*🗓*आज का पञ्चाङ्ग*🗓*
*🎈दिनांक - 03 जनवरी 2026*
*🎈 दिन- शनिवार*
*🎈 विक्रम संवत् - 2082*
*🎈 अयन - दक्षिणायण*
*🎈 ऋतु - शरद*
*🎈 मास - पौष मास*
*🎈 पक्ष - शुक्ल पक्ष*
*🎈तिथि- पूर्णिमा 15:31:53
तत्पश्चात् प्रतिपदा*
*🎈 नक्षत्र - आद्रा 17:27:00*am तत्पश्चात् पुनर्वसु*
*🎈 योग - ब्रह्म 09:04:13 *pm तत्पश्चात् वैधृति*
*🎈योग -ऐन्द्र 29:14:55*
*🎈करण - बव 15:31:53pm तक
तत्पश्चात् विष्टि बालव*
*🎈राहुकाल -हर जगह का अलग है- 10:03:am to 11:21 pm तक (नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈चन्द्र राशि - मिथुन*
*🎈सूर्य राशि- धनु*
*🎈सूर्योदय - :07:26:35am*
*🎈सूर्यास्त - 17:52:33pm*
*(सूर्योदय एवं सूर्यास्त ,नागौर राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈दिशा शूल - पूर्व दिशा में*
*🎈ब्रह्ममुहूर्त - 05:37 ए एम से 06:31 ए एम ए एम से 06:29 ए एम तक*(नागौर
राजस्थान मानक समयानुसार)*
*🎈अभिजित मुहूर्त- 12:19 पी एम से 01:01 पी एम*
*🎈 निशिता मुहूर्त - 12:13 ए एम, जनवरी 04 से 01:07 ए एम, जनवरी 04
*🎈 अमृत काल- 08:33 ए एम से 09:58 ए एम
*🎈 व्रत एवं पर्व- पूर्णिमा
*🎈विशेष -पौष मास महात्म्य *
कल से माघ मास प्रयागराज में कल्पवास*
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*🛟चोघडिया, दिन🛟*
नागौर, राजस्थान, (भारत)
मानक सूर्योदय के अनुसार।
*🛟*काल - हानि-07:25 ए एम से 08:44 ए एम काल वेला*
*🛟*शुभ - उत्तम-08:44 ए एम से 10:02 ए एम*
*🛟*रोग - अमंगल-10:02 ए एम से 11:21 ए एम*
*🛟*उद्वेग - अशुभ-11:21 ए एम से 12:40 पी एम*
*🛟*चर - सामान्य-12:40 पी एम से 01:58 पी एम*
*🛟*लाभ - उन्नति-01:58 पी एम से 03:17 पी एम वार वेला*
*🛟*अमृत - सर्वोत्तम-03:17 पी एम से 04:35 पी एम*
*🛟*काल - हानि-04:35 पी एम से 05:54 पी एम काल वेला*
*🛟चोघडिया, रात्🛟*
*🛟 लाभ - उन्नति-05:54 पी एम से 07:35 पी एम काल रात्रि*
*🛟*उद्वेग - अशुभ-07:35 पी एम से 09:17 पी एम*
*🛟*शुभ - उत्तम-09:17 पी एम से 10:58 पी एम*
*🛟*अमृत - सर्वोत्तम-10:58 पी एम से 12:40 ए एम, जनवरी 04*
*🛟*चर - सामान्य-12:40 ए एम से 02:21 ए एम, जनवरी 04*
*🛟*रोग - अमंगल-02:21 ए एम से 04:03 ए एम, जनवरी 04*
*🛟*काल - हानि-04:03 ए एम से 05:44 ए एम, जनवरी 04*
*🛟*लाभ - उन्नति-05:44 ए एम से 07:25 ए एम, जनवरी 04 काल रात्रि*
🚩*श्रीगणेशाय नमोनित्यं*🚩
🚩*☀जय मां सच्चियाय* 🚩
🌷 ..# 💐🍁🍁✍️ | #🌕 👉
👉🦚✨आंग्ल साल के नए वर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं नया वर्ष गणपति भगवान सभी को खुश हाल रखे।
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❤️💐देव दानव तो समझ में आते हैं पर ये यक्ष गंधर्व और किन्नर क्या हैं जानें,👇?
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👉 यक्ष परिभाषा :- यक्ष धन और समृद्धि के रक्षक माने जाते हैं। इनका संबंध कुबेर से है, जो देवताओं के खजांची और धन के देवता हैं।यक्षों को प्रकृति और खजाने के संरक्षक के रूप में भी जाना जाता है। भारतीय पौराणिक कथाओं में यक्षों का उल्लेख जंगलों, पर्वतों और नदियों के रक्षकों के रूप में मिलता है।
स्वरूप :- यक्षों को अर्ध-दैविक प्राणी के रूप में दर्शाया गया है। इनके रूप का वर्णन भिन्न-भिन्न रूपों में हुआ है। कहीं ये अत्यंत सुंदर और सौम्य दिखते हैं,तो कहीं इन्हें डरावने और भयानक रूप में वर्णित किया गया है। पौराणिक ग्रंथों में इनके दिव्य तेज और रहस्यमय व्यक्तित्व का उल्लेख मिलता है।
कार्य: - यक्षों का मुख्य कार्य धन और प्रकृति की रक्षा करना है। ये खजानों के संरक्षक माने जाते हैं और प्राकृतिक संसाधनों, जैसे नदियों, वृक्षों, और पर्वतों की रक्षा करते हैं। “महाभारत” में यक्ष प्रश्न की कथा प्रसिद्ध है, जिसमें यक्ष ने युधिष्ठिर की बुद्धिमत्ता की परीक्षा ली थी।
👉गंधर्व परिभाषा: - गंधर्व स्वर्गीय संगीतकार और गायक होते हैं। इन्हें दिव्य संगीत और गायन का स्वामी माना गया है। इनका संबंध अप्सराओं से है, और ये मिलकर स्वर्गीय संगीत रचते हैं। गंधर्वों को प्रेम और सौंदर्य का प्रतीक भी माना गया है।
स्वरूप :- गंधर्व सुंदर, तेजस्वी और कलाओं में निपुण प्राणी हैं। इनके रूप को अत्यंत आकर्षक और दिव्य बताया गया है। ये स्वर्ग के निवासी हैं और अपनी कला से देवताओं को प्रसन्न करते हैं।
कार्य: - गंधर्वों का मुख्य कार्य स्वर्ग में देवताओं के लिए गायन और संगीत प्रस्तुत करना है। ये प्रेम और सौंदर्य के दूत माने जाते हैं। भारतीय पौराणिक कथाओं में इनका उल्लेख कभी नृत्य और संगीत में दक्ष कलाकारों के रूप में, तो कभी योद्धाओं के रूप में किया गया है।
👉किन्नर परिभाषा: - किन्नर अर्ध-मानव और अर्ध-पक्षी रूप वाले प्राणी हैं। इन्हें अलौकिक गायन और नृत्य में निपुण माना गया है। किन्नरों को स्वर्ग में देवताओं के मनोरंजन के लिए नियुक्त किया गया है।
स्वरूप :- किन्नरों का वर्णन अक्सर मनुष्य जैसे लेकिन अलौकिक शक्तियों और अद्भुत क्षमताओं से युक्त प्राणियों के रूप में किया गया है। इनका रूप मोहक और दिव्यता से भरा होता है।
कार्य :- किन्नरों का मुख्य कार्य स्वर्ग में देवताओं का मनोरंजन करना है। वे अपने मधुर गायन और नृत्य से देवताओं को आनंदित करते हैं। इसके अलावा, किन्नरों का उल्लेख धार्मिक और सांस्कृतिक कथाओं में भी मिलता है। यक्ष, गंधर्व और किन्नर भारतीय पौराणिक कथाओं में विशेष स्थान रखते हैं। ये सभी अर्ध-दैविक प्राणी हैं, जो देवताओं और मनुष्यों के बीच सेतु का कार्य करते हैं।
◆ यक्ष धन, प्रकृति और खजानों के रक्षक हैं।
◆गंधर्व दिव्य संगीत और सौंदर्य के प्रतीक हैं।
◆किन्नर स्वर्गीय नृत्य और गायन के माध्यम से देवताओं का मनोरंजन करते हैं। इनकी कथाएं हमारे पौराणिक साहित्य को रोचक और अलौकिक बनाती हैं।
. 💥“ज्ञान ही सच्ची संपत्ति है।
बाकी सब क्षणभंगुर है।”💥
🌼 ।। जय श्री कृष्ण ।।🌼
💥।। शुभम् भवतु।।💥
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🔱🇪🇬जय श्री महाकाल सरकार 🔱🇪🇬 मोर मुकुट बंशीवाले सेठ की जय हो 🪷*
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*♥️~यह पंचांग नागौर (राजस्थान) सूर्योदय के अनुसार है।*
*अस्वीकरण(Disclaimer)पंचांग, धर्म, ज्योतिष, त्यौहार की जानकारी शास्त्रों से ली गई है।*
*हमारा उद्देश्य मात्र आपको केवल जानकारी देना है। इस संदर्भ में हम किसी प्रकार का कोई दावा नहीं करते हैं।*
*राशि रत्न,वास्तु आदि विषयों पर प्रकाशित सामग्री केवल आपकी जानकारी के लिए हैं अतः संबंधित कोई भी कार्य या प्रयोग करने से पहले किसी संबद्ध विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेवें...*
*♥️ रमल ज्योतिर्विद आचार्य दिनेश "प्रेमजी", नागौर (राज,)*
*।।आपका आज का दिन शुभ मंगलमय हो।।*
🕉️📿🔥🌞🚩🔱ॐ 🇪🇬🔱


