*💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*
*🎈दिनांक 08 अगस्त 2026*
*🎈 वार- शनिवार*
*🎈 मास -सावन मास*
*🎈 पक्ष - कृष्णा पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)- रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - रितु वर्षा*
*🎈तिथि - दशमी - 01:59 पी एम तक तत्पश्चात*एकादशी*
*🎈 नक्षत्र - रोहिणी - 04:51 पी एम तक तत्पश्चात मृगशिरा*
*🎈योग - ध्रुव - 09:02 ए एम तक तत्पश्चात्*व्याघात* हर्षण*
*🎈करण- विष्टि - 01:59 पी एम तक तत्पश्चात् बव*
*🎈राहुकाल 09:22 ए एम से 11:01 ए एम (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈 सूर्योदय-06:03.42 ए एम*
*🎈 सूर्यास्त-07:17:14 पी एम*
*🎈चंद्र राशि- वृषभ*till 27:47:07*
*🎈चंद्र राशि- मिथुन from 27:47:07*
*🎈 सूर्य राशि- कर्क*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पूर्व दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:37 ए एम से 05:20 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:14 पी एम से 01:07 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:19 ए एम, अगस्त 09 से 01:02 ए एम, अगस्त 09*
*🎈अमृत काल -04:28 पी एम से 05:58 पी एम*
*🎈अमृत सिद्धि योग 01:54 पी एम से 03:22 पी एम*
*🎈व्रत पर्व विवरण - ब्रह्म वैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों में दशमी तिथि के दिन कलम्बी (एक प्रकार का साग) का सेवन करना वर्जित (निषिद्ध) बताया गया है।
ब्रह्मवैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34)
*🎈विशेष:- 08 अगस्त 2026 को चंद्रमा वृष राशि में संचरण कर रहे हैं। आज का दिन मेष से मीन तक सभी राशियों के लिए धैर्य, संयम और करियर में निरंतर वृद्धि के संकेत लेकर आया है। विशेष रूप से सिंह राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में सूझबूझ दिखाने और गुप्त रूप से अपने प्रोजेक्ट्स पर काम करने की सलाह दी जाती है।
🛟08 अगस्त 2026, शनिवार के दिन कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि और लायंस गेट पोर्टल (8/8) का विशेष ऊर्जावान संयोग है। आज का दिन सभी राशियों के लिए आत्म-चिंतन, करियर में सावधानी और धैर्य के साथ आगे बढ़ने का संकेत दे रहा है।🛟
💥सावन महात्म्य☀️
👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔
🎉*विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल*
💥राजा गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी
💢सेनाधिपति चन्द्र⚔️ -
🏵️ रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी धान्याधिपति बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी
🛟मेघाधिपति चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी नीरसाधिपति
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी फलाधिपति
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
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🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
*🛟चोघडिया, दिन का🛟*
🛟चोघडिया, रात्🛟*
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🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
💢आज का राशिफल💢
🛟सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल‼️
💢मेष: बातचीत और संवाद कौशल में सुधार होगा। मन की बातें स्पष्ट रूप से कह पाएंगे। पुराने तनाव कम होंगे।
🏵️वृषभ: आर्थिक मामलों पर ध्यान दें। अपनी बनाई हुई वित्तीय स्थिरता और बजट की रक्षा करें।
🏵️मिथुन: जिज्ञासा और अनुकूलन क्षमता बढ़ेगी। नए अवसरों को अपनाने के लिए दिन अच्छा है।
🏵️कर्क: आत्ममंथन और शांति का अनुभव होगा। जरूरी कार्यों में एकाग्रता बनाए रखें।
🏵️सिंह: आत्मविश्वास और व्यक्तिगत प्रभाव में वृद्धि होगी। बड़े विचार मन में आएंगे, पर खर्चों पर नियंत्रण रखें।
🏵️कन्या: करियर के क्षेत्र में प्रगति और स्थिरता बनी रहेगी। योजनाबद्ध तरीके से काम करने से लाभ होगा।
🏵️तुला: दृष्टिकोण का दायरा बढ़ेगा। प्रेम जीवन और रिश्तों में रोमांस तथा मधुरता आएगी।
🏵️वृश्चिक: भावनात्मक स्वास्थ्य सुधरेगा। पैसों के लेन-देन और बचत की योजनाओं में सफलता मिलेगी।
🏵️धनु: रिश्तों और पारिवारिक जीवन में अपनापन व warmth बढ़ेगी। आपसी गिले-शिकवे दूर होंगे।
🏵️मकर: दैनिक कार्यप्रणाली और रुटीन व्यवस्थित रहेगा। कार्यक्षेत्र में उत्पादकता बढ़ेगी।
🏵️कुंभ: रचनात्मकता और खुद को अभिव्यक्त करने के मौके मिलेंगे। कलात्मक कार्यों में रुचि बढ़ेगी।
🏵️मीन: घर और परिवार के लोगों से संबल तथा प्रेरणा मिलेगी। मन शांत और प्रसन्न रहेगा
➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️☀️#🎉ॐ श्री गुरुभ्यो नमः 🙏
💕नमस्ते दोस्तों,
🏓👁️#🍁 पुष्पदंत–शिव महिमन्स्तोत्र के रचियता 🍁
✨पुष्पदंत नाम का एक गंधर्व था। गंधर्व वर्ग भी देव-तुल्य शक्ति से संपन्न हुआ करते हैं| वे उड़ सकते तथा अदृश्य भी हो सकते थे। पुष्पदंत भगवान शिव का भक्त था साथ ही विद्वान और कवि भी था। उसके गायन कौशल के कारण देवराज इंद्र के दरबार में दिव्य गायक के रूप में नियुक्त किया गया था। भगवान शिव का भक्त होने के कारण पुष्पदंत को विभिन्न फूलों से भगवान शिव की पूजा करना पसंद था।
✨एक बार पुष्पदंत भ्रमण करते हुए राजा चित्रार्थ के राज्य में पहुंचा। राज्य की सुंदरता को देखकर पुष्पदंत आश्चर्यचकित हो गया। धीरे धीरे जैसे उसने राज्य का भ्रमण किया वह यह देखकर अचंभित हो गया कि राज्य सुन्दर बगीचों और फूलों से घिरा हुआ है। वह चित्रार्थ के महल में गया और वहां और भी अधिक सुन्दर फूलों को देखकर आश्चर्यचकित रह गया। जब पुष्पदंत ने बगीचे को देखा तो वह स्वयं को रोक नहीं पाया। उसने जितने संभव हो सके उतने फूल तोड़ लिए यद्दपि पुष्पदंत को बुरा लगा कि वह फूलों की चोरी कर रहा है परन्तु जब उसने फूलों को देखा तो वह स्वयं को रोक नहीं पाया।
✨राजा चित्रार्थ जिनका बगीचा था, वे भी भगवान शिव के भक्त थे। उन्होंने यह बगीचा इसलिए बनवाया था कि वे उसमें से रोज़ फूल तोड़कर उन फूलों से भगवान शिव की पूजा करें। हालाँकि जब उस दिन वे भगवान की पूजा करने के लिए बगीचे में पहुंचे तो वे उदास हो गए क्योंकि अधिकाँश फूल तोड़ लिए गए थे। राजा चित्रार्थ ने अपने सैनिकों को बुलाया और पूछा, “फूलों को क्या हुआ?”
✨सैनिक घबराकर एक दूसरे की ओर देखने लगे तथा फिर राजा की ओर देखकर बोले, “महाराज! हमें नहीं पता...हमने नहीं लिए....हम तो महल की रक्षा के लिए चक्कर लगा रहे थे। सैनिक ने अपना सिर हिलाते हुए कहा...जब हम आए तो फूल गायब थे महाराज!” राजा चित्रार्थ ने सैनिकों की ओर देखा और महसूस किया कि वे सच बोल रहे हैं। उन्होंने त्योरियां चढ़ाई और दयनीय तरीके से पेड़ से कुछ फूल तोड़े। उन्होंने उस दिन की पूजा समाप्त की तथा दूसरे दिन बगीचे की रखवाली के लिए अधिक सैनिक नियुक्त किये।
हालंकि उन्हें आश्चर्य तब हुआ जब उन्होंने सैनिकों के शर्म से झुके हुए चेहरे देखे और देखा कि आज भी बहुत से फूल गायब थे।! राजा चित्रार्थ को गुस्सा आ गया। पूजा करने के बाद उन्होंने कुछ समय विचार किया। उन्होंने बगीचे को देखा तथा एक के बाद एक सारे पेड़ों को देखा। उन्होंने गुस्से से अपने सैनिकों को बुलाया और बेलपत्र के पेड़ की ओर इशारा करते हुए कहा, “ उन पत्तियों को पेड़ के चारों तरफ बिछा दो।“ सैनिकों ने सिर हिलाते हुए पेड़ के चारो ओर पत्तियां बिछा दी। अगले दिन सुबह पुष्पदंत अदृश्य होकर बगीचे के अंदर आया। जैसे ही वह पेड़ों की ओर बढ़ा उसने अनजाने ही बेलपत्र की पत्तियों पर अपना पैर रख दिया।
☀️ऊपर कैलाश में भगवान शिव की साधना में विघ्न पड़ा। बेलपत्र का उपयोग भगवान शिव की पूजा के लिए किया जाता है तथा उनकी प्रिय पत्तियां हैं। भगवान शिव को गुस्सा आ गया क्योंकि अहसास हुआ कि कोई व्यक्ति इन पत्तियों पर चल रहा है...भगवान शिव ने अपनी आँखें बंद की तथा पता लगाया कि बेलपत्र पर कौन चल रहा है? जैसे ही उन्हें महसूस हुआ कि वह तो पुष्पदंत है, उन्होंने अपनी आँखें खोल ली।
☀️भगवान शिव ने विचार किया...अगर किसी मनुष्य ने यह गलती की होती तो, उसे क्षमा कर देता....परन्तु एक गंधर्व...वे तो स्वर्ग के प्राणी हैं.....उन्हें यह सब पता होना चाहिए। यह आदमी गंधर्व होने के योग्य नहीं है...और यह दूसरों के फूल चुरा रहा है...वह ऐसा इसलिए कर रहा है क्योंकि वह अदृश्य है...ठीक है! मैं इसकी अदृश्य होने की शक्ति और उड़ने की शक्ति वापस ले लेता हूँ।
इधर पृथ्वी पर पुष्पदंत पेड़ों की ओर जा रहा था। जब सैनिकों ने पत्तों की सरसराहट की आवाज़ सुनी तो वे उस आवाज़ की ओर भागे। उन्होंने देखा कि एक ऊंचा गंधर्व पेड़ की ओर आ रहा है तथा बिना किसी डर के फूल तोड़ रहा है! उन्होंने गंधर्व पर आक्रमण कर दिया। पुष्पदंत बहुत आश्चर्यचकित हुआ कि मानव उसे देख सकते थे तथा वह अपने आप को बचा नहीं पा रहा था। सैनिकों ने उसे पकड़ लिया और उसे राजा के पास ले गए। राजा चित्रार्थ ने पुष्पदंत को कारागार में डाल दिया।
☀️जब पुष्पदंत बंदीगृह में था तब वह सोचने लगा कि वह अचानक से कैसे दिखने लगा? ....बेलपत्रों के कारण...पुष्पदंत जान गया कि उसने भगवान शिव को बहुत क्रोधित किया है। अपनी शक्तियों को पुन: प्राप्त करने के लिए उत्सुक पुष्पदंत ने भगवान शिव की प्रशंसा में एक स्त्रोत्र लिखा। यह स्त्रोत्र सुनने में बहुत अच्छा था...जब भगवान शिव ने इस स्त्रोत्र का गायन, पुष्पदंत से सुना तो वे प्रसन्न हुए और तुरंत ही गंधर्व को क्षमा कर दिया। इस श्लोक को महिमन्स्त्रोत्र कहा जाता हैं, जो शिव के गुणानुवाद से परिपूर्ण हैं। यह श्लोक सुन्दर विचारों और अर्थों से परिपूर्ण था।
☀️प्रभु ने पुष्पदंत को क्षमादान दिया। भगवान बोले कि तुमने जिस श्लोकसंग्रह से मेरी प्रार्थना की मुझे सर्वदा प्रिय रहेगा तथा आगे जाकर श्री शिवमहिम्न स्तोत्र के नाम से प्रचलित होगा। तुम्हारे द्वारा निर्मित यह शिवलिंग पुष्पदंतेश्वर शिवलिंग के नाम से जाना जाएगा, जो भी इसका दर्शनमात्र करेगा उसके सारे दुख दूर होंगे तथा स्तोत्रपाठ से वह पुण्य का भागी होगा।
☀️शिवमहिम्न स्तोत्र के अंतिम श्लोक में लिखा है:--
श्री पुष्पदन्त-मुख-पंकज-निर्गतेन।
स्तोत्रेण किल्बिष-हरेण हर-प्रियेण।।
कण्ठस्थितेन पठितेन समाहितेन।
सुप्रीणितो भवति भूतपतिर्महेशः।।
अर्थात्, श्री पुष्पदंत के कमल के समान मुख से निकला यह स्तोत्र सारे दुखों को दूर करने वाला है तथा शिव का प्रिय है। जो भी जन इसे सुनेंगे, पढ़ेंगे और धारण करेंगे, भगवान शिव उन्हें जन्म जन्मांतर के पापों से मुक्त कर देंगे।
प्रभासक्षेत्र के पुष्पदंतेश्वर के दर्शन से सारे कष्ट जाते हैं तथा शिवमहिम्नस्तोत्र केवल एक स्थान पर नहीं अपितु पूरे भारतवर्ष में प्रचलित है।
पुष्पदंत को क्षमादान मिलने पर उसकी शक्तियां वापस मिल गई। पुष्पदंत राजा चित्रार्थ से मिला तथा उनसे क्षमा की प्रार्थना की। उसने वादा किया कि अब वह कभी चोरी नहीं करेगा। राजा भी यह जानकार आश्चर्यचकित हुआ कि पुष्पदंत ने शिवजी के लिए अद्भुत स्त्रोत्र की रचना की हैं और वह भी शिव भक्त हैं राजा ने भी उसे क्षमा कर दिया।
पुष्पदंत की कहानी यहाँ ख़त्म नहीं होती। पुष्पदंत को बहुत घमंड हो गया... उसने सोचा कि उसने एक ऐसे अद्भुत स्त्रोत्र की रचना कर ली हैं, जिसे भगवान शिव ने स्वयं सराहा हैं। शेष अगले पोस्ट में ............
💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
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✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
*🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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*💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
*बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*♥️~*अपने घर, ऑफिस, और फैक्ट्री वास्तु के साथ सफल बनाये। जन्मकुंडली, प्रश्नन कुंडली, अंककुंडली, रत्न, जड़, एवं रुद्राक्ष आदि के लिये सम्पर्क करे।*
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💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️




