शक्तः प्रभवितुं।
न चेदेवं देवो न खलु कुशलः स्पन्दितुमपि॥
अर्थ: परमशिव केवल तब ही ब्रह्मांड की सृष्टि या कोई क्रिया करने में समर्थ होते हैं, जब वे शक्ति (माँ काली/पार्वती) से युक्त होते हैं। यदि वे शक्ति से रहित हों, तो वे एक स्पंदन (हिलना-डुलना) भी नहीं कर सकते।
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💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
*🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
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*💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
*बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️













