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पञ्चाङ्ग 23 अगस्त 2026

 *💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*

JYOTISH


*🎈दिनांक  23 अगस्त 2026*
*🎈 वार- रविवार*
*🎈 मास -सावन मास*
*🎈 पक्ष -  कृष्णा पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर     पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - रितु वर्षा*
*🎈तिथि    -एकादशी -28:18:08 ए एम अगस्त 24 तक    तत्पश्चात एकादशी व्रत*
*🎈 नक्षत्र मूल -17:43:41पी एम तत्पश्चात पूर्वाषाढ़ा*
*🎈योग    -विषकुंभ- पूर्ण रात्रि तक तत्पश्चात् प्रीति*
*🎈करण- वणिज - 15:10:22 पी एम तक तत्पश्चात् गर, वाणिज*
*🎈राहुकाल- 05:27 ए एम से 07:00 4 ए एम तक (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय-06:11:12 ए  एम ए एम*
*🎈सूर्यास्त-07:03:53 पी एम*
*🎈चंद्र राशि-धनु *
 *🎈सूर्य राशि- सिंह*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- पश्चिम दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:41 ए एम से 05:26 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:12 पी एम से 01:03 पी एम*
*🎈अमृत काल - 10:33 ए एम से 12:21 पी एम
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:16 ए एम, अगस्त 24 से 01:00 ए एम, अगस्त 24*
*🎈रवि योग -06:10 ए एम से 05:44 पी एम*
*🎈 सर्वार्थ सिद्धि योग    06:10 ए एम से 05:44 पी एम*
 *🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण-   ब्रह्म वैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड 27.29-34) के अनुसार, एकादशी तिथि के दिन सेम की फली (शिम्बी) खाना वर्जित है। इसके अलावा धार्मिक शास्त्रों के नियमों के अनुसार एकादशी पर सभी प्रकार के अन्न (चावल, गेहूं आदि) और फली-दलहन का सेवन करना पूरी तरह निषिद्ध माना गया है।
🛟23 अगस्त 2026 (रविवार) का दिन सभी 12 राशियों के लिए मिला-जुला और व्यावहारिक बदलावों वाला रहेगा। चंद्रमा का संचार धनु राशि में है, जिससे करियर, धन और पारिवारिक जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ेगा। 
kundli



          💥सावन महात्म्य☀️
 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
     🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
       *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day



          🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
★√*★√*★√*★√*★√*★
     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
    
         💢आज का राशिफल💢

🛟सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल‼️
💥 मेष: मेष: वाद-विवाद से बचें। कार्यक्षेत्र में ऊर्जा का सही इस्तेमाल करें और अपनी दिनचर्या में सुधार लाएं।

💥वृषभ: आर्थिक मामलों में सावधानी बरतें। रचनात्मक कार्यों से आत्मसंतोष मिलेगा।

💥मिथुन: घर-परिवार में शांति बनाए रखें। पार्टनर के साथ रिश्तों में आत्मीयता बढ़ेगी।

💥कर्क: खान-पान का विशेष ध्यान रखें। पुराने रिश्तों से दोबारा उपयोगी संपर्क जुड़ सकता है।

💥सिंह: कार्यस्थल पर आपके काम की सराहना होगी। पार्टनर की ओर से कोई सरप्राइज मिल सकता है।

💥कन्या: आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। प्रेम संबंधों के लिए दिन बहुत रोमांटिक और अनुकूल रहेगा।

⚡तुला से मीन राशि तक⚡

💥तुला: पराक्रम रंग लाएगा। व्यावसायिक सफलता मिलेगी, लेकिन सेहत पर थोड़ा ध्यान दें।

💥वृश्चिक: धन लाभ के योग हैं। बिना सोचे-समझे निवेश करने से बचें।

💥धनु: सकारात्मक ऊर्जा रहेगी। वरिष्ठों से बहस करने से बचें, नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।

💥मकर: मन थोड़ा अशांत और खर्च की अधिकता रह सकती है। संपत्ति के मामलों में लाभसंभावना है।

💥कुंभ: आय के नए स्रोत बनेंगे। टीमवर्क और साझेदारियों से शानदार सफलता हाथ लगेगी।

💥मीन: कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय और पिता का पूरा सहयोग मिलेगा।
     ➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
   🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️

💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏

🗓️ 🐍 #🌸 #🪔 🌿 #प्रश्न: - #🌹|| #प्रेम_और_काम_का_देवता : #कामदेव ||🌹

कामदेव कौन हैं ?

हिन्दू धर्म में कामदेव, कामसूत्र, कामशास्त्र और चार पुरुषर्थों में से एक काम की बहुत चर्चा होती है। खजुराहो में कामसूत्र से संबंधित कई मूर्तियां हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या काम का अर्थ सेक्स ही होता है? नहीं, काम का अर्थ होता है कार्य, कामना और कामेच्छा से। वह सारे कार्य जिससे जीवन आनंददायक, सुखी, शुभ और सुंदर बनता है काम के अंतर्गत ही आते हैं। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष।

कामदेव को हिंदू शास्त्रों में प्रेम और काम का देवता माना गया है। उनका स्वरूप युवा और आकर्षक है। वे विवाहित हैं और रति उनकी पत्नी हैं। वे इतने शक्तिशाली हैं कि उनके लिए किसी प्रकार के कवच की कल्पना नहीं की गई है। उनके अन्य नामों में रागवृंत, अनंग, कंदर्प, मन्मथ, मनसिजा, मदन, रतिकांत, पुष्पवान, पुष्पधंव आदि प्रसिद्ध हैं। कामदेव, हिंदू देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु के पुत्र और कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न, कामदेव का अवतार है। कामदेव के आध्यात्मिक रूप को हिंदू धर्म में वैष्णव अनुयायियों द्वारा कृष्ण भी माना जाता है।

कामदेव के अन्य नाम :- 'रागवृंत', 'अनंग', 'कंदर्प', 'मनमथ', 'मनसिजा', 'मदन', 'रतिकांत', 'पुष्पवान' तथा 'पुष्पधंव' आदि कामदेव के प्रसिद्ध नाम हैं। कामदेव को अर्धदेव या गंधर्व भी कहा जाता है, जो स्वर्ग के वासियों में कामेच्छा उत्पन्न करने के लिए उत्तरदायी हैं। कहीं-कहीं कामदेव को यक्ष की संज्ञा भी दी गई है।

कामदेव का परिवार :- पौराणिक कथाओं के अनुसार कामदेव भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के पुत्र हैं। उनका विवाह रति नाम की देवी से हुआ था, जो प्रेम और आकर्षण की देवी मानी जाती है। कुछ कथाओं में यह भी उल्लिखित है कि कामदेव स्वयं ब्रह्माजी के पुत्र हैं और इनका संबंध भगवान शिव से भी है। कुछ जगह पर धर्म की पत्नी श्रद्धा से इनका आविर्भाव हुआ माना जाता है।

कामदेव का स्वरूप :- कामदेव को सुनहरे पंखों से युक्त एक सुंदर नवयुवक की तरह प्रदर्शित किया गया है जिनके हाथ में धनुष और बाण हैं। ये तोते के रथ पर मकर (एक प्रकार की मछली) के चिह्न से अंकित लाल ध्वजा लगाकर विचरण करते हैं। वैसे कुछ शास्त्रों में हाथी पर बैठे हुए भी बताया गया है।

कामदेव के धनुष और बाण :- उनका धनुष मिठास से भरे गन्ने का बना होता है जिसमें मधुमक्खियों के शहद की रस्सी लगी है। उनके धनुष का बाण अशोक के पेड़ के महकते फूलों के अलावा सफेद, नीले कमल, चमेली और आम के पेड़ पर लगने वाले फूलों से बने होते हैं।
कामदेव के पास मुख्यत: 5 प्रकार के बाण हैं। कामदेव के 5 बाणों के नाम : 1. मारण, 2. स्तम्भन, 3. जृम्भन, 4. शोषण, 5. उम्मादन (मन्मन्थ)।

कामदेव की ऋतु वसंत :- वसंत पंचमी के दिन कामदेव की पूजा की जाती है। वसंत कामदेव का मित्र है इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है। इस धनुष की कमान स्वरविहीन होती है यानी जब कामदेव जब कमान से तीर छोड़ते हैं तो उसकी आवाज नहीं होती है। 
कामदेव का एक नाम 'अनंग' है यानी बिना शरीर के ये प्राणियों में बसते हैं। एक नाम 'मार' है यानी यह इतने मारक हैं कि इनके बाणों का कोई कवच नहीं है। वसंत ऋतु को प्रेम की ही ऋतु माना जाता रहा है। इसमें फूलों के बाणों से आहत हृदय प्रेम से सराबोर हो जाता है।

यहां रहता है कामदेव का वास :-
यौवनं स्त्री च पुष्पाणि सुवासानि महामते:।
गानं मधुरश्चैव मृदुलाण्डजशब्दक:।।
उद्यानानि वसन्तश्च सुवासाश्चन्दनादय:।
सङ्गो विषयसक्तानां नराणां गुह्यदर्शनम्।।
वायुर्मद: सुवासश्र्च वस्त्राण्यपि नवानि वै।
भूषणादिकमेवं ते देहा नाना कृता मया।।
मुद्गल पुराण के अनुसार कामदेव का वास यौवन, स्त्री, सुंदर फूल, गीत, पराग कण या फूलों का रस, पक्षियों की मीठी आवाज, सुंदर बाग-बगीचों, वसंत ऋ‍तु, चंदन, काम-वासनाओं में लिप्त मनुष्य की संगति, छुपे अंग, सुहानी और मंद हवा, रहने के सुंदर स्थान, आकर्षक वस्त्र और सुंदर आभूषण धारण किए शरीरों में रहता है। इसके अलावा कामदेव स्त्रियों के शरीर में भी वास करते हैं, खासतौर पर स्त्रियों के नयन, ललाट, भौंह और होठों पर इनका प्रभाव काफी रहता है।

मदन-कामदेव मंदिर :- मदन-कामदेव मंदिर को 'असम का खजुराहो' के नाम से जाना जाता है। वहां की मैथुन-प्रतिमाएं मध्यप्रदेश के खजुराहो की याद दिलाती हैं। सेक्स के देवता कामदेव और उनकी पत्नी रति की कथा को आज भी ये जीवंत बना रही हैं। यह मंदिर घने जंगलों के भीतर पेड़ों से छुपा हुआ है। कहते हैं कि भगवान शंकर द्वारा तृतीय नेत्र खोलने पर भस्म हो गए कामदेव का इस स्थान पर पुनर्जन्म तथा उनकी पत्नी रति के साथ पुन: मिलन हुआ था।

कामदेव की सवारी :- हाथी को कामदेव का वाहन माना गया है। वैसे कुछ शास्त्रों में कामदेव को तोते पर बैठे हुए भी बताया गया है, लेकिन इसे मूल अवधारणा में शामिल नहीं किया गया है। प्रकृति में हाथी एकमात्र ऐसा प्राणी है, जो चारों दिशाओं में स्वच्छंद विचरण करता है। मादक चाल से चलने वाला हाथी तीन दिशाओं में देख सकता है और पीछे की तरफ हल्की सी भी आहट आने पर संभल सकता है। हाथी कानों से हर तरफ का सुन सकता है और अपनी सूंड से चारों दिशाओं में वार कर सकता है। ठीक इसी प्रकार कामदेव का चरित्र भी देखने में आता है। ये स्वच्छंद रूप से चारों दिशाओं में घूमते हैं और किसी भी दिशा में तीर छोड़ने को तत्पर रहते हैं। कामदेव किसी भी तरह के स्वर को तुरंत भांपने का माद्दा भी रखते हैं।

कामदेव का भस्म होना :- जब राक्षस तारकासुर ने आतंक मचा दिया था , तब उसके वध के लिये देवताओं ने कामदेव से विनती की कि वह शिव-पार्वती में प्रेम को जन्म दे क्योंकि तारकासुर को वह वरदान था कि केवल शिव- पार्वती का पुत्र ही तारकासुर का वध कर सकता है। तब कामदेव तथा देवी रति कैलाश पर्वत भगवान शिव का ध्यान भंग करने के लिये गये । कामदेव का बाण लगने से भगवान शिव का ध्यान तो भंग हो गया पर वे कामदेव पर क्रोधित हो गए तथा उन्होंने अपना तीसरा नेत्र खोल कर कामदेव को भस्म कर दिया ।

इसपर देवी रति को अपने पति की मृत्यु पर क्रोध आ गया और उन्होंने माता पार्वती को श्राप दिया कि उनके गर्भ से कोई भी पु्त्र जन्म नही लेगा। यह श्राप सुनकर पार्वती दुखी हो गयी परंतु भगवान शिव ने माता पार्वती को समझाया कि उन्हें दुःखी नहीं होना चाहिये तथा उन्होंने पार्वती से विवाह किया।

जब देवताओं ने इस श्राप के बारे मे तथा कामदेव की मौत के बारे मे सुना तो वह बड़े व्याकुल हो गये और उन्होंने देवी रति समेत भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे कामदेव को पुनः जीवन प्रदान करें । इस पर भगवान शिव ने यह कहा कि यह असंभव है क्योंकि किसी को पुनर्जीवित करना प्रकृति के नियम के विरुद्ध है । हाँ, एक कार्य अवश्य हो सकता है कि कामदेव को पुनर्जन्म किया जा सकता है । परंतु कामदेव के भस्म होने से जन्म और पुनर्जन्म की प्रक्रिया ही रुक गई। इस पर भगवान शिव ने कामदेव की आत्मा को एक आकार दे दिया और उस आकार को अनंग नाम प्रदान किया, जिससे कि कामदेव भस्म होकर भी अपना कार्य कर सकें। परंतु जब देवताओं ने पुनः उनसे कामदेव को पुनर्जन्म देने की प्रार्थना की तो भगवान शिव ने यह आशीर्वाद दिया कि कामदेव को पुनर्जन्म, वैवस्वत मन्वंतर के 28वें द्वापर युग के अंत में भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी के रूप में मिलेगा और उसके बाद उन्हें उनका शरीर पुनः प्राप्त हो जाएगा ।

पौराणिक कथा :- पौराणिक कथाओं के अनुसार एक समय ब्रह्माजी प्रजा वृद्धि की कामना से ध्यानमग्न थे। उसी समय उनके अंश से तेजस्वी पुत्र काम उत्पन्न हुआ और कहने लगा कि मेरे लिए क्या आज्ञा है? तब ब्रह्माजी बोले कि मैंने सृष्टि उत्पन्न करने के लिए प्रजापतियों को उत्पन्न किया था किंतु वे सृष्टि रचना में समर्थ नहीं हुए इसलिए मैं तुम्हें इस कार्य की आज्ञा देता हूं। यह सुन कामदेव वहां से विदा होकर अदृश्य हो गए।

यह देख ब्रह्माजी क्रोधित हुए और शाप दे दिया कि तुमने मेरा वचन नहीं माना इसलिए तुम्हारा जल्दी ही नाश हो जाएगा। शाप सुनकर कामदेव भयभीत हो गए और हाथ जोड़कर ब्रह्माजी के समक्ष क्षमा मांगने लगे। कामदेव की अनुनय-विनय से ब्रह्माजी प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा कि मैं तुम्हें रहने के लिए 12 स्थान देता हूं- स्त्रियों के कटाक्ष, केश राशि, जंघा, वक्ष, नाभि, जंघमूल, अधर, कोयल की कूक, चांदनी, वर्षाकाल, चैत्र और वैशाख महीना। इस प्रकार कहकर ब्रह्माजी ने कामदेव को पुष्प का धनुष और 5 बाण देकर विदा कर दिया।

#इन_पांच_बाणों_के_नाम_हैं - 1. मारण, 2. स्तम्भन, 
3. जृम्भन, 4. शोषण, 5. उम्मादन (मन्मन्थ)। 



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 💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
  ✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
           *🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏     
 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹          

 *💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
          *बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
       🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬*जय श्री महाकाल सरकार *🔱🇪🇬 *मोर मुकुट बंशीवाले  सेठ की जय हो 🪷*▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ
*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय  बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️
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