*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक 13 जून 2026*
*🎈 वार- शनिवार*
*🎈 मास - अधिक ज्येष्ठ मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - शिशिर*
*🎈तिथि - त्रयोदशी 16:07:02*
*तत्पश्चात्*चतुर्दशी*
*🎈 नक्षत्र - कृत्तिका 25:15:56* तत्पश्चात्
*रोहिणी*
योग -सुकर्मा 17:27:21*
*🎈करण - गर 05:54:33* तक तत्पश्चात् वणिज*
*🎈राहुकाल -09:08am से 10:52am (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)
*🎈चन्द्र राशि - मेष *till 09:24:21*
*🎈चन्द्र राशि- वृषभ from 09:24:21*
*🎈सूर्य राशि- वृषभ *
*🎈 सूर्योदय - 05:41:18*
*🎈 सूर्यास्त - 19:29:00*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:19 ए एम से 04:59 ए एम
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:07 पी एम से 01:03 पी एम *
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:15 ए एम, जून 1301:163 से 12:55 ए एम, जून 14*
*🎈 सर्वार्थ सिद्धि योग- 01:16 ए एम, जून 14 से 05:40 ए एम, जून 14
*🎈 अमृत काल- 11:09 पी एम से 12:34 ए एम, जून 14*
*🎈 अमृत सिद्धि योग 01:16 ए एम, जून 14 से 05:40 ए एम, जून 14*
*🎈 व्रत एवं पर्व विवरण. ब्रह्मवैवर्त पुराण (विशेषकर ब्रह्म खंड, अध्याय 27) के अनुसार, त्रयोदशी तिथि के दिन बैंगन (भंटा) नहीं खाना चाहिए। ग्रंथ के इस अध्याय में ब्राह्मणों के लिए भक्ष्याभक्ष्य (क्या खाएं और क्या न खाएं) का विस्तार से निरूपण किया गया है, जिसके अंतर्गत त्रयोदशी को बैंगन खाने को निषिद्ध माना गया है।
*🎈विशेष - त्रयोदशी तिथि (विशेषकर शिवरात्रि) त्रयोदशी को बैगन खाने से पुत्र का नाश होता है। मांस सार्वभौम के लिए सदाबहार है।
*🎈विशेष:- अधिक जेष्ठ मास महात्म्य *
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल🛟
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी 💢सेनाधिपति चन्द्र⚔️ - रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के 💢स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी
🛟मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
👣🕉️ 🌹🌹 🌹🌹।। 🔶🔶🌹🌹 🌹
➡️ *।। ॐ श्री गणेशाय नमः ।।
🌺🌷 *।। 🏓.#👉रत्न या मंत्र - कौन ज्यादा प्रभावशाली
शास्त्रोक्त प्रमाण सहित संख्या सहित
`मणिमन्त्रौषधीनां च प्रभावो ह्यतिदुर्लभः ।
मन्त्रो हि देवता साक्षात् मणिस्तदधिदेवता ॥`
मंत्र महार्णव, रत्न प्रकाश 1/7
इस श्लोक का भार समझो बंधु। ये कह रहा है कि तीन चीज़ें दुनिया में दुर्लभ प्रभाव रखती हैं — मणि, मंत्र और औषधि। पर इन तीनों में भी दर्जा है।
हिंदी अनुवाद
`मणि रत्न, मंत्र और औषधि तीनों का प्रभाव दुर्लभ है`। `मंत्र साक्षात देवता है, मणि रत्न उस देवता का अधिष्ठाता है`।
यानी मंत्र खुद वो देवता है जिससे तुम्हें काम है। और मणि रत्न? वो सिर्फ उस देवता का ऑफिस, उसकी कुर्सी, उसका प्रतिनिधि है। अब खुद मालिक आ जाए तो मैनेजर से बात कौन करेगा?
`1. रत्न = ग्रह की भौतिक ऊर्जा`। समझो इसे ऐसे कि `जैसे सूर्य की किरणें माणिक्य में स्टोर होकर शरीर को देती हैं`। ये एक फिल्टर है, एक एंटीना है। ऊपर से ग्रह की रश्मि आई, रत्न ने छानकर तुम्हारी बॉडी में उतार दी। इसलिए `24 घंटे काम करता है, पहनते ही असर शुरू`। पहना नहीं कि चालू। कोई मुहूर्त, कोई पूजा बीच में नहीं।
`2. मंत्र = ग्रह की सूक्ष्म/दैवीय ऊर्जा`। ये दिखता नहीं पर चलता खूब है। `ध्वनि से ब्रह्मांड में तरंग पैदा करके ग्रह को प्रसन्न करता है`। तुमने "ॐ शं शनैश्चराय नमः" कहा, तो ये शब्द शनि तक वायरलेस मैसेज बनकर गया। इसलिए `जितना जप उतना फल, नियम से करना पड़ता है`। एक दिन किया, दस दिन भूले, तो नेटवर्क कट।
असर की गति: `रत्न तुरंत, 24 घंटे काम करता है`। ये एलोपैथी की गोली है। दर्द है तो अभी आराम। पर `मंत्र धीरे-धीरे असर देता है, 40-43 दिन बाद फल शुरू`। ये आयुर्वेद है। जड़ से रोग काटेगा, पर टाइम लेगा। शास्त्र 40 दिन को "एक मंडल" कहते हैं। इतना तो देना पड़ेगा।
बल: `रत्न ग्रह का बल 10% से 30% तक बढ़ा देता है`। मान लो किस्मत में 10 लाख लिखा है, रत्न उसे 13 लाख तक खींच देगा। पर `मंत्र ग्रह का बल 50% से 100% तक बदल देता है`। मंत्र 10 लाख को 20 लाख भी कर सकता है। क्योंकि रत्न रिक्वेस्ट करता है, मंत्र ऑर्डर देता है।
खर्च: `रत्न 5000 से 5 लाख तक, एक बार खर्च`। और वो भी गारंटी नहीं कि असली मिला या नहीं। `मंत्र जीरो खर्च, सिर्फ समय देना है`। अमीर-गरीब का भेद ही खत्म। दो घंटे सुबह निकालो, राजा बनो।
साइड इफेक्ट: ये सबसे खतरनाक हिस्सा है। `गलत रत्न पहन लिया = तुरंत नुकसान, रोग, झगड़ा, दुर्घटना`। कुंडली में जो ग्रह तुम्हारा दुश्मन है, उसका रत्न पहन लिया तो समझो दुश्मन को तलवार दे दी। वो उसी से तुम्हें काटेगा। पर `गलत मंत्र से कोई नुकसान नहीं होता, बस फल नहीं मिलेगा`। ज्यादा से ज्यादा जीरो बटा सन्नाटा। नुकसान कभी नहीं।
निर्भरता: `रत्न उतारते ही असर बंद हो जाता है`। ये किराये का मकान है। किराया बंद, मकान खाली। पर `मंत्र जप से बनी ऊर्जा जीवन भर साथ रहती है`। ये खुद का खरीदा हुआ प्लॉट है। मरने के बाद भी साथ जाएगा।
किसके लिए: `रत्न उनके लिए जिनके पास समय नहीं, तुरंत रिजल्ट चाहिए`। बिजनेसमैन, नेता, एक्टर। `मंत्र उनके लिए जिनके पास श्रद्धा + नियम है, स्थाई बदलाव चाहिए`। साधक, ब्राह्मण, और वो जो जिंदगी बदलना चाहता है।
🛟॥ श्री हरिः ॐ ॥☀️
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🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹। 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱🔥🔱🌿




