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पञ्चाङ्ग 20 अगस्त 2026

 *💥🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓💥*

jyotis


*🎈दिनांक  20 अगस्त 2026*
*🎈 वार- गुरुवार *
*🎈 मास -सावन मास*
*🎈 पक्ष -  कृष्णा पक्ष*
*🎈 विक्रम संवत् - 2083*
*🎈 संवत्सर     पराभव*
*🎈संवत्सर (उत्तर)-    रौद्र*
*🎈 अयन - उत्तरायण*
*🎈 ऋतु - रितु वर्षा*
*🎈तिथि    -अष्टमी -21:17:44 पी एम तक    तत्पश्चात नवमी*
*🎈 नक्षत्र विशाखा -09: 07:11शाम तत्पश्चात अनुराधा*
*🎈योग    -इंद्र-28:24:09 ए एम, अगस्त 20 तक तत्पश्चात् वैद्युति*
*🎈करण- विष्टि भद्रा- 08:15:01 पी एम तकतत्पश्चात् बव*
*🎈राहुकाल- 02:15 पी एम से 03:52 पी एम तक (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*हर जगह का अलग होगा
(राहुकाल वह समय होता है जिसमे किसी भी नये अथवा शुभ कार्य प्रारम्भ करने से बचना चाहिए।)*
*🎈सूर्योदय-06:09:40 ए  एम ए एम*
*🎈सूर्यास्त-07:06:42 पी एम*
*🎈चंद्र राशि- वृश्चिक*
 *🎈सूर्य राशि- सिंह*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल- दक्षिण दिशा में*
(किसी भी विशेष कार्य हेतु दिशा शूल वाली दिशा में जाने से बचना चाहिए, यद्यपि यदि उसी दिन जाकर उसी दिन लौटना हैं, अथवा व्यवसाय के दृष्टिकोण से प्रतिदिन जाना ही पड़ता है तो प्रभाव कम हो जाएगा, फिर इस पर विचार करने की आवश्यकता नही है, यदि  किसी कारण वश दिशा शूल में जाना ही पड़े तो सूर्योदय से पूर्व निकलना  श्रेयस्कर होता है, अन्यथा एक  दिन पूर्व प्रस्थान रखकर भी निकला जा सकता हैं।)*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 04:41 ए एम से 05:25 ए एम*
*🎈अभिजित मुहूर्त: 12:12 पी एम से 01:04 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:16 ए एम, अगस्त 21 से 01:01 ए एम, अगस्त 21*
*🎈अमृत काल -12:17 ए एम, अगस्त 21 से 02:04 ए एम, अगस्त 21*
*🎈सर्वार्थ सिद्धि योग-        09:08 ए एम से 06:09 ए एम,अगस्त 21*

 *🎈विशेष:- व्रतपर्व विवरण-   ब्रह्मवैवर्त पुराण (ब्रह्म खंड: 27.29-34) के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों में अष्टमी तिथि के दिन तिल का तेल खाना और शरीर पर लगाना पूरी तरह निषिद्ध (वर्जित) बताया गया है।
🛟20 अगस्त 2026, गुरुवार का दिन सभी 12 राशियों के लिए मिलाजुला रहने वाला है। इस दिन [नीचभंग राजयोग] और ग्रहों की स्थिति के प्रभाव से कुछ राशियों को विशेष आर्थिक लाभ और करियर में उन्नति के अवसर मिलेंगे, जबकि कुछ को धैर्य और सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
kundli



          💥सावन महात्म्य☀️
 👉 जय माँ आदिशक्ति सच्चियाय 🪔 
     🛟 नागौर, राजस्थान, (भारत)    
         मानक सूर्योदय के अनुसार।*🛟
       *🛟चोघडिया, दिन का🛟*
day



          🛟चोघडिया, रात्🛟*
night


 
★√*★√*★√*★√*★√*★
     🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
    🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩 
    
         💢आज का राशिफल💢

🛟सभी 12 राशियों का संक्षिप्त राशिफल‼️
💥 मेष राशि: कार्यक्षेत्र में काम का दबाव बढ़ सकता है। जल्दबाजी में निवेश या आर्थिक फैसले लेने से बचें। धैर्य से काम लें।

💥वृषभ राशि: व्यापार और पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाए रखें। सहकर्मियों के साथ तालमेल अच्छा रहेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।

💥मिथुन राशि: नई शुरुआत के लिए समय अनुकूल है। परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा, लेकिन किसी से भी तीखी बहस करने से बचें।

💥कर्क राशि: नीचभंग राजयोग के प्रभाव से आर्थिक लाभ और उन्नति के योग हैं। पुराने अटके हुए कार्य गति पकड़ेंगे।

💥सिंह राशि: आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा।

💥कन्या राशि: करियर में आगे बढ़ने के बेहतरीन अवसर मिलेंगे। सोचे हुए कार्य समय पर पूरे होंगे। खर्चों पर नियंत्रण रखें।

💥तुला राशि: भाग्य का साथ मिलेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और रुके हुए धन की प्राप्ति हो सकती है। मान-सम्मान बढ़ेगा।

💥वृश्चिक राशि: चंद्रमा आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं। स्वास्थ्य और मानसिक तनाव को लेकर थोड़ी सावधानी बरतें, सोच-समझकर निर्णय लें।

💥धनु राशि: निवेश और व्यावसायिक लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित रहेगा। खर्च बढ़ सकता है, इसलिए लेनदेन में सतर्कता बरतें।

💥मकर राशि: कारोबार में तेजी और आर्थिक लाभ की स्थिति बेहतर होगी। पद-प्रतिष्ठा बढ़ने के संकेत हैं, आत्मविश्वास ऊंचा रहेगा।

💥कुंभ राशि: पैतृक मामलों से लाभ मिल सकता है। धन की आवक बढ़ेगी और वरिष्ठजनों का मार्गदर्शन आपके पक्ष में रहेगा।

💥मीन राशि: भाग्य मजबूत रहेगा, आध्यात्मिक विषयों में रुचि बढ़ेगी। विरोधियों का प्रभाव कम होगा और कारोबार अच्छा चलेगा।
     ➡️ 💕🛟प्रात: विशेष🕉️🌺
#🌕 👉 👉🦚❤️💐 🌼🪔🏓🎊
   🌺🌷🏓।। आज बात करते हैं ☀️

💕🙏 #ॐउमामहेश्वराभ्यां नमः 🙏

🗓️ 🐍 #🌸 #🪔 पूजा सिर्फ फूल चढ़ाना नहीं, एक पूरा विज्ञान है - षोडशोपचार से लेकर अंगन्यास तक 🪔
हम सब पूजा करते हैं, पर पूजा में पंडित जी जो क्रियाएं करते हैं - हाथों की उंगलियों को छूना, हृदय और माथे पर हाथ लगाना, घंटा बजाना - उनका अर्थ क्या है?

आज पूरा क्रम समझते हैं।
🌿💎🪷💥💧
🪷  भाग 1 : 
    पूजा से पहले खुद को तैयार करना - न्यास
         मूर्ति में देवता को बिठाने से पहले अपने शरीर को मंदिर बनाना पड़ता है। इसी को न्यास कहते हैं। 
     न्यास = रखना, स्थापित करना।

💎1. कर न्यास - हाथों को मंत्र से शुद्ध करना
        हमारे हाथ ही पूजा करेंगे, इसलिए सबसे पहले हाथों को पवित्र किया जाता है।
🎈अंगुष्ठाभ्यां नमः - अंगूठे पर
🎈तर्जनीभ्यां स्वाहा - तर्जनी पर
🎈मध्यमाभ्यां वषट् - मध्यमा पर
🎈अनामिकाभ्यां हुं - अनामिका पर
🎈कनिष्ठिकाभ्यां वौषट् - छोटी उंगली पर
🎈करतल करपृष्ठाभ्यां फट् - हथेली और हाथ के पीछे

💎2. अंग न्यास / हृदयादि न्यास - शरीर को देवमय बनाना
         यह सबसे महत्वपूर्ण है जो अक्सर छूट जाता है।
     6 मंत्रों से शरीर के 6 स्थानों पर देवता को बिठाना।
🎈हृदयाय नमः - हृदय पर हाथ रखना। भावनाओं को शुद्ध करने के लिए।
🎈शिरसे स्वाहा - मस्तक पर। विचारों को शुद्ध करने के लिए।
🎈शिखायै वषट् - शिखा (चोटी) पर। हमारी ऊर्जा की रक्षा के लिए।
🎈कवचाय हुं - दोनों कंधों से छाती तक। जैसे अदृश्य कवच पहन लिया हो, बुरी शक्तियों से रक्षा के लिए।
🎈नेत्रत्रयाय वौषट् - दोनों आँखों और भौंहों के बीच। हमारी दृष्टि पवित्र हो जाए।
🎈अस्त्राय फट् - सिर के ऊपर से हाथ घुमाकर चुटकी बजाना। सभी बाधाओं को दूर भगाना।

     💎3. इसके बाद की तैयारी
🎈भूतशुद्धि - शरीर के पंचतत्वों को शुद्ध करना।
🎈प्राण प्रतिष्ठा - मंत्र द्वारा जड़ मूर्ति में प्राण डालना, तब वह पूज्य बनती है।
🎈घंटा पूजन - घंटा बजाकर वातावरण को शुद्ध करना और देवता को सचेत करना।
🌿💎🪷💥💧
🪷भाग 2 : 
      अब देवता का सत्कार - पंचोपचार, दशोपचार और षोडशोपचार

जैसे घर आए अतिथि का सत्कार करते हैं, वैसे ही -

✅पंचोपचार (रोज की पूजा) - गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य।
✅दशोपचार - पंचोपचार + पाद्य (पैर धोने को जल), अर्घ्य (हाथ धोने को जल), आचमन (पीने को जल), स्नान, वस्त्र।

और सबसे पूर्ण पूजा है -

🕉️✅  षोडशोपचार - 16 उपचारों से राजसी सत्कार

🌹आवाहन - देवता को बुलाना
🌹आसन/स्थापन - आसन देकर स्थिर रूप से बिठाना
🌹पाद्य - चरण धोने के लिए जल
🌹अर्घ्य - हाथ धोने के लिए सुगंधित जल
🌹आचमन - पीने के लिए जल
🌹स्नान - जल और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक
🌹वस्त्र - नए वस्त्र / मौली अर्पण
🌹यज्ञोपवीत - जनेऊ पहनाना
🌹गंध - चंदन, कुमकुम लगाना
🌹पुष्प - ताजे फूल, जो हमारे प्रेम के प्रतीक हैं
🌹धूप - धूप दिखाकर वातावरण शुद्ध करना
🌹दीप - दीया दिखाकर अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाना
🌹नैवेद्य - भोग लगाना
🌹ताम्बूल - पान, लौंग, इलायची - भोजन के बाद मुखशुद्धि
🌹प्रदक्षिणा, स्तुति, आरती - परिक्रमा और महिमा गाना
🌹नमस्कार, क्षमा प्रार्थना और विसर्जन - भूल-चूक की क्षमा मांगकर देवता को हृदय में ही स्थापित कर लेना।
💧💥🪷💎🌿
🪷भाग 3 : 
      अंतिम पूर्णता - होम और हवन
      होम और हवन एक ही हैं। मंत्र के अंत में 'स्वाहा' कहकर अग्नि में घी, समिधा देना। अग्नि देवता दूत हैं जो हमारी प्रार्थना को देवताओं तक पहुंचाते हैं।
🍃   होम - हर जप-पूजा के अंत में उसकी सफलता के लिए किया गया छोटा हवन।
🍃    हवन - किसी विशेष उद्देश्य - शांति, स्वास्थ्य के लिए - कुंड बनाकर किया गया बड़ा अनुष्ठान। यह त्याग का प्रतीक है और वातावरण को भी शुद्ध करता है।

 ♦️   तो पूरा सूत्र क्या हुआ?
🥀अंगन्यास से खुद को देवता बनाया -> 
🥀स्थापन और प्राण प्रतिष्ठा से मूर्ति में देवता को बुलाया ->
 🥀षोडशोपचार से उनका सत्कार किया -> 
🥀होम-हवन से अपनी प्रार्थना उन तक पहुंचाई।

उपचार तो सिर्फ बहाना है, उद्देश्य तो जीव को शिव से जोड़ना है।

अगर जानकारी उपयोगी लगी तो अपने परिवार के साथ साझा अवश्य करें। 🙏

🧨🚩⛳💥❤️🕉️🌴🍀🎈🌀🌿

 💕*"तद् यद् रुदितात् समभवन् तस्माद् रुद्राः"*💥
  ✨*नव ग्रहणां अधीनस्थ जीवनम्*✨
           *🛟॥ श्री हरिः ॐ*॥☀️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏     
 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹 🌹🌹          

 *💥“*ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।*
          *बाकी सब क्षणभंगुर* है।”💥
       🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
       💥।। शुभम् भवतु।।💥
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*♥️~*यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
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💥*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी अच्छी जानकारी वाले ज्योतिषी से संपर्क करे*।
*💥यदि आप अपनी कुण्डली विश्लेषण चाहते हैं तो जन्म दिनांक, स्थान, समय  बताएं!!🌟*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)* 
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।* 
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 💥🙏💘☀️
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