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पञ्चाङ्ग 09 अगस्त 2026

 *💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*

jyotis


*🎈दिनांक  09 अगस्त 2026*
*🎈 वार-   रविवार*
*🎈 मास -सावन मास*
*🎈 पक्ष -  कृष्णा पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर     पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - रितु वर्षा*
*🎈तिथि    -    एकादशी - 11:04:23 पी एम तक तत्पश्चात*द्वादशी*
*🎈 नक्षत्र - मृगशिरा - 14:42:28 पी एम तक तत्पश्चात आर्द्रा*
*🎈योग    - हर्षण - 26:03:19 ए एम तक तत्पश्चात्*वज्र*
*🎈करण- बालव - 11:04:23 पी एम तक तत्पश्चात् कोलव* 
*🎈राहुकाल 05:37 ए एम से 07:16  पी एम (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈 सूर्योदय-06:04:13 ए एम ए एम*
*🎈 सूर्यास्त-07:16:26 पी एम*
 *🎈चंद्र राशि- मिथुन*
*🎈 सूर्य राशि- कर्क*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
( किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:37 ए एम से 05:20 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:14 पी एम से 01:07 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:19 ए एम, अगस्त 10 से 01:02 ए एम, अगस्त 10*
 *🎈अमृत काल    -06:42 ए एम से 08:09 ए एम*
 *🎈द्विपुष्कर योग-    11:04 ए एम से 02:43 पी एम*
 *🎈व्रत पर्व विवरण - ब्रह्म वैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों में एकादशी तिथि के दिन एकादशी के दिन किसी भी प्रकार का अनाज (चावल, गेहूं, जौ) और दलहन (दालें व मटर) खाना पूरी तरह वर्जित है। इसके अलावा लहसुन, प्याज, तामसिक व मांसाहारी भोजन, और कड़े नियमों के तहत गाजर, मूली, बैंगन व हल्दी जैसी चीजों का सेवन भी नहीं करना चाहिए। सीएफ
*🎈विशेष:- 09 अगस्त 2026 (रविवार) का दिन सभी 12 राशियों के लिए सकारात्मक बदलाव, पारिवारिक सहयोग, आर्थिक मामलों में सतर्कता और कार्यक्षेत्र में नई उम्मीदों वाला रहेगा। इस दिन चंद्रमा मिथुन राशि में और सूर्य कर्क राशि में गोचर कर रहे हैं।

🛟09 अगस्त 2026 (रविवार) का दिन मेष से मीन राशि तक के जातकों के लिए नई उम्मीदें, मिले-जुले परिणाम और आर्थिक हलचल लेकर आया है। कामिका एकादशी के संयोग और बुध के सिंह राशि में प्रवेश के साथ आज आत्मविश्वास और संवाद में तेजी देखने को मिलेगी।

          💥सावन महात्म्य☀️
 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
🎉*विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल*
💥राजा    गुरु👑 - शासन व्यवस्था के स्वामी    
💢सेनाधिपति    चन्द्र⚔️ -
🏵️ रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
💢मन्त्री    मंगल⚜️ - नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी    धान्याधिपति    बुध🌻 - रबी की फसलों के स्वामी
💢सस्याधिपति    गुरु🌾 - खरीफ की फसलों के स्वामी    
🛟मेघाधिपति    चन्द्र🌧 - मेघ एवं वर्षा के स्वामी
💢धनाधिपति    गुरु💰 - धन एवं कोष के स्वामी    नीरसाधिपति    
💢गुरु🪙 - धातु, खनिज आदि के स्वामी
🛟रसाधिपति    शनि🍯 - रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी    फलाधिपति    
चन्द्र🍎 - फल-पुष्पादि के स्वामी
kundli


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     🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
       *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day




           🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
★√*★√*★√*★√*★√*★√*★√*
     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
    
         💢आज का राशिफल💢

🛟सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल‼️

💢मेष: रुका हुआ काम पूरा होगा। मन शांत और सकारात्मक रहेगा। परिवार और जीवनसाथी का भरपूर सहयोग मिलेगा।

वृष: विभिन्न मोर्चों पर उत्साह से काम करेंगे। बातचीत में संकोच कम होगा। रिश्तों को लेकर थोड़ी सावधानी बरतें।

मिथुन: आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। व्यापारिक कार्यों और साझीदारी में सोच-समझकर कदम आगे बढ़ाएं।

कर्क: कार्यक्षेत्र में मनचाहे परिणाम मिलेंगे। लाभ का प्रतिशत ऊंचा रहेगा। लापरवाही से आर्थिक नुकसान हो सकता है, सतर्क रहें।

सिंह: कारोबारी योजनाओं को सही दिशा मिलेगी। वित्तीय लाभ में बढ़ोतरी होगी। आत्मविश्वास मजबूत रहेगा।

कन्या: भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। आर्थिक उन्नति और आगे बढ़ने के नए अवसर हाथ आएंगे। प्रयास सफल होंगे।


तुला: दिन सामान्य स्थिति का संकेत देता है। कार्यों में अपनी तैयारी और विवेक को बनाए रखें। जल्दबाजी से बचें।

वृश्चिक: जीवनशैली आकर्षक और सक्रिय रहेगी। कार्यक्षेत्र में जोश के साथ आगे बढ़ेंगे। महत्वपूर्ण फैसले सोच-समझकर लें।

धनु: सेवा भावना और सहजता से अपने कार्यों में आगे बढ़ेंगे। नए अवसरों से उत्साह बढ़ेगा।

मकर: परिचितों और मित्रों का पूरा समर्थन मिलेगा। सहकारिता की भावना से उत्साहित रहेंगे। सेहत को लेकर थोड़ा सावधान रहें।

कुंभ: जिम्मेदारियों का दबाव महसूस कर सकते हैं। समझदारी और सूझबूझ के साथ अपने कार्य पूरे करें।

मीन: करियर में तरक्की के योग हैं। व्यापार के विस्तार के नए प्रयास बढ़ाएंगे। भावनाओं में बहकर निर्णय न लें।
    ➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
   🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️☀️#🎉ॐ श्री गुरुभ्यो नमः 🙏

💕🌹#कामदेव_कौन_हैं ?🌹

🌹#कामदेव_कौन_हैं ?🌹

हिन्दू धर्म में कामदेव, कामसूत्र, कामशास्त्र और चार पुरुषर्थों में से एक काम की बहुत चर्चा होती है। 



पौराणिक कथा :- पौराणिक कथाओं के अनुसार एक समय ब्रह्माजी प्रजा वृद्धि की कामना से ध्यानमग्न थे। उसी समय उनके अंश से तेजस्वी पुत्र काम उत्पन्न हुआ और कहने लगा कि मेरे लिए क्या आज्ञा है? तब ब्रह्माजी बोले कि मैंने सृष्टि उत्पन्न करने के लिए प्रजापतियों को उत्पन्न किया था किंतु वे सृष्टि रचना में समर्थ नहीं हुए इसलिए मैं तुम्हें इस कार्य की आज्ञा देता हूं। यह सुन कामदेव वहां से विदा होकर अदृश्य हो गए।

यह देख ब्रह्माजी क्रोधित हुए और शाप दे दिया कि तुमने मेरा वचन नहीं माना इसलिए तुम्हारा जल्दी ही नाश हो जाएगा। शाप सुनकर कामदेव भयभीत हो गए और हाथ जोड़कर ब्रह्माजी के समक्ष क्षमा मांगने लगे। कामदेव की अनुनय-विनय से ब्रह्माजी प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा कि मैं तुम्हें रहने के लिए 12 स्थान देता हूं- स्त्रियों के कटाक्ष, केश राशि, जंघा, वक्ष, नाभि, जंघमूल, अधर, कोयल की कूक, चांदनी, वर्षाकाल, चैत्र और वैशाख महीना। इस प्रकार कहकर ब्रह्माजी ने कामदेव को पुष्प का धनुष और 5 बाण देकर विदा कर दिया।

इन पांच बाणों के नाम हैं - 1. मारण, 2. स्तम्भन, 
3. जृम्भन, 4. शोषण, 5. उम्मादन (मन्मन्थ)। 
उनका धनुष मिठास से भरे गन्ने का बना होता है जिसमें मधुमक्खियों के शहद की रस्सी लगी है। उनके धनुष का बाण अशोक के पेड़ के महकते फूलों के अलावा सफेद, नीले कमल, चमेली और आम के पेड़ पर लगने वाले फूलों से बने होते हैं।

ब्रह्माजी से मिले वरदान की सहायता से कामदेव तीनों लोकों में भ्रमण करने लगे और भूत, पिशाच, गंधर्व, यक्ष सभी को काम ने अपने वशीभूत कर लिया। फिर मछली का ध्वज लगाकर कामदेव अपनी पत्नी रति के साथ संसार के सभी प्राणियों को अपने वशीभूत करने बढ़े। इसी क्रम में वे शिवजी के पास पहुंचे। भगवान शिव तब तपस्या में लीन थे तभी कामदेव छोटे से जंतु का सूक्ष्म रूप लेकर कर्ण के छिद्र से भगवान शिव के शरीर में प्रवेश कर गए। इससे शिवजी का मन चंचल हो गया।

उन्होंने विचार धारण कर चित्त में देखा कि कामदेव उनके शरीर में स्थित है। इतने में ही इच्छा शरीर धारण करने वाले कामदेव भगवान शिव के शरीर से बाहर आ गए और आम के एक वृक्ष के नीचे जाकर खड़े हो गए। फिर उन्होंने शिवजी पर मोहन नामक बाण छोड़ा, जो शिवजी के हृदय पर जाकर लगा। इससे क्रोधित हो शिवजी ने अपने तीसरे नेत्र की ज्वाला से उन्हें भस्म कर दिया।

कामदेव को जलता देख उनकी पत्नी रति विलाप करने लगी। तभी आकाशवाणी हुई जिसमें रति को रुदन न करने और भगवान शिव की आराधना करने को कहा गया। फिर रति ने श्रद्धापूर्वक भगवान शंकर की प्रार्थना की। रति की प्रार्थना से प्रसन्न हो शिवजी ने कहा कि कामदेव ने मेरे मन को विचलित किया था इसलिए मैंने इन्हें भस्म कर दिया। अब अगर ये अनंग रूप में महाकाल वन में जाकर शिवलिंग की आराधना करेंगे तो इनका उद्धार होगा।

तब कामदेव महाकाल वन आए और उन्होंने पूर्ण भक्तिभाव से शिवलिंग की उपासना की। उपासना के फलस्वरूप शिवजी ने प्रसन्न होकर कहा कि तुम अनंग, शरीर के बिन रहकर भी समर्थ रहोगे। कृष्णावतार के समय तुम रुक्मणि के गर्भ से जन्म लोगे और तुम्हारा नाम प्रद्युम्न होगा।

श्रीकृष्ण और कामदेव :-

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण को भी कामदेव ने अपने नियंत्रण में लाने का प्रयास किया था। कामदेव ने भगवान श्रीकृष्ण से यह शर्त लगाई कि वे उन्हें भी स्वर्ग की अप्सराओं से भी सुंदर गोपियों के प्रति आसक्त कर देंगे। श्रीकृष्ण ने कामदेव की सभी शर्त स्वीकार की और गोपियों संग रास भी रचाया लेकिन फिर भी उनके मन के भीतर एक भी क्षण के लिए वासना ने घर नहीं किया।

रति ने पाला कामदेव को पुत्र की तरह फिर उनसे कर लिया विवाह : जब शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया तब ये देख रति विलाप करने लगी तब जाकर शिव ने कामदेव के पुनः कृष्ण के पुत्र रूप में धरती पर जन्म लेने की बात बताई। शिव के कहे अनुसार भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणि को प्रद्युम्न नाम का पुत्र हुआ, जो कि कामदेव का ही अवतार था।

कहते हैं कि श्रीकृष्ण से दुश्मनी के चलते राक्षस शंभरासुर नवराज प्रद्युम्न का अपहरण करके ले गया और उसे समुद्र में फेंक आया। उस शिशु को एक मछली ने निगल लिया और वो मछली मछुआरों द्वारा पकड़ी जाने के बाद शंभरासुर के रसोई घर में ही पहुंच गई।

तब रति रसोई में काम करने वाली मायावती नाम की एक स्त्री का रूप धारण करके रसोईघर में पहुंच गई। वहां आई मछली को उसने ही काटा और उसमें से निकले बच्चे को मां के समान पाला-पोसा। जब वो बच्चा युवा हुआ तो उसे पूर्व जन्म की सारी याद दिलाई गई। इतना ही नहीं, सारी कलाएं भी सिखाईं तब प्रद्युम्न ने शंभरासुर का वध किया और फिर मायावती को ही अपनी पत्नी रूप में द्वारका ले आए।

कामदेव मंत्र :-

कामदेव का बीज मन्त्र :- "क्लीं कामदेवाय नमः" ||
कामदेव वशीकरण मंत्र :-  ” क्लीं मंत्र “ ||

“ ॐ क्लीं कामदेवाय सर्वजन आकर्षण कुरु कुरु स्वाहा ||”
“ओम् द्राँ द्रीं द्रौं स: शुक्राय नमः ओम शं सम्मोहनाय फट् ||“
‘ॐ कामदेवाय विद्महे, रति प्रियायै धीमहि, तन्नो अनंग प्रचोदयात् ’ ||
इस मंत्र का नियमित जप करने से कामदेव प्रसन्न होते हैं... जिसे आप चाहते हैं उसकी नजर आप पर रूकने लगती है। उसके विचारों में आपका ध्यान आने लगता है।

इसके अलावा आप इस मंत्र का उपयोग कर सकते हैं....
‘ॐ नमो भगवते कामदेवाय यस्य यस्य दृश्यो भवामि यस्य यस्य मम मुखं पश्यति तं तं मोहयतु स्वाहा’ || 
“ॐ नमो भगवते कामदेवाय यस्य यस्य दृश्यो भवामि यस्य यस्य मम मुखं पश्यति तं तं मोहयतु स्वाहा ||“
-- इन मंत्रों को सुबह और शाम 108 बार जाप करना चाहिए। मंत्र एकांत में बैठकर करें और जिसके लिए यह मंत्र कर रहे हैं उसका ध्यान अवश्य करें, मंत्र 21 दिनों तक करना आवश्यक है।

कामदेव के बाण ही नहीं, उनका 'क्लीं मंत्र' भी विपरीत लिंग के व्यक्ति को आकर्षित करता है। कामदेव के इस मंत्र का नित्य दिन जाप करने से न सिर्फ आपका साथी आपके प्रति शारीरिक रूप से आकर्षित होगा बल्कि आपकी प्रशंसा करने के साथ-साथ वह आपको अपनी प्राथमिकता भी बना लेगा।

कहा जाता है कि प्राचीन काल में वेश्याएं और नर्तकियां भी इस मंत्र का जाप करती थीं, क्योंकि वे अपने प्रशंसकों के आकर्षण को खोना नहीं चाहती थीं। ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र का लगातार जाप करते रहने के कारण से उनका आकर्षण, सौंदर्य और कांति बनी रहती थी।

कामदेव अमोघ शस्त्र मन्त्रः— “ॐ नमो भगवते काम-देवाय श्रीं सर्व-जन-प्रियाय सर्व-जन-सम्मोहनाय ज्वल-ज्वल, प्रज्वल-प्रज्वल, हन-हन, वद-वद, तप-तप, सम्मोहय-सम्मोहय, सर्व-जनं मे वशं कुरु-कुरु स्वाहा ||”
- इस मंत्र से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है |

रुठे हुए जीवनसाथी को मनाने के लिए निम्न मंत्र अपनाएं :-
”ॐ नमः काम-देवाय | सहकल सहद्रश सहमसह लिए वन्हे धुनन जनमदर्शनम
उत्कण्ठितं कुरु कुरु, दक्ष दक्षु-धर कुसुम-वाणेन हन हन स्वाहा ||”
- इस मंत्र का जाप २१०० बार करने से यह सिद्ध हो जाएगा |

कामदेव को वश में करने के लिए निम्नलिखित मंत्र का जाप करें –
“ ऐ पिन्स्यां कलीं काम-पिशाचिनी शिघ्रं अमुक ग्राह्य ग्राह्य,
कामेन मम  रुपेण वश्वौं विदारय विदारय, द्रावय द्रावय, प्रेम-पाशे
बन्धाय बन्धाय. ओम श्री फट् ||”
- इस मंत्र को सिद्ध करने के लिए २१०० वार इसका जाप करें |




 💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
               🌹🌹🌹🌹
✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨

         *🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏     
 
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 *💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
          *बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
       🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*♥️~*अपने घर, ऑफिस, और फैक्ट्री वास्तु के साथ सफल बनाये। जन्मकुंडली, प्रश्नन कुंडली, अंककुंडली, रत्न, जड़, एवं रुद्राक्ष आदि के लिये सम्पर्क करे।*
‼️*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
🙏*हमारा उद्देश्य मात्र आपको  केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय  बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️
vipul

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