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बुटाटी मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष सहित अन्य के विरुद्ध कुचेरा थाने में मुकदमा दर्ज

बुटाटी मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष सहित अन्य के विरुद्ध कुचेरा थाने में मुकदमा दर्ज
pawan

न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज हुई एफआईआर, मंदिर की आय एवं संपत्ति के दुरुपयोग, फर्जी रिकॉर्ड, हिसाब-किताब में अनियमितता सहित गंभीर आरोप


नागौर। बुटाटी स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री चतुरदासजी महाराज मंदिर से संबंधित परिवादीगण जयपाल सिंह राठौड़ पुत्र अमर सिंह राठौड़, सुनील चौपाल पुत्र मेहराम चौपाल, देवकी ग्राम बुटाटी तथा बलराम भगवान पुत्र ओमाराम भगवान निवासी ग्राम बुटाटी की ओर से प्रस्तुत परिवाद के आधार पर न्यायालय के आदेश के पश्चात पुलिस थाना कुचेरा में एफआईआर संख्या 0163/2026 दिनांक 24 अगस्त 2026 दर्ज की गई है। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 316(5), 336(2), 338, 305(ए) एवं 61(2) के अंतर्गत मामला दर्ज कर अनुसंधान प्रारंभ किया गया है।

परिवादीगण की ओर से अधिवक्ता डॉ. पवन श्रीमाली ने बताया कि यह मामला श्री चतुरदासजी महाराज मंदिर, बुटाटी के प्रबंधन, मंदिर को प्राप्त होने वाली दानराशि, आय, चल-अचल संपत्ति एवं उससे संबंधित वित्तीय और प्रशासनिक रिकॉर्ड में कथित गंभीर अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। परिवाद में आरोप लगाया गया कि मंदिर सार्वजनिक धार्मिक न्यास की संपत्ति है और यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं तथा श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में दानराशि एवं अन्य भेंट अर्पित की जाती है। ऐसे में मंदिर की आय, दानराशि एवं संपत्तियों का पारदर्शी और विधिसम्मत प्रबंधन आवश्यक है।

परिवाद में आरोप लगाया गया है कि देवेंद्र सिंह राठौड़ पुत्र स्वर्गीय चंदन सिंह, निवासी बुटाटी, जो लगभग तीन वर्षों तक श्री चतुरदासजी महाराज मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष के रूप में मंदिर के प्रबंधन, धरातलीय व्यवस्था, बैंक खातों, दान पेटियों, रसीद पुस्तकों, खरीद, भुगतान एवं लेखा-अभिलेखों से संबंधित कार्यों में प्रभावी भूमिका में रहे, उनके कार्यकाल से संबंधित वित्तीय एवं प्रशासनिक मामलों को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आईं। शिकायतों के आधार पर जिला मजिस्ट्रेट, नागौर द्वारा जांच समिति गठित किए जाने और रिकॉर्ड की जांच का भी परिवाद में उल्लेख किया गया है।

अधिवक्ता डॉ. पवन श्रीमाली ने बताया कि परिवाद में आरोप है कि जांच के दौरान समिति के संपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवाए गए तथा मंदिर की दानराशि और आय से संबंधित लेखा-जोखा, रसीदें, भुगतान एवं अन्य दस्तावेजों में अनेक गंभीर विसंगतियां सामने आईं। परिवाद में करीब 40 लाख रुपये के नकद दान का लेखांकन नहीं किए जाने तथा आधिकारिक रसीद पुस्तकों के अतिरिक्त लगभग 2219 रसीदें अलग से मिलने का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त परिवाद में सोना-चांदी एवं अन्य बहुमूल्य सामग्री के रिकॉर्ड तथा वास्तविक उपलब्धता में अंतर के आरोप भी लगाए गए हैं। जांच में लगभग 35.500 किलोग्राम चांदी अतिरिक्त खरीदे जाने तथा सोना-चांदी एवं बहुमूल्य संपत्ति का अनुमानित मूल्य लगभग 2 करोड़ 60 लाख 75 हजार रुपये पाया जाना भी परिवाद का हिस्सा है।

परिवाद में यह भी आरोप लगाया गया है कि भोजनशाला निर्माण के नाम पर वित्तीय वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में लगभग 49 लाख 49 हजार 693 रुपये मंदिर के खातों से दर्शाए गए, जबकि मौके पर निर्माण कार्य की स्थिति और व्यय के संबंध में प्रश्न उठे। इसी प्रकार रसोई संचालन के नाम पर दो वित्तीय वर्षों में लगभग 1 करोड़ 17 लाख 63 हजार 933 रुपये का व्यय दर्शाए जाने तथा संबंधित बिल-वाउचर, खरीद एवं वास्तविक खपत को लेकर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज की गईं।

एफआईआर में वर्णित परिवाद के अनुसार मंदिर विकास के नाम पर लगभग 31 लाख 37 हजार 753 रुपये के व्यय, विभिन्न निर्माण एवं खरीद मदों, सामग्री, फर्नीचर एवं मशीनरी आदि के नाम पर दर्शाए गए व्यय तथा उससे संबंधित रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। परिवाद में लगभग 82 लाख 41 हजार 157 रुपये के भुगतान विभिन्न ठेकेदारों एवं फर्मों को किए जाने और 58 लाख 14 हजार 227 रुपये के भुगतान एक अन्य फर्म के नाम दर्ज होने जैसे वित्तीय लेन-देन की जांच की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त सुरक्षा सेवाओं के नाम पर लगभग 31 लाख 33 हजार 596 रुपये तथा गौशाला रखरखाव के नाम पर लगभग 17 लाख 87 हजार 800 रुपये खर्च दर्शाए जाने का भी उल्लेख है।

परिवाद में यह आरोप भी है कि मंदिर परिसर की दुकानों एवं अन्य स्रोतों से प्राप्त किराया तथा आय का पूरा लेखा-जोखा मंदिर के खातों में प्रतिबिंबित नहीं हुआ। लगभग 18 लाख 12 हजार रुपये की दुकानों से संबंधित राशि तथा एक दुकान की करीब 1 लाख 40 हजार रुपये किराया आय को मंदिर खाते में जमा करने के स्थान पर निजी खाते में जमा किए जाने का आरोप भी परिवाद में लगाया गया है। इसके साथ ही रसीद पुस्तकों, सहायक लेखों, ऑडिट अभिलेखों तथा अन्य रिकॉर्ड में परस्पर विरोधी आंकड़ों का उल्लेख करते हुए विस्तृत जांच की मांग की गई।

परिवाद में वित्तीय वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 के आय-व्यय, नकद चोरी, कथित फर्जी एवं असत्यापित खर्च, खातों के कथित मिथ्याकरण तथा अन्य वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित करीब 15 करोड़ 16 लाख 49 हजार 964 रुपये की समग्र वित्तीय गतिविधियों की जांच की आवश्यकता बताई गई है। साथ ही वित्तीय वर्ष 2025-26 के रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण लगभग 7 करोड़ 58 लाख रुपये की अतिरिक्त संभावित अनियमितता का भी परिवाद में उल्लेख किया गया है। इस प्रकार परिवाद में कुल मिलाकर लगभग 22 करोड़ 74 लाख रुपये की वित्तीय गतिविधियों एवं संभावित अनियमितताओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई है।

परिवादीगण की ओर से अधिवक्ता डॉ. पवन श्रीमाली ने कहा कि मामला किसी धार्मिक आस्था या श्रद्धालुओं की भावनाओं के विरुद्ध नहीं, बल्कि सार्वजनिक धार्मिक न्यास की संपत्ति, श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दानराशि और मंदिर की आय के पारदर्शी एवं विधिसम्मत प्रबंधन से संबंधित है। श्रद्धालुओं द्वारा आस्था से अर्पित राशि एवं संपत्ति का एक-एक रुपया निर्धारित धार्मिक एवं सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए उपयोग होना चाहिए और यदि रिकॉर्ड, खातों अथवा वास्तविक व्यय में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।

मामले में परिवादीगण द्वारा पहले संबंधित पुलिस अधिकारियों के समक्ष कार्रवाई के लिए प्रार्थना की गई थी। अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय की शरण ली गई। न्यायालय ने परिवाद पर विचार करते हुए धारा 175(3) बीएनएसएस के अंतर्गत पुलिस थाना कुचेरा को प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान करने के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस थाना कुचेरा में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5), 318(4), 336(2), 338, 305(ए) एवं 61(2) के अंतर्गत एफआईआर संख्या 0163/2026 दर्ज कर ली गई। मामले का अनुसंधान उप अधीक्षक पुलिस धरम पूनिया को सौंपा गया है।

अधिवक्ता डॉ. पवन श्रीमाली ने कहा कि परिवादीगण का उद्देश्य किसी व्यक्ति को पूर्वाग्रह से दोषी ठहराना नहीं है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों की सत्यता अब निष्पक्ष पुलिस अनुसंधान, बैंक खातों, समिति के अभिलेखों, डिजिटल रिकॉर्ड, रसीद पुस्तकों, भुगतान विवरण, ऑडिट रिकॉर्ड, संबंधित फर्मों एवं अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच से सामने आएगी। परिवादीगण को विश्वास है कि मामले में निष्पक्ष, तथ्यपरक एवं समयबद्ध अनुसंधान कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी और जो भी व्यक्ति कानून के अनुसार उत्तरदायी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई होगी।

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